1947 में जामा मस्जिद में अबुल कलाम आजाद के ऐतिहासिक भाषण !

सब से पहले खबर की खबर के पाठको और लेखको को स्वतन्त्रा दिवस की मुबारक बाद पेश करता है .

मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर, 1888 को हुआ था. अबुल कलाम आजाद के जन्मदिन 11 नवंबर को प्रतिवर्ष शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है. मौलाना अबुल कलाम आजाद की राय“आजादी इंसान का पैदायशी हक है. कोई व्यक्ति खुदा के बंदे को गुलाम नहीं बना सकता. गुलामी को चाहे जितने सियासी जुल्मों के जरिए आजादी ठहराया जाए लेकिन गुलामी तो आखिर गुलामी है. यह खुदा की मंशा के खिलाफ है. भारत आजाद होगा और इसे दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती.” अबुल कलाम आजाद ने अपने इन्ही विचारों से अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थीं. आजाद के विचार और उनकी राष्ट्रभक्ति कभी भुलाई नहीं जा सकती.

मौलाना अबुल कलम आजाद का वह ऐतिहासिक भाषण जो उन्हों ने जमा मस्जिद से भारत -पाकिस्तान के बंटवारे पे दी थी और जो बंटवारे के खिलाफ थे और उन के भाषण ने लाखो लोग जो पाकिस्तान कूच कर रहे थे वह इन का भाषण सुन कर रुक गए और यही पे सुकुनियत इख़्तियार कर ली .आप उन के दूर -अनेशि का अंदाजा लगिए के उन्हों ने जो बात १९४७ में कही थी आज पूरी सच साबित हुई .

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10 thoughts on “1947 में जामा मस्जिद में अबुल कलाम आजाद के ऐतिहासिक भाषण !

  • August 15, 2015 at 7:20 pm
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    अफ़ज़ल भाई बहुत ज़बरदस्त मौलाना आज़ाद की तक़रीर है. आज उनकी कही हर बात सच साबित हो रही है. काश इस देश का बटवारा ना हुआ होता तो ना तो पाकिस्तान होता ना कश्मीर और ना ही ये रोज़ रोज़ का सरदर्द. पाकिस्तान अपने आप को तो संभाल नहीं पा रहा है हिन्दुस्तान मे भी टेन्षन पैदा करता है. चूँकि बटवारा हिंदू मुस्लिम के नाम पर था तो इसके परिणाम बुरे तो होने ही थे. आज पाकिस्तानी अपने अलग मुल्क का कितना भी जश्न मनाएँ लेकिन सच्चाई यही है की यह सौदा उनके लिए घाटे का ही रहा. ना तो वो लोकतंत्र ही हैं ना ही वहाँ इस्लामी रियासत. बल्कि अच्छा ख़ासा मज़ाक़ बना दिया है मुल्क का. अपने देश के मुसलमानों को सभी सुविधाएँ प्राप्त हैं लेकिन वो इन्फीरियारिटी कॉंप्लेक्स का शिकार हैं. आज उनका कोई लीडर नहीं जो हैं वो उनका तुस्टिकरण ही करते आ रहे हैं . एक दर से ठोकर खाते हैं तो दूसरी दर पकड़ते हैं और वहाँ भी उन्हें मायूसी हाथ आती है. यही होते होते वतन की 69वीं सालगिरह आ गयी और मुसलमानो का उतार जारी है. मुसलमानो के जो अच्छे लीडर थे वो पाकिस्तान चले गये . ये बेचारे कॉंग्रेस लालू मुलायम के पचड़ो मे फँस कर रह गये. आज हालत यह है की अगर वो एक साथ किसी का दामन थामें तो सांप्रदायिक धुर्विकरन और अगर कोई पार्टी उनके हक़ मे कुछ बोल दे तो तुष्टिकरण. अजब कैफियत है उनकी वो जाएँ तो जाएँ कहाँ??

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  • August 15, 2015 at 7:31 pm
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    आज कल में अबुल कलम आजाद की तक़रीर सुन रहा हु , सब से पहले तो ये है के आजाद कितने दूरअंदेश नेता थे आज उन की सभी बाते हर्फ़ – बी हर्फ़ सही हो रही है . पाकिस्तान के कुछ पत्रकार और वह के चैनल भी विश्लेषण कर रहे थे आजाद ने जो ४७ में कहा था काम से काम पाकिस्तान की स्तिथि आज वही है . सही बात है के धर्म के नाम पर बंटवारा का नुकसान होना ही था .

