भारत में सेकुलरिज्म!

 

secularism

लेख – हम आज जिस भारत में रहते हैं वहां एक विचित्र प्रकार की प्रजाति पायी जाती है, सेक्युलर!

सेकुलरिज्म शब्द सबसे पहले १८५१ में ब्रिटिश लेखक जॉर्ज जैकब होल्योंके द्वारा इस्तेमाल किया गया था जो कालांतर में एपिक्युरुस और मार्कस औरेलियस जैसे ग्रीक विचारकों के द्वारा परिभाषित होते हुए सारे संसार में सफल लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त बन गया है! भारत में इसे सबसे पहले महाराजा रणजीत सिंह ने १९वि शताब्दी के पूर्वार्ध में सफलतापूर्वक पंजाब में अपनाया था एक दरबार कि स्थापना कर जिसके प्रमुख होते थे एक सिख, एक मुस्लिम और एक हिन्दू!

अब मैं अपने पहले वाक्य पर आता हूँ! मैंने विचित्र इसलिए कहा है कि आज ये मुक़द्दस शब्द एक गाली बन चूका है! आज सेकुलरिज्म का मतलब रह गया है तुष्टिकरण! हमारे संविधान निर्माताओं ने सपने में भी ये नहीं सोचा होगा कि जिस शब्द को वो एक आधार बना रहे हैं वो विकृत होते होते खुद आधारहीन हो जायेगा! आज सब से ज्यादा सेक्युलर वो माना जाता है जो इफ्तार पार्टीज में सब से ज्यादा गोल टोपी पहन कर सब से सही तरीके से दुआ मांग सके भले ही उस के बाद वो अपने वोट बैंक कि राजनीती के लिए इन्ही गोल टोपी वालों कि लाशें बिछाने का ही प्रबंध क्यों न करने लग जाये! आज सेक्युलर वो है जो इसराइल के विरोध में छाती कूटे और ISIS पर खामोश रहे! आज सेक्युलर वो है जो धर्म आधारित जनगणना करा के सेना में भी धर्म के नाम पर फुट डाले! आज सेक्युलर वो है जो भारत के प्रधानमंत्री को जितनी गन्दी गालियां दे या जितने गिरे हुए शब्दों से सम्बोधित करे! आज सेक्युलर वो है जो भारत के सनातन धर्म में कीड़े निकले और इसे गलत ठहराने का प्रयास करे! आज सेक्युलर वो है जो गोधरा दंगों को कम्युनल बताये और आसाम दंगो को बाहरी बनाम स्थानीय लोगों का संघर्ष! आज सेक्युलर वो है जो मुसलमानो के पक्ष में बोल कर, उनकी सहानुभूति बटोर कर सत्ता का सुख भोगे और फिर उन्हें हिन्दुओं से खतरा बता कर बेवकूफ बनाता रहे!

मुझे आपके ये सब करने से कोई समस्या नहीं है! आप अपना वोट बैंक बढ़ाओ, अपनी राजनीती चमकाओ, अपना फायदा बनाओ! लेकिन उस के आड़ में समाज में वैमनस्यता मत फैलाओ, किसी समुदाय में दूसरे समुदाय के प्रति डर और विद्वेस कि भावना मत भड़काओ, एक समुदाय से दूसरे समुदाय के लोगो के सर न कटवाओ! आप का बोया हुआ ये विष किस हद तक प्रलयंकारी हो सकता है शायद आपको अंदाजा नहीं या है भी तो आप उसे अनदेखा कर रहे हैं अपने क्षणिक स्वार्थ के लिए! आपने मुसलमानो कि इतनी तरफदारी की कि हिन्दुओं में उनके प्रति ईर्ष्या भड़कने लगी और जिसे कुछ संगठनो ने हवा दे कर द्वेष बना दिया! आपने उस द्वेष को भुनाने के लिए पुनः तरफदारी कि और इस तरह ये बढ़ता गया! और बढ़ते बढ़ते इतना बढ़ गया कि आज छोटी छोटी सी बात पर ये समुदाय एक दूसरे के खून के प्यासे हो उठते हैं! ये इतना बढ़ गया है कि आज किसी मंदिर में गाय का मांस या किसी मस्जिद में सुवर का मांस मिलने पर ये बाद में पता लगाया जाता है कि ये किसकी करतूत है जबकि और दो चार लाशें पहले बिछा दी जाती हैं! मुस्लमान कि बस्ती से दुर्गा पूजा का जुलुस या हिन्दू कि बस्ती से मुहर्रम का जुलुस निकलने पर आपस में मर पिट और दंगे हो जाते हैं! किसी मौलाना के एक बयां पर कारसेवकों को ट्रेन में जिन्दा जल दिया जाता है और फिर उस का बदला लेने के लिए निर्दोष बच्चों, औरतों और बूढ़ों तक का कत्लेआम कर दिया जाता है!

आप जब तक किसी समुदाय विशेष कि तरफदारी करेंगे, अलग समुदायों के लिए अलग कानून बनाएंगे, समुदाय विशेष को कोई विशेष सुविधा देंगे तब तक ये चलता ही रहेगा! आप अलगाववादियों के नाम पर रोना रोते हैं जबकि आपके इसी व्यवस्था ने उन अलगाववादियों को उनका बारूद मुहैया कराया है और कराता रहेगा! ये लकीर खींचने का काम आपने किया है! आपने सरकारी प्रतिवेदनों में धर्म के लिए एक कॉलम दिया! क्या भारतीय होना काफी नहीं था.? आपने धर्म के आधार पर देश बांटी और दिल भी बांटे! क्या सारे धर्म के लोग एक साथ नहीं रह सकते थे.? आपने हिन्दू को हिन्दू और मुस्लमान को मुस्लमान बताया! क्या वो इंसान नहीं हो सकते थे.? आप ने धर्म आधारित राजनीती शुरू कि! क्या वो मुद्दे आधारित नहीं हो सकते थे.? आपने मुसलमानो को वोट बैंक बनाया! क्या वो मुख्यधारा का हिस्सा नहीं हो सकते थे.? और इतना सब कुछ कर के भी आपने मुसलमानो का क्या भला किया.? कुछ भी नहीं, बस दो चार मुस्लमान नेता पैदा कर दिए जो आपके ही अजेंडे को हवा दे रहे हैं बजाये कि मुसलमानो के लिए कुछ करते! आप सेक्युलर बनते हैं जबकि आप तो आज तक इसका अर्थ ही नहीं समझ पाये!

आज अगर कोई सेक्युलर है तो हमारे लेखक जो हिंदी और उर्दू को इस तरह से मिला कर लिखते हैं कि आप उन्हें उस वाक्य के भावार्थ और खूबसूरती कि बलि लिए बिना अलग कर ही नहीं सकते! आप इस से सिख सकते हो कि लोगों को आपस में मिलाओ पूरा देश सेक्युलर हो जायेगा नहीं तो इस शब्द का सेकुलरिज्म खुद खतरे में पड़ा हुआ दिख रहा है! कल को कहीं ये शब्द किसी एक समुदाय के लिए पक्षपात का प्रतिक न बन जाये!

