भारत तुम्हारी अस्मिता से बड़ा कैसे हो सकता है किसी इमाम का न्योता

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न्योता चाहे ब्यक्तिगत हो या सार्वजनिक दोनों में एक बात का हमेसा ख्याल रखा जाता है की कही ऐसे ब्यक्ति को आमंत्रित न कर दिया जाए जिससे ख़ुशी का माहौल बोझिल और शिकायत भरा हो जाने का डर हो ! इस लिए हमेसा न्योता देने से पहले घर में आपस में एक बार चर्चा जरूर होती है ! भारत भी तो हम सबका घर है क्यों की यहाँ लोकतंत्र प्रणाली कायम है जिस प्रकार घर में हर सदश्य घर का अहम अनिवार्य हिस्सा होता है फिर भी घर में घर के लोगो की सहमति के द्वारा एक मुखिया का चुनाव किया जाता है इस उद्देश्य से की घर पर आपत्ति संकट आने पर या कोई बड़ा फैसला लेते समय यह मुखिया घर के मान सम्मान सुरक्षा शांति सौहार्द का विशेष रूप से ध्यान रखेगा सबको ख़ुशी मिले समृद्धि मिले ऐसे हितकर फैशले लेगा उसी प्रकार भारत में जनता के लिए जनता के द्वारा चुना गया जनता का एक शासन ब्यवस्था काम करती है जिसमे जनता के मुखिया का प्रावधान है यह मुखिया जनता के सुख दुःख के साथ साथ राष्ट्र हित को ध्यान में रख कर कार्य करता है यह राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार भी होता है इसे प्रधानमंत्री कहा जाता है ! अब यह कैसे सम्भव है की राष्ट्र धर्म से बढ़ कर किसी ब्यक्ति विशेष का किसी समुदाय विशेष का धर्म हो जाए ! राष्ट्रधर्म से छेड़छाड़ करके व्यक्तिविशेष या समुदाय के धर्म को महत्वा दिया जाना एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए खतरा है ! राष्ट्र से बढ़ कर ब्यक्ति विशेष नहीं हो सकता न ही कोई समुदाय विशेष ही ! आज जब पाकिस्तान की नापाक हरकत की वजह से सीमा पर तनाव है बकरीद पर अरनिया में बेगुनाह मुसलमान भाइयो पर पाकिस्तान द्वारा गोली बारी करके बकरीद की खुसी में खलल डाली गई मातमी माहौल पैदा किया गया उससे समूचा भारतीय मुसलमान आहात है ऐसे में इमाम सैयद अहमद बुखारी द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अपने बेटे सैयद शाबान के दस्तारबंदी में न्योता क्या मुस्लिम समुदाय पचा पायेगा साथ ही क्या इसे राष्ट्र की अस्मिता के लिए एक बड़ा सवाल समझा जाये क्यों की मन बुखारी का मिया सरीफ को भेजा जाने वाला न्योता ब्यक्तिगत है किन्तु अगर परवेज मुसरफ आने को तैयार हो गए तो उनके आने का मार्ग भारत से होकर ही तय होगा और पाकिस्तान से दिल्ली की यह उनकी यात्रा विश्व्जगत में सवाल खड़ा करेगी क्यों की पाकिस्तान से दिल्ली तक नवाज सरीफ का आना बुखारी के लिए ब्यक्तिगत हो सकता है किन्तु भारत के लिए काफी उथल पुथल भरा होगा ! क्योकि जब बात आती है राष्ट्र अस्मिता की राष्ट्र धर्म की तो वहां पर ब्यक्ति विशेष गौड़ हो जाता है व्यक्ति विशेष का धर्म गौड़ हो जाता है राष्ट्र की अस्मिता अहम हो जाती है राष्ट्र का धर्म अहम हो जाता है ! एक अरब पचीस करोड़ की आबादी वाले इस देश में रोज ब्यक्तिगत आयोजन होते है खुशिया मनाई जाती है और यह भी तय माना जा सकता है की सभी लोग प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं करते न ही प्रधानमंत्री के लिए यह सम्भव ही है ! बुखारी साहब ने भी नहीं किया मोदी को आमंत्रित तो यह कोई बड़ी बात नहीं है ! किन्तु जब कोई ब्यक्ति विशेष धर्म विशेष प्रधानमंत्री से सलाह मसविरा किये बिना अपने पडोशी देश के प्रधानमंत्री को सीधे आमंत्रित कर दे अपने व्यक्तिगत कार्यक्रम में वह भी ऐसे पडोशी देश के प्रधानमंत्री को जिससे वर्तमान सम्बन्ध सौहार्द पूर्ण नहीं है और जिसके द्वारा सीमा पर हमला जारी है तो ऐसे में वह राष्ट्र धर्म पर प्रश्न चिह्न उठा देता है राष्ट्र की अस्मिता को ताक पर रखने का कार्य कर देता है ! घर के मुखिया को घर के कार्यक्रम में निमंत्रण की कोई जरुरत नहीं होती लेकिन घर में बाहर से किसे आमंत्रित करना है इसपर घर के सदश्यों द्वारा मुखिया से एक बार सलाह मसविरा जरूर होना चाहिए था क्यों की यह बात करांची से दिल्ली तक की यात्रा की है जो किसी भी दृष्टिकोड से आम बात नहीं हो सकती ! बीते कुछ दिनों पहले भारत से बात करने से पहले कट्टर धर्मगुरुओ से बात करने की वजह से ही भारत पाकिस्तान की शांति को लेकर बैठक नहीं हो पाई थी फिर भारत द्वारा एक धर्मगुरु का न्योता मिया सरीफ को क्या सन्देश देता है इमाम बुखारी साहब के बेटे सैयद शाबान बुखारी की दस्तारबंदी में भी तो कुछ ऐसे ही लोगो के शामिल होने के आसार है !

