भारत के मुसलमानों से !

bohra

ढाका की होली आर्टिसन बेकरी पर दुःसाहसी हमला (1 जुलाई 2016) भारत के लिए वेक-अप कॉल है। बल्कि ये कहें कि भारतीय मुसलमानों की आँखें खोलने के लिए काफी है।भारत के मुस्लिम समाज के एक जिम्मेदार नागरिक की हैसियत से मैं कह सकता हूँ कि तथाकथित इस्लामिक स्टेट या आईएस हमारे दरवाजों पर अगर अपनी बंदूकों से दस्तक नहीं दे रहा है तो विचारधारा की गुहार जरूर लगा रहा है।

मुझे ऐसा लगता है कि भारत का मुस्लिम समाज सपने में रहने का आदी हो चुका है। हम सब सोचते हैं कि सरकार तो है ही, पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ तो हैं ही। हमें चिंता करने की क्या जरूरत है। हमें जल्द समझ लेना चाहिए कि हमारे पश्चिम में तथाकथित आईएस की पकड़ मजबूत होती जा रही है। और ढाका के हमले के बाद यह साबित हो गया है कि अब पूर्व में भी तथाकथित आईएस वाली विचारधारा ने जन्म ले लिया है। (बाँग्लादेशी सरकार ने यह जरूर कहा है कि हमलावर स्थानीय मुस्लिम थे, लेकिन तथाकथित आईएस की संस्थापक उपस्थिति जरूरी नहीं है, इसकी विचारधारा संगठन से पहले पहुंच जाती है)।

पिछले हफ्ते हैदराबाद में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने कुछ मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार कर इन्हें तथाकथित आईएस का हिस्सा बताया। हम सब जानते हैं कि इस तरह के सरकारी दावे पहले अदालत में गलत साबित हो चुके हैं। लेकिन हैदराबाद वाला दावा अगर सही साबित हुआ तो?क्या हमें भारत में तथाकथित आईएस की मौजूदगी का ठोस सबूत चाहिए? क्या हम अदालत के फैसलों का इंतजार करें? क्या भारत के मुसलमानों के लिए यह काफी नहीं है कि उनके दोनों पड़ोसी देशों में तथाकथित आईएस और इसकी घातक विचारधारा मौजूद है?

इतना कहना काफी नहीं कि इस विचारधारा से बचके रहो, तथाकथित आईएस से होशियार रहो। नहीं, इसका अब समय नहीं रहा।

एक भारतीय मुसलमान की हैसियत से मैं कह सकता हूँ कि तथाकथित आईएस विचारधारा का उस पर दबाव बढ़ रहा है। इंटरनेट गुरु इसका पाठ पढ़ा रहे हैं। वाट्स एप ग्रुप्स हैं, जिनपर जिहादी विचारधारा पनप रही है। ये ऑनलाइन गुरु हिन्दुओं और हिंदुत्व में फर्क न दिखाकर सीधे-साधे मुस्लिम युवाओं को बहकाने में लगे हैं। आम धार्मिक प्रवचन में हमें बताया जा रहा है कि भारत का मुसलमान डरपोक हो चुका है, वो आधा हिन्दू बन चुका है। अपनी जबान उर्दू को छोड़ कर हिन्दी बोलने लगा है।

यानी भारत के मुसलमान की पहचान खतरे में है। शायद इसीलिए अब बुर्कापोश महिलाएँ पहले से कहीं अधिक नजर आती हैं। और शायद इसीलिए आज का युवा मुसलमान सिर पर गोल टोपी, लम्बी कमीज और ऊँचा पायजामा पहन कर गर्व से बाहर निकल रहा है, कम से कम ग्रामीण इलाकों में हम ऐसे युवाओं को जरूर देखते हैं। यह सच है कि कट्टर इस्लामी विचारधारा की छाप नजर आने लगी है। इसका मतलब हरगिज यह नहीं कि ये भविष्य के चरमपंथी हैं। कहने का मतलब यह है कि हम अब तक अल-कायदा और तथाकथित इस्लामिक स्टेट के बताए हुए इस्लाम से बचते आए हैं। हमारा उदाहरण नरेंद्र मोदी ने दुनिया वालों को दिया है। हमारी तारीफ बुश और ओबामा ने भी की है। हमें इस बात पर गर्व है कि आतंकी विचारधारा से बचे रहने पर हमारी प्रशंसा दुनिया भर में की गई है।
देश भर में मुस्लिम समुदाय से मिलने-जुलने से यह एहसास होता है कि मुस्लिम समाज में तथाकथित आईएस को लेकर कोई खास चिंता नहीं है। उससे भी बढ़कर इसकी खतरनाक विचारधारा के बारे में अधिक जानकारी भी नहीं। उन्हें अक्सर यह भी नहीं मालूम होता कि उनके बच्चे इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं, किस धार्मिक गुरु से सीख ले रहे हैं।

