सपने का टूटना या लोकतंत्र की जीत की उम्मीद

rahul-modi

प्रधानमंत्री मोदी का जादू चल जायेगा। लेकिन नहीं चला। संघ परिवार की सक्रियता के बगैर जीत जायेंगे। लेकिन नहीं जीते। लव जेहाद और सांप्रदायिक बोल हिन्दु वोट को एकजुट रखेंगे। लेकिन नहीं रख पाये।अल्पसंख्यक असुरक्षित होकर बीजेपी की छांव में ही आयेगा या फिर उसकी एकजुटता हिन्दुओं में जातीय समीकरण को भुला देगी। लेकिन यह भी नहीं हुआ। मायावती की गैरहाजरी में दलित वोट विकास की चकाचौंध में खोयेगा। लेकिन वह भी नहीं खोया। वसुंधरा की बिसात और मोदी की चमक राजस्थान में बीजेपी से इतर किसी को कुछ सोचने नहीं देगी। लेकिन यह भी नहीं हुआ। छह करोड़ गुजराती मोदी के पीएम बनने की खुमारी में डूबा रहेगा और आनंदीबेन मोदी को जीत का बर्थ-डे गिफ्ट दे देगी। लेकिन बर्थ-डे गिफ्ट भी धरा का धरा रह गया। तो फिर उपचुनाव के परिणाम के संकेत ने क्या लोकसभा चुनाव के फैसले को ही पलटने की तैयारी कर ली है। या फिर राजनीतिक शून्यता के ऐसे पायदान पर देश की संसदीय राजनीति जा खड़ी हुई है जहां बार बार आगे बढ़कर पीछे लौटने के अलावे कोई विकल्प देश की जनता के सामने है नहीं। मंडल की धार से 25 बरस पहले कमंडल टकरायी।

लेकिन 25 बरस बाद मोदी के विकास मंत्र ने मंडल की धार को भोथरा बना दिया और कमंडल को हिन्दु राष्ट्रवाद के आइने में उतार कर एक नयी लकीर खिंचने की नायाब पहल की। लगा यही कि मंडल के दौर में क्षत्रपों की सियासत ने देश का बंटाधार ही किया तो फिर मोदी के विकास के घोड़े की सवारी कुछ सकून तो देगी। लेकिन हकीकत से कहां कैसे वोटर भागे। उसे तो हर दिन रसोई में आंसू बहाने है। विकास का ताना बाना चाहे विदेशी पूंजी की आस जगाता हो। चाहे इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर क्रक्रीट का जंगल खडा करने की बैचैनी दिखाता हो। चाहे डिजिटल इंडिया के सपने तले हर हाथ में तकनालाजी की उम्मीद जागती हो। चाहे कॉरपोरेट के धुरंधरों और औघोगिक घरानो के एफडीआई के समझौते के नये रास्ते खुलते नजर आते हो। चाहे मोदी सरकार की इस चकाचौंध को बेहद बारिकी से मीडिया लगातार परोसता हो। और इस भागमभाग में चाहे हर कोई हर उस मुद्दे से ही दूर होता चला गया हो जो लोकसभा चुनाव के वक्त देश के आम जन की आंखों में जगाये गये हों। चाहे वह रोजगार पा जाने का सपना हो। चाहे वह पाकिस्तान और चीन से दो दो हाथ करने का सुकुन हो। चाहे बिचौलियों और कालाबाजारियों पर नकेल कसने की उम्मीद हो। चाहे कांग्रेस के गैर सरोकार वाले रईस कांग्रेसियों या कहें लूटने वालो को कटघरे में खड़ा करने की हनक हो। सबकुछ नरेन्द्र मोदी ने जगाया। और इन्हीं सबकुछ पर कुंडली मार कर देश को भुलाने और सुलाने का तरीका भी मोदी सरकार ने ही निकाला। तो क्या विकल्प की बात ख्वाब थी या विकल्प या विकास का ताना बाना सत्ता पाने का सियासी स्वाद बन चुका है । इसलिये सौ दिन की सरकार की हार ने मंडल प्रयोग से आगे मंडल का ट्रैक टू शुरु करने का संकेत दे दिये। जहां मायावती की खामोशी मुलायम को जीता कर आने वाले वक्त में गेस्टहाउस कांड को भुलाने की दिशा में जाना चाहती हैं। ठीक उसी तरह जैसे सुशासन बाबू जंगल राज के नायक के साथ खड़े हो गये। पहले तमगा दिया फिर दिल दे दिया ।

