मुस्लिम मदरसे और आतंकवाद !

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by- नुज़हत नाज़नीन खान

इस विषय पर लिखने से पहले हमने ये देखा है कि ’ आतंकवाद’ जैसे शब्दों की परिभाषा ही आज तक लोग निश्चित नही कर पाये ! उदाहरणार्थ कांगो नाइजेरिया ,म्यांमार ,थाइलैंड ,फ़िलिपिन , फ़िलिस्तीन या हमारे ही देश भारत में अगर तीन चार दिन के अन्दर में ही हज़ारों मुस्लिमों या उनकी औरतों का सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या कर दी जाये या गर्भवती महिलाओं का पेट फ़ाडकर नवजात शिशु के साथ उसे ज़िंदा जला दिया जाये तो वह आतंकवाद नही ! लेकिन अगर कोइ भी गुमनाम व्यक्ति या गिरोह चाहे वह भले ही मुस्लिम न हो मगर किसी भी गैरमुस्लिम के साथ किसी भी कुंठित घटना को अंजाम देता है तो उसको फ़ौरन मुस्लिम आतंकवाद का नाम दे दिया जाता है ! जबकि ऐसी ही घटनाओं को अनजाम देने वाले , धार्मिक स्थलों पर बम फ़ोडने वाले हमारे ही देश में देशभक्त कहे जाते हैं ! फ़िलिस्तीनी अपने देश की आज़ादी के लिये लडते हैं तो आतंकवादी कहे जाते हैं ! जेल से रहाइ पाने के लिये अंगरेज़ों से अपनी वफ़ादारी और देश के प्रति गद्दारी के लिये माफ़ी पर माफ़ी मांगने वाला ’वीर ’ और कोइ मुखबिरी करने वाला ’क्रान्तिकारी ’और जानें क्या क्या कहलाता है ! आसाम में एक ही साथ ७८ मासूम आदिवासियों व उन्के असहाय बच्चों की निरपराध हत्या होती है तो उसे आतंकवाद नही उग्रवाद कहा जाता है ! यहां भी आतंक वाद की परिभाषा बदल दी गयी ! किंतु इसका अर्थ ये हरगिज़ नही कि कोइ पुर्णरूपेण एक ही स्वरूप की क्रित्य को जब जैसा चाहे परिभाषित करे और सभी लोग मानते चले जांय ! ऐसा किसी के भी कहने से कभी भी नही होगा ! ये याद रखनी चाहिये !

पिछले दिनों बीजेपी के नेता साक्षी जिसके आगे महाराज भी लिखा जाता है ! साक्षी का अर्थ वैसे तो हिन्दी में गवाह के होता है जिसने अपनी आखों से किसी घटना को होते हुये देखा हो पर इन्होने अपने नाम को भी स्वयं झूटा करते हुये बहुत वह कुछ भी मदरसों और उस में की पढाइ के बारे में बोला था जो सपने में भी कभी देखा नही था ! और न ही वह कभी उसके गवाह थे ! जब टीवी चैनल वालों ने उनसे कडे शब्दों में इसके बारे में पूछा तो आंय बांय सांय होगये ! हां एक झूट असाक्छ्य रूप से ज़रूर जड दिये कि मदरसों में २६ जनवरी या १५ अगस्त को ध्वजारोहण नही होता और अपने इसी झूट के कारण देश को इस्लामी करण करने के षणयंत्र का मुद्दा भी उन्हों ने सवयं ही निर्माण भी कर लिया ! जबकि उनको पता भी नही मदरसे मात्रिभूमि के लिये जान की आहुति देने से लेकर सभी धरमों के सम्मान , शान्ति , आपसी भाइ चारा और मेल व मिलाप की शिक्षा के साथ ये भी बताते हैं कि तुम तब तक एक सच्चा मुसलमान नही बन सकते जब तक तुम्हारा पडोसी तुमसे खुश न रहे चाहे वह किसी भी धरम का अनुयायी क्यों न हो ! रही बात मदरसों में ध्वजारोहण की तो ये भी साक्षी जी का असाक्छ्य ही है ! हर मदरसे में २६ जनवरी या १५ अगस्त को ध्वजारोहण नियमित रूप से होता है ! सवयं जाकर देखो तो पता चले फिर बोलो ! इन बातों के बाद मुझे भी कुछ पूछना है उन सभी लोगों से जो मदरसों पर तो झूटा इल्ज़ाम लगाते हैं किन्तु सवयं की संस्थाओं और सवयं के गरेबान को नही देखते ! क्या कोइ बताये गा ? RSS के नागपुर मुख्य या प्रधान कार्यालय पर आज तक कभी तिरंगा ध्वज फहराया गया ? जवाब है नही कभी नही ! तो ऐसा क्यों है ? क्या वो देश के सम्मान और गौरव से भी उंचा है ? जो देश की शान ध्वज को अपने कार्यालय पर फहराना तक् गवारा न करे व संस्था देश भक्त कैसे हो गयी ? इतिहास साक्षी है (यहां तथा कथित साक्छी की बात नही ) कि १९४८ में उसी नागपुर में तिरंगे को पैरों से रौंदा गया था ! क्या इस पर कोइ कुछ बोलेगा !
हमारी सुरक्छा के लिये हमारी थल , वायू और जल सेना के होते हुये भी यदि किसी संस्था के द्वारा अपने सुरक्छा के नाम पर केवल हिंदुओं के लिये मार काट की ट्रेनिग दी जाती है तो वह देशभक्त कैसे होगयी और अगर ये देशभक्ति है तो फिर दूसरे समुदाय के लोगों को भी ऐसा करने की अनुमति आप दे रहे हैं कि नही ? जवाब होगा ! नही ! यदि नही तो किस नैतिक मुल्य और संवधानिक अधिकार के तहत आप ऐसा करते हुये स्वयं और अपनी संस्था को देश भक्त कह सकते हैं ! किन्तु ऐसे लोगों से ऐसे सवाल का कोइ औचित्य ही कहां जिनके लिये नैतिकता बहुत दूर की बात हो !