जब इजराइल ने 1967 में येरुशलम पर कब्जा किया था तो दुनिया भर के मुसलमानों के अलावा भारत के मुसलमानों ने एक साथ, एक समय, कंधे से कंधा मिलाकर कब्जे के खिलाफ जुलूस निकाला था। इसी तरह जब अमेरिका ने 2003 में इराक पर चढ़ाई की थी, भारत का मुसलमान सड़कों पर निकल आया था। कभी भारत के मुसलमानों ने तथाकथित आईएस या जिहादी तत्वों के खिलाफ पूरे देश में एक साथ शांति मार्च निकालने के बारे में सोचा है?जरा सोचिए, कल्पना कीजिए, कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गोवा से असम तक एक साथ हरी झंडी लेकर मुसलमान सड़कों पर शांति मार्च करें तो इसका असर क्या होगा? तथाकथित आईएस विचारधारा दुम दबाकर भागेगी। मुस्लिम समाज की इस कोशिश का असर पड़ोस के देशों पर भी हो सकता है।

अगर यह शांति मार्च संभव नहीं तो कम से कम अपने बच्चों पर कड़ी नजर रखें। कुछ समय पहले पुणे की एक युवा मुस्लिम लड़की इराक जाकर तथाकथित आईएस से जुड़ना चाहती थी। उसके माता-पिता ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों की मदद ली। एजेंसियों ने 16 वर्षीय लड़की को कट्टरपंथी विचारधारा से बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की। दूसरे मुस्लिम माता-पिता भी यह रास्ता अपना सकते हैं। मस्जिदों में इमाम तथाकथित आईएस की विचारधारा के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। मुस्लिम बच्चों को अच्छा नागरिक बनाने में मदद कर सकते हैं।

विदेश में चरमपंथी मुस्लिम संगठन जिहादियों को भारत भेजने से पहले बड़े झूठ का सहारा लेते हैं और वह यह कि ‘हिन्दू इंडिया में मुस्लिम पिस रहा है, उसे मजहबी आजादी नहीं, वो मस्जिद नहीं बना सकता, वो कुरान नहीं पढ़ सकता।’ मुझे खुद दो विदेशी चरमंपथी जिहादियों ने जेल में यह बात बताई है। भारत के मुसलमान ऐसे विदेशियों से सावधान रहें।

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जिहादी विचारधारा की सप्लाई लाइन काट देनी चाहिए और इस पर सभी जिम्मेदार मुसलमानों और संगठनों को काम करना चाहिए।
(लेखक बीबीसी के दिल्ली संवाददाता हैं
http://ravivardigest.blogspot.ae/2016/08/blog-post_97.html

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9 thoughts on “भारत के मुसलमानों से !

  • September 9, 2016 at 8:18 pm
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    JUBAIR AHMAD RSS, HINDU MAHASABHA ,AUR YAHUDI KI BHASHA BOL RAHE HAI , YE LEKH MUSALMANO KO KATGHARE ME KHADA KARTA HAI , BBC ME KAAM KAR RAHE HAI ISKKA MATLAB HAI KE MUSALMANO KE KHILAAF LIKHEGE TAB HI INKI NAUKRI PAKKI RAHEGI !

    AFZAL KHAN AUR SIKANDAR HAYAT BHI IN LOGO ME SHAAMIL HAI UNHE BHI LIKHNE KE LIYE PAISA MILTA HAI !

