मोदी के ब्रांड अंबेसडर ने ही मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया !

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जनता ,नेता ,मंत्री दादरी के अखलाख को भूल गई लेकिन शहरुख याद हैं। सरकारें सुनपेड में दो दलित बच्चो को जिन्दा जलाने की घटना को भी भूल गई लेकिन आमिर खान पर सर फुट्टवल के लिये तैयार हैं। दादरी में अखलाख का परिवार अब क्या कर रहा है या फिर फरीदाबाद के सुनपेड गांव में उन दलित मां बाप की क्या हालत है जिनके दोनों बच्चे जिन्दा जला दिये गये, कोई नही जानता । लेकिन शहरुख की अगली फिल्म दिलवाले है। और आमिर खान की अगली फिल्म दंगल है। और इसकी जानकारी हर उस शख्स को है, जो मीडिया और सोशल मीडिया पर सहिष्णुता और असहिष्णुता की जुबानी जंग लड रहे हैं। लेकिन यह लोग अखलाख और सुनपेड गांव के दर्द को नहीं जानते। तो देश का दर्द यही है । शाहरुख और आमिर खान अपने हुनर और तकनीक के आसरे बाजार में बदलते देश में जितना हर घंटे कमा लेते है उतनी कमाई साल भर में भी अखलाख के परिवार और सुनपेड गांव के जीतेन्द्र कुमार की नहीं है। और कोई नहीं जानता कि अखलाख के परिवार का अपने ही गांव में जीना कितना मुहाल है और जीतेन्द्र कुमार को अब कोई सुरक्षा नहीं है जिसके आसरे वह स्वतंत्र होकर जिन्दगी जीता नजर आये।

लेकिन आमिर खान के घर के बाहर सुरक्षा पुख्ता है। यानी रईसों की जमात की प्रतिक्रिया पर क्या सड़क क्या संसद हर कोई प्रतिक्रिया देने को तैयार है लेकिन सामाजिक टकराव के दायरे में अगर देश में हर दिन एक हजार से ज्यादा परिवार अपने परिजनों को खो रहे है। और नेता मंत्री तो दूर पुलिस थाने तक हरकत में नहीं आ रहे है तो सवाल सीधा है । सवाल है कि क्या सत्ता के लिये देश की वह जनशक्ति कोई मायने नहीं रखती जो चकाचौंध भारत से दूर दो जून की रोटी के लिये संघर्ष कर रही है। इसीलिये जो आवाज विरोध या समर्थन की उठ रही है वह उसी असहिष्णुता के सवाल को कहीं ज्यादा पैना बना रही है, जो गरीबो को रोटी नहीं दे सकती और रईसों को खुलापन। असल में आर्थिक सुधार और बाजार अर्थव्यवस्था के रास्ते चलने के बाद बीते 25 बरस का सच यही है कि पूंजी ने देश की सीमा मिटाई है। पूंजी ने अपनी दुनिया बनायी है । और मनमोहन सिंह से लेकर नरेन्द्र मोदी तक उन्हीं गलियों में भारत का विकास खोज रहे है जो चकाचौंध से सराबोर है । इसीलिये सत्ता की महत्ता हथेलियो पर देश को चलाते 8 हजार परिवारो पर जा टिकी है, जिनके पास देश का 78 फीसदी संसाधन है। देश की नीतियां सिर्फ 12 करोड़ उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर बनायी जा रही हैं। यानी देश में असहिष्णुता इस बात को लेकर नहीं है कि असमानता की लकीर मोटी होती जा रही है। कानून व्यवस्था सिर्फ ताकतवरों की सुरक्षा में खप रही है । किसान को राहत नहीं मिली। मजदूर के हाथ से रोजगार छिन गया। महंगाई ने जमाखोरों-कालाबारियो के पौ बारह कर दिये। यह सोचने की बात है कि अखलाख के परिवार की त्रासदी या सुनपेड में दलित का दर्द शाहरुख खान की आने वाली फिल्म दिलवाले या आमिर की फिल्म दंगल तले गुम हो चुकी होगी। तो मसला सिर्फ फिल्म का नही है सिस्टम और सरकारें भी कैसे किसी फिल्म की तर्ज पर काम करने लगी हैं महत्वपूर्ण यह भी है।