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52 thoughts on “भारत में सेकुलरिज्म!

  • July 7, 2015 at 10:48 am
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    सेक़ूलेरिज़्म को पश्चिमी सिद्धांत बता कर अभारतीय बताने वाले हिंदुत्ववादी अब देश को सेक़ूलेरिज़्म का पाठ पढ़ाएँगे? सेक़ूलेरिज़्म टोपी या तिलक नही है. ना ही 3 हिंदू, 1 मुसलमान, 1 सिख वाली संरचना है. ना ही ये आस्था है, ना ही नास्तिकता. जावेद अख़्तर का ये साक्षात्कार सुनो.

    https://www.youtube.com/watch?v=IN-D-_-Z98U

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    • July 7, 2015 at 5:26 pm
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      जाकिर साहब आपको गुस्सा किस बात से है ये समझ तो नहीँ आया लेकिन ऐसा लगा कि आप मुझे संघी समझ रहे हैं! तो आपको बता दूँ कि संघी और तब्लिगि के अलावे भी लोग हुआ करते हैं! संघ से सम्बन्धित अच्छी बातें कह देने से कोई संघी नहीँ हो जाता! और यहाँ ना तो मैं संघ की तरफदारी कर रहा हूँ ना ही किसी के खिलाफ़ लिख रहा हूँ!
      और इस लेख में ऐसा क्या पाया आपने जिस पर आपत्ति जाता रहे?

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    • July 7, 2015 at 5:33 pm
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      एक हिन्दू, एक मुस्लिम और एक सिख भारत में सेकुलरिज्म के आने की जानकारी है ना कि परिभाषा! मैने परिभाषा देने की कोशिश भी नहीँ की है क्योंकि ये मुक़द्दस शब्द सभी परिभाषाओं से परे है! इसमे लोकतंत्र की आत्मा बसती है!
      और आप चाहे माने या ना माने सेकुलरिज्म का सिद्धांत पश्चिम से ही आया है!

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    • July 8, 2015 at 2:17 pm
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      जाकिर साहब आपको गुस्सा किस बात से है ये समझ तो नहीँ आया लेकिन ऐसा लगा कि आप मुझे संघी समझ रहे हैं! तो आपको बता दूँ कि संघी और तब्लिगि के अलावे भी लोग हुआ करते हैं! संघ से सम्बन्धित अच्छी बातें कह देने से कोई संघी नहीँ हो जाता! और यहाँ ना तो मैं संघ की तरफदारी कर रहा हूँ ना ही किसी के खिलाफ़ लिख रहा हूँ!
      और इस लेख में ऐसा क्या पाया आपने जिस पर आपत्ति जाता रहे?

      Reply
    • July 8, 2015 at 2:38 pm
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      जाकिर साहब आपको गुस्सा किस बात से है ये समझ तो नहीँ आया लेकिन ऐसा लगा कि आप मुझे संघी समझ रहे हैं! तो आपको बता दूँ कि संघी और तब्लिगि के अलावे भी लोग हुआ करते हैं! संघ से सम्बन्धित अच्छी बातें कह देने से कोई संघी नहीँ हो जाता! और यहाँ ना तो मैं संघ की तरफदारी कर रहा हूँ ना ही किसी के खिलाफ़ लिख रहा हूँ!
      और इस लेख में ऐसा क्या पाया आपने जिस पर आपत्ति जाता रहे?

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  • July 7, 2015 at 10:57 am
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    सारे भारतीय मुसलमानो के पूर्वजों को हिंदू बताने वाले लोग, देश के पहले प्रधानमंत्री के पुरखो को मुसलमान बता कर उनका मज़ाक बनाने वाले, क्या सोच कर घर वापसी का अभियान चला रहे थे? घर वापसी, से खून नही बदलता.

    अभी हाल ही मे, पाकिस्तानी संसद मे एक हिंदू सांसद का आक्रोश यू ट्यूब पे बड़े चाव से देखा होगा? लेकिन याद रखना कि उस कट्टरपंथी पाकिस्तान ने भी कभी जिन्ना या इकबाल के हिंदू पुरखो की वजह से उनका मज़ाक नही बनाया.

    मेरा एक हिंदू दोस्त बोलता है कि ये संघी प्रजाति, हिंदुओं पे धब्बा है. हिंदू सिर्फ़ संघी ही नही होते, सभ्य और तमीज़दार भी होते हैं.

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    • July 7, 2015 at 5:50 pm
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      हरेक वो आदमी या संगठन जो इस देश की गरिमा के खिलाफ़ काम करता है वो गलत है और उसकी निंदा होनी चाहिये! चाहे वो भारत के किसी भी सांविधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को गालियाँ देने वाला हो या पूर्व प्रधानमंत्री के लिये अभद्र सम्बोधन या पुरखों की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करने वाला हो! बहरहाल आलोचना का अधिकार बरकरार रहना चाहिये! मोदी चाहे जितना भी गलत हो लेकिन अभी वो भारत का प्रधानमंत्री है भारत की जनता के द्वारा निर्वाचित! आप उसे गालियाँ देना सिर्फ इसलिये उचित नहीँ ठहरा सकते क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी संघ वाले गाली देते थे!

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    • July 7, 2015 at 7:29 pm
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      वो मुस्लिम जो अपनि हि मस्जिदो को जला सकते हो उनसे सेकुलर होने कि उम्मिद कि जा सकति है क्या ????
      मै शिया सुन्नि कि बात नहि कर रहा हु
      पर मैने ऐसे हि मुस्लिम को देखा है जिस्ने अप्नि हि मस्जिद को घासलेत से जलाने का प्रयास किय है
      नमाजियो को उदाने वाले नमाजियो पहले मुसलिम तो बन लो फिर सेकुलर भि बन लेना
      एक नार्मल हिन्दु सेकुलर हि होता है पर आज का महोल उसे संघी विचार धारा कि तरफ जाने को विवश कर रहा है

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  • July 7, 2015 at 12:46 pm
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    जिस तरह से बहुत से नौजवान मुस्लिम ओवेसियो बुखारियो आज़मखानो अजीज बर्नियो आदि की बातो से इम्प्रेस होते रहते हे भले ही वो दिल के बुरे ना हो वैसे ही वैसे ही तेज़ परताप जैसे नौजवान संघियो के प्रोपेगण्डे से इम्प्रेस होते रहते हे और बेसलेस बाते लिखते हे जैसे देखे ”जो भारत के प्रधानमंत्री को जितनी गन्दी गालियां दे या जितने गिरे हुए शब्दों से सम्बोधित करे! आज सेक्युलर वो है ” दुनिया जानती हे की नेट पर जो गंद मोदी समर्थको ने बरसो से मचाई हुई हे उसकी कोई मिसाल दुनिया में नहीं मिलती हे और देखे की ”जो इसराइल के विरोध में छाती कूटे और ISIS पर खामोश रहे ” भला कौन हे वो ? जो isis का सपोटर हे ?