क्या बात है ! कुल जनसंख्या के ८० % जिनकी जनसंख्या हो सरकारी तंत्र में जो ९०% हो ,धन धान्य और सभी प्रकार से समरिद्ध हों उनको अपनी सुरक्छा के नाम पर बंदूक चलाने से लेकर सभी प्रकार की संहारिक ट्रेनिंग हो और जो कमज़ोर ,कुचले १३ या ३% हों जगह् जगह प्रताडित किये जारहे हों उनको ऐसे ट्रेनिग की कोइ आव श्यक्ता नही !….. जगह जगह सुरक्छा के नाम पर ये ट्रेनिंग क्या अर्थ व उद्देश्य रखती है ? विगत दिनों में इस से क्या काम लिया गया है ? हम ही नही पूरा संसार जान चुका है ! किसी की ओर से इस ट्रेनिंग को देशभक्ति ,धर्म और नैतिकमुल्यों की उच्च व शिखर श्रेणी की सनद देने से यथार्थ बदल नही जाता !

आखिर में ऐसे लोग किसी और बात में साक्षी हों कि नही , अपने झूट का साक्षी ज़रूर हैं ! वैसे हमें ये आशा भी है कि ये लोग अपनी ऐसी विशेषता सदा बनाये रखें गे ! ये उनके लिये बडी बात नही ! जय भारत !

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44 thoughts on “मुस्लिम मदरसे और आतंकवाद !

  • January 30, 2015 at 10:49 pm
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    नुजहत नाज़नीन जी आपका तो बहुत बहुत बहुत ही ज़्यादा स्वागत हे लेखन और इस साइट दोनों पर क्योकि मुस्लिम महिला लेखिका बहुत ही कम हे और भारतीय मुस्लिम समाज पर जिस कटटरता का खतरा मंडरा रहा हे वो सबसे अधिक महिलाओ को ही प्रभावित करेगा क्योकि कटरपन्ति कोई भी कही के भी कैसे भी किसी भी सोच आस्था विचार के हो वो सबसे अधिक और सबसे पहले औरतो की आज़ादी और खुशियो के जानी दुश्मन होते हे उमीद हे की आप आगे भी लेखन में सकिरयता बने रखेगी

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  • January 30, 2015 at 10:59 pm
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    जिस तरह हिन्दुओं में कोई छुआ छूत वर्णभेद जातिभेद सिखाता हो या न सिखाता हो उसकी जड़ें हिन्दुओं के धर्मग्रंथो में पाई जाती हैं वैसे ही मदरसों में कोई आतंकवाद सिखाता हो या न सिखाता हो उसकी जड़ें कुरआन की आयातों में पाई जाती है और इस सच को कोई केवल वेदमंत्रो और आयातों को सन्दर्भरहित असंगत तरीके से लिए जाने की दलील के साथ भी कोई नकार नहीं सकता इसीलिए सारे फसाद की जड़ बनता है , पहली बात तो ये समझो ! और इसमे तब तक सुधार की कोई गुंजाइश नहीं जब तक इन्हें ईश्वरीय ग्रन्थ माना जाता रहेगा ! अगर ये स्वीकार नहीं तो आगे की बातें पढ़ना भी मत क्यूँ की वो आपके लिए बेकार होंगी |
    दूसरी बात ऐसे आरोपों का जवाब कभी भी प्रत्यारोप नहीं हो सकता ! अगर शान्ति से समझने की कोशिश करो तो हिन्दुओं के आतंकवाद की सीमा हिन्दुस्थान तक ही सिमित है लेकिन ….आगे आपने खुद विस्तृत विवरण दिया ही है इसीलिए उनके पीछे कारण चाहे जो भी रहे हो लेकिन सारा दोष इस्लाम के सर मढ़ा जाना कोई अस्वाभाविक भी नहीं ! आप खुद को ही देख लो ,इशारों इशारों में ही सही लेकिन गैर मुस्लिम आतंकवादी एक्टिविटी को आप हिन्दू आतंकवाद नाम देने की ही कोशिश कर रहे हो ! इसीलिए मैंने पहले ही कहा की ऐसे आरोपों का जवाब के लिए प्रत्यारोप ढूढने में लग जाने से आतंकवाद की समस्या के प्रति आपके चिंता की इमानदारी जाहिर नहीं हो सकती वरन सच्चाई को पारम्पारिक बंदिशों के दायरे से बाहर आकर देखने की स्वीकारने की हिम्मत चाहिए होती है !
    इस दिशा में आपके मदरसों में तिरंगा फेहराये जाने जैसे उदाहरण तब जायज होते जब आप इसके साथ कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के रवैये में सुधार का भी सबुत पेश करते लेकिन क्यूँ की तिरंगे के हिमायती होने का दावा करने वालों के लिए ऐसे किसी भी वजह से किसी भी तरह का अलगाव चाहने वाले नेताओं की क्या जगह होनी चाहिए ये जब आप खुद जिन्हें तिरंगे के नुमाइंदे बताना चाह रहे है उन्हें तो बताने की जरुरत नहीं होनी चाहिए !
    और अब बात सिर्फ पाकिस्तान की रही हो ऐसा भी नहीं है लोग आई एस आई एस से जुड़ रहे हैं , मैंने खुद एम् पी के छोटे छोटे गाँव में आधी रात को मोटर साइकिल पे तेज गति से जाते हुवे आई एस आई एस झिंदाबाद के नारे लगाते मुस्लिम युवाओं को देखा है !
    इसीलिए मैं लव जिहाद जैसे हौव्वे को तो नजर अंदाज कर सकता हूँ लेकिन आई एस आई एस झिंदाबाद कहने वालों को भी नजरअंदाज करना मुझे लगता है की ये मेरी इंसानियत के प्रति ही काफिरी कहलाएगी | आप क्या समझाते हैं ये आप ही बताएं !
    इसीलिए किसी के भी लफ्फाजी को नहीं उसके पीछे छिपी चिंता को हम समझेंगे तो केवल प्रत्यारोपों की जगह जमीनी हकीकत पर सकारात्मक और समस्या प्रतिरोधक काम कर पायेंगे ! उसमे हम बढ़ चढ़ के दावे करें बजाये इसके की उसने मेरी कूरेदी तो मैं भी उसकी कुरेदूँ !

    मेरे लिए ओवैसी ,कुरैशी भागवत, साक्षी सब की औकात आरोप और प्रत्यारोप से ज्यादा की नहीं हैं क्यूँ की मैं नहीं चाहता की आज जो पाकिस्तान को ये कहने की नौबत आई की तालिबान अच्छा या बुरा नहि होता ,सिर्फ बुरा होता है वही नौबत भविष्य में हम पर भी आये और ऐसे भविष्य को जाने अनजाने करीब लाने वाले मेरे लिए एक बराबर है चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम !

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  • January 31, 2015 at 8:16 am
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    इस्लाम अथार्त आताँकवाद क्यु कि जितने भि मदरसे है इस दुनिया मेँ सब मेँ सरिया कानुन के नियम पढाये और सिखाये जाते है और दुनिया मे जितने भि आँताकवादीँ सँगठन हैISIS,huji,hamas,laskar,im,taliban,alkayada etc सभी सरिया कानुन पे हि चलते है

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    • January 31, 2015 at 12:08 pm
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      Kya bodo aur ulfa muslim hain kya LTTE wale muslim hain kya Myamar ke atankwadi muslim hain kya Nagaland manipur ke atanki muslim hain kya rozana hazaron ki tadad me police aur fauj ko marne wale naxalites muslim hain kya mahatma gandhi ko marne wala is desh ka pahla atankwadi muslim tha kya Indira gandhi ko marne wala muslim tha kya Rajiv gandhi ko marne wala muslim tha kya Babri masjid ko girane wale muslim the kya punjab ke atankwadi muslim the kya Byant singh ki hatya muslim ne kiya.Nahi ye sab Hindu log the lekin kyun inhe hindu atankwadi nahi kahte kyunki hum atankwad ko sirf atankwad samajhte hain.lekin kuch log ise musalman samajhte hain.chashma badalte hi taswir badal jati hai.

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      • February 1, 2015 at 3:29 pm
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        जित्ने भेी आपने आतन्कवाद के गिरोह बतलाये है वह स्थानेीय् है , राश्त्रेीय् भेी नहेी हैऔर इस्लामेी आतन्क्वादियो से अनेक देश बहुत परेशान् है !

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  • January 31, 2015 at 8:22 am
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    बहुत ही अच्छा लेख और सच से भरा हुआ है . ये हमारी बदनसीबी है के मुस्लमान भारत में ही नहीं पुरे दुनिआ में बदनाम किये जा रहे है , अब देखिये संघ जो के गांधी जी का हत्या भी कराया और आज भी भारत के झंडे को नहीं मानता फिर भी देश भक्त बना हुआ है .

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    • January 31, 2015 at 12:09 pm
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      sangh ne bahut hi accha kiya joki gandhi ji ki hatya karva di ,,, agar gandhi jinda rehta to bharat batbad ho jata,,,,,,,,,

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      • February 1, 2015 at 3:25 pm
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        गान्धेी जेी हो या अन्य कोइ भेी हो हत्या करना या कर्वाना बहुत गलत कार्य है , जिन्से मत्भेद हो उन्का पर्दाफाश आम् जनता मेजरुर किजिये लेकिन मौत नहेी

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  • January 31, 2015 at 9:00 am
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    अगर इस्लाम गैर मुस्लिम लोगों को मारने का आदेश देता, तो सबसे पहले इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ही अपने चाचा अबु तालिब को मार देते क्योंकि उन्होंने इस्लाम को स्वीकार नहीं किया था। और फिर अपने अनुयायियों का इसका आदेश देते कि जो भी इस्लाम को न स्वीकार करे, उसका कत्ल कर दो। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
    और यह भी सोचने वाली बात है कि जब उन्होंने बिना युद्ध के मक्का पर विजय पायी थी तो अगर वे चाहते तो मक्का के सारे गैर मुस्लिम लोगों को या तो मार देते या मक्का से बाहर निकाल देते। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और कह दिया कि “जाओ! आज तुम पर कोई दोष नहीं।” उन्होंने तो उन लोगों को भी क्षमा कर दिया, जिन्होंने मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर जुल्म किया था और आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को मक्का से निकाल दिया था।
    किसी के जीवन का सही अध्ययन किए बिना और सब कुछ जाने बिना उस पर आरोप लगाना जाहिल लोगों का काम है। अब यह आप पर निर्भर करता है कि इस जाहिल काम को सच मानकर जाहिल लोगों का साथ देते हैं या उनसे दूर रहते हैं।

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    • January 31, 2015 at 12:37 pm
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      जब मुहम्मद जेी ने मक्काऔर् मदेीना मे कबजा कर लिया स्थानेीय निवासियो को तेीन बात कहेी थेी या तो मुस्लिम बन जाओ या मक्का से बाहर जाओ वर्ना लद्ने के लिये तैय्यार हो जाओ ! तब जो कम्जोर थे वह मुस्लिम बन गये जो दरपोक् थे वह मक्का से हत गये ! जो लद सक्ते थे वह लद कर मर गये ! तब से लेकर आज तक् कोई गैर मुस्लिम इन नगरो मे नहेी जा सका है !
      क्या कोइ” माई का लाल ” मुस्लिम किसेी भेी गैर मुस्लिम को मदेीना और मक्का नगर मे रहने केी सुविधा दिल्वा सकता है

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    • January 31, 2015 at 1:12 pm
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      अबुलहब भेी मुहमम्द जेी से मत्भेद रख्ते थे उन्के विशय मे कुरान केी पुरेी सुरत १११ वा पेश केी गयेी है , जिसमे उन्के विनाश केी बात कहेी गयेी है !
      नजर बिन हारस को बदर के युद्ध मे बन्देी बन्वा कर उस्का कत्ल मुह्म्मद जेी ने करवाया था ! कित्ने नरम दिल के थे मुह्म्मद जेी और साथ मे उन्का कल्पित कुरानेी अल्लाह !