    मगर इतिहास बताता है के जब आजाद ने जमा मस्जिद से भाषण देना शुरू किया तो लाखो लोगो ने पक्स्तान जाने का मन त्याग दिया और भारत में ही रहना पसंद किया . कुछ तो नेहरू की बद्मासशी रही है भारत के बंटवारे में सिर्फ जिन्ना और मुस्लिम लीग ही इस के जिम्मेदार नहीं है . खैर जो हुआ सो हुआ मगर ४७ के बाद भारत में मुसलमानो के लिए आजाद जैसा एक नेता भी पैदा नहीं ह सका .

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  • August 18, 2015 at 4:07 pm
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    ”सीमा के आर पार बॉलीवुड बिगाड़ रहा हे ”कल्चर ” पहले भारत का पढ़े फिर पाकिस्तान का देखे की कैसे बॉलीवुड ” महान ” लोगो की चिंता का विषय बना हुआ पहले एक भारतीय आर्य वीर महापुरुष के विचार की कैसे बॉलीवुड उनके महान कल्चर की जड़ो में मट्ठा डाल रहा हे ”

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  • August 18, 2015 at 4:07 pm
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    बॉलीवुड राष्ट्रिय एकता के लिए खतरा डॉक्टर विवेक आर्य ( साभार आर्य मुदित )-एक समय था जब अमिताभ बच्चन को सब और से थकहार कर मंदिर जाते दिखाया जाता था वहा वो मूर्ति के सामने अपनी समस्या बोलते या कोई अन्य अभिनेता अपना सर पटकता था और उसकी माँ या प्रेमिका पत्नी या पिता मित्र इत्यादि का स्वास्थय ठीक हो जाता था . फिल्मे लोगो में विशवास जगाती थी की जब कुछ नहीं हे , तब धर्म का सहारा भगवान ईश्वर अंतिम आश्रय हे . हम आर्य हे योग का मार्ग मानते हे , पर हम लोगो को विकल्प देते हे की मूर्तिपूजा से ऊपर उठो ऋषियों माँ मार्ग अपनाओ मगर आज पी के जैसी फिल्मे क्या कहती हे मंदिर ना जाओ वहा पैसे ना चढ़ाओ सारे बाबा ढोंगी हे पाकिस्तानी मुल्ले अच्छे हे उनसे शादी करो वो धोखा नहीं देते हे —- और दलालो का अड्डा बना हुआ हे बॉलीवुड जो पाकिस्तानी आई एस आई और शेखो के पेसो से चल रहा हे तभी बाप्पा रावल राणा कुम्भा पार्थवी राज़ चौहान राणा सांगा महाराणा प्रताप शिवाजी तानाजी मालसुरे बंदा बैरागी हरी सिंह नलवा इत्यादि शूरवीरो पर फिल्मे नहीं बनती हे . इसके विपरीत आत्तताइयो और आकर्मणकारियो पर फिल्मे बनाई जाती हे शाहज़हां ताज़महल मुगले आज़म जोधा अकबर जैसी फिल्मे बनाई जाती हे फिजा मिशन कश्मीर शौर्य हैदर में हु ना जैसी फिल्मे बनती हे जो हमारी सेना पर कालिख पोतने का काम करती हे इसके साथ नंगापन खुल कर परोसते हे शादी से पहले सम्बन्ध बनाओ बाद में बनाओ बुढ़ापे में जवान लड़की से सम्बन्ध बनाओ प्यार की उम्र नहीं होती इत्यादि इत्यादि . सनी लियोनी जैसी —–को हीरोइन बनाकर क्या सन्देश देना चाहते हे सवांद में उर्दू फ़ारसी के शब्द इतने मिला दिए जाते हे की लोग उसी को हिंदी समझ के हिंदी को मुसलमानो की भाषा समझने लगे हे गानो में मौला अल्लाह अली सूफी संगीत जैसे शब्दों का छलावा देकर छोटे छोटे बचो से लेकर बड़ो तक अरब की भाषा और सभ्यता की छाप छोड़ देते हे बॉलीवुड वास्तव में राष्ट्रिय एकता अखंडता और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा हे ” संपादक विजय कुमार सिंघल जी की पत्रिका जय विजय से साभार .