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    • July 8, 2015 at 2:50 pm
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      सिकंदर सर ना तो मैं संघ से जुड़ा हूँ ना संघ के प्रभाव में हूँ! आप लेख को पूरा पढ़ें और फ़िर उसके मर्म को समझें! दो चार लाइनों को नहीँ!
      मैंने इसराइल और आइसिस का उदाहरण दे कर सेकुलरों के डबल स्टेंडर्ड को सामने लाना चाहा!
      और मोदी विरोध में किसी को इतना अंधा ना हो जाना चाहिये कि भारत के सांविधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को गालियाँ दी जाये! मैं उसका भी विरोध करता हूँ जिसने पूर्व प्रधानमंत्री के पुरखों पर घिनौने लांछन लगाये!
      व्यक्ति या संस्था या पद का आलोचना और विरोध होना चाहिये लेकिन मर्यादा के अंदर!
      और चूँकि संघी गालियाँ देते हैं तो इस का ये तो मतलब नहीँ कि हम उसे आधार बनाकर दूसरों के किये गये गलत काम को सही ठहरायें!

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  • July 7, 2015 at 2:38 pm
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    हमारे प्रधान मंत्री कहते हैं कि उनकी आलोचना मे जो अभद्र शब्द आए हैं, अगर उन्हे छापा जाए, तो पूरा ताजमहल ढँक जाए. यहाँ तेज प्रताप जी, भारत के पीएम की आलोचना पे गुस्साए हैं, जबकि संघी 60 साल से देश के पीएम के परिवार वालो और पुरखो तक को घसीट लाए उसका क्या? मोदी-भक्तो ने जितनी गालियाँ बाकी है, उससे तो पूरा देश ढँक जाए. श्रुति सेठ, सागरिका घोष को देखिए. सागरिका को तो सामूहिक रेप तक की धमकी दी गयी.

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  • July 7, 2015 at 5:19 pm
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    आपसे अनुरोध है कि अपने कॉमेंट्स लेख को पूरा पढ़ने के बाद ही डालें!

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  • July 7, 2015 at 5:20 pm
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    अब ये हिंदू धर्म की परिभाषा भी तो स्पष्ट नही. सब झोलझाल है. जो लोग कुरीतीयो को उनकी आस्था का हिस्सा नही मानते, उनसे बहस करने का कोई फ़ायदा नही. लेकिन क्या कुरीति है और क्या महान संस्कृति का अंग, इसका फ़ैसला करने की समझ, परंपरावादी मे नही होती. लेकिन हिंदुत्ववादियो से ये प्रश्न तो पूछा ही जाना चाहिए कि, हो हल्ला तो कर रहे हो, हिंदू राष्ट्र का, लेकिन इसकी परिभाषा क्या है? जम के संप्रदायिक नफ़रत फैलाते हो, लेकिन प्रगया ठाकुर, कर्नल पुरोहित और दारा सिंह जैसे आतंकवादियो से रिश्तो को मुकर जाते हो.

    कभी तो अखंड भारत की बात करते हैं, कभी उस अखंड भारत के सभी लोगो को हिंदू मानते है, लेकिन कभी उनमे से कुछ लोग सिर्फ़ मुस्लिम हो जाते हैं. अपने को अंध-विश्वाशी और पाखंडी नही मानते. लेकिन 1987 मे जो आख़िरी सती हुई, उसके समर्थन मे उतरे हज़ारो लोगो मे हर व्यक्ति हिंदुत्ववादी ही था. ये वीडियो क्लिप देखो.

    https://www.youtube.com/watch?v=MpiAUHLzYD0

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  • July 7, 2015 at 5:35 pm
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    मैं किसी भी धर्म की बुराई नही करना चाहता. बस यह सवाल उठाना चाहता हूँ कि अगर सेक़ूलेरिज़्म की बजाय, संविधान और तंत्र को हम आस्था पे आधारित करेंगे, तो कौन सी व्याख्या सही है, कौन सी ग़लत, इसका फ़ैसला कौन करेगा? आस्था आधारित देश विकास के पैमाने पे पीछे हैं. सभी विकसित देशो ने सेक़ूलेरिज़्म को अपना के ही ये मुकाम पाया.

    सेक़ूलेरिज़्म का मिज़ाज, बहुसंख्यक जनता पे निर्भर करता है. भारत आज अगर सेकुलर गणतंत्र है तो इसका बड़ा श्रेय बहुसंख्यक हिंदुओं को ही जाता है, लेकिन इसे आप मुस्लिम या अन्य अल्प संख्यको पे अहसान के तौर पे मत देखिए, ये रास्ता, बहुसंख्यक जनता की खुशहाली के लिए भी ज़रूरी है. वरना सब बर्बाद हो जाएँगे. पाकिस्तान का हाल देख लो. बांग्लादेश ने भी तरक्की की सीढ़ियाँ सेक़ूलेरिज़्म को अपनाने के बाद ही चढ़ी.

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    • July 7, 2015 at 5:58 pm
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      पूर्णतः सहमत हूँ! सेकुलरिज्म किसी भी लोकतांत्रिक देश की आत्मा है! आप हिन्दू हो कर सेकुलरिस्ट नहीँ हो सकते ठीक वैसे ही जैसे मुसलमान हो कर! सेकुलर होने के लिये आपको इंसान बनना होगा! आपको बिना किसी पूर्वाग्रह या पक्षपात के सब के साथ समान व्यवहार करना होगा! आपको ना तो किसी के नाम से विरोध करना होगा ना ही नाम से तुष्टिकरण!

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  • July 7, 2015 at 5:54 pm
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    एक खफ्त ये भी इन संघियो को सवार रहती हे की सेकुलरिज़म के नाम पर मुस्लिमो से मूर्ति पूजा अवतारवाद जरूर करवाई जाए जबकि ये मुस्लिमो के ”डी एन ए ” में हे की उन्हें मूर्ति पूजा व्यक्तिपूजा बहुदेववाद में कोई भी दिलचस्पी नहीं होती हे इस विषय में कोई आकर्षण नहीं होता हे में 100 % शुद्ध सेकुलर मुस्लिम हु जीवन में एक सेकण्ड के लिए भी में कम्युनल नहीं हुआ (तब भी नहीं जब बचपन में कुछ समय के लिए छुटभय्या तालिबान टाइप भी रहा ) लेकिन शुद्ध सेकुलर मुस्लिम होने के बाद भी में अरबो रुपयो मिलने के बदले भी एक सेकण्ड के लिए भी मूर्ति पूजा व्यक्ति पूजा बहुदेववाद नहीं कर पाउँगा मुझसे ना होगा हां आपको करना हे तो करिये कोई आप पर इस विषय में ज़बरदस्ती तो में उसे रोकूंगा

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    • July 7, 2015 at 8:10 pm
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      एक ये स्वर्ग फैला रखा हे इस संघी सरकार ने की जब से ये आई हे तब से कम से कम दिल्ली में जहा में रहता हु यहाँ तो महगाई की तरह ही सड़को पर गायो की तादाद में भी काफी बढ़ोतरी लग रही हे ?

