मैं एक भारतीय मुसलमान हूँ !

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मैं एक भारतीय मुसलमान हूँ , इसी भारतीय समाज में हूँ , जागरूक हूँ , व्यवहारिक हूँ , समाज में हो रहे बदलाव को देख रहा हूँ समझ रहा हूँ , मैं भी इस देश में मुसलमानों की बदहाली का गवाह हूँ , मैं देखता हूँ कि मेरे आसपास कैसे हजारों परिवार दो वक्त की रोटी के लिए जद्दोजहद करते हैं , कोई पंचर बनाता है तो कोई कबाड़ खरीद फरोख्त करता है तो कोई रिक्शा चलाता है पर कोई शिक्षा के लिए नहीं जाता दिखता क्युँकि घर का चुल्हा जलना जीवन के लिए कहीं ज़रूरी है , और धर्म के लोग भी यह सब करते हैं पर मै जो देखता हूँ वह महसूस कर रहा हूँ कि आजादी के 68 वर्षों में मुसलमानों के साथ न्याय नहीं हुआ और यह सच है ।देश के आजादी के समय 22% नौकरी में रहने वाला एक समाज बच्चों को दो वक्त की रोटी देने और सिस्टम के भेदभाव में ऐसा उलझा कि 1•5% भी नौकरियों में नहीं रहा ,हम देख रहे हैं कि कैसे सच्चर कमेटी , रंगनाथ मिश्र कमेटी , कुंडू कमेटी , श्रीकृष्ण कमेटी बनाई जाती है और इनकी रिपोर्ट कूड़े के ढेर में फेंक दी जाती है, हम सब देख रहे हैं समझ रहे हैं महसूस कर रहे हैं और हमें भी दुख है कि हम लाचार हैं , हमारा कोई नेता आजतक ना हुआ यह टीस भी है ।

इसलिए मुझे भी असदुद्दीन ओवैसी की बातें अच्छी लगती हैं , मुझे भी आराम मिलता है जब ओवैसी हमारे ज़ख्मों पर अपने दमदार तर्कों से मरहम लगाते हैं , मेरा भी दिल कहता है कि मैं ओवैसी के साथ चलूँ क्योंकि यह एक बंदा है जो मुसलमानों के हक की बात करता है चाहे उसपर कितने ही आरोप क्युँ ना हों , मेरा दिल भी सोचता है कि भारत की राजनीति ऐसे ही तो होती है कि रोज एक समुदाय को गलियाते रहो और चर्चा में आते रहो फिर सत्ता हथिया लो और इस देश के सारे सिस्टम को अपने लिए बदल लो तो यही तो ओवैसी भी करते हैं ।मुझे भी वह आकर्षित करते हैं जब संसद में एक अकेले अपने तथ्यों और तर्कों से सबको चुप करा देते हैं , आखिरकार किसी भी कौम का नेता कैसा होना चाहिए ? बिल्कुल असदुद्दीन ओवैसी जैसा ही होना चाहिए जिसमें एक उम्मीद तो दिखती है वर्ना तो ऐसे भी नेता हैं जिन्होंने मुसलमानों के वोट के कारण मलाई खाई और जब कुछ करने के लायक हुए तो मुसलमानों से अधिक भैंस के लिए परेशान रहे , मुझे भी तकलीफ होती है कि ऐसे मुस्लिम बिकाऊ नेता जो आज यदि उत्तर प्रदेश सरकार से वादा किये 18% आरक्षण को लेकर विद्रोह कर दें तो सरकार की चूलें हिल जाएँ पर भैंस मिल गई तो मुसलमान जाएँ भाड़ में , यह सोचता हूँ तो ओवैसी अच्छा लगता है , पर फिर मुझे मेरे महात्मा गाँधी याद आते हैं तो सोचता हूँ कि कभी गाँधी यदि सपने में ही सही मिल गये तो कैसे नज़र मिलाऊंगा उनसे कि सिद्धांततः जिस कार्य पद्धति का सदैव विरोध किया वही पद्धति को समर्थन दे दिया केवल अपने तुच्छ लाभ के लिए ? तब याद आते हैं मुझे मेरे वह 80% हिन्दू भाई जो हमेशा मेरे साथ थे और हैं जिनको इन्हीं ओवैसियों ने गालियाँ दीं श्रीराम की माँ को गालियाँ दीं तो कैसे भूल जाऊँ कि जो 80% हिन्दू भाई हमारे लिए अपने ही समाज के 20% संघियों से लड़ते रहे लतियाते रहे उनको उनके भगवान को गालियाँ देने वालों का मै समर्थन करूँ ? मेरे तो सभी व्यक्तिगत मित्र ही हिन्दू भाई हैं जो मेरी एक आह पर भागे घर चले आते हैं तो इनको गालियाँ देने वालों का समर्थन मैं कैसे करूँ ? मेरे घर से निकलते ही मेरे व्यवसाय के जो 99% हिन्दू भाईयों ने हमेशा मेरा साथ दिया उनको गालियाँ देने वालों का समर्थन मैं कैसे करूँ ?