गजब की सियासत का दौर है यह । क्योंकि इस बिसात पर संभल कर चलने के लिये चुनावी जीत की तिकडमें ही हर दल के लिये महत्वपूर्ण हो चली हैं। और तिकडमों से निकलने वाली चुनावी जीत संविधान से बड़ी लगने लगी है। यूपी के सांप्रदायिक दंगे। मुजफ्फरनगर की त्रासदी के बीच सैफई का नाचगान। अब कोई मायने नहीं रखता। गहलोत के दौर के घोटाले सचिन पायलट की अगुवाई में काग्रेस की जीत तले छुप जाते हैं। मोदी के दरबार में वसुंधरा राजे के प्यादा से भी कम हैसियत पाना। यूपी की बिसात पर राजनाथ को प्यादा और योगी आदित्यनाथ का वजीर बनाने की चाहत वाले अमित शाह की चाल भी जीत के दायरे में मापी जाती है। और अमित शाह को हर राज्य में जीत का सेहरा पहनाने की हैसियत वाला मान कर आरएसएस झटके में प्यादे से वजीर बनाकर सुकुन पाती है। तो फिर चुनावी दौड़ का यह रास्ता थमता किधर है। शायद कहीं नहीं। क्योंकि यह दौड़ ही सत्ता की मलाई खाने के लिये जातीय और धर्म के आधार पर उचकाती है। या फिर विकास का अनूठा मंत्र देकर ऐसे भ्रष्टाचार की ऐसी लकीर खिंचती है,जिसके तले मजदूर के हक के कानून बदल जाये। पर्यावरण से खुला खिलवाड विकास के नाम पर दौड़ने लगे। जन-धन योजना तले देश की लाइफ इंशोरेंस कंपनी एलआईसी का नहीं बल्कि विदेशी बैंक एचडीएफसी के लाइफ इंशोरेंस का कल्याण हो। विदेशी पूंजी की आहट राष्ट्रीयता को इतना मजबूर कर दें कि जुंबा पर हिन्दु राष्ट्रवाद गूंजे जरुर लेकिन देश बाजार और व्यापार में बदलता दिखे। जिसमें चुनी हुई सरकार ही बिचौलिये या कमीशनखोर हो जाये। ध्यान दीजिये तो मनमोहन का दौर हो या मोदी का दौर पटरी वही है इसलिये बार बार देश उन्हीं क्षत्रपों की गोद में लौटता है, जहां मलाई खाने के लिये सत्ता के दरवाजे तो खुले मिलते है चाहें लूट खुली क्यों ना हो। इसलिये उपचुनाव के परिणाम निराशा और सपनों की टूटने के अनकही कहानी भी है और लोकतंत्र की जीत की उम्मीद भी।

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6 thoughts on “सपने का टूटना या लोकतंत्र की जीत की उम्मीद

  • September 24, 2014 at 10:07 am
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    कश्मीर में सेना की मदद को लेकर बज़रंगियो संघियो ने नेट को सर पर उठा लिया था इसी पर कुछ कॉमेंट