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  • January 31, 2015 at 9:25 am
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    इस लेख क शिर्शक् कुच और है और लेख कुच और है अभिि इसि सप्तह ३१०० मौलाना पकिस्तान मेऐस्लमि अतन्क्वाद के मुद्दे पर गिरफ्तार किये गये है ! उन्मे कुच तो मदर्से भ चल्ते होन्गे ! आज पाकिस्तान मज्बुर् हो चुका है ! कि वह जेत विमान से बम वर्शा करके इस्लामेी अतन्क्वादियो के नाम पर अप्ने हेी ब नाग्रिको कि हत्या करे यह काम वह अनेक बार कर चुका है और अमेरिका भि द्रोन हम्ले कर्ता है , कोइ वकिल नहि, कोइ बचाव ,नहि कोइ दलेील नहि, कोइ अद्लत नहि, बस मार्ते चलेजाओ!
    बत्लऐये ऐसा भारत मे कब हुआ है १
    जिस गुज्रात कि बात कि जति है वह भि प्रतिक्रिया थेी उस्को भि शर्म्नाक कहा जयेगा वह भेी किसेी गेीता या रामयन के नम पर नहि एक क्रोध के नाम पर हुआ था !
    अभि कल हेी पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त के शिकार्पुर मे निर्दोश शिया मुस्लिम् को मस्जिद मे घुस्कर फिदायेीन बन्कर ५८ व्यक्तियो कि हत्या कर् देी गयेी ! ऐसा क्यो हुआ क्यो कि सैक्दो सालो से उन्को काफिर्- काफिर कहने के गेीत सुन्नि मुस्लिम् गाते थे ! कुरान् मे मुनाफिक् का जिकर है लेकिन मुस्लिम को कफिर कहने कि बात नहि है! कल् कि घतना कोइ पहलि बार नहि हुयै सैक्दो बार हो चुकि है क्या शिया मुस्लिम मौत के वास्ते बनाये गये है ? उन्के बच्हो से पुचिये उन्कि महिलाओ से पुचिये कि आज के बाद वह कैसे जिन्द्गेी गुजारेन्गे ! क्या वह “पदोसेी” नहेी थे ? जब् गैर मुस्लिमो को मक्का मदेीना से निकाला गया था तब क्या वह पदोसेी नहेी थे ? क्य इसेी को इस्लाम कहते है !
    असम मे जो अदिवासेी मरे गये वह किसेी “गेीता” के सन्देश के करन नहेी मरे गये थे, गेीता के शासन के लिये नहेी मरे गये थे फिर भेी वह निन्द्नेीय कहा जयेगा

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  • January 31, 2015 at 10:55 am
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    ASSALAM O ALAIKUM, MUJHE AAP KA YEH ARTICLE BAHUT BAHUT,TOUCH KIYA DIL KO ,KIYA HAQEET BAYAN KIYA,HAI ALLAH AAP KO AUR LIKHNE KI QUWAT ATA KARE, Aameen

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  • January 31, 2015 at 12:35 pm
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    आप के सारे सवालो का जवाव शायद इस link मे मिल जाय
    https://khabarkikhabar.com/archives/1290
    मेरा सवाल ये है कि अगर हिन्दु अातंकवाद है
    तो हमे ये बताइये

    पाकिस्तान बंगला देश के अल्पसंख्यको ने कितने आतंकी संगठन बनाये है, काशमीरी पंडितो ने कितने मानव बम वनाये है ए

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  • January 31, 2015 at 12:42 pm
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    अगर आप सत्यता जानती तो जो आप ने ऐ लेख, लिखा है उसे लिखने की जरूरत नही पड़ती, लेख में भी आप ने सिर्फ Rss और हिन्दूधर्म को निशाना बना के अपनी लेख लिखी है जिससे आपकी मनो भावना को कोई व्यक्ति को समझ सकता है और लेख में सिर्फ मुसलमानो को एक सच्चा देश भक्त बताया है जैसे लेख आपने नही आजम खान उत्तर प्रदेश के मंत्री ने लिखे हो,आप तैयार हो हमारे साथ चलने को तो मुसलमान,मदर से और आतंकवाद एक दूसरे से जुड़े हुये है में आपको दिखला सकता hoon

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  • January 31, 2015 at 12:43 pm
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    एक परीवार का एक सदस्य खराब हो तो……….
    एक परीवार का एक सदस्य अच्छा हो तो…..

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  • January 31, 2015 at 5:12 pm
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    देश कि विकास कि सोचो

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  • January 31, 2015 at 6:41 pm
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    Jis trah ki tryning rss wale apni surakcha ke liye de rhe hai agar wahi tryning musalman dene lage to use fauran atangwadiyo ki tryning ho rhi hai bol kar sari duniya me badnam kar diya jata ab is desh me jeena hai to islaam nafis karna hoga nhi to ye hum par ilzaam lgate rahenge aur sari duniya ka musalman badnaam hota rhega aur agar hmare muqaddar me badnaam hi hona lukha hai to kiyo na hum islaam ke liye badnaam take ye buto ko poojne wale ye kahe ki ye log to Allah ke manne wale hai aur mohammade mustafa sallallaho alaihwasallam ke ummati hai aur jab hmara jism maut ke liye hi bna hai to kiyo na hum Allah ki rah me apni jano ko Qurbaan kar jisse hmara Rab bhi Razi hoga aur aur mere Aaqa mohammade mustafa sallallaho Alaihwasallam bhi khush honge ki meri ummat ke log mere pyare husain ki sunnat pe amal kar rahe hai
    Allah o Akbar
    Nare takbeer Allah o Akbar

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    • February 1, 2015 at 3:33 pm
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      आर एस एस कितरह केी सन्स्था कोइ भेी खोल सक्ता है . इस्लामेी अतन्क्वाद केी तरह् नहि,

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  • January 31, 2015 at 8:18 pm
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    सामयिक संदर्भ में प्रासंगिक लेख ।