सरकारों के ब्रांड अंबेसडर कौन है और देश के आदर्श कौन हो जायेंगे। याद कीजिये मोदी प्रधानमंत्री बने तो पीएमओ हो या इंडियागेट दोनो जगहों पर आमिर खान को प्रधानमंत्री मोदी ने वक्त दिया । महत्ता दी। कभी कोई गरीब किसान मजदूर पीएमओ तक नहीं पहुंच पाता लेकिन आमिर खान के लिये पीएमओ का दरवाजा भी खुल जाता है और प्रधानमंत्री मोदी के पास मिलने का वक्त भी निकल आता है । लेकिन आमिर खान ने कुछ इस तरह से प्रधानमंत्री मोदी के दौर को ही कटघरे में खडा कर दिया जो बीजेपी पचा नही पा रही है और मोदी सरकार निगल नहीं पा रही है।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी और मोदी सरकार के मंत्री भी जिस तेजी से निकल कर आमिर खान को खारिज करने आये उतनी तेजी कभी किसी असहिष्णु होते नेता मंत्री के बयान पर नहीं दिखायी दी। ना ही अखलाख की हत्या पर कोई इतनी तेजी से जागा। तो क्या देश जुबानी जंग में जा उलझा है या फिर विकास के उस चकाचौंध में उलझा है जहां मान लिया गया है कि सत्ता के ब्रांड अंबेसडर रईस ही होते हैं। सत्ता रईसों के चोचलों से ही घबराती है। रईसों के साम्राज्य में कोई सत्ता सेंध नहीं लगा सकती । इसीलिये अर्से बाद संसद भी उसी तर्ज पर जाग रही है जिसमें असहिष्णुता के सवाल पर नोटिस देकर विपक्ष दो दिन बाद से शुरु हो रहे संसद के तत्कालीन सत्र में बहस चाहता है। यानी सवाल वही है कि असहिष्णुता के सामने अब हर सवाल छोटा है। चाहे वह महंगी होती दाल का हो । या फिर आईएस के संकट का । बढ़ती बेरोजगारी का है या फिर नेपाल में चीन की शिरकत का । यकीनन दिल किसी का नहीं मानेगा कि भारत में सत्ता बदलने के बाद सत्ता की असहिष्णुता इतनी बढ़ चुकी है कि देश में रहे कि ना रहे यह सवाल हर जहन में उठने लगा है। लेकिन जब देश के हालात को सच की जमीन पर परखे तो दिल यह जरुर मानेगा कि देश गरीब और रईसो में बंटा हुआ है । गरीब नागरिक वह है जो सत्ता के पैकेज पर निर्भर है और रईस नागरिक वह है जिसपर सरकार की साख जा टिकी है और उसी के लिये विकास का टंटा हर सत्ता चकाचौंध के साथ बनाने में व्यस्त है । इसलिये देश के हालात को लेकर जब देश का गरीब सत्ता से कोई सवाल करता है तो वह किसी के कान तक नहीं पहुंचता लेकिन जैसे ही चकाचौंध में खोया रईस सत्ता पर सवाल दागता है तो सरकार में बेचैनी बढ़ जाती है । ध्यान दें तो मोदी सरकार के ब्रांड अंबेसडर वही चेहरे बने जिनमें से अधिकतर की जिन्दगी में एक पांव देश में तो दूसरा पांव विदेश में ही रहता है । और संयोग से आमिर खान को भी मोदी सरकार का ब्रांड अंबेसडर बनने का मौका भी मिला और इंडिया गेट पर प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के साथ आमिर खान की गुफ्तगु हर किसी ने देखी समझी भी । तो क्या मोदी सरकार का दिल इसीलिये नहीं मान रहा है जिन्हे अपना बनाया वही पराये हो गये । मगर आखिरी सवाल यही है कि रास्ता है किधर और हालात लगातार बिगड़ क्यों रहे है । क्या देश उन परिस्थितियो के लिये तैयार नहीं है जहां मीडिया बिजनेस बन कर देश को ही ललकारते हुये नजर आये। और सोशल मीडिया कही ज्यादा प्रतिक्रियावादी हो चला है, जहां हर हाथ में खुद को राष्ट्रीय क्षितिज पर लाने का हथियार है। और हर रास्ता चुनावी जीत-हार पर जा टिका है । जहां मान लिया जा रहा है कि जुनावी जीत सत्ता को संविधान से परे समूची ताकत दे देता है । यानी तीसरी दुनिया के भारत सरीखे देश को एक साथ दो जून की रोटी से भी जूझना है और चंद लोगो के खुलेपन की सोच से भी।

