मोदी जी , इस बार पीएम नहीं देश फेल होगा

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दो दिन बाद संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी। जिस पर संसद की ही नहीं बल्कि अब देश की नजर होगी आखिर मोदी सरकार की किन उपलब्धियों का जिक्र राष्ट्रपति करते हैं और किन मुद्दों पर चिंता जताते हैं । क्योंकि पहली बार जाति या धर्म से इतर राष्ट्रवाद ही राजनीतिक बिसात पर मोहरा बनता दिख रहा है । और पहली बार आर्थिक मोर्चे पर सरकार के फूलते हाथ पांव हर किसी को दिखायी भी दे रहे है। साथ ही संघ परिवार के भीतर भी मोदी के विकास मंत्र को लेकर कसमसाहट पैदा हो चली है। यानी 2014 के लोकसभा चुनाव के दौर के तेवर 2016 के बजट सत्र के दौरान कैसे बुखार में बदल रहे है यह किसी से छुपा नहीं है । कारपोरेट सेक्टर के पास काम नहीं है । औघोगिक सेक्टर में उत्पादन सबसे निचले स्तर पर है । निर्यात सबसे नीचे है। किसान को न्यूनतम समर्थन मल्य तो दूर बर्बाद फसल के नुकसान की भरपाई भी नहीं मिल पा रही है । नये रोजगार तो दूर पुराने कामगारों के सामने भी संकट मंडराने लगा है । कोयला खनन से जुड़े हजारों हजार मजदूरों को काम के लाले पड़ चुके हैं । कोर सेक्टर ही बैठा जा रहा है तो संघ परिवार के भीतर भी यह सवाल बडा होने लगा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास मंत्र के आसरे संघ के जिस स्वदेशी तंत्र को ही हाशिये पर ढकेला और जब स्वयंसेवकों के पास आम जनता के बीच जाने पर सवाल ज्यादा उठ रहे हैं और जवाब नहीं है तो फिर उसकी राजनीतिक सक्रियता का मतलब ही क्या निकला।

दरअसल मोदी ही नहीं बल्कि उससे पहले मनमोहन सिंह के कार्यकाल से ही राजनीतिक सत्ता में सिमटते हर संस्थान के सारे अधिकार महसूस किये जा रहे थे । यानी संस्धानों का खत्म होना या राजनीतिक सत्ता के निर्देश पर काम करने वाले हालात मनमोहन सिंह के दौर में सीबीआई से लेकर सीवीसी और चुनाव आयोग से
लेकर यूजीसी तक पर लगे । लेकिन मोदी के दौर में संकेत की भाषा ही खत्म हुई और राजनीतिक सत्ता की सीधी दखलंदाजी ने इस सवाल को बड़ा कर दिया कि अगर चुनी हुई सत्ता का नजरिया ही लोकतंत्र है तो फिर लोकतंत्र के चार खम्भों के बारे में सोचना भी बेमानी है । इसलिये तमाम उल्झे हालातो के बीच जब संसद सत्र भी शुरु हो रहा है तो यह खतरा तो है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के वक्त ही विपक्ष बायकाट ना कर दें । और सड़क पर भगवा ब्रिगेड ही यह सवाल ना उठाने लगे कि नेहरु माडल पर चलते हुये ही अगर मोदी सरकार पूंजी के आसरे विकास की सोच रही है तो फिर इस काम के लिये किसी प्रचारक के पीएम बनने का लाभ क्या है। यह काम तो कारपोरेट सेक्टर भी आसानी से कर सकता है । और सही मायने में यही काम तो मनमोहन सिंह बतौर पीएम से ज्यादा बतौर सीईओ दस बरस तक करते रहे । यानी पेट का सवाल। भूख का सवाल । रोजगार का सवाल । किसान का सवाल । हिन्दुत्व का सवाल । हिन्दुत्व को राष्ट्र से आगे जिन्दगी जीने के नजरिये से जोड़ने का सवाल । मानव संसाधन को विकास से जोड़ कर आदर्श गांव बनाने की सोच क्यों गायब है यह सवाल संघ परिवार के तमाम संगठनो के बीच तो अब उठने ही लगे है। किसान संघ किसान के मुद्दे पर चुप है । मजदूर संघ कुछ कह नहीं सकता । तोगडिया तो विहिप के बैनर तले राजस्थान में किसानों के बीच काम कर रहे है । यानी मोदी सरकार के सामने अगर एक तरफ संसद के भीतर सरकार चल रही है यह दिखाने-बताने का संकट है तो संसद के बाहर संघ परिवार को जबाब देना है कि जिन मुद्दों को 2014 लोकसभा चुनाव के वक्त उठाया वह सिर्फ राजनीतिक नारे नहीं थे । असर मोदी सरकार के इस उलझन का ही है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी अब संघ के राजनीतिक संगठन के तौर पर सक्रिय ऐसे वक्त हुये जब संसद शुरु होने वाली है। यानी टकराव सीधा नजर आना चाहिये इसे संघ परिवार समझ चुका है । इसलिये पीएम बनने के बाद मोदी के ट्रांसफरमेशन को वह बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है । और ध्यान दे तो संघ की राष्ट्रभक्ति की ट्रेनिंग का ही असर रहा कि नरेन्द्र मोदी ने 2014 के चुनाव में राइट-सेन्टर की लाइन ली । पाकिस्तान को ना बख्शने का अंदाज था । किसान-जवान को साथ लेकर देश को आगे बढाने की सोच भी थी । कारपोरेट और औघोगिक घरानों की टैक्स चोरी या सरकारी रियायत को बंद कर आम जनता या कहे गरीब भारत को राहत देने की भी बात थी । यानी संघ परिवार के समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचने की सोच के साथ देशभक्ति का जुनून मोदी के हर भाषण में भरा हुआ था । लेकिन बीते दो बरसो में राइट-सेन्टर की जगह कैपिटल राइट की लाइन पकडी और पूंजी की चकाचौंध तले अनमोल भारत को बनाने की जो सोच प्रधानमंत्री मोदी ने अपनायी उसमे सीमा पर जवान ज्यादा मरे । घर में किसान के ज्यादा खुदकुशी की । नवाज शरीफ से यारी ने कट्टर राष्ट्रवाद को दरकिनार कर संघ की हिन्दू राष्ट्र की थ्योरी पर सीधा हमला भी कर दिया । लेकिन इसी प्रक्रिया में स्वयंसेवकों की एक नयी टीम ने हर संस्धान पर कब्जा शुरु भी किया और मोदी सरकार ने मान भी लिया कि संघ परिवार उसके हर फैसले पर साथ खड़ा हो जायेगी क्योंकि मानव संसाधन मंत्रालय से लेकर रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय से लेकर कृषि मंत्रालय और सामाजिक न्याय मंत्रालय में संघ के करीबी या साथ खडे उन स्वयंसेवकों को नियुक्ति मिल गई जिनके जुबा पर हेडगेवार-गोलवरकर से लेकर मोहन भागवत का गुणगान तो था लेकिन संघ की समझ नहीं थी । संघ के सरोकार नहीं थे । विश्वविद्यालयों की कतार से लेकर कमोवेश हर संस्धान में संघ की चापलूसी करते हुये बडी खेप नियुक्त हो गई जो मोदी के विकास तंत्र में फिट बैठती नहीं थी और संघ के स्वयंसेवक होकर काम कर नहीं सकती थी । फिर हर नीति । हर फैसले । हर नारे के साथ प्रधानमंत्री मोदी का नाम चेहरा जुडा । तो मंत्रियों से लेकर नौकरशाह का चेहरा भी गायब हुआ और समझ भी ।