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  • January 31, 2015 at 11:22 pm
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    जब हमारा उद्देश्य ही ये हो कि अमुक वस्तु को हमें गलत ही कहना है तो बात वहीं पर समाप्त होजाती है ! उसके लिये उसको जांचना अध्ययन करना कोइ महत्व नही रखता ! मिसाल के तौर पर ,एक पति अपनी पतनी के हर काम को हेय द्रिष्टि से देखने का आदी था साथ ही उसे अन्डा खाने का शौक भी था एक दिन वह बाज़ार से अन्डा लाया पत्नी ने उसे बना कर दिया तो वह बोलने लगा इसे थोडा जलाकर क्यो नही लायी और पत्नी को मारने लगा ! दूसरे दिन भी बाज़ार से अन्डा लाया पत्नी ने उसकी इक्छानुसार थोडा जला कर बनाया उसे खाने को दिया ! पति फिर नाराज हुआ कि थोडा जलाया क्यों थोडा कच्चा क्यों नही रहने दिया और पत्नी को फ़िर पीटने लगा ! तीसरे दिन पति फिर बज़ार से अन्डा लाया लेकिन उस दिन पतनी ने किसी बच्चे से एक और अन्डा भी मगवा लिया और एक अन्डा थोडा कच्चा और दूसरा थोडा जलाकर बनाइ और पहले कच्चा वाला दी पति आदत के अनुसार बोला थोडा जलाइ क्यों नही पत्नी ने तुरत थोडा जला हुआ अन्डा उसके आगे रख दिया पति लाजवाब होगया लेकिन फिर ये कहते हुये पत्नी को पीटने लगा कि जिस अन्डे को जलाना चाहिये उसे कच्चा और जिसको कच्चा रखना चाहिये उसे जलाया क्यों ????//
    ऐसा होते रहता है ! जीवन की बहुत दिशाओं में मैने ये देखा है ! शहीदों का कफ़न बेचने वाले , उलटा दूसरे सुमुदाय विशेष को गद्दार कहते हैं ,किसी की बेटी का जीवन नरक बना देने वाले बेटी बचाओ की बात करते हैं !इलज़ामधारी-बलात्कारी स्त्रियों की रक्छा की दुहाइ देने वाले मंत्री मंडल में शामिल किये जाते हैं !

    अब यदि कुरान या किसी धर्म ग्रंथ के संबन्ध में बिना जानकारी या आधूरी जानकारी के अधार पर उससे अपनी इक्छानुसार कोइ कुछ भी निष्कर्ष ले तो ये उसकी अपनी मरज़ी तो हो सकती है ! उस धर्म ग्रंथ का तात्पर्य कभी नही हो सकता ! जैसे भ्रूण हत्या का स्रोत कोइ किसी धर्म ग्रंथ को बाताकर अपनी अगयानता का सबूत दे !
    इसी प्रकार लेख के शिर्षक पर भी लोगों का विरोध है जो कोइ अर्थ नही रखता किन्तु उनका लक्छ्य ही विरोध करना है तो करें गे ही ! मुझे उससे कुछ नही लेना ! मैं कमेंट का जवाब भी नही देना चाहती थी किन्तु पबलिशर जी के इक्छा के सम्मान हेतु लिखना पडा ! बहस के लिये बहस करना मेरे अनुसार समय बरबाद करने के अतिरिक्त और कुछ नही ! किन्तु यदि बहुत लोगो का ध्येय ही यही हो तो क्या किया जा सकता है ! हां उनको बधाइ देने में कोइ ग्लानि नही क्योकि कम से कम उन को तो अवश्य प्रसन्नता का आभास होगा !

    रही बात कि किसने क्या देखा है ? मुझे ये स्वीकार करने में कोइ झिझक नही कि मुस्लिमों में भी बहुत सारे लोगों की मान्सिकता सराहनिय नही लेकिन यह भी खर्रा सच है कि हर धर्म के अनुयायियों में ऐसे लोग मिलते हैं ! देखने को मैने भी बहुत कुछ देखा है कि एक हिन्दू मुस्लिम को हज करने हेतु रूप्या देता है तो एक हाजी अपनी ज़मीन मंदिर बनाने हेतु दान कर देता है लेकिन ये भी देखा है कि लखनऊ में सर पर टोपी लगाये दाढी रखे बिल्कुल मुस्लिम ड्रेस में कुछ लोग शिया समुदाय के जलूस पर पत्थर फ़ेंकते हैं पुलिस के गिरिफ़तारी के बाद भेद खुलता है कि वो मुस्लिम नही दूसरे धर्म के लोग है , मन्दिर में गोमांस फ़ेंकने वाला अभी हाल ही में पकडा गया है गिरिफ़तारी के बाद अपना जुर्म कबूल करते हुये वह बताता है कि वह हिन्दू समुदाय का ही है ! पुलिस की नज़र में दंगा फ़ैलाने वाला , कहीं सम्मानित किया जाता है ! बहुत सारे उदाहरण प्रस्तुत किये जासकते हैं ऐसा कौन और क्यों करता है बताने की आवशयकता नही है ! लेकिन इसका अर्थ ये हर्गिज़ नही कि कोइ किसी पूरे समुदाय और धर्म पर उंगुली उठाने का दुस्साहस करे ! मुझे ये स्वीकार है कि हमारे हिन्दू समाज में आज भी बहुत अधिक महान व पवित्र आत्मायें रहती हैं जिनका उदाहरण भी मिलना मुश्किल है जो दूसरों की पीडा और ब्यथा को बढकर अपनाते हुये दुखों को दूर करने हेतु हरसंभव प्रयास में अग्रसर रहते हैं ! उनके कारण हमारे समाज में शान्ति , समरिद्धि है देश की अखंडता भी बनी हुइ है ! मैं उनकी पवित्रता और महानता को सलाम करती हूं ! किन्तु किसी भी समुदाय में जिसका उद्देश्य ही नफ़रत , इर्ष्या हो उसे सम्मानित नज़रों से देखना मेरी प्रकिर्ति और प्रविर्ति से दूर की बात है !हां हीन भावना से भी नही देखती कि पता नही कब परमेशवर उसके दिल को प्रकाशमान कर दे !

    आखिर में परमेश्वर हम सबको मेलमिलाप , शान्ति के साथ सत्यमार्ग पर चलने की सदबुद्धि दे यही मेरी दुआ है और कामना भी ! जय हिन्द !

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    • February 1, 2015 at 7:23 am
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      सचाई से आंखे चुरा कर भागता बेहद स्तरहीन लेख ?? नक्सलवाद और धार्मिक इस्लामी आतंकवाद का सीधा-2 फर्क मालूम नही ?? आदिवासियो की बेहद बुनियाडो जरूरतो को पूरा करने वाले जंगलो और जमीन को पूंजीपटियो के हवाले करने की वजह से जन्मा है नक्सलवाद बेशक अब इसकी कमान गुंडो के हाथो मे है पर इस्लामी आतंकवाद के पनपने की वजह ?? कोई मुस्लिम मूह नही खोलेगा ??

      रोज आई एस किसी ना किसी बेगुनाह का गला काट रहा है पर पूरी साइट पर अफ़ज़ल साहब और हयात भाई के अलावा किसी के मूह से उनके खिलाफ दो बोल नही फूटते……कही किसी की कोई नन्ही सी भी कमी नज़र आ जाये बस सारे लग जाते है उसके साथ अपने इस्लामी आतंकवाद का बचाव करने ??……माफी चाहते है मगर बंद दिमाग वालो से डिस्कसन करके उनका समय बर्बाद करने मे हमे कोई दिलचस्पी नही है.