दिल्ली स्थित ज़ामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी साहब आप एक धर्म विशेष के मुखिया है जिस धर्म विशेष का हम सम्मान और आदर करते है किन्तु आपका भी एक दायरा है बेहतर होता आप उस दायरे का लिहाज़ करते और इस बात से इतेफाक रखते की लोकतंत्र प्रणाली वाले हमारे राष्ट्र के मुखिया की क्या अहमियत है राष्ट्र की अस्मिता के दृष्टिकोण से ! मिया परवेज़ मुसर्रफ को आमंत्रण भेजने से पहले क्या प्रधानमंत्री के साथ सलाह मसविरा होना अनिवार्य नहीं था ! क्या आपको नहीं लगता की बकरीद के पाक मौके पर हमारे बेगुनाह मुस्लिम भाइयों की पाकिस्तानी सेना द्वारा हत्या की गई , क्या आपको नहीं लगता की परवेज़ मुसर्रफ साहब के दामन पर बकरीद के दिन हुए अरनिया के लोगो की हत्त्या का दाग है और खून के छींटे भी ! आखिर आप हमारे भारतीय मुसलमान भाइयों को क्या सन्देश देना चाहते है ! क्या आप उन्हें ये जताना चाहते है की जिसने अपने दामन पर अरनिया के बेगुनाहो के खून के छींटे लिए हुए है वह कातिल आपके ब्यक्तिगत ख़ुशी का साथी है आपका मेहमान है ! इमाम बुखारी साहब भले मौका ख़ुशी का है आपके लिए , भले यह आपका ब्यक्तिगत कार्यक्रम है भले यह कार्यक्रम 1665 से होता आ रहा है किन्तु इस बार यह कार्यक्रम सवाल खड़ा कर रहा है आपके निमंत्रण के प्रति आपके दिल में भारत के अस्मिता के प्रति साथ ही समस्त भारतीय मुसलमान भाइयो के प्रति ! बुखारी साहब आपके फैसले को हम यहाँ राजनितिक तूल नहीं दे रहे है किन्तु राष्ट्र की अस्मिता से जोड़कर जरूर देख रहे है और बात जब राष्ट्र के अस्मिता की आई है तो मै आपको अरनिया के निर्दोष लोगो का चेहरा भी याद दिलाना चाहता हूँ , बकरीद पर खुसी की जगह मातमी चीख भी सुनाना चाहता हूँ और आपको ले जाना चाहता हूँ जम्मू कश्मीर के अरनिया क्षेत्र तक और उन 45 पुलिस चौकियों तक जिसे लहूलुहान किया था पाकिस्तानी सेना ने बकरीद के दिन ! मै आपको आपके राष्ट्र धर्म की याद दिलाना चाहता हूँ क्योकि राष्ट्र धर्म से बड़ा न कोई ब्यक्ति होता है न कोई धर्म और राष्ट्र की अस्मिता के साथ छेड़छाड़ करने का हक़ भी किसी को नहीं है ! लोकतंत्र में जनता का साशन जनता के लिए जनता द्वारा चुना जाता है अतः बुखारी साहब आपको मिया परवेज़ मुसर्रफ को न्योता भेजने से पहले एक बार जनता द्वारा जनता के लिए चुने गए जनता के साशन का प्रतीक यानी भारत के प्रधानमंत्री से सलाह मसविरा जरूर करना चाहिए था साथ ही उस धर्म विशेष के लोगो की आस्था का मान भी रखना चाहिए था जिनके मुखिया के तौर पर आप जाने जाते है यानी हमारे मुस्लिम समुदाय के भाई बंधुओ से भी एक चर्चा करनी चाहिए थी !