पीएम मोदी सक्रिय है तो पीएमओ सक्रिय हुआ । पीएमो सक्रिय हुआ तो सचिव सक्रिय हुये । सचिव सक्रिय हुये तो मंत्री पर काम का दबाब बना । लेकिन सारे हालात घूम-फिरकर प्रदानमंत्री मोदी की सक्रियता पर ही जा टिके। जिन्हे 365 दिन में से सौ दिन देश में अलग अलग कार्यक्रमों में व्यस्त रखना नौकरशाही बखूबी जानती है। फिर विदेशी यात्रा से मिली वाहवाही 30 से 40 दिन व्यस्त रखती ही है । तो देश के सवाल जो असल तंत्र में ही जंग लगा रहे है और जिस तंत्र के जरीये अपनी योजनाओं को लागू कराने के लिये सरकार की जरुरत है वह भी संकट में आ गये तो उन्हें पटरी पर लायेगा कौन । मसलन एक तरफ सरकारी बैक तो दूसरी तरफ बैक कर्ज ना लौटाने वाले औघोगिक संस्थानों का उपयोग । यानी जो गुस्सा देशभक्ति के भाव में या देशद्रोह कहकर हैदराबाद यूनिवर्सिटी से लेकर जेएनयू तक में निकल रहा है । उसको देखने का नजरिया चाह कर भी छात्रों के साथ नहीं जुड़ेगा । यानी यह सवाल नहीं उटेगा कि छात्रो के सामने संकट पढाई के बाद रोजगार का है । बेहतर बढाई ना मिल पाने का है । शिक्षा में ही 17 फिसदी कम करने का है । शिक्षा मंत्री की सीमित समझ का है । रोजगार दफ्तरों में पड़े सवा करोड आवेदनों का है । साठ फिसदी कालेज प्रोफेसरो को अंतराष्ट्रीय मानक के हिसाब से वेतन ना मिलने का है । सवाल राजनीतिक तौर पर ही उठेंगे । यानी हैदराबाद यूनिवर्सिटी के आईने में दलित का सवाल सियासी वोट बैक तलाशेगा । तो जेएनयू के जरीये लेफ्ट को देशद्रोही करारते हुये बंगाल और केरल में राजनीतिक जमीन तलाशने का सवाल उठेंगे । या फिर यह मान कर चला जायेगा कि अगर धर्म के साथ राष्ट्रवाद का छौक लग गया तो राजनीतिक तौर पर कितनी बडी सफलता बीजेपी को मिल सकती है । और चूंकि राजनीतिक सत्ता में ही सारी ताकत या कहे सिस्टम का हर पूर्जा समाया हुआ बनाया जा रहा है तो विपक्षी राजनीतिक दल हो या सड़क पर नारे लगाते हजारों छात्र या तमाशे की तर्ज पर देश के हालात को देखती आम जनता । हर जहन में रास्ता राजनीतिक ही होगा । इससे इतर कोई वैकल्पिक सोच उभर सकती है या सोच पैदा कैसे की जाये यह सवाल 2014 के एतिहासिक जनादेश के आगे सोचेगा नहीं । और दिमाग 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दिनो की गिनती करने लगेगा । यानी सवाल यह नहीं है कि संघ परिवार अब सक्रिय हो रहा है कि मोदी फेल होते है तो वह फेल ना दिखायी दे । या फिर कांग्रेस हो या अन्य क्षेत्रिय राजनीतिक दल इनकी पहल भी हर मुद्दे का साथ राजनीतिक लाभ को देखते हुये ही नजर आयेगी । हालात इसलिये गंभीर है क्योकि संसद का बजट सत्र ही नहीं बल्कि बीतते वक्त के साथ संसद भी राजनीतिक बिसात पर प्यादा बनेगी और लोकतंत्र के चारो पाये भी राजनीतिक मोहरा बनकर ही काम करेंगे। इस त्रासदी के राजनीतिक विकल्प खोजने की जरुरत है इससे अब मुंह चुराया भी नहीं जा सकती । क्योंकि इतिहास के पन्नो को पलटेंगे तो मौजूदा वक्त इतिहास पर भारी पड़ता नजर आयेगा और राजद्रोह भी सियासत के लिये राजनीतिक हथियार बनकर ही उभरेगा । क्योंकि इसी दौर में अंरुधति से लेकर विनायक सेन और असीम त्रिवेदी से लेकर उदय कुमार तक पर देशद्रोह के आरोप लगे । पिछले दिनो हार्दिक पटेल पर भी देशद्रोह के आरोप लगे । और अब कन्हैया कुमार पर ।