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  • September 24, 2014 at 10:08 am
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    sikander hayat
    September 16,2014 at 12:43 PM IST
    भारतीये सेना अपना फ़र्ज़ निभा रही है और इधर नेट पर आप जेसे बज़रंगियो की फ़ौज़ हमेशा की तरह इस विष्य पर भी गंद मचा देने का अपना फ़र्ज़ निभा रही है इस कदर बकवास ताने तिश्ने टर्र टर्र किये जा रहे है की कश्मीरी पानी उतारने के बाद भारतीये फ़ौज़ को भूल कर इन बज़रंगी फ़ौज़ के तानो को ही याद रखे इन बज़रंगियो ने उन्नाव मे इस विष्य पर एक कुलपति के ओफ़िस मे तोड़फोड़ भी की है

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  • September 24, 2014 at 10:08 am
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    sikander hayat को जवाब )- ब्रजकिशोर सिंह
    September 16,2014 at 01:17 PM IST
    मित्र,फर्ज क्या सिर्फ भारतीय सेना का है? क्या कश्मीरियों का यह फर्ज नहीं है कि वे भारतीय सेना द्वारा उनकी की जा रही सेवा को याद रखें? मित्र,हम बजरंगी नहीं हैं बल्कि बजरंगबली के भक्त जरूर हैं। हमने कभी किसी मजहब के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर नहीं लिखा अलबत्ता सच को हमेशा बेनकाब किया है चाहे इसके लिए हमें अपने ही मजहब के लोगों के खिलाफ क्यों न लिखना पड़े।

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  • September 24, 2014 at 10:09 am
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    (ब्रजकिशोर सिंह को जवाब )- sikander hayat
    September 16,2014 at 03:49 PM IST
    भारतीय सेना ने जो मेहनत करके कश्मीरियों की जान बचाकर उनके दिल में स्पेस बनाया होगा उस स्पेस को शून्य में बदल देने का काम ये नेट पर बैठी हिन्दू कठमुल्लाओं की सेना ( सुना हे की पेड़ ? ) बखूबी कर रही हे अभी सिर्फ लोगो की जान बची हे लाखो परिवारो का जीवन बर्बाद हो गया हे माल का बहुत नुकसान हुआ है उसे फिर से पटरी पर लाना बहुत बड़ी हिमालयी चुनौती हे मगर ये शैतान हिन्दू कठमुल्ला एहसान मानो एहसान मानो कर करके इन बर्बाद लोगो की छाती पर चढ़े हुए हे ( जबकि केसा आएहसआन जब हम कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानते है तो ? ) चुनाव भी सर पर हे अफ़ग़ान से अमेरिका जा रहा हे आई एस की मुसीबत सर पर हे चीन अपनी बदमिजाजी छोड़ने का कोई इरादा नहीं दिखा रहा हे साफ़ हे की ये हिन्दू कठमुल्ला और इनकी फेवरिट सरकार भारत के लिए खतरा बनती जा रही हे याद रहे की हिन्दूकठमुल्लाओं के बस का कुछ नहीं हे ये सिर्फ मुह्जोरी कर सकते हे और किसी उग्र भीड़ का हिस्सा बन कर मासूम लोगो पर अत्याचार कर सकते हे और कुछ नहीं

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  • September 24, 2014 at 10:10 am
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    sikander hayat को जवाब )- ब्रजकिशोर सिंह
    September 16,2014 at 05:07 PM IST
    मित्र,यहाँ फाँके की नौबत है और आप हम पर पेड न्यूज का आरोप लगा रहे हैं। आईए कभी हमारे किराए के गरीबखाने में पधारिए। जो हिन्दू कट्टर हैं उनकी वे जानें लेकिन हम तो इंसानियत के पुजारी हैं और कश्मीरियों से इंसानियत की उम्मीद कर रहे हैं। उप्र और यूपीए की पूर्ववर्ती केंद्र सरकार के आंकड़े गवाह हैं कि दंगों की शुरुआत 99 प्रतिशत मामलों में मुसलमान करते हैं। क्या अल कायदा और ISIS भी हिन्दू कट्टर की प्रतिक्रिया में बने हैं? अच्छा हो कि आप लोग कल्बे जब्बाद जी का हाथ मजबूत कीजिए और मुस्लिम कट्टरता के खिलाफ उनकी आवाज को मजबूत कीजिए।
    (sikander hayat को जवाब )- ब्रजकिशोर सिंह
    September 16,2014 at 05:08 PM IST
    #kashmir अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने सेना से लूटी राहत-सामग्री भरी नाव
    http://www.hajipurtimes.com/archives/16089

