भगवान राम और रामायण यथार्थ के दर्पण में !

ram

by — Shadab Saharai

विष्णु अवतार भगवान राम , रामायण या राम सेतु पर हम इस्लिये बात करते हैं कि शायद विष्णु अवतार भगवान राम का अस्तित्व था ! इस्लिये की रामायण में उनकी कथा है ! और रामायण को एक धार्मिक ग्रंथ होने का स्थान प्राप्त है उस्के लिये राम सेतु का प्रमाण भी दिया जाता है ! हम सब पर निगाह बारी बारी निगा डालें गें किन्तु सबसे पहले विष्णु अवतार भगवान राम के संबंध में उनके जनम की बात करते हैं !

१ – ये माना जाता है कि विष्णु अवतार भगवान राम त्रेता में पैदा होकर ग्यारह हज़ार वर्ष (११०००) की आयू में त्रेता युग में ही स्वर्ग वासी हुये इसमें किसी को कोइ दुविधा नही है अब त्रेता युग के बाद द्वापरयुग आता है जिस्की अवधि २४०० ब्रह्म वर्ष या खुदाइ साल है हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार एक ब्रह्म वर्ष या खुदाइ साल ३६० मानव या इनसानी साल के बराबर होता है ! इस प्रकार द्वापर युग की कुल अवधि हुयी -२४०० x ३६० = ८६४००० वर्ष !
फिर क्लयुग भी हिन्दू ज्योतिष्यों के अनुसार १९१२ इ० मे समाप्त हो गया जिसकी अवधि १२०० ब्रह्म वर्ष या खुदाइ साल हुयी अर्थात – १२०० x ३६० = ४३२००० वर्ष इनसानी साल जो हम उप्योग में लाते हैं ! इस प्रकार आज से लगभग कम से कम = ८६४००० (द्वापर की अवधि) + ४३२०० (कलयुग की अवधि) + ११००० ( राम की कुल आयु ) का योग हुआ = १३०७००० वर्ष (तेरह लाख सात हज़ार वर्ष पह्ले राम शायद पैदा हुये थे !
२- कुछ हिन्दू धार्मिक बुद्ध जीवियों के अनुसार रम का जनम आज से १८५५८०८४ (एक करोड पचासी लाख चौरासी वर्ष ) पहले हुआ था ! ( देखें सहरोज़ा दावत नईदिल्ली हिन्दुस्तानी मज़ाहब नंबर)
जब कि NASA की रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका में मनुष्यों की आबादी का आरंभ ही १७५८०,००० वर्ष हुआ अर्थात श्री लंका मे मनुष्यों के आबाद होने से लगभग नौ लाख अठहत्तर हजार चौरासी साल (९७८०८४) पहले राम का जनम हुआ था ! सवाल उठता है कि क्या फिर वो विष्णु अवतार भगवान राम हो सकते हैं !
३-S V Roy के अनुसार राम २००० ई० पुर्व अर्थात आज से ४०१५ (चार हज़ार पंद्रह वर्ष) पहले पैदा हुये !
४ – राम की जनम कुंडली और नक्छत्रों के आधार पर कुछ ज्युतिषी कहते हैं कि राम का जन्म ७३२३ ( सात हजार तीन सौ तेइस ) वर्ष इसा पुर्व अर्थात आज से ठीक ९३३८ वर्ष पहले हुआ था !
५ – अब आज कल जिसकी बात की लोगों में प्रसिद्ध प्राप्त है उन पुष्कर भटनागर की बात करते हैं जिन्हों ने स्पेशल साफ़्टवेयर बनाकर क्मप्यूटर द्वारा दो वर्ष से पहले ये शोध किया है कि राम का जन्म आजसे ७०७६ ( सात हज़ार छिहत्तर वर्ष पहले हुआ था !

अब प्रश्न उठता है कि जिन धर्मग्रंथों के द्वारा राम को जाना गया वो गलत हैं तब जाकर पुषकर भटनागर की बात सही हो सकती है ! या और लोगों की बातें सही हो सकती हैं ! इस तरह हर कथन दूसरे के राम के अस्तित्व को नकार रहा है !
इस प्रकार हम देखते हैं कि
अ- या तो पुषकर भटनागर गलत हैं !
ब- या दूसरे लोग गलत हैं !
स – या सभी के सभी गलत हैं ! हां जब पांच मे चार गलत हैं तो फ़ांचवे के सही की गारंटी कौन देसकता है जब कि उस के पास भी कोइ तार्किक सबूत नही है ! और अगर है तो रिषि मुनि झूटे साबित होते हैं खुद रामयाण भी झूट के एरे में आती है ! और सही बात ये भी है कि अगर रामायण न होती तो लोग राम को ऐसा जानते भी नही !
जो भी हो जिसके जनम से लेकर मरण हर बात में कोइ सबूत न हो बस लोगों के केवल अपने मत हों जिनमें लाखो या हज़ारों वर्षों का अनतरविरोध हो उसके अस्तित्व को सत्य कहना खुद हिन्दू धर्मविदों के अनुसार ही बहुत मुश्किल है ! ये मैं नही कहरहा हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय कवि और धर्मविद श्री रामधारी सिंह ’दिनकर’अपनी किताब ’संस्किर्ति के चार अध्याय ’ में पन्ना क्र्मांक १०२ पर लिखते हैं ” राम की कहानी का मूल स्रोत क्या है तथा यह कितनी प्राचीन है इस प्रश्न का अभी तक कोइ सही उत्तर नही मिल पाया है ”
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हिन्दू धर्म ग्रंथ व धर्मविदों के अनुसार विष्णु अवतार भगवान राम , के बारे में कुछ और यथार्थ !