लेकिन उंची अदालत में कोई मामला पहले भी टिक नहीं पाया लेकिन राजनीति खूब हुई । जबिक आजादी के बाद महात्मा गांधी से लेकर नेहरु तक ने राजद्रोह यानी आईपीसी के सेक्शन 124 ए को खत्म करने की खुली वकालत यह कहकर की अंग्रेजों की जरुरत राजद्रोह हो सकती है । लेकिन आजाद भारत में देश के नागरिको पर कैसे राजद्रोह लगाया जा सकता है । बावजूद इसके संसद की सहमति कभी बनी नहीं । यानी देश की संसदीय राजनीति 360 डिग्री में घुम कर उन्ही सवालों के दायरे में जा फंसा है जो सवाल देश के सामने देश को संभालने के लिये आजादी के बाद थे । और इसी कडी 2014 के जनादेश को एक एतिहासिक मोड माना गया । इसलिये मौजूदा दौर के हालात में अगर मोदी फेल होते है तो सिर्फ एक पीएम का फेल होना भर इतिहास के पन्नो में दर्ज नहीं होगा बल्कि देश फेल हुआ । दर्ज यह होगा । और यह रास्ता 2019 के चुनाव का इंतजार नहीं करेगा।

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30 thoughts on “मोदी जी , इस बार पीएम नहीं देश फेल होगा

  • February 20, 2016 at 8:15 pm
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    शरद भाई की चिंता हो रही हे वो हरियाणा पानीपत के ही रहने वाले हे सब खेरियत तो हे ना शरद भाई — ?

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    • February 22, 2016 at 4:07 pm
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      पुरे हरियाना मे इन्तर्नेत और फोन बन्द है तब् शरद् जेी अपनेी बात भि कैसे रख सक्ते है !

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      • February 22, 2016 at 9:10 pm
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        मुद्दा तकनीक का नहीं हे भावनाव का हे राज़ साहब ये हे की हमें फ़िक्र हे शरद भाई की भी और हरियाणा और उत्तर की सभी उस बेकसूर जनता की जो मोदी जी की अगला चुनाव जितने की खफ्त का शिकार हुई हे मुझे बहुत सख्त तकलीफ हुई हे जनता की हालत देख कर लोगो को 12 दिनों से बंधक सा बनाया गया लोग पानीपत से दिल्ली पैदल चल कर आये खरबो की सम्पत्ति बर्बाद हुई हे लोगो से पानी तक छीन लिया गया हमें कोई दिक्कत नहीं हुई अल्लाह का करना ऐसा हुआ की बवाल से एक दिन पहले ही में जाट बेल्ट से अपना बहुत ही ज़्यादा जरुरी काम जिसमे सात साल की मेहनत थी वो में निपटा कर आ गया था दिल्ली में हमारे यहाँ पानी भी गंगा वाटर हे हमें कोई दिक्कत नहीं हुई मगर दुसरो की तकलीफ नुकसान उनके साथ हुई बेदर्दी बर्बरता जनता का इस ज़हरीली सरकार दुआरा घोर मानमर्दन सोच सोच कर मुझे पिछले दो दिन से नींद भी नहीं आई हे

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  • February 21, 2016 at 9:22 am
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    किस कदर निकम्मी और ज़हरीली सरकार हे ये अंदाज़ा लगाइये की परसो से देश की राज़धानी का पानी हरियाणा में रोका हुआ हे और परसो से ये बेहूदा सरकार ( केंद्र और राज्य ) दोनों बके जा रही हे की सेना जा रही हे जा रही हे सेना जा रही हे मगर अब तक कुछ नहीं हुआ हे असल में ये ज़हरीली सरकार जो की मुजफरनगर दंगो की मेहरबानी से बनी थी जिसने दंगो के आरोपी नेताओ को को खूब नवाज़ा था यहाँ तक की अपने पुराने वफादारों मुख़्तार और शाहनवाज़ से भी बहुत ज़्यादा अब इस ज़हरीली सरकार की नज़र यु पि चुनाव पर हे उसी की कीमत उत्तर भारत और खासकर हरियाणा की मासूम आबादी चूका रही हे मुझे उनके लिए बहुत अफ़सोस और चिंता हो रही हे

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  • February 21, 2016 at 11:37 am
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    घिनोनेपन की सारी सीमा इन मोदी भक्तो ने तोड़ दी हे इस कदर जहालत ? अब दिल्ली में जल संकट के लिए भी केजरीवाल को जिम्मेदार ठहरा रहे हे जबकि ये मुजफरनगर दंगो का जो भाजपा – मोदी जी ने फायदा उठाया था अब ये उसी का हिसाब देना पड़ रहा हे भला इसका केजरीवाल से क्या लेना देना और देखिये जो सस्ते देशभक्त सिर्फ कुछ नारो की एडिटिंग करके फांसी का फंदा लेकर घूम रहे हे वो ही लोगो को प्यासा ( दिल्ली में कही भी भूजल पीने योग्य नहीं हे ) मारने वालो के खिलाफ चु भी नहीं कर रहे हे क्योकि इनके आकाओ की नज़र यु पि चुनाव पर हे हरियाणा के सिसकते लोग इन्हे नहीं दिख रहे क्योकि वहा चुनाव हो चुके हे