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  • September 9, 2016 at 10:05 pm
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    ” brijesh yadav
    September 5, 2016
    Ye sikandar hayaat sahab jo hai….inhe mai 3-4 salo.se lagaatar pdh raha hu….ye sahab secularism ka naqaab pahankar aate hai..darasal ye ek samprdaayik tatv hain jinhe ham ‘Soft Jihadi ‘ keh sakte hai….muslim samaz aise hi karta hai kuch logo ko aage rakhkar jo jhootmuth ka secularism ka dhong karte hai..dusre samudayo ko bhrm me rkhta hai…aur apne mansubo ko anzaam dene me laga rehta hai….ye bat yad rkhne ki hai ki agar koi muslim islam me aastha rkhte hue secularism ki bat karta hai to sawdhaan rehne ki jarurat hai….kyoki islam me secularism ki koi jagah nhi hai…aise insan kabhi bhi asli rang dikha sakte hai….ye khulkar hindu kattrata ki mukhalfat karte hai…par jo asli samsya hai vo islami kattrata hai us par do ek bat keh kar puri kar dete hai….inse sawdhan rahe.” ———————– ?

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    • September 16, 2016 at 9:31 am
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      वाहीद साहब पैसा फिलहाल तो नहीं हे, न मिल रहा हे , लेकिन अगर कल को होगा या मिलेगा तो ये में गारंटी देता हु की एक एक पैसे का में इस्तेमाल में ” कठमुल्लाशाही ” की जड़े खोदने में करूँगा

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  • September 10, 2016 at 12:03 pm
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    वाहिद जी या बृजेश जी में आप दोनों से सहमत नहीं हु क्योके सिकंदर हयात हमेशा सच लिखते है उनकी तारीफ़ की जानी चाहिए ! दूसरी बात खबर की खबर हिंदी का अकेला पोर्टल है जो अच्छे लेख देता है और हिन्दू मुस्लिम दोनों कट्टरता के खिलाफ आवाज उठता है !

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    • September 12, 2016 at 1:23 pm
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      सही कहा रमेश जी अफ़ज़ल भाई की कोशिशो से आयी ये हिंदी साइट अपनी एक अलग जगह तो बना ही चुकी हे , अब हो ये रहा हे की प्रिंट का वो भी हिंदी प्रिंट का काफी पतन हो रहा हे आने वाले समय अब इसके ग्रोथ की कोई आशा नहीं दिख रही हे ऐसे में हिंदी साइटस का भी फ्यूचर लग रहा हे रोज़ नए नए हिंदी साइट आ रहे हे और बड़े पब्लिकेशनो के तो हे ही मगर गौर करे तो किसी के भी पास विचार बहस या कमेंट हे ही नहीं— ? ( इसकी वजह हे की भारत में कही भी ”लक्ष्मी ” और ” सरस्वती ” का मेल बिलकुल नहीं हो रहा हे जिनके पास लक्ष्मी हे वो बिलकुल विचारशून्य हो चुके हे ना ही विचारो के लिए उनमे कोई जोश बचा हे जिनके पास ”सरस्वती ” हे वो सब लक्ष्मी ना होने से बुरी तरह तनाव में हे या थक चुके हे और काम नहीं कर पा रहे हे जबकि अफ़ज़ल भाई भारत के लुप्त हो रहे उन गिने चुनो लोगो में से हे जिनके पास ठीक ठाक लक्ष्मी भी हे और सरस्वती ( विचार ) भी हे ) अब देखे की चारो तरफ खबरे ही खबरे तो हे डॉक्यूमेंट्री हे रिपोर्ट हे प्रोपेगेंडा हे एकतरफा बयानबाज़ी हे मगर विचार बहस कमेंट किसी के भी पास नहीं हे हिंदी साइट में ये सिर्फ तीन संपादको के पास हे यानि नागर जी अफ़ज़ल भाई और संजय तिवारी इनमे से नागर जी जहां एक बड़े मिडिया ग्रुप से हे और शायद रिटायर होने वाले हे वही संजय तिवारी शायद घरेलू और सवास्थ्य समस्यो के बाद सिर्फ सोशल मिडिया टिप्पणियों तक ही लिमिटेड हो चुके हे ऐसे में आने वाले समय में मुझे लग रहा हे की अफ़ज़ल भाई की साइट ही हिंदी में काफी” टी आर पी ” लेगी हालांकि इस समय हिंदी की काफी” टी आर पी ” फेसबुक पर हे मगर ये माध्य्म इतना अधिक टाइम लेता हे की मुझे लगता हे की गंभीर पाठक धीरे धीरे इसे छोड़ेंगे और हिंदी साइटस की तरफ आएंगे