      कौन सा परमेश्वर और किस तरह करवायेगा मेलमिलाप जब मुस्लिमो की निगाह मे (और उनके धर्मग्रंथो मे) गैर मुस्लिमो का या तो कत्ल करो और या उनको मुसलमान बना लो ?? शान्ति से रह ही नही सकते ??

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    • February 1, 2015 at 11:43 am
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      परम आदर्निया बहन् नुजहत जेी, कोई पत्नेी जेी भेी अप्ने पति जेी से यह कभेी नहेी कहेगेी केी आज तुम्ने १०० रुपये हेी क्यो कमा कर् लाये ११० रुपये भेी ला सक्ते थे ? एक घन्ता और मेह्नत क्यो नहेी केी ?
      क्योकि पत्नेी जेी कम्जोर है !
      पतेी जि तो तकत्वार होते हेी है
      लेकिन इस्लाम तो ताकत्वर है , उस्केी आलोचना करने से आप्को तक्लेीफ नहेी होनेी चहिये ! आप्को तो खुश होना चहिये कि ताकत्वर् केी आलोच्ना कर्ने कोइ तो साम्ने आया ? हमारेी आलोच्ना उस ” अन्दे” तरह नहेी है कि कुरान का नाम कुरान क्यो है” करन” क्यो नहि या ” कन” क्यो नहि !
      अगर हमारेमुस्लिम बन्धुओ मे” कुच् लाल्” इस्लाम् केी नितियो कि “जरा सेी ” भेी आलोचना करने का ” रास्ता ” खोजते तो हम्को भेी यह् तक्लेीफ करने केी नेीयत भेी नहेी होतेी ?
      लेकिन जब यह कहा जाता है कि इस्लाम “सम्पुर्न” है उस्मे कोई दोश नहेी है , तब हम्को जरा सेी कोशिश इस मुद्दे पर करनेी होतेी है !
      इस्लाम् तो “मुल केी भुल है ” धर्म से इस्का कोई सम्बन्ध भेी नहेी है!
      अगर मोदेी जेी ने किसेी केी” बेतेी ” को नरक बना दिया तो “आयशा जेी ” को “भरेी जवानेी ” मे विधवा बनाने केी तक्लेीफ किस्ने केी थेी ?
      जो अप्नेी पत्नेी जेी एक पल मे हेी तलाक तलाक तलाक के कोदे मार्ने का रास्ता कुरान के विरुद्ध दे गये ! क्या उन्को हेीरो कहाजाना चाहिये ?
      हम मोदेी जेी से भेी यहेी चह्ते है कि वह अप्नि पत्नेी जेी को अप्ने साथ रखे ! हर रज्नैतिक दल मे बुरे और अच्हे व्यकति भेी होते है मोदेी जि के मन्त्र मन्दल मे अनेक बुरे व्यक्तेी भि है !
      हम आप्केी इस बात से सहमत है कि हर समुदाय मे बुरे व्यक्ति भेी होते है !
      लेकिन यहुदियो को हमेशा कोई समुदाय बुरा कहे वह भेी थेीक् नहेी है !
      “सिर्फ्” इश्वर से हेी कामना केी जाये मेल मिलाप् वह् करवा दे ! अप्ने कर्तव्य से भागना होगा ! क्योकि वह् “चोते मोते ” कार्य् हम इन्सानो के लिये हेी काफेी है ! उस्को तक्लेीफ क्यो देी जाये !
      सम्भव है कि आप्को हमार्र्र्रे विचारो से तक्लेीफ हुई हो !
      उस्के लिये हम दिल से माफेी भेी चाहेन्गे !
      फिर भेी अपनेी बात रख्ने कि स्वतन्त्र्ता भेी आप सभेी से चहेन्गे !
      अप्ने देश मे लोक्तन्त्र है सभेी को हर तरह के विचारो को पेशकरने केी आजादेी होनेी चाहिये !

      Reply
      • February 1, 2015 at 7:01 pm
        Permalink

        राष्ट्रभक्त” नाथूराम गोडसे पिस्तौल
        चलाना जानता था,
        लेकिन ग़ुलामी से ऐसा प्रेम
        था कि किसी अंग्रेज़ को एक कंकड़ भी फेंककर
        नहीं मारा।
        जब देश आज़ाद
        हो गया तो उसका ”हिंदुत्ववादी शौर्य” जगा और
        उसने एक ऐसे निहत्थे बूढ़े की छाती पर तीन
        गोलियाँ दाग़ दीं, जो सुबह-शाम रामधुन
        गाता था।
        आज जो ख़ुद को रामज़ादे कह रहे हैं, वे दरअसल,
        ”नाथूरामज़ादे” हैं। कोई शक..!

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        • February 1, 2015 at 9:10 pm
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          बिलकुल सहमत ! वहाब चिस्तीजी !

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        • February 1, 2015 at 9:36 pm
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          सही कहा वहाब साहब इसी तरह उन लोगो की भी निंदा कीजिये जो एक बुरे गुंडे बदमाश मुस्लिम को भी गांधी से ऊपर कहते थे मगर वायसराय का नाम नहीं लेते थे वो शायर जो सारी दुनिया में पुरे भारत में इस्लाम के झंडे गाड़ना चाहते थे मगर अंग्रेज़ो के खिलाफ एक नज़्म लिखने की हिम्मत नहीं करते थे इन्ही के वंशज पाकिस्तान में आज भी नास्तिक चीनियो को अपना पक्का दोस्त और इस्लाम का सम्मान करने वाले ईश्वर को माने वाले हिन्दुओ को काफ़िर कहते हे

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      • February 1, 2015 at 9:10 pm
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        यार नाम तो सही लिखो आप !! छद्म नाम के इंसान किस श्रेड़ी मे आते हैं पता होगा । ? इस्लाम धर्म नहीं वे ऑफ लाइफ है ।

        Reply
  • February 1, 2015 at 8:47 pm
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    बहुत ही उम्दा लेख आपने लिखा है मोहतरमा जी । भटके हुवे लोग जरूर आरोप उल्टे लगा लें मगर जो लोग कुरान की एक लाइन भी नहीं जानते वो कमेंट करने चले आते हैं ? यह गलत है । आपका प्रयास बहुत ही उम्दा है । लिखते रहिए और समाज को जागरूक करते रहिए ॥

    Reply
  • February 1, 2015 at 9:16 pm
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    क्या आप ये दावा कर सकते हो की आप कुरआन की एक लाइन भी जानते हो ? तो जाकर उन्हें बताओ जो कुरआन में जो है ही नहीं उसे कुरआन की लाइन मानकर,या फिर खुद को सच्चे कुरआन की लाइनों को ज्यादा समझने वालों में गिना कर एक दुसरे की ही हत्या कर रहे हैं ! जब की इस विवाद में मुसलमानों के अलावा और कोई है ही नहीं !!