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  • February 21, 2016 at 6:55 pm
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    आठ दिनों से हरियाणा की बेबस जनता पर जो जुल्म हो रहा हे उसका सीधा सम्बन्ध मोदी जी की अगला चुनाव जीतने की खफ्त से हे उनकी इस खफ्त से हमने कई बार जनता को आगाह किया हे अब देखिये किस कदर जनता को अपमानित किया गया हे आठ दिनों से ये जनता दंगाईयो के सामने बेबस हे कई जगह तो बताया जा रहा हे की पुलिस भाग खड़ी हुई हे सोच कर भी अफ़सोस होता हे की जनता पर क्या क्या गुजरी होगी ? और इस निकम्मी सरकार ने कुछ भी नहीं किया जानते हे क्यों ? कारण हे की मोदी जी को यु पि में वोट चाहिए हे दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर ही जाता हे यु पि हारते ही मोदी जी 2019 में बोरिया बिस्तर बधना तय हे तो इसलिए जनता इस कदर दुर्गत करवाई जिसे देख कर नहीं सिर्फ सुन सुन कर हम तो खून के आंसू रो रहे हे

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  • February 22, 2016 at 7:11 am
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    आरोप हे की मोदी जी के चुनाव जितने में तीस से साठ हज़ार करोड़ का खर्च हुआ और अब हरियाणा में बीस हज़ार करोड़ का नुक्सान बताया जा रहा हे सिर्फ मोदी जी की यु पि विधानसभा चुनाव में वोट की खातिर यु समझ लीजिये की 2019 चुनाव के लिए पहली क़िस्त आपकी हमारी जेब से जारी कर दी गयी हे और ये भी की माल का नुक्सान तो हुआ ही आम और बड़ी जनता का जो मानमर्दन दस दिनों तक हुआ वो शायद ही कभी इतिहास में हुआ हो ? http://www.amarujala.com/feature/samachar/national/bhartiya-janta-party-in-trouble-during-jat-reservation-movement-hindi-news/?page=1

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  • February 22, 2016 at 8:50 am
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    एक सरकार के पिट्ठू अखबार की ही खबर हे की सेना के भी हाथ बाँध दिए गए सेना के सामने भी उपद्रव होता रहा सेना कुछ न कर सकी और इधर चैनेलो पर सरकार खबर चलवाती रही की देखते ही गोली मारन इ के आदेश मगर ऐसा कुछ ना हुआ कहा जा रहा हे की इससे सेना के मनोबल पर भी असर हो सकता हे पहली बार भारत में ऐसा हुआ हे की किसी उपद्रव में सेना का नाम भी सुनते ही शांंति नहीं हुई ऐसा कभी नहीं हुआ ये काम भी इस ज़हरीली निक्क्मी और सत्ता की भूखी सरकार ने कर दिखाया हे

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  • February 22, 2016 at 11:31 am
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    गुजरात में जो दंगाईयो उपदर्वियों को खुली छूट देने का मासूमो पर हेकड़ी साबित करवाने का भीड़ का मनोबल बनाय रखने का उन्हें काफी दिनों तक सकिर्य रखने का लोगो को महँगी गाड़ियों से आकर दंगा करते देखने के अधभुत नज़ारे का अधभुत प्रशासनिक कौशल और अनुभव साबित किया था अब वही अनुभव और प्रशासनिक कौशल हरियाणा में काफी काम आया हे

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  • February 23, 2016 at 6:25 pm
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    दंगाईयो और उपदर्वीयो के साथ हद से ज़्यादा नरमी बरती गयी इसका दस % भी मुसलमानो ने किया होता तो हज़ारो दंगाई मारे जाते मगर यहाँ सेना तक के हाथ बंधे रहे जानते हे क्यों ? बात हरियाणा की नहीं बल्कि मोदी जी की अगले साल यु पि विधानसभा के रास्ते से फिर दिल्ली में अगला चुनाव जीतने की खफ्त और सत्ता की भूख थी इसी के शिकार हुए बेकसूर लोगो की दर्दनाक कहानियाँ मुकदमेबाज़ियो में हमारी बहुत जायदाद लूटी हे इसलिए में समझ सकता हु की इन परिवारो पर क्या गुजरी होगी किस कदर कठिन होता हे जिंदगी को फिर से पटरी पर लाना में समझ सकता हु ऊपर से ये भी देखिये की बिना किसी शर्म के दंगाईयो के लिए लाखो का मुआवजा और सरकारी नौकरी मांगी जा रही हे क्यों ? क्योकि इनके नेताओ ने पहले ही इशारा कर दिया था की भाई हमने ही तो मुजफफरनगर में जो चिंगारी पैदा की थी उसी से तो ये मोदी सरकार बनी थी मुजफरनगर की अगर की अगर निष्पक्ष सी बी आई जांच हो तो हरियाणा हिंसा के सूत्र भी मिल सकते हे इस सबके लिए मोदी जी ही जिम्मेदार बनते हे http://www.amarujala.com/channels/states/haryana/

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  • February 23, 2016 at 9:22 pm
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    रास्ते खुलने के बाद ही हरियाणा में जो हुआ उसकी दिल हिलाने वाली कहानिया सामने आ रही हे भाजपा संघ के सबसे बड़े समर्थक व्यापारी ही रहे हे इन्ही व्यापारियों का नुक्सान वो भी घोर अपमान के साथ हुआ हे कोई बात नहीं कोई आपदा नहीं कुछ लेना देना नहीं फिर भी इतना जुल्म ? एक बूढ़े व्यापारी का रोना तो दिल दहला देने वाला था जब वो 70 – 80 साल का बुजुर्ग रो रो कर कहता हे की मेने उपदर्वीयो के हाथ जोड़े की जितनी चाहो मिठाई ले जाओ आराम से खाओ पर मेरी दुकान ना जलाओ ये मेरे बच्चो का इकलौता सहारा हे फिर भी उपदर्वी दुकान जलाने से नहीं बाज़ आये याद रखिये ये वही लोग हे जिन्होंने मोदी जी को बढ़ चढ़ कर समर्थन दिया था ये वही लोग जिनके बीच आरोप हे की पिछले दिनों संघियो ने भी अपनी गतिविधिया काफी बढ़ाई थी इसलिए हम हमेशा सावधान करते रहे हे की किसी भी हालत में साम्पर्दायिको का कठमुल्लाओं का कभी समर्थन ना करे ये किसी के सगे नहीं होते हे मुसलमानो ने हमेशा अपने यहाँ के उग्रो को बढ़वा देकर खुद ही नुक्सान उठाया और अब उससे भी बहुत ज़्यादा बुरा हादसा हरियाणा में हुआ हे में पैसे वाले मुसलमानो से अपील करता हु की वो आगे आये और हरियाणा के पीडितो की मदद करे सुप्रीम कोर्ट को भी चाहिए की वो खुद ही इस बात का नोटिस ले और मुजफरनगर दंगो की भी की भी सी बी आई जांच कराय ताकि पता चल सके की मोदी सरकार उपदर्वीयो पर इतनी नरम क्यों थी ?