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    • July 7, 2015 at 10:45 pm
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      सवाल यह है कि आखिर संघियो कि ताकत क्यो बद रहि है आखिर क्यो उप जहा ब ज प मर्त प्राय थि ७१ सिते ले उदि
      इस पर मन्थन करने कि जरुरत है

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      • July 7, 2015 at 11:13 pm
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        बिलकुल हमने तो जब लिखना शुरू किया था नेट पर तो २०११ से और कुछ छिट पुट प्रिंट में भी 2006 के आस पास से तभी से लेखन में भी और रियल लाइफ में भी बार ये लिखा और बोला ही था की उपमहादीप में बढ़ता मुस्लिम कटट्रपंथ संघ बज़रंग भाजपा मोदी को बेहद मज़बूत करेगा नतीजा वाही हुआ की 2014 पहली शुद्ध संघी सरकार वज़ूद में आई और अब इस संघी सरकार की हरकतों से फिर मुस्लिम कटट्रपंथ और बढ़ रहा हे तो बेहतर होगा की हम मुर्गी अंडा मुर्गी फिर अंडा के खेल न पड़े और बिना किसी किन्तु परन्तु के सभी कटरपन्तियो को डाउन करे

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  • July 7, 2015 at 6:17 pm
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    संघ, राष्ट्रवादी मुस्लिमो की भी बात करता है, लेकिन इस राष्ट्रवादी मुस्लिम की क्या परिभाषा है, कुछ पता नही? इस देश की संस्कृति का सम्मान करो. भाई क्यूँ करो? और ये क्या होती है, इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नही.
    भारतीय संस्कृति क्या है? ये अँग्रेज़ी पढ़ते, बोलते हैं, जींस, टी शर्ट पहनते हैं, ईसाई केलेंडर को मानते हैं, पिज़्ज़ा-बर्गर खाते हैं, फ़ारसी, उर्दू शब्दो को हिन्दी समझ कर बोलते हैं, शायरी-ग़ज़ल सुनते हैं. अब काहे की सांस्कृतिक पवित्रता और अक्षुण्न्ता? और फिर इसी धरती से उपजी हर चीज़ महान है तो सती प्रथा, छुआछूत भी यहीं से उपजा था (इस बात को किसी धर्म की बुराई ना माने). जब संस्कृति मे अच्छी, बुरी, चीज़े रहती है, एक दूसरे से मिलने, जुलने मे कुछ तोड़ देती है, कुछ मोड़ देती है, कुछ जोड़ देती है तो इस शब्द की सनक का क्या मतलब?

    फिर हिंदू कहे जाने लोगो मे भी बहुत सांस्कृतिक भिन्नता है. दक्षिण भारत मे करीबी कजन से शादी-ब्याह होते हैं. तमिलनाडु मे मामा-भांजी की शादी का प्रचलन रहा है, तो फिर ये सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का क्या मतलब?
    बहुल संस्कृति वाले देश मे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एक ख़तरनाक अवधारणा है. किसी के हित मे नही है.

    वैसे भी राष्ट्रवाद के लिए एक शत्रु समुदाय की ज़रूरत होती है. राष्ट्रवाद पे खड़ा देश, शत्रुता को मित्रता मे बदलने के प्रयास नही करता, बल्कि उसे जीवित रखना चाहता है. पाकिस्तान का ही उदाहरण देख लो. ऐसे मे राष्ट्रवाद के प्रति सजगता ज़रूरी है.

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  • July 8, 2015 at 9:25 am
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    उमाकांत जी और हसन साहब, आप लोग सिर्फ़ अपने साइड के नंबर ही नही देखे, संख्या दूसरी तरफ भी बढ़ रही है.
    सिर्फ़ संघी ही नही तब्लीगी भी बढ़े हैं. इस बीच एड्स, डेंगू, डायबिटीज़ भी बढ़ी है. सिर्फ़ संख्या मे ही बढ़ोतरी नही, गुणवत्ता भी देखी जानी चाहिए.
    क्या अन्य क्षेत्रो, कला, साहित्य, विज्ञान आदि मे इन लोगो का आनुपातिक प्रतिनिधित्व, इनकी संख्या के मुताबिक है? हाँ, एक का कट्टरपंथ दूसरे कट्टरपंथ को प्रेरित करता है, इसे ही ध्रुवीकरण कहते हैं. ये सिर्फ़ इस देश भारत की बात नही है, दक्षिण एशिया का भी यही हाल है.
    एक का कट्टरपंथ, दूसरे का राष्ट्रवाद हो जाता है.

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    • July 8, 2015 at 2:08 pm
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      secular —– Not connected with religious or spiritual matters

      जाकिर साहेब वासतविकता यह है कि ना तो हिन्दु और ना हि मुस्लिम secular है और हुम कित्ने भि धर्मनिरपेक्श बन ले हमारा रुजान हमेशा अप्ने-२ धर्मो कि तरफ हि जयदा होत है दुसरा सेकुलरिज्म एक फरेबि शब्द है जिस्का प्रयोग राजनेतिक पार्तियो ने लोगो को मुर्ख बनाने मे किया है

      मुस्लिमो के रह्नुमा सपा ने मुस्लिमो को कितनि नोकरिया दि है शायद जबाब होगा आप्के पास ,कित्ने मुस्लिमो को रोजगार परक शिक्सा दिलायि

      जरुरत है इन्सान बनने कि तभि हमरे मत्भेद समाप्त होन्गे

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  • July 8, 2015 at 5:02 pm
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    उमाकांत जी, सेकुलर का अर्थ वो नही है, जो आपने लिखा है. पूर्ण रूपेण आस्तिक व्यक्ति भी 100% सेकुलर हो सकता है. दुनिया के तमाम विशुद्ध सेकुलर लोगो मे बहुमत आस्तीको का ही है. इसी प्रकार नास्तिक होना, सेकुलर होने का प्रमाण नही. इसी वजह से मैने उस वीडियो का लिंक भेजा.

    बाकी राजनैतिक पार्टियाँ क्या कर रही है, क्या नही, वो एक अलग मसला है. लेकिन लेखक का लेख सेक़ूलेरिज़्म के पक्ष मे है या खिलाफ? हालाँकि भाषा घोर दकियानूसी, संप्रदायिक और कट्टरपंथी संघियो की है, इसमे कोई शक नही.

