मोदी खुशनसीब या बदनसीब प्रधानमंत्री !!!

Modi

प्रस्तुति – अनवर शमीम ( संपादक – कसौटी जदीद )

प्रधानमंत्री ने आज दिल्ली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा के मेरा नसीब आप लोगों के काम आए इससे बड़ा सौभाग्य मेरे लिए और कुछ नहीं हाे सकता है। उनका कहना था कि यदि उनके नसीब से पेट्रोल और डीजल के दाम कम हुए तो इसमें क्या गलत है. उन्हों ने कहा के आप को नसीब या बदनसीब प्रधानमंत्री चाहिए – इस खबर के बाद फेसबुक पर पोस्ट की भरमार शुरू हो गई . कुछ लोगो के पोस्ट आप सब के लिए पेश है और आप फैसला करे के मोदी खुशनसीब है या बदनसीब प्रधानमंत्री .

प्रधानमंत्री ने आज चुनावी सभा में कहा की उनके नसीब से पेट्रोल सस्ता हुआ है। उन्होंने आगे कहा की दिल्ली वालो को नसीब वाला चाहिए या बदनसीब। वाह मोदी जी वाह यदि ये बात है तो आपके शपथ लेते ही ट्रैन एक्सीडेंट हुआ उस एक्सीडेंट में ५० से ज्यादा लोग मारे गए और इन ८ माह में रेल दुर्घटना में अब तक ३०० से ज्यादा लोग मारे गए है। आपके नसीब से ३९ भारतीय अभी तक वापस नहीं आये है इराक से। आपके नसीब से सीमा पर १५० से ज्यादा जवान शहीद हो चुके है। आपके नसीब से चीन ३० किलोमीटर भारतीय सीमा में घूस आया। आपके नसीब से देश में धार्मिक विभाजन पर एक के बाद एक साम्प्रदायिक बयान आये है। आपके नसीब से ईमानदार अफसर संजीव चतुर्वेदी को एम्स से बाहर कर दिया। आपके नसीब से जम्मू कश्मीर में अभी तक की भयानक बाढ़ आई जिसमे सेकड़ो लोग मारे गए और हज़ारो लोग हताहत हुए है। आपके इतने अच्छे नसीब से महाराष्ट्र और गुजरात में इन ८ महीनो में २०० से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके है। आपके नसीब से महंगाई बिलकुल भी कम नहीं हुई है। आपके नसीब से लाखो किसानो की फसले ज्यादा वर्षा और सूखे से बर्बाद हुई है। आपका नसीब इतना शानदार है की पुरे देश में बलत्कार की १०००० से ज्यादा लडकिया / महिलाये शिकार हो चुकी है। क्या क्या गिनाउ साहेब आपके नसीब के बारे में। यदि आप इतने नसीब वाले है तो उन बदनसीबों का क्या जो आपके आठ महीनो के कार्यकाल में दुखी परेशान हुए है। इसकी जिम्मेदारी भी आपको लेना पड़ेगी यदि पेट्रोल सस्ता जो की इंटरनेशनल कारणों से हुआ है और चुनावी क्रेडिट आप लेना चाहते है। आज गोपीनाथ मुंडे का परिवार क्या सोच रहा होगा की ये मोदी जी का नसीब था जो मंत्री पद की शपथ लेते ही सड़क दुर्घटना हो गयी। मुंडे परिवार से पूछिये की आप उनके लिए नसीब वाले रहे है या बदनसीब प्रधानमंत्री. (उमेश दिवेदी की वाल से )

नसीब बनाम बदनसीब? … पहले अंधविश्वास, फिर अवैज्ञानिक नजरिया और अब भाग्यवाद भी? … वाह, क्या रहनुमाई है!( ( ओम थानवी )

इस देश में एक औरत है जो है तो ज़िंदा लेकिन उसके अस्तित्व को नकारना कई लोगों के लिए ज़रूरी है। खासतौर पर इस देश के पत्रकारों और उन लोगों के लिए ऐसा करना ज़रूरी है जिन्हें सरकार से सीधे लेना-देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नसीब भले ही कितना अच्छा हो मगर उनकी पत्नी जसोदाबेन का नसीब उन जैसा नहीं है। बकौल मोदी जी उनके नसीब से डीज़ल के दाम गिर गए पर इसी खुशनसीबी का फायदा जसोदाबेन को नहीं मिल सका। जसोदाबेन ने एक आरटीआई के जरिए यह जानना चाहा था कि उन्हें प्रशासन की ओर से जो सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है वो किस हैसियत से दी जा रही है.. क्या प्रधानमंत्री की पत्नी होने के नाते वो इस सुरक्षा की हकदार हैं या किसी अन्य रूप में.. अगर पीएम की पत्नी होने की वजह से उन्हें सुरक्षा दी जा रही है तो फिर वो ऐसी और किन-किन सुविधाओं की हकदार हैं? प्रशासन ने जब 25 नवंबर 2014 को उन्हें जवाब देने से इनकार कर दिया तो जसोदा बेन ने इसके खिलाफ अपील दायर की।( आधी रात का खब्त की वाल से )