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  • February 23, 2016 at 10:26 pm
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    मेने कह तो दिया हे की पैसे वाले मुस्लिम हरियाणा के पीडितो की मदद करे मगर अफ़सोस जानता हु की ऐसा होगा नहीं हमारे तो महान लोग दरगाहो पर देंगे देवबंद को देंगे एक बार कहा गया था पर नहीं कई कई बार हज और उमरे पर जाएंगे बकरीद पर लाखो के बकरे लेंगे मगर समाजसेवा जैसी फालतू बातो से दूर ही रहते हे

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  • February 24, 2016 at 7:38 am
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    अब बुलाओ उस वरिष्ठ पत्रकार समाजवाद की खाल ओढे संघी बहरूपिये विष्णुगुप्त http://visfot.com/index.php/author/vishnugupt/ को जो 2012 में असम मुद्दे पर लखनऊ में मुसलमानो की छोटी मोटी कुछ घंटे की मामूली हिंसा को ”मुसलमानो की वहशी भीड़ ” लिखता था नेट पर पहली बार लम्बा लेखन मेने इसी विष्णुगुप्त के विरोध में किया था अब बुलाओ और दिखाओ हरियाणा में हुए महान प्रशासक मोदी जी राज़ में क्या क्या नहीं हुआ ? अच्छी तरह देख लो विष्णुगुप्त देख लो वहशी भीड़ कैसी होती हे ? और उसके कारनामे कैसे होते हे गलत और बुरे मुस्लिमो के काण्ड भी ( आज़ाद मैदान मालदा सहारनपुर असम ) इसके सामने गांधीवाद सा लग रहे हे हालांकि हमने उस पर भी कई कई बार माफिया मांगी हर मुस्लिम नेता और रहनुमा को भलाबुरा कहा और तुम्हारे नेता माफ़ी तो बहुत दूर की बात उपदर्वीयो के लिए दस से पचास लाख रूपये मुआवजा और सरकारी नौकरी मांग रहे हे

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    • February 24, 2016 at 10:57 am
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      वहशीपन देखिये की एक जगह तो रिपोर्ट हे की एक कसबे की तो लगभग सारी एम्बुलेंस तक तोड़ फोड़ दी गयी और घायलो तक की पिटाई की गति बहरूपिये वरिष्ठ पत्रकार विष्णुगुप्त देख लो अच्छी तरह किसे कहते हे कुरुरता ? मेरा अंदाज़ा यह हे की इसमें कही ना कही संघी शिक्षा का ही नतीजा हे क्योकि पिछले दिनों ही एक नेता ने बयान दिया था की हमने जो मुजफरनगर में चिंगारी पैदा की थी उसी से मोदी सरकार बानी हे अच्छा मुजफरनगर दंगो के दौरान विष्णुगुप्त जी का वहशीपन देखिये की इन्होने मारे गए मुस्लिमो और पचास हज़ार विस्तापितो के लिए हमदर्दी के दो शब्द नहीं कहे थे तब भी यह मुस्लिम विरोधी भड़काऊ लेखन ही कर रहे थे वास्तव में यही वो मानसिकता जिस कारण हरियाणा में ये सब हुआ हे

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  • February 25, 2016 at 7:48 am
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    ”सूत्रों के मुताबिक इसी बीच केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने सर छोटू राम की प्रतिमा तोड़े जाने और पूरे राज्य में गैर जाट बिरादरी के लोगों की संपत्तियों की लूटपाट का हवाला देते हुए पूछा कि सरकार हिंसा करने वालों की बात तो कर रही है, मगर पीड़ितों की बात कब सुनी जाएगी।
    उन्होंने कहा कि आंदोलन के नाम पर एक वर्ग विशेष ने गुंडागर्दी की सारी हदें पार कर दी। ऐसे में इस वर्ग विशेष के पक्ष में खड़ा होने पर भाजपा को बड़ा सियासी नुकसान झेलना पड़ेगा। ” अमर उजाला से साभार
    पाठको इस वर्ग विशेष के पक्ष में और कोई नहीं बल्कि खुद पि एम साहब खड़े हुए हे क्योकि उन्हें मुज्जफनगर का एहसान चुकाना था जिस कारण पुरे प्रदेश में धुर्वीकरण हुआ और उमीद से साठ सीटें ज़्यादा लेकर मोदी जी पि एम पद पर कब्ज़ा कर सके खेर जो गैर जाट लोग हे हरियाणा के ही नहीं पुरे उत्तर के जिनका घोर अपमान हुआ हे लोगो पर क्या क्या नहीं गुजरी ? अब रेप की भी अफवाह हे विकलांग बच्चो के स्कुल तक जला दिए गए ऊपर से अब दंगाईयो के लिए सरकारी नौकरी और मुआवज़ा माँगा जा रहा हे इतना अपमान लोकतंत्र में विशाल जनता का कभी नहीं हुआ हे क्या अब भी आप इस ज़हरीली सरकार के साथ रहेंगे ?