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    • July 8, 2015 at 6:58 pm
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      माननिय श्रेी जाकिर जेी, इस देश मे तो पुर्न रुप से १% व्यक्ति भेी आस्तिक् नहेी है ! ९९% से ज्यादा पाखन्देी जरुर है !

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    • July 8, 2015 at 9:22 pm
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      जाकिर साहब भाषा को नहीँ लेख के मर्म को देखिये!
      मैंने ये बताने कि कोशिश की है कि आज सेकूलरिज्म को सबसे बड़ा खतरा उन सेकुलर लोगों से ही है जो सेकूलरिज्म के नाम पर अपनी दूकान चलाने के लिये तुष्टिकरण कर रहे हैं और सेकूलरिज्म का नाम खराब कर रहे हैं!

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    • July 9, 2015 at 10:25 am
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      जाकिर जि मैने सेकुलर का वहि अर्थ लिखा है जो oxford ने दिया है आप चाहे तो google पर search कर सकते है
      बेसक आप ओर हम सन्घि और कत्तर पन्थि का सपोर्त ना करते हो पर हम धर्म निरपेक्स भि कभि नहि हो सकते क्योकि ना तो आप मुर्तिपुजा न हि हम नमाज पध सक्ते है ,एस्के लिये एक शब्द जरुर प्रयोग किया जा सक्ता है वो है– सर्वधर्मसमभाव

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  • July 8, 2015 at 10:35 pm
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    एक विशेस समुदाय की तरफ़दारी का क्या मतलब है?? कौन तरफ़दारी करता है.अगर तरफ़दारी ही होती तो वो समुदाय आज इतना दैनिय्य ना होता. मुज़फ़्फ़रनगर ना होता, वल्लभ गढ़ ना होता, मलियाना,ना होता, उनके खिलाफ आज हर दिन ज़हर ना उगला जाता. कौन तरफदार है?? मौलाना मुलायम सिंघ?? ज़रा उत्तर प्रदेश का दौरा तो कर लो हर जगह छोटी मोटी संप्रदायिक झड़प ने लहू लुहान कर दिया है प्रदेश को.पूरे प्रदेश को एक विशेस जाती के लोगों ने ढक लिया है .पूरे प्रशासन मे केवल उनकी ही तादाद दिखती है फिर कहाँ गये मुसलमान और काहे के मौलाना मुलायम सिंघ?? महाराष्ट्र को ही लें पहले बीफ बैन के नाम पर लाखों लोगों का रोज़गार छीना गया फिर मदरसों को फालतू के विवाद मे घसीटा गया . शिव सेना आए दिन धमकियाँ देती ही रहती है जैसे ये देश की एक की बाप की जागीर हो गया. सेकूलरिस्म एक ऐसा हथियार है जिसे संघी गैर संघी लोगों के लिए एक गाली के तौर पर प्रयोग करते है. जो उनसे मतभेद रखे वो सेक्युलर है, देश द्रोही है, राष्ट्र विरोधी है, जैसे राष्ट्र भक्ति का सर्टेफिकेट यही लोग बाँटते हों. देश के मुखिया को देश की हालत पर विचार का समय ही नहीं. उनके राज मे कुछ लोगों की ज़बाने बहुत लंबी हो गयी हैन.उन्को विदेशी दौरों से फ़ुर्सत ही नहीं देश जाए भाड़ मे…

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  • July 9, 2015 at 9:36 am
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    इससे बढ़कर तो झूठ हो ही नही सकता की 80% हिंदू आबादी वाले मुल्क मे 14% मुस्लिमो के तुष्टिकरण से सरकरे बनी है. नेहरू, शास्त्री, देवेगोडा, गुजराल सब के सब हिंदू ही थे. नेल्ली, हाशिमपुरा, भागलपुर मुसलमानो को मरवाने वाले और उन हत्यरो को राजनैतिक संरक्षण देने वाले यक़ीनन सेकुलर नही थे, वो भी हिंदू वोट बैंक से बँधे थे.

    बाकी लेख का मर्म क्या है? एक वाहियात, घटिया और तथ्यो से विपरीत लेख है. इस देश मे कौन सी पार्टी isis का समर्थन करती है.

    ऐसे लेखो से मर्म, लेखक की तरह सोच रखने वाले संकीर्ण विचारधारा वाले लोग ही निकाल पाते हैं.

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  • July 10, 2015 at 11:24 pm
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    वाह !! क्या लेख है ! सबसे पहले लेखक जी अपने आप अपने आप महाज्ञानी साबित करने की कोशिश में सेकुलरिज्म की जड़ को विदेश में खोदते हैं !! और फिर उसकी सारी बुराइयों को सिर्फ भारत में ही पाते हैं !! इनके पास १८५१ से लेकर आज तक जिन देशो में सेकुलरिज्म रहा उसके उत्थान पतन का कोई ब्यौरा नहीं है !! और न ही सेकुलरिज्म के किसी विकल्प के सफलता का कोई उदहारण , फिर भी निकल पड़े सेकुलरिज्म नाम के एक शब्द की बाल की खाल उधेड़ने !! सेकुलरिज्म की वजह से सारा पतन इन्हें केवल भारत में ही नजर आ रहा है ! जब की अंग्रेज आने से पहले के भारत के पतन के इतिहास के लिए कौन सा सेकुलरिज्म जिम्मेदार था इसकी भी इन्हें कोई जानकारी नहीं है | अब बताइये जब सेकुलरिज्म भारत के बाहर ही जन्मा था और १९ वि सदी में ही भारत को इसका पहला साक्षात्कार हुवा था तो क्या आज भारत में नजर आने वाले विभिन्न धर्म के लोग १९ सदी से पहले पैदा ही नहीं हुवे थे ? क्या इनके हिसाब से इन सारे धर्मो के लोग आजादी के बाद आचानक पैदा हो गए थे जो इनको एक राष्ट्रवाद से जोड़े रखने के लिए सेकुलरिज्म की आवश्यकता पड़ गई ?? क्या आजादी की लड़ाई से पहले इस देश के सारे के सारे लोग सिर्फ हिन्दू थे ? या फिर सिर्फ मुस्लिम , सिर्फ इसाई या फिर सिर्फ सिख ?? अगर नहीं तो उस समय भी जब लेखक महोदय के हिसाब से तब इस सेकुलर नाम की विचित्र प्रजाति और सेकुलर नाम तक से अनजान लोग फिर किस व्यवस्था के तहत एक साथ रहते थे ?? वह कौन सा राष्ट्रवाद था जो अपने राज्य को और अपनी राजेशाही बचाने के लिए मुस्लिम सहित सभी शक्तिशाली आक्रमणकारियों की शरण जाना सिखाता था ? और वह कौन सा सेकुलरिज्म था जो मुस्लिम शासकों के यहाँ हिन्दुओं तथा हिन्दू शासकों के यहाँ मुस्लिमों के वफादारी का बेमिसाल इतिहास रचा जाता था ?? इसकी भी जानकारी दे देते तो आगे लिखी बातों पर हम कुछ पूछने की हिम्मत कर पाते !
    आप संस्कृति का रोना रो रहे हो न ? तो सनातन धर्म नहीं सेकुलरिज्म ही इस देश की मूल संस्कृति है साहब ! और जो इसके खिलाफ गया उस पाकिस्तान का हश्र वहां कोई विचित्र प्रकार की जाती न होने के बावजूद आज सारी दुनिया देख रही है ! अब यह अलग बात है आपको अपने देश का पाकिस्तान से ज्यादा पतन नजर आ रहा है !