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6 thoughts on “मोदी के ब्रांड अंबेसडर ने ही मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया !

  • November 25, 2015 at 11:42 pm
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    अब देखिये कांग्रेस शासित राज्य में ही बिना किसी डर के ” चूज़ो ” ने राहुल गांधी की झंड कर दी किसी कोई कोई डर कोई खौफ नहीं कोई मसला नहीं यही तो हे नेहरू जी की विरासत वो खुद लोगो से कहते थे की बेखौफ मेरी आलोचना करो तुम्हारा अधिकार बल्कि एक बार नेहरू जी ने खुद छदम नाम से खुद के खिलाफ लेख लिखा था ये होती हे सहिष्णुता जबकि इधर मोदी टोडीज़ बज़रंगियो संघियो के कारनामे देखिये इनका हिस्टीरिया देखिये बड़े तो क्या छोटे नेता की भी बुराई कोई ”चूज़े ” करने की हिम्मत नहीं कर सकते हे हाथ के हाथ इन चूज़ो को फ्राई कर दिया जाता

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  • November 26, 2015 at 9:46 am
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    दिल्ली, उसके बाद बिहार, ये भक्त लोग चाहे जितनी गाली गलौच या देश-भक्ति और गद्दारी के प्रमाण पत्र बाँट ले, लेकिन ये जल्दी ही सत्ता से बाहर होने वाले हैं. और उसके बाद जब ये आत्म-मंथन करें, तो इस बात का ध्यान रखना, कि सरकार को उखाड़ फैंकने मे इन भक्तो और योगियो का योगदान है. अब भले ही, कोई ओवैसी, या किसी इस्लामी कट्टरपंथ का हवाला देके, इस सच से इनकार करना चाहे, कि ये हुड़दंगी, बजरंगी सर पे नाचने लगे हैं, और सोशल मीडिया मे ये कितना भी छा जाओ, समझदार जनता तुमसे दुखी हो गयी है.

    मोदी,, हिंदुत्व का नही, बल्कि विकास का झाँसा देके सत्ता मे काबिज हुआ था. धोखा दिया, लेकिन चिंता मत करो, तुम्हे सत्ता स्थाई तौर पे नही दी, साढ़े तीन साल बाद आना. हिंदुत्ववादियो, तुम्हारी असभ्यता, अभद्रता खुल के सामने आ गयी है.

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  • November 26, 2015 at 11:27 am
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    क्या नॉनसेंस बाते करते हे ये मोदी टोडीज़ अच्छा कल से छी न्यूज़ और उसका दलाली मे जेल रिटर्न संपादक भी कश्मीरी पंडित कश्मीरी पंडित कश्मीरी पण्डित बके जा रहा हे बीच बीच में अफ़ीमचियो की तरह आमिर और साहित्यकारों को भला बुरा कह रहा हे हे नहीं ये लोग पुरे जोकर ? कश्मीरी पंडितो के साथ जो हुआ बहुत बुरा हुआ सही हे कोई शक नहीं लेकिन उसमे तब के पी एम वि पि सिंह का हाथ या कोई प्रोत्साहन तो कतई नहीं था उसमे तब के फारुख अब्दुल का हाथ तो नहीं था उसमे हाथ था पाकिस्तान का और अफ़ग़ान जंग में भेजे गए अंधाधुंध अमेरिकी पेसो और हथियारों जिनसे कश्मीरी में हिंसा शुरू हुई थी ये बात थी लेकिन अब जो घटनाय देश में हो रही हे उसमे सत्तधारी लोगो का ही तो डाइरेक्ट इनडाइरेक्ट हाथ हाथ नहीं तो प्रोत्साहन हे ही इसलिए इस बार इतना कड़ा विरोध सोच समझ सजगता उदारता इंसानियत तो रखने वाले लोगो ने किया हे

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  • November 26, 2015 at 11:41 am
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    जिस तरह इन्सान के शरीर का कोई अंग अगर ख़राब हो जाये तो भी वह जीने की आस नहीं छोड़ता ठीक उसी तरह अगर देश में कुछ वारदात हो जाती है तो देश छोड़ने की बात नहीं करना चाहिए! इस देश पर सबका बराबर का हक है! बुरा वक्त अगर आता है तो अच्छा वक्त भी आता है! आज देखो हम अकेले नहीं हैं हमारे साथ पूरा हिंदुस्तान खड़ा है और हमारे लिए करीब सारे हिन्दू भाइयों ने आवाज़ बुलंद की है, और जो भी गलत हुआ है उसे गलत ही कहा है! विश्वास बनाये रखें कुछ लोगो की वजा से देश शर्मसार हुवा है कसम है हिंदुस्तान की कुछ दिनों में ये लोग गुमनामी की ज़िन्दगी जियेंगे न इन्हें कोई पूछेगा और ना ही कोई हिन्दुस्तानी इन्हें याद करेगा जो लोग देश को तोडना चाहते हैं देश खुद उनको इतना तोड़ देगा की कोई FEVIQUICK भी उन्हें नहीं जोड़ पायेगा जय हिन्द ( जय हिन्दुस्तानी )

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    • November 26, 2015 at 8:45 pm
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      प्रीत सिंह चिंता न करे सब ठीक हे जो हो रहा हे अच्छा हो रहा हे बस पूरी ताकत से मोदी सरकार को हटाने में हमारा साथ दीजिये किसी झांसे में मत आइये मोदी जी के पास देश के लिए कुछ नहीं हे सिर्फ ये हे की मोदी जी देश विदेश में हिंदी में बोलते हे तो मिडिया उन्हें बड़े शोक से दिखाता हे क्योकि हिंदी एक अरब भारतीयों दक्षिण एशियाइयो को समझ आती हे तो बस लगता हे की वो कोई नयी बात कर रहे हे बाकी कुछ नहीं हे मोदी के जाने से हिन्दू काटरपंथ को बेहद गहरा झटका लगेगा (इसलिए ये लोग इस कदर आसमान सर पर उठाय हुए हे ) हिन्दू कटरपंथ मोदी के जाने के बाद कोमा में चला जाएगा हम आपको पूरा विशवास दिलाते हे उसके बाद भी चेन नहीं लेंगे बल्कि फिर पूरी ताकत ( पहले से भी ज़्यादा ) से मुस्लिम काटरपंथ के खिलाफ भी जंग छेड़ी जायेगी जब ऐसा होगा तो हिन्दू मुस्लिम एकता भी होगी कश्मीर भी सुलझेगा भारत पाक दोस्ती और महासंघ भी बनेगा और पुरे इलाके में खुशाली आएगी बस फिलहाल जो हो रहा हे उससे मत घबराइये मोदी हटाओ मुहीम में साथ दीजिये ” दूर से देखो न धधकते हुए शोलो को जलाल इसी दोजख के किसी कोने में जन्नत होगी ” कैफ़ी आज़मी

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  • November 26, 2015 at 11:43 am
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    मेरे बहुत सारे दोस्त पटना, बिहार में रहते है उनका कहना है की बिहार में जंगलराज फिर से सुरु हो गया है। अब यहाँ रहना सुरक्षित नही है। बिहार से बाहर कहीं जा कर रहते है ।
    इसका मतलब यह थोरे ही हो गया की यह सब लोग आमिर और शाहरुख खान हो गये। बोलने का भाव और मतलब समझना चाहिए। पत्रकारिता में लोग अब अपने अपने मतलब से घटना को तोड़ मरोड़ कर परोस रहे है।
    पत्रकारिता भी अब दलों में बाटता जा रहा है।

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