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  • February 25, 2016 at 8:01 am
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    अच्छा जिन संघियो और मोदी टोडीज़ ने आसमान सर पर उठा रखा था मालदा में चार घंटे और चार करोड़ के नुक्सान पर की हिंसा जहा मौके पर ही मौजूद मंदिर को किसी ने हाथ तक नहीं लगाया था अब उन्हें चौतीस हज़ार करोड़ के नुक्सान और दस दिन चली हिंंसा पर चु भी करने की मजाल नहीं हो रही हे छी न्यूज़ को तो शायद पता भी नहीं हे की भारत में कोई हरियाणा स्टेट भी हे दिल्ली का पानी कही रोक भी गया हे ये घिनौना रवैया इस लिए क्योकि इस सबके l लिए इनके प्रिय मोदी जी ही जिम्मेदार हे में तो खटटर को भी दोष नहीं देता कोई सी एम भला ऐसे में क्या कर सकता जब अधिकारी तक इशारा कर कर के लोगो की सम्पतिया जलवा रहे हे हो सेना को भी रोक रहे हो ? वो तो शायद एक केंद्रीय मंत्री का ही ईमान जाग गया उसने सेना को बिना किसी से पूछे दंगाईयो को गोली मारने के आदेश दिए तब ही जाकर शायद शान्ति हुई वार्ना जाने क्या होने वाला था

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  • February 25, 2016 at 12:36 pm
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    कश्मीर का मुद्दा हो या कोई और बात वैसे ये मोदी टोडीज़ संघी बज़रंगी हर बात पर मार लो फांसी दे दो गोली मार दो जिन्दा जला दो की बात करते हे एक संघी संपादक तो जेल में होमो केदियो से भी देशभक्ति की गुहार लगा रहा हे उधर हरियाणा और उत्तर भारत में जनता का घोर अपमान लूट रेप और चौतीस हज़ार करोड़ के नुकसान पर भी ये चु भी नहीं कर रहे हे क्योकि सारा किया धरा उन्होंने किया जो मुजफरनगर दंगो के बाद मोदी जी जिनके लाडले थे जो मोदी जी के लाडले थे खेर सभी सेकुलर लोगो से अपील हे की हरियाणा में हुए जुल्मो की कहानी भारत के कोने कोने में पहुँचाय जहा टकलू खेर जैसे लोग इस ज़हरीली सरकार का चरणचुम्बन करके अवार्ड ले रहे हे

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  • February 25, 2016 at 1:12 pm
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    क्या कभी ऐसा हुआ हे भारत में जनता के साथ की एक साथ ही उससे मकान दुकान रोज़गार स्कूल कॉलिज सड़क रेल कार बस एम्बुलेंस पानी सेना का सम्मान सब कुछ एक साथ छीन लिया गया हो ये कारनामा किया भारत की पहली शुद्ध गैर गांधीवादी नेहरूवादी सरकार ने

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  • February 25, 2016 at 9:56 pm
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    publicservices•144• Sikander Hayat•4 hours ago •फॉलो करें
    यह करनामा कांग्रेस की चाल है सिकंदर जी, अगर यकीन ना हो तो न्यूज़ पड लेना, एक्स c. म. भुपेन्दर सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार के उपर रिपोर्ट दर्ज कर लि गयी है, कांग्रेस बहुत गिर चुकी है और बदनाम कर रही है मोदी को…Sikander Hayat•29 secs ago
    नीचे ”पब्लिक सर्विस ” के कॉमेंट का जवाब भाई संसद राजकुमार सैनी ने बड़ी सटीक बात की हे की कोई जाट चाहे वो जिस पार्टी में था चाहे आप में ही क्यों ना था उसने भी आंदोलन किया हे और हमें तो कोई शक ही नहीं हे की कांग्रेस और बीस साल से हरियाणा पर काबिज़ जाट नेताओ ने क्या क्या कुछ नहीं किया होगा ? वैसे ही जेसे अगर सी बी आई जांच हो जाए तो पता चल जाएगा की किसने किस किस नेताओ को क्या क्या लालच देकर मुजफरनगर दंगा कराया था फिर किसने इस दंगे की फसल काटी ? भाई असल बात ये हे की या तो मोदी जी पहले दिन से जाट नेताओ की बात मान लेते या फिर पहले दिन से दंगाईयो को गोली मारते गोली इसलिए नहीं चली की मोदी जी को यु पि में जाट वोट चाहिए मोदी जी की इसी सत्ता की हवस में जनता के खून पसीने के चौतीस हज़ार करोड़ का नुक्सान ( और उससे भी बड़ा अपमान ) हुआ जो ब्याज सहित आपकी हमारी जेब से ही पचास हज़ार क्रोड निकलेंगे यानी 2013 से अब तक भारत की गरीब जनता को मोदी जी लगभग एक लाख करोड़ के आस पास पड़ चुके हे और फिर भी आप उन्हें क्लीन चिट देते हे देते रहिये मगर हरियाणा के पीडितो के आंसू मोदी और भाजपा को बहुत भारी पड़ेंगे इसलिए रात दिन टर्र टर्र करने वाले मोदी टोडीज़ और छी न्यूज़ जैसे मिडिया हरियाणा मुद्दे पर जैन संतो की तरह मुह पर कपडा बाँध कर बैठे हे