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    • July 10, 2015 at 11:59 pm
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      एक सवाल सेकुलर मुस्लिमो से
      इस उपमहाद्वीप मे 50-55 करोड़ मुस्लिम 80-90 करोड़ हिन्दू है जहा पर मुस्लिम बहूसखन्यक है वहा से हिन्दुओ का सफाया हो गया है पाकिस्तान कासमीर बांग्लादेश लेकिन मुस्लिम साब जगह है
      तो आप कैसे कह सकते है की मुस्लिम सेकुलर है
      क्या सेकुलरिज्म का ठेका सिर्फ हिन्दुओ ने ले रखा है

      Reply
  • July 11, 2015 at 2:05 pm
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    कहीं भी किसी भी धर्म के बहुसंख्यको में सेकुलरिज्म का पक्ष लेने वाला धर्मविरोधी , देशद्रोही करार दिया जाता है ! यही इसकी वजह है !!

    Reply
    • July 18, 2015 at 6:28 pm
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      सचिन जि अगर कि चन्द मुत्ति भर लोगो से ये देश सेकुलर है तो ये गलत है
      कोइ अल्पसखन्यक धर्म उन्नित कर रहा है तो इसलिये कि बहुसंख्यक समाज सेकुलर है
      सवाल ये भि है कि क्या पाकिस्तान बांग्लादेश भारत के मुस्लिम अलग्-२ है
      अगर पाकिस्तान बांग्लादेश मे हिन्दु कम हो रहे है तो ऐसा भारत मे नहि होगा इसकि गारन्ति कोन लेगा????????
      क्या ये सो काल्द सेकुलरिज्म इसकि गारन्ति लेगा?????????????

      Reply
  • July 13, 2015 at 11:03 am
    Permalink

    मुस्लिम देशो मे सेक़ूलेरिज़्म नही है, इसका ख़ामियाजा तो वहाँ के नये और पुराने दोनो मुसलमान भुगत रहे हैं. सेक़ूलेरिज़्म सिर्फ़ अल्प संख्यक समुदाय के अधिकार या सुरक्षा से जुड़ा मसला नही है.
    जी नही, सेक़ूलेरिज़्म का ठेका, सिर्फ़ हिंदुओं ने नही लिया है. सेक़ूलेरिज़्म, अल्प संख्यको पे अहसान नही है. आज 90% मुस्लिम आबादी वाला, बांग्लादेश, 10% हिंदुओं के प्रेम मे सेकुलर नही बना. ना ही पाकिस्तान मे जो लोग, सेक़ूलेरिज़्म की वकालत कर रहे हैं, वो वहाँ के हिंदुओं या ईसाइयो से हमदर्दी की वजह से ऐसा कर रहे हैं. तुर्की मे तो गैर मुस्लिम बचे ही नही, फिर भी सेक़ूलेरिज़्म को ज़रा भी नुकसान की भनक पे प्रदर्शन करने पे उतर जाने वाले लोग, खुद का ही फ़ायदा सोचते हैं.
    उमाकांत जी, आप मुसलमानो की चिंता छोड़िए, अगर आपको लगता है कि हिंदुत्व से हिंदुओं का भला हो सकता है, तो उसका समर्थन कीजिए. सेक़ूलेरिज़्म, कोई अल्प संख्यको पे अहसान नही है, ये हर विकसित मुल्क ने अपनी खुद की तरक्की के लिए चुना है.

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  • July 18, 2015 at 12:10 am
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    बात कुच्ह यु है जाकिर जि आपकि सेकुलर चद्दर मे च्हेद हि च्हेद है
    आज कल आप लोगो ने नितिश जैसे घोर अवसरवादि को भि घोर सेकुलर बनादिया
    अब चलो मान भि ले कि ये बि जे पि को हराने के लिया किया गया है पर उस का क्या जब यहि लोग सत्ता के लिये बि जे पि को अपना समर्थन दे देते है
    अभि कुच्ह सालो तक पासवान जि भि सेकुलर होन्गे पर अब अच्हुत ????
    सवाल ये भि है कि बि जे पि को समर्थन देने वाले इस ताइप के लोगो को आप गले कैसे लगा लेते है
    यहिआप लोगो का सो काल्द सेकुलरिज्म है

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  • July 18, 2015 at 11:20 am
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    तेजप्रताप जी, आज इस देश मे “सेक्युलर” होने का सर्टीफिकेट तथाकथित सेक्युलर लोगों लेना पड़ता है । इसको पाने के लिए आपको हिंदु समाज की बुराई और मुसलमानों के लिए घड़ियाली आँसु बहाने पड़ते हैं ।ये सर्टीफिकेट अगर आपके पास नहीं है तो आप संघी और सांप्रदायिक करार दिए जाएंगे ।

    सचिन जी, तेजप्रताप जी सेक्युलर शब्द को देश मे आज जिस तरह लिया जा रहा है वही बता रहे हैं। सेक्युलर होना तो बहुत ही अच्छी बात है । हिंदु या मुसलमान देश या समाज का कोई भला नहीं कर सकता ।

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    • July 18, 2015 at 2:42 pm
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      धर्मवीर जी इस लेख पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं ने मुझे वो अनुभव करा दिया है जो आप शब्दों में ढाल कर मुझे अवगत करा रहे हैं!
      और ये पूर्णतः सत्य है कि मुझे सेकुलर होने का सर्टिफिकेट अब नहीँ मिल सकता क्योंकि मैने इन तथाकथित सेकुलरों की असलियत सामने रखनी चाही!

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  • July 18, 2015 at 11:27 am
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    चरमपंथी हिंदु या मुसलमान देश या समाज का कोई भला नहीं कर सकते ।

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    • July 18, 2015 at 2:48 pm
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      कट्टर हिन्दू तो सेकुलर नहीँ ही है, लेकिन वो समान्य हिन्दू भी सेकुलर नहीँ माना जाता (तथाकथित सेकुलरों की नज़र में) जो मुसलमानों के लिये घड़ियाली आँसू ना बहाये!
      हाँ कट्टर मुसलमान सेकुलर हो सकता है (माना जा सकता है) अगर वो बीजेपी के अलावा कोई और पार्टी जोइन कर ले!