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  • September 11, 2016 at 9:24 am
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    ” Himanshu Kumarअगर मोदी दिल्ली से मुंबई का रेल टिकिट 25 हज़ार का भी कर देतब भी एक भी भक्त मूँह नही खोलेगाभक्तों के अनुसारमोदी की हार मतलब मुल्लों और कम्युनिस्टों की जीतऔर ये बात भक्तगण कभी सहन नहीं कर सकतेठीक इसी तरह हिटलर ने भी यहूदियों और कम्युनिस्टों का डर दिखा कर सत्ता अपने हाथ मे ले ली थीफिर हिटलर ने सवा करोड़ लोगों का कत्ल किया ,लेकिन उसके भी किसी भक्त ने विरोध नही किया था
    सत्ता पाने के लिये ठीक वही तरीका संघ ने भारत मे अपनाया हैहर चुनाव से पहले संघ दंगा करता है और फिर मुसलमानों और पाकिस्तान का हव्वा खड़ा करके चुनाव जीतता हैऔर देखिये डरे हुए लोग मोदी की लात भी खा रहे हैं और गुणगान भी कर रहे हैनौकरी मिले ना मिले , दाल चाहे 2OO रु किलो मिले , पर मुसलमानों और पाकिस्तान को नीचा दिखा दो क्या शातिर दिमाग पाया है , क्या चाल खेली है ?पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर दिया नफरत के खेल मे हिमांशु कुमार” जो मानवाधिकार कार्यकर्त्ता हिमांशु कुमार कह रहे हे सेम वही हाल मुस्लिमो का भि हे प्रेक्टिकल में मुस्लिम यूनिटी सुपीरियॉरिटी इकवेल्टी कही भी नहीं कही भी नहीं दुनिया में नहीं देश में नहीं राज्य गाँव गली किसी बिल्डिंग तक में भी नहीं . फिर भी इसके ख्यालो में खोय रहेंगे इन नमूनों को देखिये जो आई एस में भर्ती होने जा रहे थे भला हो पुलिस का ही जिन्होंने इन्हें धर लिया वार्ना इनका हाल वही होता जैसे खिलाफत आंदोलन के समय कुछ मुर्ख नए आज़ाद हुए इस्लामी मुल्क अफ़ग़ानिस्तान की तरफ हिज़रत कर गए वहां लोगो ने इन्हें लूटा और धक्के मार कर ब्रिटिश इंडिया के बॉर्डर की तरफ दौड़ा दिय कहा तो ये भी जता हे की खिलाफत आंदोलन के दो ”रत्नों ” को अरब के तुर्को से लड़कर आज़ादी पाए शासक ने नया खलीफा बनने की उन्कि जिद पर पहले तो प्यार से ना किया फिर जब नहीं माने तो —— घनश्याम सक्सेना भोपाल की किताब से

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  • September 15, 2016 at 7:17 pm
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    आज से ठीक दस बारह साल पहले में और मेरे अलीगढ़ के हाई प्रोफ़ाइल कज़िन इन मुद्दों पर खूब बहस कर रहे थे वो कई और में सेकुलर अकेला और थकेला ? मेरी जम कर झंड की जाती यहाँ तक की मेरा एक और कज़िन जो मेरे खेमे में था वो भी सामने भीड़ से घबरा कर एन टाइम पर पाला बदल देता हे और सब मिलकर मुझे किताबी , दुनिया ना जानने वाला , नास्तिक , मुस्लिम विरोधी , हिन्दुओ को खुश करने वाला बताते और मुझ पर आभासी अंडे टमाटरों जूते चप्पलो की बरसात हुई तब जाकिर नायकों की कोई खास मौजूदगी भी ना थी न वेस्ट यु पि ( हमारा इलाका ) की मुस्लिम आबादी का इतना तब्लीगिकरण हुआ था लेकिन ना जाने कैसे सिर्फ बेहद जमीनी अनुभवों से मुझे इल्हाम हो गया था जबकि मेरे कज़िन मुझ से ज़्यादा पढ़ने वाले थे मेरा कहना यही था जो आज हो रहा हे की आने वाले समय में पूंजीवादी आधुनिकता के दबावों तनावों अकेलेपन से घबरा घबरा मुस्लिम युवा अधिक धार्मिक होने की तरफ अग्र्सर होंगे और जब जरुरत से ज़्यादा अगसर होंगे तो मुल्ला नेता पूंजीपति आदि मिल कर इनका इस्तेमाल करेंगे और बहुत क्लेश होगा सेम वही सब हो रहा हे

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  • September 26, 2016 at 10:42 pm
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    Swati Mishra11 hrs · एक्सप्रेस की इस ख़बर को 4 हज़ार लोगों ने लाइक किया है अबतक। ख़बर में से मुस्लिम हटा दो, तो लोगों को इतनी दिलचस्पी नहीं होती। मुस्लिमों की देशभक्ति के सर्टिफिकेट जैसी लगती हैं इस तरह की ख़बरें। मुसलमानों ने पूजा की, आरती गाई, जन्माष्टमी पर अपने बच्चे को कान्हा बनाया, नवरात्रि में व्रत रखा जैसी ख़बरें भी बड़ा पसंद करते हैं लोग। कितना शक़ भरा है ना हमारे दिलों में…
    Muslim traders boycott ‘made in Pakistan’ products in Gujarat
    Muslim Traders’ Association, an unregistered group of Muslims traders in the city, also took out a protest march and burnt made in pakistan products near Mandvi area
    INDIANEXPRESS.COM

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  • September 30, 2016 at 2:50 pm
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    ”देवेश्वर द्विवेदीआज केवल 56 इंच की बात करो। हजारों किसानों का भूख से मर जाना, अपने परिजनों के शव की गठरी-पोटली बाँध कर हाँफते हुए ढोना, गरीबी, भुखमरी, दलित संहार और सांप्रदायिक आतंक की बात आज मत करो। अभी हम जुनून में हैं। जुनून में किसका खून हो जाय, कह नहीं सकते। ये भी मत कहना कि हमला, कल ही क्यों किया? हमले को बंसल परिवार के खात्मे से जोड़ने की गुस्ताखी की तो समझ लेना। मुझे तो इस बात पर भी हैरत होती है, कि अब तक बीके बंसल को पाकिस्तान का एजेंट नहीं कहा गया। भई.! उसने अमित शाह का नाम क्यों लिया? शाह के विरोधी तो वही हो सकते हैं, जो पाकिस्तान के एजेंट हैं। खैर, आप तो अपनी कलम सम्हालो। जज्बातों पर लगाम लगाओ। अभी तो आप स्वयं को देशभक्त साबित करो। कोई मरता है, मरने दो। बलात्कार होने दो। सीबीआई को कत्ल करने दो। आवाज़ नीची.!! और हाँ, देश ग़ुलाम बन चुका है। साँस रोककर तमाशा देखो।देवेश्वर द्विवेदी Shashi Bhushan Singh43 mins · मध्यवर्ग पर मोदी सरकार का जबरदस्त सर्जिकल स्ट्राइक…..
    छोटी बचतों से लेकर भविष्यनिधि तक पर ब्याज दरों में कटौती…..”Shashi Bhushan Singh.
    बड़े ही दुःख की बात हे की इस्लामिक कटरपंथ सारी दुनिया में ही जनविरोधी दक्षिणपंती ताकतों का रास्ता साफ़ कर रहा हे अमेरिका में ट्रम्प के आसार हे फ़्रांस ऑस्ट्रिया सभी जगह दक्षिणपंथी ताकते मज़बूत हो रही हे तो यहाँ पाकिस्तान और कश्मीर के सनकी मुस्लिम कटटरपन्तियो ने आख़िरकार यु पि पंजाब चुनाव से पहले इस सड़ियल मोदी सरकार को बेहद मज़बूती दे ही दी

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