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11 thoughts on “भारत तुम्हारी अस्मिता से बड़ा कैसे हो सकता है किसी इमाम का न्योता

  • November 2, 2014 at 10:22 am
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    बुखारी साहब ने नवाज़ शरीफ को आमंत्रित कर के एक गलत काम किया है जिस की भर्त्सना की जानी चाहिए और हो भी रही है . सब से पहले दस्तारबंदी एक धार्मिक रस्म है इस में राजनितिक शख्सियत को बुलाना नहीं चाहिए था सिर्फ धार्मिक लोगो को.

    समझ में नहीं आ रहा है बुखारी से आखिर कौन सवाल पूछे ग के आप ने जो करोडो की जायदाद वक़्फ़ बोर्ड की हथुया ली उसे कब वापस करे गए , असल में उन से कोई नहीं पूछ सकता क्यों के उन्हें राजनितिक समर्थन है . मुस्लिम के नाम पे राजनीति करने वाले बुखारी सिर्फ अपना लाभ उठा रहे है .

    आखिर राजनितिक पार्टिया उन्हें क्यों भाव दे रही है जब के हक़ीक़त ये है के मुस्लिम समाज उन्हें अब कोई मानता नहीं है अगर बुखारी खुद जाम मस्जिद से नगर पालिका की चुनाव लड़े तो हार जाए गए.

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    • November 2, 2014 at 12:23 pm
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      एक ये बुखारा से आया खानदान हे जो सोचता हे की जब तक जामा मस्जिद रहेगी तब तक ये पुरे भारतीय उपमहादीप की जनता की साझी विरासत और धरोहर -इनकी खानदानी निजी मिलकियत सी रहेगी वही हमारे नए पी एम हे जो मुस्लिम कटटरपन्तियो की घिनोनी करतूत गोधरा काण्ड की ”बदौलत ” पी एम बन गए और अब इनकी सोच हे की ये ही 15-20- साल पी एम बने रहे इसके लिए ये हिन्दू कटटरपन्तियो की इंडाइरेक्ट्ली हौसला अफ़ज़ाई करते रहेंगे ताकि ये हर हाल में मेह्गाई बेरोजगारी इनकी पीठ पर किसका हाथ ( सचित्र ) इन बातो को इग्नोर करके हर हाल में वोट जरूर दे और दे भी रहा हे तो ये दो लोगो के दो सपने हमारे सामने हे में कसम खाता हु की इन दोनों सपनो को तोड़ने के लिए और जामा मस्जिद और सेवन रेसकोर्स रोड दोनों में ही सही परिवर्तन (”परिवर्तन ” सिर्फ सवेधानिक तरीको से ही ) के लिए में अपनी जान लड़ा दूंगा जो मुझसे जब भी बन पड़ेगा करूँग

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      • November 2, 2014 at 12:27 pm
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        अफज़ल भाई मोदी जी के तौर तरीको के कारण पुरे देश में आम मुस्लिम निराश हताश आशंकित हो रहा हे इसलिए उसकी हताशा के तवे पर अपनी रोटिया सेकने के लिए शायद बुखारी साहब ने ये दाव खेला आखिर ये भी तो राज़नीति में ही हे उधर हैदराबाद की ही मुसीबत भी अब दूसरे राज्यों के मुसलमानो के बीच पाँव पसार रही हे मोदी सरकार देश के अस्सी करोड़ आम बिलकुल आम लोगो के लिए खतरा बनती जा रही हे

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        • November 2, 2014 at 1:13 pm
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          प्राइम टाइम पे रविश कमर की बहस इसी इमामत पे बहुत ही अच्छा प्रोग्राम है किर्पया देखे . मीडिया से भी उम्मीद ख़त्म होती जा रही है मगर रवीश जी को देख कर लगता है के अभी भी कुछ लोग मीडिया की इज्जत बचने में लगे है मगर ९५ % मीडिया बिक चुकी है

          http://khabar.ndtv.com/video/show/prime-time/343355

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  • November 2, 2014 at 11:39 am
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    मेरे मुसलमान भाइयो और बहनों,
    रहती दुनिया तक हुसैन को याद करना इस्लाम को मजबूती देता है। अमीर माविया के बेटे यज़ीद के जुल्मो सितम के आगे आज हुसैन दिलो में हुकूमत करते है।
    इस्लाम में पीड़ियो की बादशाहियत को मना किया गया है। क्युकी हज़रत अली ने ऐसी किसी परंपरा को पनपने नहीं दिया।
    आज मुहर्रम के इस पाक महीने के बाद फिर दिल्ली में दस्तारबंदी है 22 साला नौजवान जो कान्वेंट की शिक्षा में पले-बढे है उनकी। शायद इनकी इस्लामिक जानकारी पर भी शक्को शुबह है। दोस्तों, ना ये वक़्त है की इसको सुना जाए और कोढ़ ये की इसको जानबूझ कर एक जलसे की शक्ल देकर देश की सियासत भी खेली जा रही है।
    जो चुप थे जिनके पास बोलने के लिए कुछ ना था उनको बैठे बिठाए मुद्दा दिया जा रहा है। मुसलमान जो अपनी गरीबी, अनपढ़ और पिछड़ेपन से जूझ रहा है उसको अपनी सहूलियत के लिए सियासत के इस दलदल में इमाम ने उम्मते मुसल्मा को जानबूझ कर डाल दिया।
    मेरे भाइयो और बहनों,
    हमारा शगल ये नहीं की कौन नमाज़ पढाये या कौन क्या बने जो हो वो हो। पर हमको और हमारी कौम को जानबूझ कर कटघरे में खड़ा करना अपनी इमामत के लिए इसका जवाब बुखारी साहब दे तो अच्छा है।
    भाइयो, मुसलमानों की लड़ाई अपनी गरीबी, बच्चो के इल्म, और अपने हुकूक को लेकर है। जान और माल की हिफाज़त को लेकर है।
    लिहाज़ा इन यज़ीद के चक्कर में ना अपना वक़्त खराब करे ना अपनी ताक़त। ध्यान रखे अपने जमीनी दिक्कतों की तरफ।

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  • November 2, 2014 at 11:42 am
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    बुखारी ने 2004 चुनाव में bjp की जीत के लिये फतवा दिया :-हारी
    2014 में काग्रेंस की जीत के लिये फतवा दिया:-काग्रेंस पूरी तरह निपट गई..

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  • November 2, 2014 at 11:52 pm
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    वैसे तो ये मसला पूरी तरह से मुसलमानो का ही है मगर एक बात दिमाग मे खटकती जरूर है कि क्या हमारे देश के इतने करोड़ मुसलमानो मे से “कोई एक भी” इतना काबिल नही बन पाया है जो इल्म और काबिलियत के मामले मे बुखारा से आकर शाही इमाम बने इस परिवार के पीढी दर पीढी चले आ रहे परिवारवाद का विकल्प बन सके ?

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    • November 3, 2014 at 6:02 pm
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      शरद भाई

      असल में बुखारी साहब ने इमामत को अपना खानदानी पेश बना लिया है जब के इस्लाम के क़ानून के अनुसार इस का मेरिट के आधार पे चयन होइनी चाहिए.

      आप तो जानते है जिस की लाठी उस की भैंस वाली कहावत , जब उन्हों ने वक़्फ़ की करोडो की जमीं जायदाद कब्जा कर रखा है और राजनीतीक समर्थन है उस का कोई क्या बिगाड़ सकता है. आप देखे सिर्फ बुखारी ही नहीं हर धर्म के पीठाधीसिं मस्जिद मंदिरो पे कब्जा कर रखे है कोई उन का कुछ नहीं बिगड़ सकता.

      सब से बड़ी बात ये के मेरे समझ के १% मुसलमानो का भी सहयोग बुखारी को नहीं है मगर मुस्लिम समाज का नेता बना फिरता है .. अब आप इसे मुस्लिम समुदाय के लिए बदकिस्मती ही कहे गए.

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      • November 3, 2014 at 7:41 pm
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        अफ़ज़ल भाई हालांकि हम दूसरे के मज़हबी मामले मे तब तक बोलना मुनासिब नही समझते जब तक कि वह डिस्कसन सार्वजनिक ना हो, इमाम साहब के बारे मे इसलिये बोलना पड रहा है कि जिस पाकिस्तान के नुमाइन्दो को वे अपना मेहमान बना रहे है उन पाकिस्तानियो ने हमारे देश मे आतंक फैलाने, सैनिको का सर काटने, यहा तक कि ईद के दिन भी कश्मीर के आम नागरिको की जान लेने से परहेज नही किया….और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी हमारे देश को बार-2 नीचा दिखाने की कोशिशे की (और कर रहा है) ??

        ठीक है मोदी जी ने मुसलमानो के लिये कुछ नही किया उनको मत बुलाइये मगर बाकी जिस-जिस को बुलाया है उसने मुसलमानो के लिये कौन से ताज-महल बनाये है ?? सबने झूठे वादे ही तो किये थे !!….

        शरीफ़ साहब हो या मुशर्रफ साहब आखिर उन्होने भारतीय मुसलमानो के लिये ऐसा क्या किया है ?? कहते हुए अच्छा नही लगता मगर खुद इनके पाकिस्तान मे भारत से गये मुसलमान को दोयम दर्जे की इज़्ज़त ?? देकर “मोहाज़िर” से नवाजा जाता है ?? भारतीय मुसलमानो को मोहाज़िर बनाने वाले इन बुखारी साहब के सगे हो गये ?? कमाल है ??

        हो सकता है मुसलमानो को लगता हो कि भारत मे उनके साथ भेदभाव होता है पर दुनिया का एक भी देश बता दीजिये जहा भारतीय मुसलमानो को भारत से जयदा हक, अधिकार और इज़्ज़त मिलती हो ?? बाकी गलतफहमी का इलाज तो हकीम लुकमान साहब के पास भी नही था

        अब जब बुखारी साहब मुसलमानो के सरपरस्त बन कर भारतीय मुसलमानो को अपमानजनक “मोहाज़िर” बनाने वालो को गले लगाएंगे और उनका विरोध होता नही दिखेगा तो इमाम साहब के साथ-2 बाकी मुसलमानो पर सवालिया निशान लगना शायद गलत नही माना जाना चाहिये (कष्ट के लिये क्षमा).

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      • November 4, 2014 at 6:20 pm
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        अफज़लभाई बुखारी साहब की ही बात नहीं हे भारत में हर जगह वंशवाद हे 90 % लोग यहाँ वंश की वजह से कुर्सी पर बैठे या आगे बढ़ पाये हे चारो तरफ यही हाल मिलेगा मोदी जी के बारे में कहा जा रहा हे के जी ये अपनी मेहनत से बिना वंश के कहा से कहा पहुंच गए ये भी पूरा सच नहीं हे क्योकि मोदी जी के गुरु इनामदार साहब थे जो संघ के बड़े नेता थे और अविवाहित थे मोदी उनके बेटे की तरह ही थे मोदी जी के एक महत्वपूर्ण पोजीशन में पहुचाने में उनका बड़ा योगदान जरूर रहा होगा ये भी एक किस्म का वंशवाद ही हे शाहरुख़ खान के बारे में कहा जाता हे की अपने दम पर बॉलीवुड बादशाह बने मगर ये भी आज़ाद हिन्द फ़ौज़ के जनरल शाहनवाज़ केंद्रीय मंत्री के ही नवासे या फिर रिश्तेदार तो थे ही तो भारत में हर जगह वंश मिलेगा

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  • November 3, 2014 at 3:15 pm
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    इधर काफी दिनों से वाइब्रेशन मॉड में थे इमाम बुखारी
    इस लिए फ़्लैश होने का एक नया तरीका ढूंढ निकाले है
    और मुद्दे के लिहाज़ से इस समय उनके लिए पाकिस्तानी
    प्रधानमंत्री को न्योते से बड़ा दूसरा कोई मुद्दा हो ही नहीं
    सकता क्योंकि इस समय पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र
    जो बना हुआ है पाकिस्तान अपनी हरकतों की वज़ह से …
    बुखारी ने अपना बुखार उतारने के लिए अच्छा डॉक्टर
    ढूंढ निकला है सस्ता भी अच्छा भी हाहाहाहाहाहा

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