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      • July 18, 2015 at 3:49 pm
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        और एक कट्टर मुसलमान बी जे पी ज्वाइन कर ले तो किस बात का सर्टिफिकेट मिलता है ? जरा ये बताने का कस्ट करेंगे ? और उससे खुद बी जे पी सहमत होगी ??
        क्या मुसलमानो को गाली देने वाले को हिन्दुत्ववादी होने का सर्टिफिकेट मिलता है ? बाबरी गिराने वाले कल्याण सिंह को कौन सा सर्टिफिकेट मिल गया ? कौन सा तमगा मिल गया ?
        चलो सेकुलरिज्म अगर इस देश के लिए गलत है तो सही क्या है ? क्या यह विकल्प देने की और उसे दुनिया के साम्बने सही साबित करने की है किसी में हिम्मत ? या अपने विकल्प को सही साबित करने वाला उदाहरण बना दुनिया का कोई देश ? वर्तमान में न मिले तो अपने इतिहास से ही साबित कर दो !!

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        • July 18, 2015 at 5:50 pm
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          सवाल ये उथता है कि सेकुलर कि परिभाशा क्या ? इस देश कि सेकुलर परिभाशा ये है कि जुह्ते हि सहि पर मुस्लिमो के लिये रोना रोये मन मे नफरत भि हो तो तोपि पहने
          और अगर आप किसि से सहमत नहि है तो आप सिधे -२ सन्घि
          सेकुलर जैसे फरेब को प्रयोग करके इन सो काल्द सेकुलरो ने मुस्लिमो को वोत बैन्क के रुप मे प्रयोग किया है
          मायावति ,अजित ,चोताला, नितिश ,पासवान आदि ऐेसे बहुत से नेता ने बि जे पि सन्घियो के नाम पर पह्ले तो मुस्लिमो को लुता और बाद मे बि जे पि सन्घियो कि सरकारे बनवादि
          सचिन जि अगर यहि आपका सेकुलरज्म है तो जि हा सेकुलरिज्म इस देश के लिये गलत है

          Reply
          • July 18, 2015 at 9:54 pm
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            विकल्प ? विकल्प बताइये विकल्प ?
            क्यों की इतिहास में कभी हिन्दुत्ववाद अस्तित्व में नहीं था ! वो तो आजादी की सुगबुगाहट से पैदा हुवा था । और फिर उसीने पाकिस्तान के निर्माण के बीज बोये !

  • July 18, 2015 at 5:07 pm
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    यह देश हजारो सालो से सेकुलर रहा है ! बौद्ध जैन सिक्ख पारसेी हुद कुशान आदि साथ रहे है !
    और यह देश आगे भि सेकुलर रहेगा हिन्दु राश्त्र् या हिन्दु देश नहि हो सकेगा !
    चर्चा इस बात कि किजिये कि क्या कुरान के आदेश्, सन्देश सेकुलर् है क्या कुरान अन्य धर्म होने कि मान्यता देता है !
    जो कुरान के ज्यादा कत्तर भक्त् है क्या वह फिर से देश विभाजन् केी भुमिका पेश कर सक्ते है तब सामन्य मुस्लिम कि भुमिका क्या रहेगेी वह उस्के समर्थक् रहेन्गे या विरोधेी ! कुरान के नाम पर् सामान्य मुस्लिम को बह्काया जा सक्ता है !

    Reply
    • July 18, 2015 at 10:07 pm
      Permalink

      आप क्यों यह मानकर ही चलते हैं की सारे मुस्लिम सिर्फ कुरआन की लकीर के ही फ़क़ीर हैं ? जब की सिया सुन्नियो में बटे मुस्लिम खुद इस बात का सबूत हैं की वे सिर्फ और सिर्फ कुरआन को नहीं मानते !! अगर कुरआन के नाम पर ही वास्तव में आम मुस्लिम बहकता तो खुद अपने ही हम मजहब पर गोली नहीं चलाता ! वो बहकता है कठमुल्लों से !
      और याद रहे सिर्फ बहुसंख्यक ही ये तय कर सकता है की वो सेकुलर रहे या नहीं !

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  • July 18, 2015 at 5:39 pm
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    हमे सेक्युलरिज्म ही चाहिए लेकिन तुष्टीकरन वाला नहीं। एक समुदाय का अहित करके दुसरे को खुश करने वाला सेक्युलरिज्म ठीक नहीं है । तुष्टीकरन वाले सेक्युलरिज्म की वजह से ही देश बटा । ये घातक है । एक समुदाय विशेष के लिए घड़ियाली आँसु बहाकर और उसे दुसरे समुदाय का डर दिखाकर उस समुदाय को वोट बैंक बनाने वाले सेक्युलरिज्म से भी देश का भला नहीं होगा ।

    भारतिय समाज सदा से सहिष्णु रहा है और हमे इसपर गर्व है । मैं आगे के लिए भी यही सहिष्णुता चाहुँगा । कट्टर लोगों का समर्थन मैं कभी नहीं करूंगा ।

    Reply
    • July 18, 2015 at 6:02 pm
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      धर्मवीर जि हमे सेक्युलरिज्म नहि धार्मिक सहिस्नुता चाहिये क्योकि हमारे ज्ह्गदे, मतभेद धार्मिक है

      Reply
  • July 18, 2015 at 10:28 pm
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    सेकुलरिज्म से ज्यादा सेकुलरिज्म का ढोंग किसी भी धार्मिक राष्ट्रवाद से ज्यादा घातक होता है ! और ये ढोंग आजीवन एंटी सेकुलर रहे लोग भांड बनकर करने लगे तो उनका यह ढोंग उस राष्ट्र को गर्त में ले जाने की अंतिम दस्तक होता है ।
    आज भारत में धार्मिक राष्टवादी भी भारत को इसी कगार पर ले जा रहे हैं !!
    तथाकथि एंटी सेकुलरों के पास भी सेकुलरिज्म के अलावा और कोई विकल्प नहीं इसीलिए सत्ता पा लेने के बाद बड़ी मासूमियत से ३७० सीट का रोना रोते हैं लेकिन आज तक किसी माई के लाल ने जनता से ३७ ० सीटें नहीं मांगी ! क्यों ??
    फिलहाल रावण ने क्या किया इससे ज्यादा राम क्या कर रहा है वो देखो ! मेरे ख्याल से तो वो अपने आप को राम भी नहीं कह रहा !! सेकुलर तो फिर भी खुद को सेकुलर कहता है !