मोदी के नसीब से इस मुल्क में अंबानी-अडाणी पल रहे हैं तो स्मृति-अमित शाह जैसे घाघ लोगों की भी चांदी है। वैसे तेल के दाम गिरने के पीछे आपकी खुशनसीबी नहीं साहेब.. यूरोप और तेल उत्पादक देशों के बीच का समीकरण है.. मगर ठीक है.. चुनावी भाषणों में ही लफ्फाज़ी नहीं होगी तो कब होगी..( आधी रात का खब्त की वाल से )

नसीब वाली बात सुनकर तो लग रहा है कि अब नेताओं की कुंडली देखकर वोट देने पड़ेंगे। वैसे मानव संसाधन विकास मंत्री भी एक दिन हाथ फैलाकर अपना नसीब दिखाती मिली थीं। उसकी तस्वीर भी वायरल हो गई थी। भक्त लोग खामख्वाह ही नाराज़ होते थे जब हम कहते थे कि भई ये काम-वाम नहीं करता..सब इसके नसीब का खेल है!!( आधी रात का खब्त की वाल से )

साहेब कह रहे हैं मेरे भाग्य से कच्चे तेल की कीमतें गिरी हैं . मैं भाग्यवान हूँ इसलिए मुझे वोट दो . साहेब जी , कच्चे तेल के भाव क्या सिर्फ भारत के लिए गिरे हैं , बाक़ी दुनिया के लिए नहीं? किसका बेवकूफ बना रहे हो !कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय बाजार की कुछ नालेज है आपको या नहीं ? या ऎसी ही बकैती किए जा रहे हैं .
वैसे भी तेल की गिरी हुई कीमतों का क्या फ़ायदा पहुँचाया है आपने जनता को जो आपको वोट दिया जाए ?(मीनू जैन की वाल से )

साहेब जी जनता को नसीब वाला PM नहीं चाहिए
ऐसा PM चाहिए जिससे जनता का नसीब अच्छा हो.
देश को भाग्य भरोसे ही चलाना है तो फ़िर चुनाव करवाने की जरूरत ही नही |कुंडली सबसे अच्छी हो उसे ही प्रधान सेवक और मुख्यमंत्री बना दिया जाए|
मोदी जी की बेरोजगारी, मंहगाई, कालाध, भ्रष्टाचार, लव जेहाद, घर वापसी पर खामोशी के बावजूद अगर देश चल रहा है तो ये भगवान का आटोपायलटमोड है ।( अब्दुल खान )

क्या दो पैसे का प्रधानमंत्री है खुद को नसीब वाला बोल पेट्रोल दाम कम होने का श्रेय ले दिल्ली में वोट मांग रहे है। तो फिर जरूर कश्मीर आपदा के साथ ही देश के अन्य हिस्सों में हुए प्राकृतिक आपदा और देश में हुए हजारों दंगे भी इनके नसीब के कारण हुआ होगा!(विक्रम सिंह चौहान )

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7 thoughts on “मोदी खुशनसीब या बदनसीब प्रधानमंत्री !!!

  • February 2, 2015 at 8:42 am
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    अगर पेट्रोल और डीजल के दाम काम होने से मोदी जी खुसनसीब है तो फिर सिर्फ मोदी ही क्यों दुनिया के सभी मुल्क के शासक और राष्ट्रपति अपने अपने मुल्क के लिए खुशनसीब है . आप नसीब के सहारे नहीं चल रहे है बल्कि कांग्रेस के द्वारा बनाये गए पालिसी को ही आगे बड़ा रहे है नहीं तो बताये के पिछले ९ महीने में आप ने कौन सा काम अपने टैलेंट पे किया है

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  • February 2, 2015 at 9:05 am
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    मोदीजी वाकई नसीबवाले हैं क्योंकि उनके नसीब से विश्व के 200 देशों को तेल 115 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 47 डॉलर प्रति बैरल में मिलने लगा. और भारत की जनता इसलिये बदनसीब है क्योंकि वो आज भी एक लीटर पेट्रोल के लिए 65 रूपये चुका रही है. हम तो उस पाकिस्तान से भी बदनसीब हैं जहाँ पेट्रोल 35 रुपया लीटर है.

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    • February 2, 2015 at 1:34 pm
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      पाकिस्तान मे उन्के देश का रुपया १०१ रुपये मे एक् अमेरिकेी दालर मिलता है !

