राजनैतिक उम्मीदों पर बहस की सार्थकता

polआज हम जहाँ अपनी राजनैतिक पार्टी और विचारधारा विरोधी को नीचा दिखाने में लगे हैं और उधर उस विचारधारा का फायदा उठाने वाले और उस दिशा में अपना काम करने वाले अपना काम किये जा रहे हैं ! राजनीती करने वाले अपनी रोटी सेंक रहे हैं तो बाकी गैर राजनैतिक संगठन अपने अपने दिशा में बिना यह सोचे की इससे देश को क्या फायदा हो रहा है अपने आप को घसीटे जा रहे हैं ! उसमे भी आरएसएस जैसे गैर राजनैतिक संगठन सीधे सीधे राजनीति में हस्तक्षेप कर के अपनी सीमा लांघ रहे हैं ! और हम अपने अपने पूर्वाग्रहों के साथ राजनैतिक उम्मीदों पर बहस किये जा रहे हैं |

तो जाहिर है ऐसे में सभी समर्थकों की चर्चा आरोप प्रत्यारोप भी निरर्थक और इन सही गलत दिशा में जा रहे लोगों के लिए बेअसर साबित हो रही है ! ऐसे में पहली बात तो ये की ऐसी कोई बहस इमानदारी से करना ही है तो केवल अपने अपने विचारधारा या राजनितिक पार्टी के आरोप प्रत्यारोपों पर भिड़ने से पहले , वास्तव में अपने पक्ष को सही साबित करना हो तो ये जरूर सोचना चाहिए की क्या हम इसपर नहीं टिक सकते की किसी भी कार्य का अवलोकन और उस कार्यकर्ता को स्वतंत्र रूप से उसके अपने ही दावों की कसौटी पर रख पर बात करे ? बजाय उसे दुसरो की करतूतो के आधार पर स्वयं ही भागने का रास्ता प्रदान करने के ??

जैसे हर सत्ताधारी पार्टी अपने किये गए वादे ,वचन पूर्ति का समय ,प्रत्यक्ष जमीनी हकीकत आदि की तुलना विपक्ष के सत्ताकाल से किये बगैर अपने कार्य को सही साबित ही नहीं कर सकती | क्यों ?? जब की उसे खुद के दावों तक ही सिमित रहना चाहिए | क्यूँ की आज अगर वह सत्ता में है तो जाहिर है की यह जनता द्वारा पहले ही की जा चुकी ऐसी ही तुलना का नतीजा है !! और पूर्व में सत्ता में रहे पार्टी और आपके वादें दोनों में आपकी जीत जनता द्वारा पहले ही की जा चुकी ऐसी ही तुलना का ही तो नतीजा है | जिसमे लोगों द्वारा आपके वादों के आगे पूर्व के सत्ताधारी पक्ष के हर दावे को तुलना में कम आँका जा चूका है | फिर उसी बात को दुबारा दोहराने का क्या मतलब ? फिर क्यूँ नहीं मौजूदा सत्ताधारी पक्ष ये कहता की पूर्व में क्या हुवा यह जानते हुवे अगर हमने आपसे कुछ वादे किये हैं तो हम सिर्फ उन्ही वादों पर कितना खरा उतरे इसी आधार पर खुद को बेहतर साबित करेंगे न की फिर से वही तुलना का राग गा के भूखे पेट सुलायेंगे और ऐसे सुनते सुनते,भूखे सोते सोते आप मर गए तो बीमा का प्रावधान कर देंगे !! जिसका की कभी कोई वादा ही नहीं किया गया था |

जब हमारी बातों से या जो परिवर्तन का दावा कर रहे है उनसे भी एकदम से देश बदलने की उम्मीद रखना व्यर्थ साबित हो रहा है तो हम क्यों नहीं जो है उसीको बेहतर बनाने की दिशा में एक स्वस्थ चर्चा कर पातें ? आर एस एस जैसे संगठन के समर्थक ,और साथ साथ बी जे पी और कांग्रेस भी अपनी दिल्ली में हार की वजह ठहरे केजरीवाल पर वादाखिलाफी का बड़ी सहजता से आरोप भी लगाते हैं और उसे खुद पर लगे वैसे ही आरोपों से बचने की ढाल भी बनाते है ! कांग्रेस ,बी जे पी तो नहीं लेकिन केजरीवाल की वजह से लोग जरुर इस नतीजे पर पहुंचे हैं की चुनाव पूर्व के सभी वादे केवल चुनावी जुमले ही रहेंगे !! फिर इसके पीछे वजह पार्टियों की राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी हो ,या फिर सत्ता में टिकने के लिए पर्याप्त कॉमन मिनिमम परफॉरमेंस तक ही काम करने की सोची समझी रणनीति | ताकि बचे हुवे कामो के लालच में जनता फिर से चुन के दे ! फिर से चुन के दे !और …ऐसे ही देती रहे !!! या फिर केजरीवाल के बहाने सामने आ रही नई टेक्नीकल प्रॉब्लम ! कुल मिलाकर राजनीति से कितनी उम्मीद की जाय कितनी नहीं इसकी केजरीवाल की ही वजह से बढ़ी हवी सीमा इन सभी कारणों के साथ साथ आप पार्टी के चुनाव उपरान्त हश्र से वापस अपने पूर्व स्थान पर आकर स्थिर हो चुकी है |