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    • July 18, 2015 at 11:00 pm
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      <<>>सहि फरमाया आपने
      बि जे पि तो खुल्म खुल्ला एंटी सेकुलर है
      पहले भि लिखा है अब भि लिख रहा हु
      नितिश पासवान जैसे लोग जब तक बि जे पि के साथ रहते है तब तक एंटी सेकुलर जैसे हि बि जे पि का साथ च्होदा सेकुलर
      यहि भांड परिभाशा है भांड सेकुलरज्म कि
      रहि बात बि जे पि कि तो उनको अच्हे से पता है जित्ना उत्पात वे सत्ता मे रह कर मचा सक्ते है उतना सत्ता से बाह रह कर नहि इसलिये उन्के लिये कोइ भि अच्हुत नहि चाहे वो मुफ्ति हि क्यो ना हो यहि बात मुस्लिम समाज सम्ज्ह्ने मे असफल रहा है

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      • July 19, 2015 at 12:09 am
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        कहीं तो सहमति के लिए धन्यवाद ! उमाकांत जी ! अब ये बताइये की बी जे पी ने कब कहा की वो एंटी सेकुलर है ? या फिर बताइये की कब साबित किया ? जो भी कहा किया वो सिर्फ सत्ता पाने के लिए ! और सत्ता पाने के बाद ?और कुछ तो आप भी बयां कर रहे हो !! फिर भी आप उसे एंटी सेकुलर कह रहे हो ! तो फिर आप में और नितीश पासवान के समर्थकों में क्या फर्क रहा ?
        दूसरा खुद को एंटी सेकुलर कह कर भी आप उसका कोई विकल्प नहीं दे पा रहे क्यों की ये साबित हुवा की सेकुलरिज्म की तरह हिन्दुत्ववाद भी भांडगिरि से अछूता नहीं फिर ? तो क्या इसके लिए हिन्दुराष्ट्रवाद को भी त्याग देने की सलाह देंगे आप ?
        फिर दोषी कौन है सेकुअरिज्म? हिन्दुत्ववाद या फिर भांडगिरि ?? फिर सारा ठीकरा सेकुलरिजम पर ही क्यों फोड़ा जा रहा है ? जब की सेकुलरिज्म की व्याख्या में तुष्टिकरण कहीं नहीं है ! इसीलिए अब आपको तय करना होगा की आप असल में भांडगिरि के खिलाफ है या नकली सेकुलरिज्म या हिंदुराष्ट्रवाद के ! इसीलिए खटमल मारने के लिए खटमल को पनाह देने का दोष लगाकर घर ही जलाने की बेवकूफी क्यों ?

        Reply
  • July 18, 2015 at 11:14 pm
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    भारत का हर राष्ट्रपति स्वतन्त्रता के पश्चात आज तक ईद के हर मौके पर इफ्तार पार्टी का आयोजन राष्ट्रपति भवन में लगातार करता रहा है, लेकिन वहां कभी भी महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी या नवरात्रों पर भोज का आयोजन 70 साल में एक बार भी नहीं किया गया।ना ही कभी लंगर खिलाये गये!
    वैसे मुझे इस से शिकायत नहीँ है लेकिन इसे कहते हैं तुष्टीकरण!
    आप करो तो सब के लिये करो अन्यथा ना करो!

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  • July 19, 2015 at 12:40 am
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    क्या आपके ७० सालों में अटल और मोदी सरकार के मिलाकर हुवे ७ साल भी शामिल है ? फिर भी अगर यह तुष्टिकरण है तो इसे रोकने या हिन्दू त्योहारो पर ऐसे आयोजनों को शुरू करवाने पर राष्ट्रपति को बाध्य कराने के लिए भी क्या ३७० सीट चाहिए ? आपकी सलाह पर अमल करने वाला अब बचा कौन है ?
    इसीलिए अब ऐसे आयोजनों के लिए भारत के मुस्लिमों को ही पहल करनी होगी इस बात को तो मैंने पहले भी रखा है ! क्यों की किसी चीज के बंद करने करवाने से अगर वह अच्छी है तो उसे ऐसी जायज शिकायतों से जरूर दूर रखना चाहिए इस बात से मैं भी सहमत हूँ !
    रही बात तुष्टिकरण की तो हिंदुओं के सिंहस्थ कुम्भ और अन्य सालभर चलते त्योहारो में सरकार के महाखर्च की अपरिहार्यता और नेताओ की हाजिरी को भी नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए ! क्यों की जो करो सब के लिए की तर्ज पर हज सब्सिडी और इफ्तार पार्टी आदि के साथ हिंदुओं के उपरोक्त त्योहारो में भी सरकार की सहभागिता हटा दी जाए तो आप सोच सकते हो की क्या होगा !

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    • July 19, 2015 at 5:27 am
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      समय का अभाव है मेरे पास धर्य रखिये विकल्प भि दुन्गा

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  • July 5, 2017 at 4:53 pm
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    अगर कोई ईन्सान सच्चा सेक्युलर है, ऊसके मन मे किसी भी जाती और दुसरे धर्म के खिलाफ कोई बैर नही. हर जाती और हर धर्म के लोगो से ऊसकी दोस्ती है, ऊठना बैठना है, खाना पिना सब है. पर अगर वो खुद के परिवार मे अपने ही भाईयो के साथ पारीवारीक विवाद मे, या किसी प्राँपर्टी के विवाद मे ऊलझा हुवा है, और हमेशा अपने ही भाई बहनो से झगडे करता है. तो क्या ऐसे ईन्सान को किस कँटँगिरी मे डालना चाहीये?

    मसला सेक्युलर होने का नही है. मसला ईर्षा, घृणा, नफरत से ऊपर ऊठने का है. धार्मिक नफरत तो बहोत दुर कि बात है. मै तो सबसे जादा खुन खराबे परिवार, प्रिय जन, दोस्तो मे ही देखता हु. यकिन नही होता तो है तो किसी भी पोलीस स्टेशन जाकर crime data निकालो. धार्मिक दंगो से जादा खुन खराबा पारिवारीक रिश्तो मे होता है यही data base मिलेगा आपको.

    मुझे ऐसा लगता है धर्म परिवार को बांधना सिखाता है. भाई भाई का रिश्ता, बाप बेटा, मा बेटी, भाई बहन, पती पत्नी, सास बहु, ससुर जमाई. एक आम इन्सान को जिवन मे ईतने सारे रिश्ते निभाने होते है. सबकी भिन्न भिन्न अपेक्षाये, हर किसीका अलग अंदाज. वो यही रिश्ते जिवन भर निभाते थक जाता है. खुद के परिवार कि जरुरतो को पुरा करते करते वो बुढा होता है. और ऐसे ईन्सान पर बुद्धीजिवीयोने एक और रिश्ता थोपा है. सामाजीक एकता का, और सेक्युलारिझम का. बेचारा आम ईन्सान, वो थोडी दंगे करने निकलता है. दंगे करने वाले तो पैसे देकर बुलाये भाडे के गुंडे होते है.

    Reply

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