इससे अच्छा मैं जैसा हूँ वैसा ही रहना पसंद करूँगा , नहीं चाहिए ऐसा न्याय जो ओवैसी देना चाहता है , नहीं चाहिए ऐसा सुख ऐसा ऐश्वर्य जो ओवैसी दिलाना चाहता है , नहीं चाहिए ऐसी सुरक्षा जो ओवैसी देने का वादा करता है , हम ऐसे जीवित रहने से बेहतर किसी उन्मादी भगवा भीड़ के चंगुल में फंस कर मरना पसंद करेंगे घर का जलना पसंद करेंगे , बहन बेटियों पर अत्याचार भी बर्दाश्त कर लेगें पर हमारे सुख दुख के साथी हमारे 80% भाईयों को गाली देने वालों को आगे करके अपना हक छीनूँ यह मंजूर नहीं क्युँकि हम एहसान फरामोश नहीं।इस देश में हम मुसलमानों की ताकत हमारे ये 80% हिन्दू भाई ही हैं और उनको और उनके भगवान को गालियाँ देने वालो उनको कुत्ते की औलाद कहने वालों के दिलाए हक और समृद्धि से बेहतर है कि हम नंगे भूखे ही रहें ।

ओवैसियों हम जैसों का साथ चाहते हो तो सर्वाजनिक रूप से हिन्दू भाईयों से माफी मांगनी होगी जब वह माफ कर देगें हम उनके साथ ही तुम्हारे समर्थन में खड़े होंगे नहीं तो हम जैसे हैं वैसे ही भले ।

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21 thoughts on “मैं एक भारतीय मुसलमान हूँ !

  • September 16, 2015 at 7:35 pm
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    असुद्देीन ओवेसि से उन्के भाई अक्बर उद्देीन ओवेसेी ज्यादा जान दार लाग्ते है !
    अप्का यह लेख दोहरापन् दर्शाता है ! ऊपर कुच्, निचे कुच

