मत क़त्ल करो आवाजों को!

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मशहूर सूफी कव्वाल अमजद साबरी (45) की बुधवार के दिन अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। चश्मदीदों के मुताबिक अमजद गोलियों से बुरी तरह घायल हो गए थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक लियाकताबाद इलाके में अज्ञात लोगों ने साबरी की कार पर हमला करके उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही उनकी मौत हो गई। अब्बासी शहीद अस्पताल ने अमजद की मौत की पुष्टि की है। इस हमले के वक्त अमजद के भाई भी कार में सवार थें और गोली लगने से उनकी भी मौत हो गई। 45 साल के अमजद मशहूर साबरी ब्रदर्स के सदस्य थे। अमजद के परिवार के मुताबिक उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही थी। रमजान के पवित्र महीने में हुई इस घटना से संगीत की दुनिया शोक में डूब गई है। चिश्ती परंपरा के सूफी गायक साबरी ब्रदर्ज का ताल्लुक पाकिस्तान से है और इन्होंने कव्वाली को पूरी दुनिया में एक नई पहचान दिलाने में अहम रोल अदा किया।मॉडर्न जमाने के श्रोताओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए अमजद साबरी अपनी कव्वाली को कोक स्टूडियो तक ले जाने की मुहिम में जुटे थे। कोक स्टूडियो के आगामी सीजन को लेकर साबरी बेहद उत्साहित भी थे। साबरी मशहूर गायक राहत फतेह अली खान के साथ कव्वाली गाने वाले थे। बताया जा रहा है कि कोक स्टूडियो 9 के लिए लाइनअप का खुलासा भी आज ही होने वाला था, लेकिन अब साबरी की मौत के बाद इसे टाल दिया गया है।

अहमद फराज की एक नज़्म अमजद साबरी को समर्पित !

मत क़त्ल करो आवाजों को!

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तुम अपने अकीदों के नेजे

हर दिल में उतारे जाते हो

हम लोग मुहब्बत वाले हैं

तुम खंजर क्यों लहराते हो

इस शहर में नग्मे बहने दो

बस्ती में हमें भी रहने दो

हम पालनहार हैं फूलों के

हम खुशबू के रखवाले हैं

तुम किस का लहू पीने आए हो

हम प्यार सिखाने वाले हैं

इस शहर में फिर क्या देखोगे

जब हर्फ़ यहाँ मर जाएगा

जब तेग पे ले कट जाएगी

जब शेर सफर कर जाएगा

जब क़त्ल हुआ सुर साजों का

जब अकाल पड़ा आवाजों का

जब शहर खंडहर बन जाएगा

फिर किस पे संग उठाओ गे

अपने चेहरे आइनो में

जब देखोगे डर जाओगे

(अहमद फ़राज़)

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One thought on “मत क़त्ल करो आवाजों को!

  • June 28, 2016 at 9:07 am
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    साबरी साहब को बस इतना जानता हु की पिछले दिनों जब मार्च में छिछले भारत पाक क्रिकेट मैच हो रहे था सभी चेनलो ने गंद मचाई हुई थी तब पाकिस्तान में एक चैनल पर मैच से पहले ये आये और शायद उमर शरीफ और बासित अली की पीठ थोक रहे थे की भाई फला इन्डियन चैनल पर आपने इन्डियन पैनल की घटिया बातो का बहुत अच्छा और मुंहतोड़ ” घटिया ” जवाब दिया था वाह अफ़सोस तब साबरी साहब को क्या पता था की बहुत जल्द भारतीय उपमहाद्वीप का यही घटियापन उनकी भी जान ले लेने ही वाला हे

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