    Reply
  • February 1, 2015 at 11:37 pm
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    एक सवाल इस साइट पर मौजूद कुरान के उन जानकारो से जिनहोने कुरान केी कम से कम एक लाईन पढी हो ः)…… अल्लाह किस मुसलमान को जन्नत देगा
    1-मरने वाले बे-गुनाह मुसलमान को (जो किसी बम धमाके मे किसी दूसरे मुसलमान के हाथो मारा गया) ??
    2-बम धमाके करके बेगुनाह मुसलमानो की जान लेने वाले मुसलमान को ??
    3या फिर बाकी उन बेगुनाहो की हत्याओ पर जुबां सिल कर चुप रहने वाले मुसलमानो को जो मुस्लिम भाईचारे की लम्बी-2 डींगे हांकते हुए नही थकते ??

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    • February 2, 2015 at 10:35 am
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      अरे भाई है कोई इस साइट पर ऐसा जिसने क़ुरान की एक भी लाइन पढी हो ?? एक जरा से सवाल पर सारे बगले झांक गये:)……( हयात भाई और अफ़ज़ल साहब से कुछ देर चुप रहने की गुजारिश है)….

      वैसे एक बात तो है कि धार्मिक रूप से कट्टर मुसलमान को खामोश करना हो तो उससे इस्लाम के बारे मे पूछना शुरु कर दीजिये, पता नही क्यो सिट्टी-पिटटी गुम हो जाती है:) वैसे दूसरो के बारे मे 25 घंटे बोल सकते है !!…..जो भी साहेबां आये पहले हमारे सवाल का जवाब दे उसके बाद लम्बी चौड़ी कहानी सुनाये…शुक्रिया

      Reply
      • February 2, 2015 at 11:34 am
        Permalink

        आदर्नेीय् श्रेी शरद जेी, कल्पित जनन्त मे तो जगह् किसेी को भेी नहेी मिल्नेी है ! फिरभेी कुरान के अनुसार मुहमम्द जेी को मन्ते हुये कल्पि अल्लाह् मानेन्गे तो कल्पित जनन्त मिल्ने केी पुरेी आशा रहेगेी !
        कल्पित अल्लाह इत्ना जुल्मेी है कि वह् मन्देला , लिन्कन गान्धेी मदर तेरेसा आदि जैसो को कल्पित जनन्त पर विचार भेी नहेी करेगा !
        बिना निकाह वालेी मुस्लिम”जवान ” कन्याओ के मरने के बाद कल्पित जनन्त मे क्या सुख मिलेगा उस पर् भेी इस्लाम मौन रहता है !
        हम चाहेन्गे कि मुस्लिम् बन्धु इस पर् भेी अपना जवाब” सबुत” सहित दे ,

        Reply
        • February 2, 2015 at 11:51 am
          Permalink

          राज भाई कुछ देर शान्ति बनाये रखिये क्योकि हम भी देखना चाहते है कि आखिर इनके धर्मग्रंथो और इनकी दिमागी सोच के भीतर है क्या ?? बात करते है कि दूसरो को क़ुरान की एक भी लाइन नही पता इसलिये वे नासमझी मे लिखते है ?? और खुद को क़ुरान का मालूम होने पर एक लाइन का जवाब देने मे पसीने आ रहे है ?? तौबा-तौबा….

          ये है असलियत ??पता नही खुद ने कभी क़ुरान देखी भी है या नही ?? पढी होती तो इतना सन्नाटा नही रहता ?? सही गलत कुछ तो जवाब आता ??

          Reply
  • February 2, 2015 at 8:55 am
    Permalink

    डिअर नुजहत जी,
    मैं कोई बहुत बड़ा राइटर नहीं हूँ ना ही आलोचक. परन्तु ये जरूर कहना चाहूंगा की लिखने से पहले कुछ शोध और जानकारी होनी बहुत आवश्यक है.
    आपने टाइप करना शुरु किया और जो फितूर आपके दिमाग में था उसे टाइप कर डाला.
    चलो आपकी बातें मान भी लेते हैं तो कभी ये सोचा है की ये पक्षपात क्यों होता है मुसलमानो के साथ?
    क्यूंकि मुसलमानो ने ही इस अवस्था को जन्म दिया है. ये भेदभाव hamesha से नहीं रहा है बल्कि तब से शुरु हुआ है जब इस्लाम के नाम पर आतंक फफैलाया जाने लगा. दूसरे धर्मो के prati नफरत फैलाया जाने लगा.
    और इसके जजिम्मेदार आप जैसे लोग हैं जो इस तरह के आर्टिकल से उस कुकृत्य को जस्टिफाई करने में लगे होते हैं और कहीं ना कहीं ये साबित करना चाहते हैं की हमारे साथ भेदभाव हो रहा है इसलिए हम अलगाववाद के रस्ते पर हैं.

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  • February 2, 2015 at 1:22 pm
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    अच्छा लेखा है, लेकिन जिन लोगो की नजरो मे झूठ का पर्दा पड़ा है, उन्हे तो अपराधियों को दिये जाने वाला दंड भी आतंकवाद लगेगा. ज़ुल्मो सितम से लड़ना आतंकवाद नही. लेकिन जालिम कभी अपनी हरकतो को जुल्म नही मानता.