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  • September 16, 2015 at 10:40 pm
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    sikander hayat
    August 10,2013 at 01:21 AM IST
    पार्ट – 2 सच्चर रिपोर्ट का जहा तक सवाल हे तो भारत में लोकतंत्र हे चुनावी राजनीति हे मुस्लिम वोटो का भारी महत्व हे नेताओ को किसी हालात में चुनाव जितना होता हे इस्तिती बड़ी ही पेचीदा हे सब अपने अपने हिस्से और मतलब का सच देखना चाहते हे खेर जहा तक य बात की हालात दलितों से भी ख़राब—– तो दलित आदिवासी इस देश के सबसे बड़े शोषित हे वो पिछले 2- 3 हज़ार से दबे कुचले रहे वो सत्ता में कभी नहीं रहे उनके पास जमीन कभी नहीं रही जबकि मुस्लिम इस देश पर पिछले ही 1 हज़ार मेसे 700 साल हुकूमत कर चुके हे जमीन का सवामितव बहुत रहा आज भी ठीक ठाक हे फिर दलितों से भी ख़राब हालत केसी हो गयी ? य संभव ही नहीं हे मेरे ख्याल से सच्चर साहब ने अपनी बात कहने के लिए यहाँ ”अतिश्योक्ति अलंकार ‘ का पर्योग किया हे जो की सव्भाविक हे अतिश्योक्ति का पर्योग सभी करते हे फाजिल भाई मुसलमानों की हालात दलितों से ख़राब होती तो हर शहर में मुस्लिम बहुल इलाके हे जिनके बाहरी हिस्सों को छोड़ दे तो इनमे शायद ही कोई गेर मुस्लिम संपत्ति मकान दूकान खरीदता हो अगर की मुसलमानों की हालात दलितों से ख़राब होती तो मुस्लिम बहुल इलाको में मकान दूकान आदि के दाम किराया आदि कम होने चाहिए थे क्योकि बाहर वाला कोई खरीदेगा नहीं और मुस्लिमो की हालात दलितों से भी ख़राब हे तो जाहिर हे फिर पैसा नहीं पैसा नहीं तो फिर खरीदार भी नहीं फिर रेट तो गिरने चाहिए ? तो क्या रेट गिर रहे हे गिरे छोडो क्या रेट रुके हुए है ? जी नहीं बाकि देश की तरह ही मुस्लिम बहुल इलाको में भी आज मकान दूकान सम्पति जमीन के रेट बढ़ते ही जा रहे हे इन्हें कोई गेर मुस्लिम नहीं मुस्लिम ही खरीद रहे हे ? कहा से खरीद रहे हे जब हालात दलितों से भी बदतर हे ? तो मेरे घर में 4 – 4 लोगो की सेलरी 50 हज़ार से ऊपर हे फिर भी हम मुस्लिम इलाके में फ्लेट नहीं ले सकते हे पिछले दिनों एक देखा था डेढ़ सो गजके फ्लेट के डेढ़ करोड़ मांगे गए किराय भी गेर मुस्लिम इलाको जेसे ही बढे हुए ——जारी

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    • September 16, 2015 at 10:45 pm
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      https://khabarkikhabar.com/archives/847मुसलमान उतने पिछड़े तो खेर कतई नहीं हे जितना हम दर्शाते हे और अगर हे भी तो इसका सबसे सबसे बड़ा कारण परिवार नियोजन की तरफ उतना ध्यान नहीं देना हे असल में पढ़ा लिखा मुसलमान मूद्धो पर कोई स्टेण्ड नहीं लेता हे क्योकि उसे पता हे की फिर उसे देर सवेर कठमुल्लाओं और कठमुल्लाशाही से भिड़ना होगा जो आसान नहीं हे इसलिये वो असल मुद्दो पर आता ही नहीं हे

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        • September 19, 2015 at 1:31 pm
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          मुसलमानो की हालात उतनी खराब नहीं हे जितनी बताई जाती हां ये सच हे की नौकरियों में और सरकारी नौकरियों में कम हे नौकरियों के बारे में जैसा की बताया ही गया हे की भारत में नौकरियों से अधिक कमाई सवरोजगार में हे और जहा तक सरकारी नौकरियों का सवाल हे तो उसमे मुसलमानो की कमी हे सही हे उसके लिए हम भेदभाव का आरोप लगाते हे तो भेदभाव से भी बड़ा कारण बड़ा परिवार हे देखिये मेरी ददिहाल और ननिहाल लगभग एक सी आर्थिक हालात के थे बल्कि ददिहाल की आर्थिक हालात बेहतर थी मेरे पापा चार भाई थे चारो के कुल 23 बच्चे थे नतीजा हम 23 में से एक भी सरकारी नौकरी में नहीं दूसरी तरफ मेरे कज़िन तो मेरे ननिहाल में मामा लोग पांच भाई थे पांच में से दो चले गए पाकिस्तान बचे तीन तीन के कुल 9 बच्चे थे आर्थिक हालात कोई बहुत अच्छे नहीं थे मगर चिंता वाली भी कोई बात नहीं थी नतीजा तीन में से भी एक एम सी डी में ऊँचे पद पर रहे फिर नो में से भी अब तक छह की सरकारी नौकरी लग चुकी बाकी तीन भी बढ़िया पार्इवेट जॉब में हे मेरे घर में भी मुझे छोड़ कर सभी भाई बहन एक से बढ़ कर एक काबिल हे मगर किसी को भी सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी क्योकि बड़े परिवार में संभव नहीं हो सका ना बजट था ना समय था और तो और स्पेस भी नहीं था सीधी सी बात हे विकास और खुशाली चाहिए तो आबादी कम रखनी होगी मगर मुस्लिम समाज में डॉक्टर तक परिवार नियोजन का विरोध करते हे ( डॉक्टर जाकिर नाइक और एक डॉक्टर ब्लॉगर ) तो कैसे आएगी खुशाली ? भाई कभी किसी को मुक़्क़मल जहाँ नहीं मिलता या तो खुशाली का आनद ले लो या बड़े परिवार का दोनों एक साथ नहीं मिल सकते हे