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  • February 26, 2016 at 8:25 am
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    मोदी जी की नेक्स्ट भी सत्ता पाने की हवस ने शायद एक बहुत ही बड़ा हादसा करवा दिया हे हम तो दुआ करते हे की कुछ ना हुआ हो मगर रिपोर्ट आ रही हे की \’\’\’ जाट आंदोलन के दौरान मुरथल हाईवे पर महिलाओं के कुछ कपड़े मिले हैं। दबी जुबान कुछ लोगों ने भी माना है कि ये यहां हुई दरिंदगी के ही निशान हैं। बता दें कि यहां करीब दस मीटर एरिया में जगह-जगह महिलाओं की लैगीज, जींस, अंडर गारमेंट्स और टॉप्स फटे पड़े हैं। अलग-अलग दावों की मानें तो कपड़े ज्यादती की शिकार महिलाओं के ही हैं। हालांकि, अभी तक यह कन्फर्म नहीं हुआ है। उधर, पूरे मामले पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाई है। जबकि पुलिस ने आरोपों को नकारा है। इस मामले पर लोगों ने क्या कहा, क्या है पूरा मामला…- आसपास के लोग भी दबी जुबां के साथ महिलाओं के साथ दरिंदगी की बात को स्वीकार रहे हैं।- लेकिन वह कहते हैं की डर के कारण किसी ने शिकायत की हिम्मत नहीं जुटाई।- वे कहते हैं हालात इतने खराब थे कि लोग मारकाट और आगजनी कर रहे थे, पुलिस मौन खड़ी थी।- हमें भी यहां कारोबार करना है इसलिए खुलकर शिकायत नहीं कर सकते। \’\’ आगे आप देखेंगे की मोदी जी के \’\’सिपाही \’\’ इन दरिंदो का वैसा ही बचाव करते फिरेंगे जैसा ये लोग मुजफरनगर के आरोपियों ( रेप के भी ) का करते हे

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  • February 26, 2016 at 12:44 pm
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    उत्तर से बाहर के बहुत से जो लोग सोच रहे होंगे की आखिर ये हरियाणा में इतना बवाल हुआ कैसे ? तो उन्हें बता दू की महान कलाकार विजय राज़ और पंकज त्रिपाठी का एक सीन हे की ” जब खाईएगा कव्वा बिरयानी तो मुह से मोहम्मद रफ़ी का आवाज़ थोड़े ही निकलेगा ” जब मुज्जफनगर बवाल के आरोपियों को मंत्री बनाया जाएगा किसी को जेड प्लस सुरक्षा मिलेगी मोदी जी के मंच से उन्हें सम्मानित किया जाएगा इसके आलावा और बहुत से लोग थे जिनके सामने दंगे भड़काने पर बहुत से लालच लटकाने के आरोप हे तो भाई फिर यही होना था अभी तो आप देखिये की कैसे हरियाणा के आरोपियों को छुड़ाने के लिए क्या क्या किया जाएगा ? जब पड़ोस में जुल्म होता हे और आप चुप रहते हे तो अगला नम्बर आपका ही होता हे मुजफरनगर हरियाणा का पड़ोस ही हे

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  • February 27, 2016 at 9:08 am
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    मुजफरनगर दंगो की आग भड़का कर भाजपा और अमित शाह के बनाय नए वोट बैंक ने हरियाणा में क्या क्या किया रिपोर्ट ” हुआ महिला और उसके परिवारवालों के साथ…
    रोते हुए आपबीती सुनाने वाली महिला दिल्ली की हैं, उनका नाम – बबीता है।
    महिला ने बताया कि उसके पति और भतीजे को लाेहे की रॉड से बेरहमी से पीटा गया।
    उन्होंने कहा- ‘मैंने कार की विंडो बंदकर लॉक लगा दिया। उपद्रवी खिड़की तोड़ने की कोशिश करने लगे।’
    -लॉक लगने से वे खिड़की को नहीं तोड़ पाए। मेरे पति और भतीजे को लहूलुहान कर भाग गए।’उनके जाते ही हम गेहूं के खेत में छुप गए। अचानक उपद्रवी वापस आए और इनोवा में आग लगा दी।’मुरथल थाने में दर्ज करा दी है शिकायत
    – बबीता ने कहा कि जिस तरह से हाईवे पर गुंडों ने मुझे कार से निकालने की कोशिश की, उससे आशंका है कि उन्होंने अन्य महिलाओं के साथ दरिंदगी की होगी।
    उनके पति सतीश का हाथ तोड़ दिया। शरीर पर कई जगह गहरे नीले निशान हैं।
    – वे मुरथल थाना एसएचओ अजय धनखड़ के सामने उपद्रवियों के बर्बर व्यवहार को बताते हुए रो रहे थे।
    एसएचओ अजय धनखड़ के सामने बबीता खूब रोईं। बोलीं- ‘भाई साहब! मैंने महिलाओं का शोर सुना है। चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था। लोगों काे लूटा जा रहा था। किसके साथ क्या हुआ, इसको देखने से पहले सबको अपनी जान बचाने की चिंता हो रही थी।’

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  • February 27, 2016 at 9:09 am
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    मुजफरनगर दंगो के बाद से ही वहा जाट किसानो की आत्महत्या की खबरे आई उससे पहले हमने नहीं सुनी थी कारण ये भी हो सकता हे की सारे मुस्लिम विस्थापित लेबर और स्किल्ड लेबर थे इससे गावो की अर्थवयवस्था को खासा नुक्सान हुआ होगा किसानी में नरेगा के कारण पहले ही लेबर की समस्या बढ़ रही हे वहा के लोग बताते हे की जाट नेताओ को बहुत कुछ आश्वासन देकर दंगे कराय गए थे बाद में सारी दुनिया ने देखा की दंगो के दो दो आरोपी मुजफरनगर से लोकसभा का टिकट चाहते थे उनमे से एक दंगा आरोपी जीता भी और मोदी जी ने मुख़्तार शाहनवाज़ से भी पहले उस आरोपी को मंत्री बनाकर वही हरियाणा हिंसा के बीज बो दिए थे हालांकि हरियाणा हिंसा के सामने तो बाकी सब हिंसा गांधीवाद लग रही हे हमने तो सहारनपुर में सिखो के कुछ करोड़ के नुक्सान पर ही खूब आंसू बहाय थे माफ़िया मांगी थी मुस्लिम नेताओ को खूब भला बुरा कहा था और यहाँ इतनी बड़ी हिंसा के ” शहीदो ” के लिए सरकारी नौकरी और पचास लाख मुआवज़ा माँगा जा रहा हे

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  • February 27, 2016 at 9:48 am
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    अच्छा ये छी न्यूज़ और इसका दलाली का आरोपी संपादक और इसके थर्ड क्लास रिपोटर और एंकर अब कल कई चेनेल हरियाणा में हुई दरिंदगी के सबूत जुटा रहे थे और ये मनहूस लोग मोदी जी के वोट बैंक की चिंता करते हुए गोधरा में भटक रहे थे