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  • February 2, 2015 at 4:26 pm
    Permalink

    तो पाठक मित्रो अब यह साबित हो रहा है की इस कम से कम इस साइट पर किसी को भी क़ुरान की एक भी लाइन का ग्यान नही है इसलिये आगे से किसी भी डिस्कसन मे अगर कोई क़ुरान से किसी संदर्भ का हवाला देता है तो उस पर ध्यान ना दिया जाये….सूचना समाप्त !!

    Reply
  • February 2, 2015 at 4:38 pm
    Permalink

    हमारे एक मित्र का मानना है कि एक कोशिश और की जाये और शुतुरमुर्ग की तरह समस्या देख कर रेट मे गर्दन घुसा कर कॉमेंट देने से डरने वाले तीसरे वाले ग्रूप के दिमाग पर जोर ना डाला जाये क्योकि अगर वह अपना दिमाग इस्तेमाल करना जानता होता तो कुछ तो जवाब देता:)
    इसलिये उनकी बात को सर माथे रखते हुए हम उदाहरण सहित पहले दो ग्रूप यानि मरने वाले मुस्लिम और मारने वाले मुस्लिम के लिये अपना सवाल फिर से दोहरा रहे है……

    घटना –> दो दिन पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जुमे की नमाज के दौरान खचाखच भरी एक शिया मस्जिद पर शक्तिशाली विस्फोट में कम से कम 61 लोगों की मौत हो गई, जबकि 55 से ज्यादा घायल हो गए

    सवाल्–> 61 मरने वाले मुस्लिम और उन 61 को मारने वाले मुस्लिम दोनो अल्लाह के सामने खड़े है, बताइये अल्लाह किसको जन्नत देगा 🙂
    1-मरने वाले शियाओ को ??…..या…..
    2-मारने वाले सुन्नियो को ??

    Reply
    • February 2, 2015 at 7:55 pm
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      बगैर कल्पित कुरानेी अल्लाह् केी ईच्ह के किसेी केी मौत भेी नहेी आतेी है उसेी केी ईच्हा से बम् से उन्केी मौत हुई होगेी !

      Reply
      • February 2, 2015 at 8:05 pm
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        राज जी जवाब पहली बात तो ये कि हमारे सवाल का कोई जवाब आपके पास भी नही है, और अगर है भी तो इनके अल्ला सल्ल क़ुरान हदीस वाले तर्को पर सही नही उतरेगा…अभी किसी हिन्दू, सीख या ईसाई से पूछते तो बिना अपने धर्मग्रंथो की तरफ देखे वो 1 सेकेण्ड लगाये बिना बता देता कि जन्नत किसको मिलेगी !!…..

        मगर यहा तो मारने वालो को भी जन्नत का जुगाड़ करवाना है क्योकि वे मुसलमान जो ठहरे इसीलिये सबकी जुबाने तालू से चिपकी हुई है….कही किसी ने कह दिया कि मारने वाले को जन्नत नही मिलेगी तो बाकी उसका बेंड बजा देंगे और खुल कर इनमे से कोई मारने वाले को जन्नत की बात कहने की गलती करेगा नही क्योकि फिर पूरे इस्लाम पर शान्ति का मजहब होने का सवाल लग जायेगा :)…..

        राज भाई ये हमारे सवाल है और इनके जवाब जो इमानदारेी से दे सकते है उनको हम बुरा बनने नही देंगे इसीलिये उनसे शांत रहने की रिक्वेस्ट की हुई है !!

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        • February 2, 2015 at 11:36 pm
          Permalink

          वैसे लेखिका जेी को चहिये था कि वह इन बातो का जवाब् देतेी या किसेी से दिल्वातेी !
          हमारेी ओर से तो स्वर्ग- नरक, जन्नत- जहन्नुम् आदि कोइ विशेश स्थान नहेी होते !
          जो जैसा कर्म करेगा वैसा हेी फल उस्को भोगने को अवश्य् मिल सकेगा !
          सुख विशेश को स्वर्ग् कहा जा सक्ता है और दुख विशेश् को नरक ,

          हमारे मुस्लिम बन्धु तो यहेी कहेन्गे कि अल्लाह केी बाते अल्लाह हेी जाने !
          वहेी गालिब ताकत्वर है वह कुच भेी कर् सक्ता है ! बस, हम यहेी दुआ करेन्गे कि काफिर् को कभेी जनन्त् नसेीब न हो ! जो कुरानेी अल्लाह ने वादा किया है
          और जिस्ने कल्मा पध् लिया वह तो मुस्लिम हो गया वह हमारेी जाति बिरादरेी का भेी है इसलामेीभाई चारा उस्से है !

          Reply
        • February 3, 2015 at 7:30 am
          Permalink

          अमा शरद भाई आप भी कहाँ सर मार रहे हैं.
          इन्हे बस कुरान कुरान aur इस्लाम इस्लाम चिल्लाने के अलावा कुछ भी नहीं आता.
          आप कुरान पढ़ने की बात कर रहे हो, मुझे तो लगता है इन्होने शायद ही कभी कुरान देखी हो.

          Reply
          • February 3, 2015 at 10:21 am
            Permalink

            तेजस भाई यही तो हम साबित कर रहे है की “कम से कम इस साइट के” मुसलमानो ने तो क़ुरान ना कभी देखी है और ना ही पढी ही है इसीलिये वे बार-2 दूसरो से कहते है “क़ुरान पढ़ो”…..यहा क़ुरान पढ़ो का मतलाम है कि जब आप पढोगे तो क़ुरान के बारे मे हमे भी बताओगे !!

            बड़ी दिली तमन्ना इन्के दिल मे दबी हुई है आखिरात से पहले क़ुरान को जानने की (पर वक़्त की कमी के चलते क़ुरान पढ ही नही पाते क्योकि बतौर मुसलमान सारा वक़्त और एनर्जी तो गैर मुसलमानो के धार्मिक और सामाजिक कमियो को ढूंढने मे ही खत्म हो जाती है:) .हाहाहह

  • February 2, 2015 at 11:44 pm
    Permalink

    वैसे भेी कुरान के अनुसार एक मुसल्मान् का किसेी मुस्लिम केी हत्या कर्ना बहुत बदा जुर्म है , सिर्फ मुस्लिम हेी तो इन्सान होते है वह किसेी भेी जेीव् केी हत्या कर्ने से रोकने कि बात नहेी कर्ता है,{” क्योकि उस्से कुरानेी अल्लाह् को बेहद तक्लेीफ होतेी है “}

    Reply

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