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          • September 19, 2015 at 1:50 pm
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            यहाँ में झूठ नहीं बोलूंगा में परिवार नियोजन को कह रहा हु छोटे परिवार को कह रहा हु तो ये भी साफ़ कर दू की छोटा परिवार दुखी परिवार ? छोटे परिवार में मज़ा नहीं आता हे क्योकि इंसान नहीं होते और इंसान का सच्चा सुख और आनद कोई दूसरा इंसान ही हो सकता हे अपने आस पास में एक इकलोती लड़की को बिल्ली से खेलते देखता हु तो सोचता हु की हमने तो बचपन में कभी किसी कुत्ते बिल्ली तोते को मुह लगाया ही नहीं चारो तरफ इंसानो की भरमार थी उन्हें से ही हमे फुसरत कभी नहीं मिली खेलने के लिए इतने सारे भाई बहन फिर कज़िन फिर पड़ोस के सचिन नितिन निर्दोष मोहन नीरज राम भरोसे शाहनवाज़ और भी ढेरो नमूने फिर स्कूल के दोस्त स्वर्ग का आंनद मगर ज़ाहिर हे आनद अलग होता हे तरक्की विकास आगे बढ़ना एक अलग बात होती हे मुसलमान तरक्की विकास ऊँची नौकरियां ऊँचे पद मांग रहे हे तो आपको छोटा परिवार रखना ही होगा कुदरत का कानून सा ही हे की कभी किसी को भी सब कुछ नहीं मिल सकता दुनिया में कही भी विकास आबादी पर कंट्रोल किये बिना नहीं आया हे

  • September 16, 2015 at 11:05 pm
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    ८०० साल देश पर राज करने के बाद भी मुस्लिम समाज पिछड गया
    आजादी के बाद ५०-५५ सालो तक देश पर कान्ग्रेश का राज रहा फिर भि मुस्लिमो को सच्चर कमेटी , रंगनाथ मिश्र कमेटी , कुंडू कमेटी , श्रीकृष्ण कमेटी आदि की जरुरत पडने लगी
    यो तो देश के १७ करोड मुस्लिमो मे एक विशेष तरह की एकता देखने को मिलती है फिर भी इन लोगो के पास अपना खुद का कोइ नेता या दल नही है
    up की राजनीति मे देखा जाये तो यादव सपा दलित बसपा जाट रालोद अगडे बिजेपी से जुडे हुये है पर मुस्लिम बे पेन्दी के लोटे क़ी भाति उस कन्डिदेट को सपोर्ट करते है जो बिजेपी को हरा सके यही से मुस्लिमो की दुर्दशा प्रारम्भ हो जाती है और ये एक बिकी हुयी औरत की तरह हर तथाकथित सेकुलर दलो द्वारा यूज किये जाते है और शायद ये भूल भी जाते है की जितने मुस्लिम आजादी से अब तक दन्गो मे मरे है उसे ज्यादा इन दलो द्वारा भुख और बिमारी से मार दिये गये है

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    • September 16, 2015 at 11:09 pm
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      अपना खुद एक दल बनाओ जो आपकी समस्याओ के लिये लड सके जब तक दुसरो की बेसाखी की तरफ देखोगे दुख ही पाओगे

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    • October 13, 2015 at 11:59 am
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      50-55 साल के कांग्रेस के शासन के बावजूद मुस्लिम पिछड़े हुए हैं के तर्क का क्या मतलब? क्या कांग्रेस, मुस्लिमो की पार्टी है? बात जनाब यह है कि मुस्लिमो के पिछड़ेपन को सिर्फ़ भारत के परिदृश्य के बजाय, वैश्विक स्तर पे देखो. मुसलमान वैश्विक स्तर पे भी तालीम और गुणवत्ता के मामले मे पिछड़ा हुआ है. मुसलमानो के पिछड़ेपन के लिए बीजेपी या कांग्रेस की नीतियो को दोषी नही ठहराया जा सकता, उनकी नीतियाँ, सुरक्षा की दृष्टि से ज़रूर मायने रखती है, जिसमे कांग्रेस निश्चित बीजेपी से बेहतर है.
      बाकी मुसलमान हो या हिंदू, इंसान तालीम को कितना महत्व देता है, उससे उसकी तरक्की के रास्ते खुलते हैं. अनेक मुसलमानो ने शिक्षा और हुनर की बदौलत अनेक क्षेत्रो मे अपनी उपस्थिति दिखाई है.
      बाकी लकीर के फकीर, दकियानूसी लोग किसी भी क़ौम के हो पिछड़ जाते हैं. मैने खुद ने इस देश के सर्वोत्तम कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद.

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      • October 13, 2015 at 1:39 pm
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        वाह ये तो बहुत ही बढ़िया बात हे ज़ाकिर भाई की आप पढ़े लिखे भी हे और सोच विचार के भी पक्के हे बहुत बहुत बधाई असल में आप हो अफज़ल भाई हो या मेरे अपने बड़े भाई हो वास्तव में भारत में और भारत के मुसलमानो में भी एजुकेटिड भी और विचारवान भी लोग बहुत ही दुर्लभ हे यहाँ तो पढ़े लिखे भी अपने हित के मामले में तो बेहद सजग और चतुर ( मक्कार ? ) होते हे मगर समाज के मामले में बेहद ज़ाहिल होते हे

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        • October 14, 2015 at 9:29 am
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          सिकंदर भाई, वैसे मैने मेरी शिक्षा का ज़िक्र अपनी बडाई के लिए नही किया था, ना ही मैं इसे अपनी कोई बड़ी उपलब्धि मानता हूँ, जिंदगी मे जो कुछ मिला है, सब अल्लाह की वजह से ही मिला है. सारी तारीफ़ भी उसीके लिए है. लेकिन मैं यही बताना चाहता हूँ कि इस देश मे मुसलमानो के लिए भी अवसारो की कमी नही, लेकिन उन्हे अपनी प्राथमिकताओ मे गुणवत्ता की तालीम और रोशन ख़यालात को शामिल करना होगा. आपने जो परिवार की नियोजन की बात कही, वो यक़ीनन मायने रखती होगी, हमारा परिवार भी ज़्यादा बड़ा नही है, और इसका कारण मेरे वालिदान की समझ ही रही होगी.

          मेरे वालिदेन ने कभी मुझे दिमाग़ को संकीर्ण बनाने वाले मदरसो मे नही भेजा. तरक्की का रास्ता, तालीम से ही खुलता है.

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          • October 14, 2015 at 2:25 pm
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            मुझे पता हे की आप बड़ाई के लिए नहीं कह रहे थे मेरे कहने का आशय था की भारत में पढ़े लिखे लोग भी बेहद संकीर्ण विचार रखते हे जबकि इन पढ़े लिखो का समाज पर भारी प्रभाव होता हे तो इनके संकीर्ण विचारो का नीचे फिर आम लोगो पर बहुत बुरा असर पड़ता हे आपने तो देखा ही होगा की कैसे बड़े बड़े है प्रोफाइल मुस्लिम मुस्लिम महफ़िलो में कठमुल्लशाही का विरोध तो दूर संकीर्ण समर्थन ही कर जाते हे हमारे बड़े भाई डॉ रंजन माहेश्वरी सर को ही देख लो कितने प्रोफाइल वाले आदमी हे मगर बजाय इस ज़हरीली सरकार का विरोध करने के जो एक तरफ मांस के पीछे पड़ी हे दूसरी तरफ दाल दोसो तक पहुचाने वाली हे उसका समर्थन ही कर रहे हे तो में ये कह रहा था की आप एजुकेटिड भी हे और संकीर्णता से भी दूर हे तो आपके अच्छे विचारो को समाज और अधिक ध्यान से सुनेगा अब यही देख लो वहाब साहब हमेशा मुझे तो घसीट घसीट कर मारते हे और आपके सामने आते हे ही मौन वर्त पर चले जाते हे खेर जो भी हे आप जैसे विचारक का होना इस्लाम इंसानियत और इन्डिया तीनो के लिए अच्छा संकेत हे और हां ये तो हे की छोटे परिवार के लोगो के लिए आगे बढ़ना सरल होता हे दुनिया में कही भी विकास बिना आबादी कंट्रोल के नहीं आता हे और रात दिन मुसलमानो का विकास ना होने का रोना रोने वाले ये बात गोल कर जाते हे क्योकि इन्हे अपने वोटो की , अधिक आबादी मतलब सस्ती लेबर की , बढ़ती आबादी के साथ इन की आसमान छूती जमीनो जायदादों की कीमत की अधिक फ़िक्र हे

        • October 14, 2015 at 9:46 am
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          मेरा परिवार स्टीरियो टाइप मुस्लिमो जैसा नही था, लेकिन मज़हब को लेके मेरे परिवार ख़ासकर बड़े लोगो का रवैया, उतना उदारवादी नही है. हालाँकि हमारे हिंदू पड़ौसीयो से सदैव मधुर संबंध रहे हैं.
          मैं ये ज़रूर मानूँगा की शुरुआती घर के माहौल के बाद, तालीम के साथ मेरे विचारो मे बड़ा परिवर्तन और स्पष्टता आई. मैं आज भी अल्लाह पे अटूट आस्था रखता हूँ. लेकिन जब भी कोई मदरसा टाइप या जाकिर नायक के चेले चपाटो या तब्लिगियो से टकराव हो जाता है, और वो इस्लाम को अध्यात्म की बजाय, ईर्ष्यालु अल्लाह, आडंबर और पाखंड की अवधारणा से जोड़ने लग जाते हैं, मैं इस्लाम की उनकी समझ को ग़लत ठहराने की बजाय यही कहता हूँ कि अगर “आपकी इस्लाम की समझ सही है तो मैं मुसलमान कतई नही”.
          आम तौर पे मैं उनसे वार्तालाप टालने की ही कोशिश करता हूँ, क्यूंकी भैंस के आगे बीन बजाने से कोई फ़ायदा नही.

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        • October 16, 2015 at 10:08 am
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          तालीम की अहमियत पता हो तो पढ़े लिखे लोगो की बात को अहमियत दी जाए. आप और मेरी बात तो छोड़िए. इन लोगो ने तो पहला नोबेल पुरूस्कर जीतने वाले मुस्लिम अब्दुस सलाम को ही जाहिल ठहरा दिया. दुनिया की सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट परवेज़ हूदभोय तक को देश-द्रोही ठहरा देते हैं.

          हालाँकि मैं अतिरंजना मे कुछ ज़्यादा लिख रहा हूँ, स्थिति शायद उतनी भी खराब नही. लेकिन ऐसे लोगो की कोई कमी नही, जो इस दुनिया मे विविध क्षेत्रो मे कामयाब लोगो उपलब्धि पे ऊन्ह भरते हैं, या उनसे सीखने की चाह रखते हैं. श्रेष्ठतता की ग्रंथि के शिकार लोगो को कमियाँ बतलाना बहुत मुश्किल होता है.

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      • October 18, 2015 at 1:36 pm
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        जाकिर जी जान कर खुशी हुयी कि आप आई आई टी से ग्रेजुएट है फिर भी आप मे पोजिविटी का अभाव दिखाई दे रहा है वैश्विक स्तर पे देखो गे तो आप पायेन्गे की अधिकतर अरब मुस्लिम देश धर्मन्ध है फिर भी उन्मे टर्की जैसे धर्मनिरपेक्ष देश भी है तो यदि एक मुस्लिम देश धर्मनिरपेक्ष हो सकता है तो भारत का मुसलमान पडा लिखा क्यो नही हो सकता????????
        वैसे कांग्रेस से मेरा अभिप्राय तथाकथित सेकुलर दलो से था

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  • September 17, 2015 at 9:47 am
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    مسلمانو کی کوئی پارٹی نہیں بن سکتی کیو کے آپس مے یکتا نہیں ہے . مسلمان اسی طرح لوگو کے سکار بنتے رہے گے اور انھ ہر پارٹی انھ بیوقوف بناتی رہے گی . ان لوگو کا کچھ نہیں ہو سکتا .

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  • September 17, 2015 at 11:03 am
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    LEKH ME JAAHID SAHB KIYA KAHNA CHAAHTE HAI SAMAJH ME NAHI AA RAHA HAI . KUL MILA KAR LEKHAK KHUD CONFUSE HAI .

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  • September 17, 2015 at 4:29 pm
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    हर इंसान की अपने समुदाय के प्रति जिम्मेदारी होती है,यह और बढ़ जाती है जब वह समुदाय रसातल में जा रहा हो,२२%से १’५%हो जाना यही बतलाता है। अब अपने मित्रों से केवल दुआ-सलाम बनाए रखने के लिए समुदाय को मिटते देखते रहना कहाँ तक उचित है ?आगे बढ़िए और अपना कर्तव्य निभाइये।उनकी भाषा में वही जो अर्जुन को श्रीकृष्ण ने दिया था।

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  • September 17, 2015 at 5:44 pm
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    मुसल्मान कि समस्या के लियए कान्ग्रेस्स और मुस्लमन हि जिम्मेदर है. पाच बिबि और दर्जन बच्हे, मद्रसा, आतन्क्वाद्, औरत को बुर्ख मे बन्द कर्ना| पुरा दुनिया देख रहा है| जो समाज औरतो को बराबर् क दर्जा नहि दे सक्ता, खुदा उसे माफ नहि करेगा|

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  • October 10, 2015 at 9:49 pm
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    भारत देश हिन्दुओ का देश है इसलिए मुसलमानो को सभी धार्मिक अधिकार और सरकारी अधिकार है , भारत देश में मुस्लमान ,राजनेता, फिल्मस्टार, किकेटर ,इंजीनियर ,डॉक्टर सब बन सकता है ,ये अधिकार हिन्दुओ ने २० % मुसलमनो को दिए है ,मन लीजिये की भारत देश में ८० % जनसंख्या मुसलमनो की होती तो शायद हिन्दुओ को ,राजनेता, फिल्मस्टार, किकेटर ,इंजीनियर ,डॉक्टर जैसे अधिकार नहीं मिलता ,यहाँ तक ही हैं हिन्दुओ को सास लेले से पहले मुसलमानो की इजाजत लेनी पड़ती , देश का हेर मुसलमान खुद से यह पूछे की यदि हिंदुस्तान में ८०% मुस्लमान होते तो क्या मुस्लमान सरकारी ,और धार्मिक अधिकार हिन्दुओ को देता , सब से बड़ा उदाहरण पाकिस्तान है, पाकिस्तान मुसलमानो का देश है इस लिए मुसलमो ने हिन्दुओ से सरकारी और धार्मिक अधिकार छीन लिए है , हिन्दुओ को पाकिस्तान में हर दिन मारा जाता है

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  • October 13, 2015 at 12:06 pm
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    सच्चर कमेटी: यानी इस दुनिया (देश) मे मुस्लिमो के पिछड़ेपन की बात को इंगित करने वाला दस्तावेज़. आरक्षण की बात पे तो यही सच्चर कमेटी याद आ जाती है.

    इस दो कौड़ी की दुनिया को ठोकर मार कर, परलोक मे पूरे मार्क्स लेने के लिए जाकिर नायक की कोचिंग क्लासो मे जाने वाली या उन लेक्चरो को यू ट्यूब पे सुनने वाली या तब्लिगियो की शरण मे जाने वाली आवाम को तो सच्चर कमेटी की बात नही करनी चाहिए.

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