अब आते हैं ऐसी ही उम्मीद जगाने वाले मोदी सरकार पर ! क्या हम जानते नहीं की मोदीजी आर एस एस के प्रचारक रह चुके हैं ? और कम से कम आर एस एस ने तो पक्का उन्हें विकास- उकास के लिए डायरेक्ट पि एम् नहीं बनाया है !! तो ? फिर आर एस एस को क्या उम्मीद रही होगी मोदीजी से ? मोदीजी के गाँधी भक्ति गीत और सर्व धर्म समभाव ,संविधान से वचनबद्धता वाली बाते किसी तरह पचा कर भी आर एस एस मोदीजी को वह कदम मान रहा है जो उन्हें हिन्दुराष्ट्र के एक कदम और करीब ले जा रहा है ! और इसी उत्साह में कईयों के बोल फुट भी पड़े ! लेकिन अभी समय नहीं आया है कह कर उनके बोलों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष डंडोसे फिलहाल के लिए दबा दिया गया | लेकिन इसके लिए भी दिल्ली से हाथ धोना पड़ा ये बात दूसरी है ! लेकिन इस लेख का असल मुद्दा यह है की इस देश में कोई बड़ा परिवर्तन एकदम से संभव नहीं है और हिन्दुराष्ट्र जैसा बुनियादी परिवर्तन जिसमे पूरा का पूरा संविधान बदलने के जरुरत पड़ेगी उसके होने का सपना देखना भी शुद्ध मुर्खता होगी ! और यह बात कोई और नहीं बल्कि खुद मोदीजी और उनके विदेशों के दौरे साबित कर रहे हैं ऐसा कहें या फिर ऐसा मुर्खता पूर्ण सपना पालने वाले अपने ही साथियों को खुद मोदीजी हिदायत दे रहे हैं ऐसा कहें ? क्यूँ की साफ़ दिख रहा है की मोदीजी विदेशों में जो भारत की पहचान बनाए जा रहे हैं उसमे ऐसे किसी धर्माधारित राष्ट्र के लिए जमीं तो क्या सहानुभूति की तक गुंजाइश नहीं रख रहे हैं |

मोदीजी पि एम् बनने बाद कहिये या फिर विदेश दौरों के बाद यह त्रिकाल दर्शी सत्य जान चुके है की हम किसी को भी उसकी जमीनी जड़ से सदा के लिए अलग नहीं कर सकते ! क्यों की कोई व्यक्ति आज अगर हिन्दू या मुसलमान है तो इसमे उसका कोई दोष नहीं | और इतने सदियों बाद इसका भी कोई प्रमाण नहीं की उसके पूर्वज भी वही रहे होंगे ! लेकिन इसके बावजूद की आज कोई हिन्दू है या मुसलमान अगर कोई कुछ प्रमाणित कर सकता है तो वह ये की वो कहाँ का है ! पूरा गली मोहल्ला और गाँव का भी पता न हो तो भी देश तो दुनिया में हर किसी को पता होता है की वो किस देश का मूल निवासी है ! और इसका प्रमाण है भले ही दुनिया अनेक देशों की सीमा में बंट चुकी हो, किसी भी देश में आई किसी भी विपदा या देश की नीति में अनिवासियो को मध्ये नजर न रखना आज किसी भी देश के लिए असंभव है | और तब बिना किसी धर्म के भेदभाव के विदेश में पीढ़ियों बसे अपने देश के मूलनिवासी भी किसी भी देश के लिए केवल अपने देशवासी होते हैं | उनकी उपलब्धि फिर वो किसी देश के राष्ट्रपति ही क्यों न बन जाए हमारे लिए गर्व की बात होती है !! और ये निश्चित ही हमारे इतिहास की राजेशाही में बटी देशभक्ति और राजद्रोह की कुंठित परिभाषाओं से कहीं कहीं आगे की सोच है जिसपर दुनिया आज चल रही है ! फिर ऐसे वर्तमान में अपने आपको बेहतर साबित करना ही विकास, उन्नति कहलायेगा या फिर पुन: हिन्दुराष्ट्र जैसी पिछड़ी मानसिकता पे अड़े रहना दुनिया में इज्जत दिलाएगा ?

मोदीजी के विदेश दौरों के लिए भी ठीक यही दलील दी जा रही है ! और कोई नहीं कह रहा की दुनिया में हिन्दुराष्ट्र का प्रमोशन किया जा रहा है !!! ? फिर भी मोदी के बिना बचा हुवा आर एस एस और अन्य हिन्दू संगठन खुद के साथ साथ अपने ही देश के लोगों को क्यों बरगलाये जा रहें है ? आर एस एस और हिन्दू राष्ट्रवाद के समर्थक खुद सोचें की अब ऐसा सपना देखने वालों को इससे बड़ा और क्या मौका मिलेगा अपने सपने को अंजाम देने का ? उनके पास अगर कोई संविधान है तो उसे दुनिया में सही साबित करने का ?? लेकिन नहीं ! ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा ! हो रहा क्या खुद ऐसा सपना दिखाकर सत्ता हासिल कर चुके लोग ही नहीं कर रहे तो अब ऐसे सपने अब भी देखने वाले और अपने सपने के विरोधियों को हिंदुओं का ,देश का ही दुश्मन या फिर सीधे पाकिस्तानी कहने वालों को भी अपने इस पिछड़ेपन के लिए शर्मिंदगी न सही लेकिन अब आगे दुनिया के सामने छी थू होने से पहले ही अपने आप को बदल लेना चाहिए और लोगों को भी मुर्ख बनाने से बचना चाहिए ! और भारतीय राजनीति की इस सच्चाई को स्वीकारते हुवे अपने हर आचार विचार में धर्म हित की जगह जन हित की पटरी पर टिके रहना चाहिए !

(Visited 16 times, 1 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *