मोदी सरकार भारत की जगहंसाई करा रही है !

 

Indian-Army

भारतीय सेना ने मंगलवार सुबह म्यांमार की सीमा में घुसकर मणिपुर हमले के जिम्मेदार लगभग 20 उग्रवादियों को मार गिराया। उग्रवादियों के दो अड्डे ध्वस्त कर दिए गए। म्यांमार सरकार के समन्वय से सेना ने यह सफल कार्रवाई की। इस घटना के बाद भारतीय सेना की यह सफलता देश में सोशल मीडिया पर छाई हुई है। आज INDIANARMYROCKS ट्रेंड कर रहा है।लेकिन खुश उस समय फीकी पद गयी जब म्यांमार ने कहा ऐसी कोई करवाई नहीं हुई है , ऊपर से जो फोटो दिखाया जा रहा था सोशल मीडिया ने उस का भी भेद खोल दिया क्यों के फोटो एक साल पुरानी थी . इस से पहले भी भारत पाकिस्तान नौका उड़ाने पे अपनी खिल्ली उडा चूका है . भारत सरकार की बेवकूफी के कारण आज पुरे विशव में भारत की जगहंसाई हो रही है और भारत की छवि को धक्का पहुंचा है . पेश है सोशल मीडिया पे कुछ महत्वपूर्ण लोगो के कमेंट —

( OM THANVI )
जवाबी कार्रवाई में सही, आतंकवादियों को पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र में सबक सिखाया गया यह काबिले-तारीफ है। लेकिन भारत के सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने गुड़ को गोबर क्यों किया? उन्होंने कहा कि म्यांमार में की गई भारतीय सेना की कार्रवाई पाकिस्तान समेत उन दूसरे देशों को एक संदेश है, जहाँ भारत विरोधी चरमपंथी बसते हैं। लेकिन म्यांमार सरकार ने तो कहा है कि जो हुआ है वह भारत की सीमा के भीतर ही हुआ है! सच्चाई क्या है?

दूसरी बात, सीमा की फौजी कार्रवाई पर राजनेताओं का बड़बोलापन और प्रचार-यश-प्रार्थी होना और पड़ोस के अन्य देशों को हड़काना कूटनीतिक स्तर पर कितना वाजिब है? या मोदी सरकार ने दक्षिण एशिया के लिए नई रणनीति तैयार कर ली है? अगर यही अंदाज रहा तो अच्छे दिन अर्जित न होने पर, या किसी चुनाव में आसार बिगड़ने की आहट पर, डर नहीं कि मोदीजी के उत्साही मंत्री कहीं सचमुच युद्ध का बिगुल न बजा दें? ‘वतन की आबरू खतरे में है आवाज दो’ का उदघोष जन-जन में अपार राष्ट्रबोध जगाता आया है और जो इसका विरोध करता है वह तुरंत देशद्रोही कहलाता है। उन्मादी विस्फोट का यह आजमाया हुआ फार्मूला है। इसका भविष्य अब क्या है, यह भविष्य ही बताएगा।

पहले म्यांमार की सीमा के भीतर जाकर फौजी कार्रवाई करने का केंद्रीय मंत्री का दावा झूठ निकला (म्यांमार का कहना है कि कार्रवाई भारत में ही हुई होगी), अब कल से टीवी पर और आज अखबारों में छाई तसवीरों का ‘सच’ उजागर हुआ है! विश्वव्यापी प्रचार के बाद पोल खुलने पर सरकार ने बस यह बयान दिया है तसवीरें रक्षा मंत्रालय ने जारी नहीं की थीं!

बहरहाल उचित सैनिक कार्रवाई हुई, और सरकार की सम्मति से हुई, इसमें किस को शक होगा। पर सौ की तादाद में आतंकवादी मारे गए और जो मारे गए उनमें प्रमुख नाम कौन-से हैं, यह भी तो आधिकारिक तौर पर सामने आना चाहिए – अगर गोपनीयता इसमें आड़े नहीं आती।टीवी चैनल तो कल पुराने फोटो दिखा-दिखा कर मुदित हुए; पुराने फोटो आज हिन्दू और टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने पर भी शोभित हैं! मतलब यह कि सौ आतंकवादी दूसरे देश की सीमा में घुसकर-न-घुसकर मारने की ‘खबर’ ने बावला कर रखा है सयानों तक को!!

( TONY RAJA)

कहा है बड़बोली सरकार ,भाड़ मीडिया और भगतगण ! म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय के निदेशक जाव हते ने इन खबरों का फ़ेसबुक पोस्ट के जरिए खंडन करते हुए कहा, ‘हमारी सेना की ओर से दी गई सूचना के मुताबिक भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई हमारे देश में घुस कर नहीं, बल्कि भारत-म्यांमार सीमा के नजदीक भारतीय इलाके में ही की गई।’ —कहा है वो राठोड जो ५६ ” सीना और मजबूत सरकार की बात कर रहा था ,दे अब जवाब ? ये कार्रवाई म्यांमार के हमारी सेना को बताने पे हुवी की यहाँ आतकी छुपे है और वो सीमा भारत की थी तो फिर ये बिना काम को हो हल्ला मचा के ये देश की नाक क्यों कटवा रहे हो ! पहले पाक बोट जो गुजरात में आई थी उसके बारे में भ्रामक प्रचार किया गया और फिर जब उस सैनिक अफसर ने सच बोला तो उसे दबा दिया गया —ये सिर्फ लोगो का १७००० एकड़ जमी जो बांग्लादेश को दी गयी है उससे धयान हटाने की कुचेस्टा है और कुछ नहीं और भगतो को खुस करने का ड्रामा और देश में जो हालत पैदा हो रहे है उससे लोगो का ध्यान बाटने की कोशिस –कुछ तो सरम करो -डूब मरो-डूब मरो .

( Nilesh Takre )

Shame media is using old army pictures to justify so called Mayanmar fake strike

जैसे गुजरात में बोट धमाका हुआ वैसे हे तो कुत्च हुआ होगा म्यांमार में क्यो भक्तो , बोट धमाके का आज तक खुलासा नहीं हुआ.

भाजपाई हमें देशभक्ति सिखाने आते है, अरे जाओ जरा अपने आका को भी सिखाओ देशभक्ति कम से कम देश और सेना को बदनाम ना करे।

( Umesh Diwedi )

इस सरकार की प्रत्येक कार्यवाही अगले दिन संदेहो को जन्म क्यों देने लगती है ? पिछली बार पाकिस्तानी बोट को उड़ाने के मामले भी सरकार और अधिकारीयों के बयान अलग अलग थे . मुश्किल ये है की ये सरकार हर चीज़ का तुरंत श्रेय लेना चाहती है और देश को ये बताना चाहती है की उसके जैसी सरकार आज तक इस देश में नहीं आई है और यही से गड़बड़झाला शुरू हो जाता है यदि मनोविज्ञान से सरकार को समझा जाए तो ये लगता है की सरकार के पास अभी तक दिखने लायक कुछ नहीं है ईसलिये जब भी इस तरह की घटना होती है सरकार तुरंत इसका श्रेय लेने कूद पड़ती है . परिपक्वता की बहुत कमी है.

( Mohammed Anas )

ऐसे सौ उग्रवादी मार गिराए गए दूसरे देश में जो अत्यंत दुर्गम भागौलिक स्थिति वाला है। टीवी वाले कह रहे हैं हमारे 160 फौजी उस पार गए थे। खरोंच तक नहीं आई। ज़मीन में उतर कर मार गिराए।
फुटेज में बार्डर पिच्चर की लड़ाई दिखाई जा रही है। एकदम वो समझ रखा है क्या जनता को। वो समझते हैं न? नहीं। चार साल है अभी तो,समझ जाएंगे।अगर म्यांमार के भीतर भारतीय फौज नहीं घुसी और न तो उन्होंने ऐसा कोई ऑपरेशन वहां अंजाम नहीं दिया तो इस बात की जांच होनी चाहिए की सेना पर किन लोगों का दबाव था ऐसी बात मीडिया से कहने के लिए। आज देश शर्मसार है। जो भी है वह साफ होना चाहिए। यदि कार्यवाई नहीं हुई है तो अब होनी चाहिए। नरेंद्र मोदी जी पर मुझे पूरे एतबार है। उनके 56 गुणे 0 सीने पर पूरा गर्व है मुझे। वे देश नहीं झुकने देंगे। दुनिया को दिखा दें कि म्यांमार तो क्या चीन में घुस जाएंगे हम। अब पूरी दुनिया के सामने लंका लगा दें मोदी जी शत्रुओं का।
वंदे मातरम।

(wasim akram tyagi)

अजब हमला है म्यांमार कहता है कि कोई कार्रवाई ही नहीं हुई और अखबार के पहले पन्ने इस हमले से इस कद्र खुश हैं कि मानो गोली उनकी खबर को लिखने वाले की -बोर्ड ने चला दी हो। रक्षा मंत्री पता नहीं क्यों और किस वजह से नहीं बोल पा रहे हैं ? क्या उन्हें भी भारतीय सीमा में घुस आये घुसपैठियो को मार गिराने की खबरों पर यकीन नहीं है ? उधर अखबार नवीश हलवाई की दुकान पर लड्डू बुकिंग कराने की तैयारी कर रहे हैं, एक साहेब तो इससे बड़े साहेब की ब्रांडिंग करने पर उतारू हो गये है। अगर यह सच है कि सेना ने वाकई घुसपैठिये मार गिराये हैं तो उनकी लाशें कहां भी तो कहीं पर गिरी होंगी वे लाशें कहा हैं ? या फिर वे गोली लगने के बाद वापस म्यांमार की सीमा में घुस गये होंगे ? हां इतना तो जरूर है कि इस ‘फर्जी’ हमले से जितनी खुशी अखबारों के संपादकों को हो रही है उससे लगता है यहां एक विशेष वर्ग जो च्यूंटियों को आटा खिलाने में यकीन रखता है उसी वर्ग के डीएनए में हिंसा नफरत और खून खराबा है। उसी वर्ग का मीडिया पर कब्जा है बाबा साहेब ने इस वर्ग को तथाकथित उच्च वर्ग और ब्राहम्णवादी वर्ग बताया है।

( DHRUV GUPTA )

हमारी सरकार की प्रचंड प्रचारप्रियता और भारतीय मीडिया की मूर्खता के कारण नेपाल में भारतीय वायुसेना और एन.डी.आर.एफ द्वारा किए गए प्रशंसनीय राहत और बचाव कार्य के बावज़ूद देश की नेपाल में इस क़दर भद्द पिटी कि अपमानित नेपाल सरकार को आख़िर में भारतीय मीडिया को अविलंब नेपाल से निकल जाने को कहना पड़ा। अब भारतीय सेना और वायुसेना द्वारा मणिपुर और नागालैंड में आतंकियों के ख़िलाफ़ चलाए गए साहसिक और बेहतरीन अभियान को पडोसी देश म्यांमार में घुसकर आतंकियों को मारने का अभियान बताकर मीडिया और सरकार ने एक संप्रभु देश को इस क़दर अपमानित किया कि अंततः म्यांमार की सरकार को भारत के दावे का खंडन करना पड़ा। म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय के डायरेक्टर ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि भारतीय सेना का अभियान म्यांमार की सीमा के भीतर नहीं, म्यांमार की सीमा से लगी भारतीय ज़मीन पर की गई थी। यह अभियान म्यांमार की ज़मीन पर ही अगर चलाई गई थी तो इसे गोपनीय रखने के बजाय एक ज़िम्मेदार सरकार द्वारा अपने एक सहयोगी पडोसी राष्ट्र की संप्रभुता का मखौल उड़ाना क्या जायज़ कहा जाएगा ?

हमारी यह दंभपूर्ण प्रचारप्रियता कहीं हमें हंसी का पात्र तो नहीं बना रही ?

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21 thoughts on “मोदी सरकार भारत की जगहंसाई करा रही है !

  • June 12, 2015 at 5:59 am
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    जमीन किस देश की थी से जयादा महत्वपूर्ण है कि उग्रवादी मारे गये या नही !! अगर यह घटना हुई ही नही तो देश का मीडिया कटघरे मे खड़ा होना चाहिये क्योकि खबरो को दिखाने का काम उन्होने किया है, देशवासियो को किसी खबर का सच खुद कैसे मालूम चलेगा ??
    पर यकीन नही होता कि दुनिया भर के मीडिया मे छाई यह खबर झूठी होगी ?? पता नही सच क्या निकल कर सामने आता है….वेट एंड वॉच यानि फिलहाल तो इंतजार करो और देखो की नीति पर काम करना होगा….

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    • June 12, 2015 at 2:56 pm
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      शरद जी मिडिया की छोड़िये लेकिन क्या अब देशवासी सरकार के मंत्रियों पर भी भरोसा ना करे ? और देशवासियों की भी छोड़िये क्या दुनिया म्यांमार पर भी भरोसा ना करे ??

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      • June 13, 2015 at 12:46 am
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        अरे सर जी कैसे छोड़ दे मीडिया को क्योकि हर बार मारे गये उग्रवादीयो की सांख्या मीडिया ही तो अपने चेनल पर दिखा रहा था 🙂 म्यांमार का बयान तो स्वभाविक है क्योकि कौन स्वीकार करेगा कि उसकी जमीन पर उग्रवादी रहते है और बाकयदा उनके केम्प चलते है ??

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    • June 12, 2015 at 3:10 pm
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      शाहनवाज हुसैन ने इस घटना का श्रेय लेने के लिए टी वि पर कहा था की बिना राजनैतिक इच्छाशक्ति के १० वर्षो से लटकी पड़ी ऐसी कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया जा सकता ! अगर यह मोदी की इच्छाशक्ति का ही नमूना है तो क्या एक साल तक वो इसे अंजाम देने के लिए महूरत ढूंढ रहे थे या जिनके हर राजनैतिक इच्छा शक्ति की कीमत २०-२० जवानो की मौत है ?
      और ऐसी खबर का ठीकरा केवल मिडिया पर फोड़ कर आप परे नहीं हट सकते ! क्यों ऐसी बे सर पैर की खबर के लिए चैनलों में सबसे पहले और एक्सक्लूसिव जैसी होड़ नहीं दिखी ? क्यों किसी चैनल की खबर दूसरे से बढकर नहीं थी और सारे एक सुर में एक जैसा गौरवगान गाते नजर आये ??

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  • June 12, 2015 at 10:09 am
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    शरद जी

    मेरे समझ से सरकार ने जो आतंकवादियो के खिलाफ करवाई की है वो सराहनीय है और हर कोई इस का स्वागत करता है , मगर जिस तरह संघी पत्रकारिता और अन्धे मोदी भक्तो ने पुराने तस्वीर से साथ हंगामा मचाया है वो निन्दनीय है. कुछ चीजे मुल्क के लिये बहुत ही महत्पूर्व होती है खास तौर से रक्षा, इस की हर चीज गोपनीय होती है . हर चीज का प्रचार करने की आवश्कता नही है. ऐसी खबरे सोशियल मीडिया पे आती है तवज्जुब होता है के भारत के बड़े अखबार और चॅनेल भी ऐसी खबरे देखाई है जिस का कोई हक़ीक़त ही नही है. ऐसी खबरो को रोकना हो गा.

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    • June 13, 2015 at 12:53 am
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      आपसे सहमति है अफ़ज़ल साहब !! उग्रवादीयो को मार कर जिस प्रकार एक शानदार शुरुआत हुई है उसकी हर तारीफ कम है पर इस बारे मे कई विरोधाभासी बयानो की बजाय एक ही बयान आता तो बेहतर होता…..वैसे व्यक्तिगत तौर पर हम उग्रवादीयो के मारे जाने से खुश है (इनको मार कर ही उग्रवाद का खात्मा किया जेया सकता है), कितने मरे और किसकी जमीन पर मरे सरीखी बाते हमारे लिये उतना मायने नही रखते …..

      इस खबर पर देसी मीडिया काफी अपरिपक्क्व दिखा है, शायद भविष्य के लिये कुछ सबक ले.

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  • June 12, 2015 at 10:46 am
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    ऑजो लोग भारतीय कमांडों के म्यांमार की सीमा पार करके 100 आतंकवादियो को ढेर करने पर ख़ुश हो रहे हैं,
    क्या वो लोग तब भी इतना ही या ज़रा सा भी ख़ुश होंगे
    अगर हमारे किसी पड़ोसी देश के, विशेषकर चीन या पाकिस्तान के, कमांडों
    हमारी सीमा के भीतर आ कर ऐसी कोई कार्रवाई करेंगे?
    अगर हम अपना फ़ायदा होते देख कर ख़ुश हो जाते हैं,
    तो भले ही यह स्वाभाविक मानव प्रकृति हो और हमारी मंशा बुरी न हो,
    लेकिन यह मूलत: एक स्वार्थी प्रवृत्ति है
    और मनुष्य का विकास इसमें ही है
    कि वो अपनी मौज़ूदा वास्तविकता से परे जा कर सोच सके।
    जब किसी को हमारी सीमा में घुस आने की अनुमति नहीं है,
    तो हमारे लोगों को भी हमारी सीमा से बाहर जाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
    वैसे ऐसा पहली बार नहीं हुआ है,
    पहले भी भारतीय सीमा दूसरे मुल्कों में घुस कर कार्रवाई कर चुकी है
    लेकिन तब इसे गुप्त रखा गया है
    दोनों मुल्कों ने आधिकारिक तौर पर इससे इन्कार ही किया था,
    ऑन रिकॉर्ड्स ऐसी कोई कार्रवाई कभी हुई ही नहीं थी।
    वही ठीक था। ग़ुलज़ार साब ने एक मामले में कहा है “कोई नाम न दो।”
    सुनते हैं कि अब म्यांमार ने साफ़ इन्कार कर दिया है कि भारत ने उनकी सीमाओं के भीतर कोई भी कार्रवाई की है।
    तो अब एक तरह से हमारी सरकार झूठी साबित हो गई है,
    अब दुनिया हँस रही होगी हम पर, हमारे कमांडो पर, हमारे मीडिया पर।
    बस, हम अपनी सोच का विश्लेषण कर सकते हैं
    कि हम उसी कार्रवाई को सही मानें, दिल से,
    जब हम उस कार्रवाई को सही मान सकें
    भले ही वो हमारे लोगों ने दूसरे देश के लोगों पर की हो,
    या दूसरे देश के लोगों ने हमारे देश के लोगों पर की हो।
    मेरा ऐतराज़ कार्रवाई होने पर नहीं है, की गई कार्रवाई का नगाड़ा बजाए जाने पर है।

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    • June 12, 2015 at 12:55 pm
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      मोदी सरकार डर गयी उसे पता चल गया हे की उसके बस का कुछ नहीं हे सिवाय कुछ बड़े और छोटे व्यापारियों की सेवा के वो भी खासकर गुजरात के ऐसे में ये डरे हुए हे की कही वो लोग जो मोदी के लिए पगलाय हुए थे वो कही प्रतिक्रांति ना कर दे भारत की जनता हे ही ऐसी ये जितनी जल्दी सर पर बिठाती हे उतनी ही तेज़ी से पटकती भी हे इसी डर से रोज़ कोई न कोई ड्रामे किये जा रहे हे कभी नाव में विस्फोटक शान्ति से जलते दीखते हे तो कही दूसरे देश में आतंकवादियों को ” स्टेचू ” कहकर उन्हें आराम से मारा जा रहा हे ये सब अपने मुर्ख सपोटरो को दिए जाने वाले झुनझुने हे

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      • June 13, 2015 at 6:23 pm
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        पाकिस्तान और दूसरे देशो से आने वाले ब्यानो से साफ़ हो रहा हे की मोदी सरकार दक्षिण एशिया को हथियारों की होड़ में लगभग झोक चुकी हे मोदी सरकार के बड़े समर्थक रहे वैदिक जी ने भी आज इसी और इशारा किया हे जैसे की उमीद ही थी की क्योकि मोदी एक ऐसे इंसान हे जिनमे महानता के कोई लक्षण नहीं होते हे मोदी सरकार उपमहादीप की आम जनता के लिए खतरा बन चुकी हे

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  • June 12, 2015 at 11:47 am
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    म्यांमार कांड के बाद भारतीय मीडिया के बेपनाह जोश और उत्साह को देखकर हमारे भी खून में उबाल आने लगा है। देशप्रेम का यह ज़ुनून देखते ही बनता है ! मुझे यक़ीन है कि मीडिया वाले भाई लोग आज रात तक अपने कैमरों के साथ बार-बार सीजफायर का उल्लंघन करने वाले पाकिस्तान पर म्यांमार की तर्ज़ पर हमला कर न सिर्फ पाक-अधिकृत कश्मीर में चल रहे तमाम आतंकी कैम्पों को नष्ट कर डालेंगे, बल्कि दाऊद की लाश भी कल सुबह तक न्यूज़ चैनलों के स्टूडियोज में हमारे दर्शनार्थ लटका कर मानेंगे।
    इंतज़ार करिए अगले ब्रेकिंग न्यूज़ का !

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  • June 12, 2015 at 5:37 pm
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    एक सफल सैन्य अभियान…
    – कुछ लोगों ने छाती ठोकी।
    – कुछ लोगों ने छाती पीटी।

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  • June 12, 2015 at 9:32 pm
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    is khabar ki gahrai se jhaanch honi chahiye aur satya sabke samne aana chahiye itana bhram failne par logo ka vishwas khatam ho jane ka khatra hai, is tarh desh ki arthik vyavastha aur bhi gart me chali jaegi.

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  • June 13, 2015 at 12:35 am
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    भेजा घूम गया इस बार तो 🙂 ये तो के बी सी का सवाल बन गया है….
    सवाल–>भारतीय सेना ने कितने उग्रवादी मारे (म्यांमार या भारत मे को एक तरफ रखिये)…
    A-30
    B-100
    C-एक भी नही
    D-7

    कभी सुना 30 को मारा, कभी 100 की लाशे बिछाई, कभी उग्रवादियो की तरफ से खबर आई कि एक भी नही मारा गया और अब 7 पर आम राय बनाने की कवायद !!

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  • June 13, 2015 at 6:41 am
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    Sabhi mullo ki gandh phati padi tabhi modi ko lekar itne comment kar rahe hai itne mc agar pakistan ko lekar kare

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  • June 13, 2015 at 6:43 am
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    sabhi ko is bath par garv honi chaiye ki aantikiyo ko attaक ho

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  • June 13, 2015 at 2:10 pm
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    चीन की बौखलाहट -चटगांव बन्दरगाह भारत को गिफ्ट
    ————————————————————-
    चीन ने बॅग्लादेश के चटगांव बन्दरगाह को भारत पर हमले के लिये विकसित किया था । एक कूटनीतिक निर्णय से वह आज भारत का अंग है । इसी बौखलाहट मे मोदी की बँग्लादेश यात्रा को विफल करने के लिये चीन ने सेना पर हमला करवाया । बदले मे 100 से अधिक आतंकी मार गिराना चीन पर सीधा हमला है । प्रशांत शुक्ला

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  • June 13, 2015 at 2:12 pm
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    ये अफजल खान अफजल गूरू का भाई है जिसने ऐक फर्जी न्यूज का पेज बना रखा है,
    चल तेरी बात मान ली की मोदी जी झूठ बोल रहे है,लेकिन आर्मी झूठ नही बोलती सिधे रगड़ती है।
    तेरे जैसे कई कूतों को मोदी से प्रोबलम
    और विदेशी मिडीया तो कूछ बोल ही नही रही ये आजतक, NDTv ईन प्रेस्टिटयूट को ही ज्यादा प्रोबलम है ।
    तू अपने भाईयों को समझा की 72 हूरें कही नही है,

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  • June 15, 2015 at 11:46 am
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    जीतेंद्र और मन्नू के कमेंट सुनकर यकीन हो गया की मंद बुद्धि बच्चे दोनो और है. सरकार को ऐसे मंद बुद्धि बच्चो की बहुत ज़रूरत है, इसको बढ़ाने के लिए सरकार और अधिक काम करेगी और कर रही है.

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    • June 17, 2015 at 7:45 am
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      शीतल पि सिंह सर ने इनका सही प्रोफाइल बताया हे लिखते हे Sheetal P Singh : BJP के हाथियों के दंगल में पैदल सेना की बड़ी दुर्गति है. बीजेपी की पैदल सेना मुख्यत:दरिद्र सवर्णो की रुग्णशाला से आती है। रुग्णशाला का मतलब यहाँ उन प्रतिभागियों से है जो आर्थिक शैक्षिक शारीरिक मोर्चों पर दोयम दर्जा रखते हैं पर मनु महाराज की अनुकम्पा से उन्हे अपने से बुरे हाल में सड़ रहे ग़रीब नसीब हैं, जिन्हें देखकर उन्हे ख़ुद के “बड़े” होने का एक झूठा अहसास तरावट देता रहता है. तो यह पैदल सेना अपनी दो हज़ार से बीस हज़ार के मध्य झूलती सामुदायिक विपन्नता के दौर में अरबों ख़रबों के वारे न्यारे करने वाले फ़ैसलों /विवादों के पैरवीकारों के रूप में अपने आप को पाकर समझ ही नहीं पाती कि बैटिंग किधर करनी है. इंतज़ार करती है कि कुछ ऊपर से ज्ञान छिड़का जाय तो वह भी लोकल बघारे.मसलन आप सोशल मीडिया के गट्ठर के गट्ठर अकाउंट देख आइये. एक भी शायद ही मिले जिसने KG6 basin प्रसंग पर ख़ुद से कुछ लिखा हो? आयरन ओर के गोरखधंधे पर एक हर्फ़ दरज कराया हो? अडानी के बारे में कुछ गहरी जानकारी प्रकट की हो? अब यकायक उसे ललित मोदी/सुषमा स्वराज की मानवीय रिश्तेदारी पर डिफ़ेंस खड़ा करना है. काफ़ी मीमांसा के बाद मैंने पाया कि कम से कम सोशल मीडिया में मौजूद मोदी/बीजेपी समर्थकों का ९९% आज के क्रोनी कैपिटल के ऐतिहासिक साइज़ के प्रपंच से दयनीय स्तर तक अनभिज्ञ है. वह दरअसल मुसलमानों से लड़ रहा है, ईसाइयों से लड़ रहा है, औरतों को क़ाबू (उसकी समझ में मर्यादा) में रखने में लगा है, कश्मीर में तैनाती चाहता है, लाहौर पे क़ब्ज़ा, चीन को सबक़ और विश्व गुरू/हिन्दू /संस्कृत …
      प्रोफ़ाइल्स छोड़कर. मैं दस साल बाद का दृश्य अपने हिसाब से जैसा देख पा रहा हूँ कि “खेती सेठों की हो चुकी होगी और बेरोज़गारों के झुंड तमाम तरह की लम्पट सेनायें बनाकर एक दूसरे से निबटने/निबटाने में लगे होंगे. सरकारी फौजफाटा/पुलिस अपनी लूटपाट अराजकता में. सांप्रदायिक बँटवारा नई चुनौतियों को पेश कर रहा होगा. बुज़ुर्ग औरतें बच्चे और बीमार सबसे ज़्यादा वलनरेबल होंगे. है तो बहुत बुरा सा स्वप्न पर…
      शीतल पी सिंह के एफबी वॉल स

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      • June 23, 2015 at 9:35 am
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        26 जनवरी सेल्यूट विवाद के विवाद पर अपनी मूर्खता पर्दर्शित करने के बाद फिर से वही हरकत ? अब देखिये की जब एक भाजपाई ने ही रामाधव के ट्वीट पर उन्हें लताड़ा तो एक संघी फ़ौज़ का सिपाही क्या कहता हे इससे अंदाज़ा लगाइये की सोशल मिडिया पर छायी रहने वाली संघी फ़ौज़ कितनी मूढ़मति हे इसीलिए हमारी सलाह हे की फेसबुक टिविटर आदि पर इन्हे पढ़ पढ़ कर लोग अपना खून ना जलाय बेहतर हे की इन्हे पढ़ा ही ना करे कुछ अच्छी साइटों पर ही रहे देखिये संघी सिपाही क्या लिखता हे की ”इस लेख में मेरा मकसद उपराष्ट्रपति को गलत ठहराने का नहीं है ना ही राम माधव के बयानों को जायज ठहराना. मगर जहां बात उपराष्ट्रपति की है, यहाँ तमाम भारतीयों की तरह मुझे भी थोड़ी आपत्ति है. हामिद अन्सारी उपराष्ट्रपति होने के अलावा भारतीय भी तो हैं. बीते कुछ समय में उपराष्ट्रपति रहते हुए हामिद अंसारी पर अलग अलग विषयों पर आपत्ति उठाई गयी हैं. वर्तमान आपत्ति तीसरी है इस क्रम में. पहली रामलीला मैदान में आरती की. फिर 26 जनवरी की सलामी की. और अब योग वाली. दूसरी और तीसरी बार प्रोटोकॉल का बहाना था. पहली बार धार्मिक आस्था का. सार्वजनिक जीवन में आपका स्तर आम भारतीय से उठकर राष्‍ट्रीय नेता या उससे भी उपर का हो जाता है. ऐसे में जब आप भारतीयों के त्योहार में शामिल होने जाते हैं तो आचरण भी मर्यादित करने की उम्मीद रहती है. यदि धर्म आपको रोक रहा था तो वहाँ जाते ही नहीं बजाय ऐसे प्रदर्शन करने के. दूसरे और तीसरे मामले में प्रोटोकॉल की वजह से आप ऐसा करने के लिये विवश नहीं थे, ना ही किसी को ऐसे प्रश्न सार्वजनिक रूप से उठाने भी चाहिये. मगर जब मंच पर मौजूद सभी गणमान्य अतिथि और नेता राष्ट्रपति के साथ ध्‍वज को सलामी दे रहे हों, वहाँ प्रोटोकॉल की आड़ लेकर सलामी ना देना वाकई खलने वाली बात थी.———–”

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  • June 16, 2015 at 9:29 pm
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    ये मन्नोू और जितेंद्र ापने को सबित कर दिये कि वास्तव में ये कुत्ते हेी है ! घुसपैठ का ये पुरा प्रपच हेी मन गढंत है विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने का और अब चटागांव का बंदरगाह भेी मोदेी क होगया ,सिंघाई का भेी जल्देी हेी होने वाला है चमचे हैं कुछ भेी फेंकते है ये !

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