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  • August 18, 2015 at 4:09 pm
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    अब ऊपर वाले का चमत्कार देखिये की उधर पाकिस्तानी भी परेशान हे की बॉलीवुड उनकी भी एकता अखंडता और पहचान के लिए खतरा बना हुआ इनकी भी वही शिकायत हे जो आर्यवीर की हे की बॉलीवुड इनकी महान इस्लामी अरबी मुस्लिम पहचान में मिलावट कर रहा हेवगेरह वगेरह देखे https://www.youtube.com/watch?v=YXNDlGUwjcM

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  • August 20, 2015 at 7:18 pm
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    मुस्लिम लीग और जिन्ना साहब ने 37 – के चुनाव में ही नेहरू रफ़ी अहमद किदवई गफ्फार खान से करारी हार के बाद से फिर 1940 से लगातार पाकिस्तान का प्रचार कर रखा था अलीगढ यूनिवर्सिटी के लड़के पुरे देश में फेल गए और पाकिस्तान के लिए वोट मांगे 93 % मुस्लिम वोट जिन्ना को मिले जिससे पाकिस्तान बना ( हालांकि मणि शंकर अय्यर अपनी किताब एक सेकुलर कटरपन्ति में इस 93 के आंकड़े में कुछ पेंच बताते हे खेर ) लेकिन जब पाकिस्तान जाने का टाइम आया तो मुसलमानो के सौ बहाने ? ना जाना था ना जा सकते थे न संभव था कोई हलवा नहीं हे अपने बाप दादाओ की जमीं से उखाड़ना पाकिस्तान से भी हिन्दुओ सिखो को ज़बरदस्ती निकला गया था वार्ना वो भी आना चाहते थे मतलब जब जाना नहीं था तो पाकिस्तान और मुस्लिम लीग के साथ क्यों दिया ? जैसा की हम कई बार बता चुके हे की ये सब दिल्ली पर से गांधी नेहरू कांग्रेस का तिरंगा हटाने -भगवा या हरा लहराने की जंग थी और आज भी हे —–

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    • August 20, 2015 at 7:36 pm
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      ( गलत टाइप हो गया हे उखड़ना की जगह गलती से उखाड़ना आ गया हे वही फिर वार्ना वो भी आना चाहते थे यहाँ” नहीं ” शब्द रह गया हे -) 47 से लेकर आज तक जिन्ना और मुस्लिम लीगियों की शिकायत हे की कश्मीर पर कब्ज़ा कर लिया और मुसलमानो को कटा छटा घुन खाया पाकिस्तान दिया तो आप क्या चाहते थे साहब ? जैसे सावरकर हेडगेवार अटक से कटक तक भगवा लहराने की सोचते थे वैसे ही मुस्लिम लीगियों और इनके समर्थको का इरादा था और खूब स्यापा था की पूरा पंजाब और पूरा बंगाल दिया जाए यानी ओवर स्मार्ट नेस क्योकि उस समय का पंजाब पेशावर से गुड़गांव यानी बिलकुल दिल्ली की दहलीज तक फिर भारत को नार्थ ईस्ट से रास्ता बंगाल होकर ही हे वो भी सिर्फ 61 किमी की पट्टी मतलब पूरा बंगाल यानी पूरा नार्थ ईस्ट और पूरा पंजाब यानी पूरा कश्मीर इस तरह से पाकिस्तान लगभग आधा हिंदुस्तान फिर बिलकुल दिल्ली की बगल में बनता फिर इन लीगियों का इरादा था की हिन्दू तो बटे हुए हे जबकि मुसलमानो को धार्मिक नारो इरादो की दुहाई देकर कुछ समय के लिए ही सही एक किया जा सकता हे और दिल्ली पर कब्ज़ा करके मुग़ल राज़ की वापसी हो सकती हे इसलिए जिन्ना को उपमहादीप का सलाहुद्दीन अय्यूबी भी कहा जाता था नारा भी था की ” हंस के लिए पाकिस्तान लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान

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      • August 20, 2015 at 8:32 pm
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        अब आप अंदाज़ा लगाइये की एक तरफ तो ऊपर बताय गए ये हालात थे दूसरी तरफ गांधी नेहरू को मारने की साज़िश कर रहे हिन्दू दंगाई थे तीसरी तरफ साजिशी ब्रिटिश थे फिर कई इलाको में फैला वाम विद्रोह था सत्ता छोड़ने के नाम से भी बगावत पर उतारू देशी राजा कश्मीर हैदराबाद जूनागढ़ जैसलमेर त्रावणकोर थे पूंजीवादी पिशाच थे सनकी समाजवादी थे अंग्रेजी पिशाच थे शुध्दता वादी हिंदी वाले थे हिंदी विरोधी तमिल थे इन सबके बीच से भी दुनिया का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक सेकुलर भारत बना लेना हिन्दू मुस्लिम सहअस्तित्व की संस्कर्ति को हज़रत नूह की तरह से बचा लेना गांधी नेहरू आज़ाद किदवई कांग्रेस का कितना बड़ा और ज़बरदस्त कारनामा था हमें भी इस कारनामे का अंदाज़ा सिर्फ किताबो को पढ़ने से ही नहीं बल्कि ऐसी ही भेजा पीस कर रख देने वाली समस्याओ का प्रेक्टिकल में सामना करने से हुआ

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  • August 21, 2015 at 9:38 am
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    संजीव भट्ट दक्षिण एशिया की सबसे ताकतवर हस्ती से टकराते हुए बर्खास्त हो गए हे दूसरी तरफ नज़ीब जंग की भक्ति देखे संजीव भट्ट ठीक कहते हे की भारत के अधिकांश मुस्लिम अफसर सरकार और निजाम के बेहद वफादार होते हे ना ये कभी सरकार से टकराते हे ना कभी करप्शन से जिहाद करते हे ना कभी साम्प्रदायिकता से लड़ाई लड़ते हे यही नहीं आम मुस्लिम के लिए भी ये कहकर कुछ नहीं करते हे की लोग क्या कहेंगे की में मुसलमानो की तरफदारी कर रहा हु ( ये बात खूब प्रचारित होती हे ) यानी मलाई खूब खाते हे और जिम्मेदारी कुछ नहीं लेते हे लगभग यही हाल बहुत से भारतीय मुस्लिम बुद्धजीवियों आदि का भी हे एक बड़े शिया मुस्लिम बुध्दजीवी लेखक पिछले दिनों खुद को साम्प्रदायिकता से लड़ने वाला योद्धा सा बता रहे थे जबकि अल्लाह माफ़ करे इन लोगो का आम मुस्लिम समाज पर छोड़ो पढ़े लिखो पर भी कोई प्रभाव नहीं दीखता हे ना इन्होने कभी इसकी कोशिश का खतरा मोल लिया इनकी अधिकांश जिंदगी आराम की अकादमिक लाइफ में और पर्यटन में ही बीती हे

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  • November 11, 2016 at 3:01 pm
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    Samar Anarya
    3 hrs · Hong Kong ·
    मौलाना अबुल कलाम आज़ाद याद हैं? वो जो सारी जिंदगी हिन्दुस्तान के दुश्मनों से लड़ते रहे, उसे बांटने के समर्थकों- अंग्रेज, मुस्लिम लीग और आरएसएस- से जूझते रहे! वे जो जिन्ना के लाख बुलावों के बावजूद खुद तो पाकिस्तान नहीं ही गए, लाखों और मुसलमानों को रोका भी! वो जिनकी अगस्त 1947 में जामा मस्जिद की सीढ़ियों से दी तक़रीर सुन आज भी रीढ़ में सिहरन उतर आती है- हिन्दुस्तानी होने का वो जज्बा जागता है जिसे हत्यारी भीड़ें सिनेमा हॉलों में किसी विकलांग के जनगणमन पर खड़ा न हो पाने पर पीट के क़त्ल करने पर आमादा हैं! जी, वह तक़रीर सुनियेगा कभी जिसमें आजाद ने दहाईयों पहले बता दिया था कि पाकिस्तान को वहीँ पहुँचना है जहाँ आज वो पहुँचा है! वो तक़रीर जिसको सुन सामान बांध रवानगी को तैयार लाखों मुसलमान घरों को लौट गए थे, सत्तर साल बाद भी मुहाजिर बने रहने से बच गए थे!
    आज उन्हीं मौलाना आज़ाद का जन्मदिन है- और मनाने का हक सिर्फ उन्हें है जो आज के हिन्दुस्तान को हिन्दू पाकिस्तान बनाने की साजिशों से जितना भी सही, जैसे भी सही लोहा ले रहे हों- वरना ओवैसियों का पता नहीं पर बधाई तो मोदी ने भी ट्वीटी है!
    और हाँ, लोहा सिर्फ हिन्दू ‘लीगियों’ से नहीं लेना है, उनकी मदद कर रहे तमाम ठेकेदारों पर भी नजर बनाये रखनी है! हिन्दुस्तान को अपने जैसे सरपरस्त देने वाली वाली कौम को ओवैसियों की निगहबानी में देखना मौलाना आज़ाद को भी रास न आता!
    सो यौमे पैदाइश मुबारक मौलाना साहब! आज की आंधियाँ अपनी जगह, हम हिन्दुस्तान को वैसा ही बनाये रखेंगे जैसा आपके सपनों में था, पाकिस्तान नहीं बनने देंगे! तक़रीर सुनें: https://www.youtube.com/watch?v=ySLJDKy-KwMSamar Anarya

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