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  • September 24, 2014 at 10:10 am
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    sikander hayat
    September 17,2014 at 06:09 PM IST
    मेने पेड़ का आरोप आप पर नहीं लगाया था पूरी फ़ौज़ हे नेट पर उन पर लगाया था जानकर दुःख हुआ की आप पर फाको की नौबत आ रही हे वाइफ भी साथ नही है आदि इसलिए आपको सलाह दे रहा हु की कुछ और कामधंदा कीजिये ये हिंदूवादी मोदी वादी आर अस अस वादी पत्रकारिता लेखन छोड़िये कुछ नहीं रखा इन बातो में न कुछ हासिल होगा आपको हां आप जेसो के शोषण और इस्तेमाल से और लोगो को जरूर फायदा होगा वो ही लोग आपको भुलावा देते रहेंगे की आप बड़े महान है जो देश और हिन्दू धर्म दोनों के दुश्मनो से लड़ रहे हे जनता को हिन्दुओ को जागरूक कर रहे हे वगेरह वगेरह इस तरह आपको दिलासा देते रहेंगे और आप बेमतलब में नेट पर बैठ हिन्दू मुस्लिम इंडिया पाकिस्तान भाजपा दूसरे क्लेश को बढवा देते रहेंगे खुद को महान देशभक्त मानते रहेंगे और शोषित होते रहेंगे आप ही की तरह मेरा दोस्त एक मुस्लिम धार्मिक संस्थान के बारे में बता रहा था जहा तालिब बेहद साधारण जिंदगी जीते हे और संचालक सर्वेसर्वा करोड़ो में खेल रहे हे मुसलमानो में भी आप जैसे लोग खूब हे जो बेमतलब में अपना शोषण करवाते हे और सोचते हे की वो इस्लाम की सेवा कर रहे हे में आप सभी लोगो को चेता रहा हु छोड़ दो ये सब और नार्मल जाओ अपना कामधंधा देखो इस्लाम को या भारत को तुम्हारी सेवा की कोई जरुरत नहीं हे लोग तुम्हारा शोषण करके अपनी सेवा करवा रहे हे
    जवाब देंsikander hayat को जवाब )- ब्रजकिशोर सिंह
    September 17,2014 at 06:37 PM IST
    मित्र,आपकी सलाह के लिए धन्यवाद। मैं एक विवेकी व्यक्ति हूँ इसलिए आप मुझे परामर्श न दें तो अच्छा है बल्कि आप मेरी सलाह पर अमल करें तो देश का कुछ भला हो। मैंने कभी हिन्दू या मुस्लिम भारत की बात नहीं की है और मैं यह चाहता हूं कि मुसलमान भी खुद के हिन्दुस्तानी होने पर,भारतमाता की संतान होने पर गर्व करें और देश के लिए जीएँ और मरें। मैंने अपने इस आलेख में भी कश्मीरी लिखा है हिन्दू या मुसलमान नहीं लिखा है। आज ही श्रीनगर में सेना पर गोलियाँ चलाई गई हैं,यासीन मलिक ने सैनिकों से राहत का सामान छीन लिया है इससे साबित होता है कि सेना के राहत-कार्य चलाने से भारतविरोधी तत्व व्याकुल हो उठे हैं। यह सौभाग्य की बात है कि मोदी सरकार ने अबतक मुसलमानविरोधी कोई कदम न तो उठाया है और न ही ऐसी कोई बात की है इसलिए आपलोगों की भी मानना चाहिए कि मोदी सरकार सबका साथ सबका विकास पर अमल कर रही है जिसमें मुसलमान भी शामिल हैं।

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