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  • February 27, 2016 at 9:50 am
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    रविश कुमार के ब्लॉग पर मोहक भाई से हुआ विमर्श मोहक भाई रोमन में लिखते हे mohak • 21 hours ago
    koi bachaav nahi…,anil vij,minister ne iska kada sangyaan liya hai….stithi aur na bigdey ,isliye talkh tippni na karke haryana sarkaar ka sakhti karne per dhyaan hona chahiye….agar ye jat aandolan kaarion ne kiya hai to ye tatha kathit khaap k bujurg gundon ke apne bacchhon ko diye gaye sanskaar hi saamne aa rahe hain,,,jo harrami gundey khud to haryana ke gaavon me subah se raat taash peet te rehtey hain aur apni biwi,beti bahu se din rat ghar khet me kamar tod mehnat karwatey hain …ye unhi napunsako ka kaam hai…35 biradarion ne jaat biradari ka bahishkaar kar diya hai…yahan aaj patrakaaron ki badi bhumika hai ..wo sach dikhaayen kaun sahi hai kaun galat..waise jaat bjp ke paramparagat supporters nahi hain,80% ne bjp ko vote nahi diya

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  • February 27, 2016 at 9:51 am
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    सिकंदर हयात mohak • 18 hours ago
    मोहक भाई सही कहा सही कहा की ये लोग भाजपा के वोटर नहीं थे मगर मुजफरनगर में इन्होने भाजपा का और भाजपा ने इनका जमकर इस्तमाल किया में तो नहीं लेकिन मुजफरनगर के लोकल लोग कहते हे की भाजपा ने इनके नेताओ को बहुत कुछ नवाज़ने का आश्वासन देकर दंगे कराय मुस्लिम नेता हमेशा की तरह मुर्ख और बदमिजाज बने रहे (हालांकि आम मुसलमानो ने कही जुल्म नहीं किये ) खेर दंगे हुए भाजपा की मुराद पूरी हुई धुर्वीकरण हुआ और यु पि से उमीद से साठ सीटें अधिक लेकर मोदी पि एम बन गए एक दंगा आरोपी को केंद्रीय मंत्री तक बना दिया गया वो भी पुराने वफादार मुख़्तार शाहनवाज़ से भी ऊपर और पहले उसके बाद ही तय हो गया की मोदी यु पि चुनाव में आगे भी धुर्वीकरण चाहते हे जाट नेताओ ने शायद ये बात ताड़ ली और पूरी तरह कंट्रोल से बाहर हो गए शायद इसी से हरियाणा का ये हश्र हुआ इसके लिए जिम्मेदार कोई हे तो वो खटटर नहीं मोदी जी ही हे बाकी मिडिया मोदी जी का कितना बड़ा आज्ञाकारी हे सब जानते हे इसलिए इतने भारी नुक्सान और इंसानियत के इतने तिरस्कार पर भी चुप्पी छाई हे बाकी कांग्रेस तो हे ही सारी मुसीबतो की जड़ रविश जी ने भी चुप्पी ओढ़ राखी हे शायद वो भी संघियो बज़रंगियो की रात दिन की धमकियों में आ गए हे

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  • February 27, 2016 at 9:52 am
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    mohak 17 hours ago
    रविश जी ने भी चुप्पी ओढ़ राखी हे ,ravish koi bhagwaan hain,ya aap kamjor hain jo dusrey ka saath chahtey hain….apka vishleshan atishayokti adhik jaan padta hai…UP men aur bhi jaatiyan hain,jaat to kewal 3-4 zilon me significant hain…ye modi ki boti boti karney ka bayaan dene wala kaun tha?action ki reaction hui vote ki chot se…kewal western UP me…banaras ka mahaul modi ji k ladne se bana…kejriwaal k aane se aur dhruvikaran ho gaya….jaat cm na honey k karan kuchh gunda khaap varg bokhlaa gaya…badhawaas ho kar unhoney haryana ki honour killing kar di….rohtak jhajhar ke bashindo k paas 4 jobs jeb me hoti thi,congress k time me, ab sookha pad gaya,bokhlaa gaye sab…jab billi ko kamre me band kar do,usko rasta nahi milega to wo doosre ka muh nochne lagti hai …kuchh suvidhabhogi logo ko asuvidha bardasht nahi….सिकंदर हयात mohak • 14 hours ago
    रविश जी के हम भी बहुत बड़े फैन हे मगर हम कोई मोदी टोडीज़ नहीं हे हम किसी के गुलाम नहीं हे ना होंगे ऐसे भयानक समय में रवीश जी हरियाणा पर नहीं एंटीना पर लिखे हमें नहीं भाया और भाई अपने कोर वोट के साथ साथ दूसरा वोट भी या किसी वर्ग के एकमुश्त एकतरफा वोट जो पार्टी हासिल कर लेती हे वाही जीत जाती हे जाट तो फिर भी यु पि में 11 % हे जबकि सिर्फ 2 % ब्राह्मणो के कुछ ही वोट खिंच कर ही बसपा की सरकार बन गयी थी इसी तरह यादवो के आलावा एकमुश्त मुस्लिम वोट मिलते ही सपा की सरकार बन गयी थी भाजपा का अपना सवर्ण और शहरी वोट तो था ही साथ ही मुजफरनगर की मदद से जाट वोट एकमुश्त मिलते ही भाजपा को 73 सीटें मिल गयी वाही कारनामा ये विधानसभा में दोहराना चाहते थे इसलिए हरियाणा में उपद्रवियों को दामादों वाला ट्रीटमेंट दिया नतीजा इतनी बड़ी तबाही और दिल दहला देने वाले कारनामे अल्लाह माफ़ करे मगर हमने इसकी चेतावनी मुजफरनगर के बाद ही दे दी थी में मुजफरनगर का ही मूल निवासी हु

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