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  • February 2, 2015 at 5:43 pm
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    आपने कभी एसे नौकर को देखा है जो 1000000 रूका एक सूट पहनता है लेकिन उसके मालिकों परअंतिम संस्कार के लिए कपड़े का भी एकटुकड़ा भी नहीं हैमोदी जी अकेली भाजपा को 283 सीटें दी हैजनता ने ! सरकार बने 9 महीने होने को है !गौ ह्त्या रोकना तो दूर आपसे तो बजट मेकत्लखानो को दी जाने वाली सबसिडी भी बंदनहीं हुई !!जब से आपने सत्ता संभाली है एक ही चीज देखनेको मिल रही है चीन जाकरचीनी कंपनियो को बुलाओ ,जापान जाकरजापानी कंपनियो को बुलाओ ,और अगले महीनेअमेरिका जाकर अमेरिकी कंपनियो को बुलाओ !एफ़डीआई के लिए नियम और सरल बनाओ इधर चीनसे विदेशी निवेश का समझोता होता है और उधरवो 1000 सैनिक भारत की सीमा मे निवेश करदेता है ! देश का विकास अगर चीन ,जापान औरअमेरिका करेंगे तो आप क्या करेंगे ??विदेशी कंपनियो के लिए लाल कालीन बिछाने मेआप मनमोहन सिंह का रिकार्ड तोड़ते नजर आ रहेहै !!

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    • February 2, 2015 at 8:00 pm
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      जब देश मे नवजवानो को रोजगार देने के लिये रुपया और तक्नेीकि नहेी है तब विदेश से उस्केी व्य्वस्था कर्वानेी होगेी !

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  • February 5, 2015 at 1:48 am
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    मोदी जी नसीब जैसी कोई चीज नहीं होती । देश को नसीब और भाग्य पर नचाने से अच्छा है कि बुनियादी स्तर पर सुधार किया जाए । गरीब और मजदूर सबसे पहले दो वक्त की रोटी चाहता है । पैट्रोल और डीजल वैसे भी जितना सस्ता होना चाहिए था उतना तो हुआ नहीं ।
    इन सब बातों से भी बढकर देश के लोगों को राजनीतिक तौर पर जागरूक करने की बहुत आवश्यकता है नहीं तो न जाने कब तक ये लोग देश को बर्बाद को बर्बाद करते रहेंगे ?

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  • February 13, 2015 at 10:03 am
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    आज कल तक मोदी जी के बड़े सपोटर रहे वेद परताप वैदिक जी ने भी कह दिया हे की मोदी जी एक साधारण नेता हे जो असल में मुक्क़दर के सिकंदर हे बस . वो लिखते हे की ” इसी प्रकार गुजरात में भेजे जाने के पहले नरेंद्र मोदी को कौन जानता था? सांसद होना तो दूर की बात है, वे कभी विधायक या पार्षद भी नहीं रहे। गुजरात के मुख्यमंत्री केशूभाई को अचानक हटाना पड़ा। उनकी जगह नरेंद्र मोदी को अटलजी और आडवाणीजी ने हेलिकाॅप्टर से गांधी नगर ले जाकर बिठा दिया। 2002 के गोधरा कांड ने उन्हें अचानक हिंदू हृदय-सम्राट बना दिया। वरना क्या पता, अपने पहले चुनाव में ही मोदी ढेर हो जाते और फिर लौटकर पार्टी के दिल्ली दफ्तर में पहले की तरह मौन सेवा करने लगते। जैसे राजीव गांधी संयोगवश प्रधानमंत्री बन गए थे, वैसे ही संयोगवश नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए।यह संयोग बढ़ता गया और वे 2014 में प्रधानमंत्री बन गए। लालकृष्ण आडवाणी के मुंह का ग्रास छीनकर मोदी के मुंह में रख दिया गया। देश की जनता ने मोदी को इसलिए प्रधानमंत्री नहीं बनाया कि वे उग्र हिंदुत्व के प्रतीक बन गए थे, इसीलिए भी नहीं बनाया कि उन्होंने गुजरात में कोई विश्व-विश्रुत चमत्कार कर दिखाया था और इसलिए भी नहीं बनाया कि उनके पास विकास का कोई अद्‌भुत माॅडल था। इसके अलावा वे कभी अपने राजनीतिक या आर्थिक चिंतन के लिए भी नहीं जाने गए। उन्हें तो जनता ने बहुत बाद में चुना।
    उन्हें चुनाव के पहले ही प्रधानमंत्री बना दिया गया था, सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने ” यही बात हमने भी सौ बार दोहराई थी की मोदी जी ने गुजरात में कोई चमत्कार नहीं किया गुजरात हमशा से ही अमीर था अमीर का और अमीर होना कोई चमत्कार या बड़ी बात नहीं हे

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