१- संस्किर्त में लगभग २० रामायण हैं जिनमें किसी में भी राम को विष्णु का अवतार नही कहा गया है और ये किसी भी प्रकार छोटी बात नही की इसकी अनदेखी कर दी जाये क्यों कि जिस विष्णु अवतार भगवान राम के संबंध में पूरी पुस्तक रची जाय उसमे ही उनके विष्णुअ अवतार होने की अतिमहत्वपुर्ण बात न लिखी जाये ये संभव नही ! अर्थात संस्किर्त के लगभग २० रामायण ही किसी विष्णु अवतार भगवान राम कि पुष्टि करने मे अक्छम हैं ! या इनकारी हैं !
२- संस्किर्त भाषा का पितामह पाणिनी ने अपने किसी भी पुस्तक में किसी राम या विष्णु अवतार भगवान राम की बात भूले से भी नही की है ! यदि राम का अस्तित्व विष्णु अवतार भगवान राम के स्वरूप होता तो अवश्य ही उनकी बात उसके किताबों मेइं होती ! वो लाख व्याकरण विद था फ़िर भी राम का नाम ज़रूर लिखता ! लेकिन ऐसा नही हुआ क्यों कि उसके युग में ऐसी कोइ बात नही थी जब कि उसका युग एक अनुमान के अनुसार ६०० ,७०० वर्ष ई० पुर्व था !
३ – सापताहिक हिन्दुस्तान ४ अक्तूबर १९९२ के अपने अंक में लिखता है कि राम अयोध्या नही बल्कि उत्तर प्रदेश के पूरबी ज़िले बलिया में पैदा हुये ! इसका अर्थ भी यही हुआ कि अस्प्ताहिक हिन्दुस्तान किसी विष्णु अवतार भगवान राम का इंकारी है !
४ – रामा को किसी भी उपनिषद में विष्णु का अवतार नही लिखा गया अर्थात उपनिषद भी विष्णु अवतार भगवान राम के अस्तित्व की पुष्टि नही करते !
५- इसी लिये राष्ट्र पिता गांधी जी कहते हैं मेरा राम , रामायण वाला राम नही हैं !
६- भारत का पहला गवर्नर जनरल राज गोपालाचार्य कहते हैं राम भगवान नही बल्कि एक् हीरो है !
७ – सुप्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद प्रो० लाल कहते हैं ” अगर राम अयोध्या में पैदा हुये तो उन का युग त्रेता न होकर द्वापर होगा ! जो क्रिष्ण क युग था !
८- राष्ट्रीय सहारा १३ दिसंबर १९९२ के अंक में साहित्यकार विष्णु प्रभाकर लिखते हैं ” ये सच है की राम को ऐतिहासिक व्यक्तित्व नही हा mythological बे बुनियाद् कहानी का पात्र् है पर symbol of Values है !
(-It is truth that Rama is not a historical personality but mythological and symbol of Values. Sahityakar Vishnu Prabhakar (Rashtriya Sahara 13 Des1992)
९- श्री अरविन्दू कहते हैं ! राम का कोइ ऐतिहासिक आधार नही है !
१० – M Venkat Rtanam कहते हैं राम वास्तव में इजिप्ट या देश मिसर का फ़िरओन रअमसीस था !

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21 thoughts on “भगवान राम और रामायण यथार्थ के दर्पण में !

  • April 15, 2015 at 9:21 am
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    भगवान श्री राम को अवतार के रूप में मान ने का काम सिर्फ धार्मिक पुष्तकों से ही किया जाना चाहिए! और भगवान के रूप में जान ने का काम और उनको भगवान के रूप में अनुभव करने का या उनका दर्शन प्रत्यक्छ रूप में करने के लिए धर्मगंथों में वर्णित साधनाओं से ही किया जासकता है ! सिर्फ बौद्धिक और तार्किक विश्लेषण समय की बर्बादी और बौद्धिक खुराफात के अलावा और कुछ नहीं है !राम के असितत्त्व पर और उनके भगवान होने पर प्रश्न चिन्ह उनके जीवन काल में भी उठते रहे और आज तक उठ रहे है !और उठते रहेंगे !और यह सिर्फ राम के ही सम्बन्ध में नहीं अन्य अवतारों के सम्बन्ध में ही है !किन्तु इस सबके बाद भी भगवान श्री राम श्री कृष्ण अवतार के रूप में पूजे जाते हैं !पूजे जाते रहेंगे !क्योँकि बो वास्तव में ईश्वर केअवतार थे !इसका प्रमाण उन संतो सन्यसिओं साधुओं और महात्माओं के जीवन और उनकी साधनाओं और प्रभाव से प्रत्यक्छ होता है !जिसका ज्ञान हजारों साल के इतिहास से सिद्ध होता है !और जिनका विवरण महाभारत उपनिषदों आदि ग्रंथोँ से और अनेक ज्ञात अज्ञात संतो के और साधुओं सन्यासिओं के प्रत्यक्छ जीवनो से होता है !और साधको के दिल दिमाग में तर्क से सिद्ध करने वाले बुद्धि जीविओं से भ्रम उत्पन्न हो कर कही साधक भक्ति पथ से विचलित होकर पथ भ्रष्ट ना हो जाएँ !इसीलिए भगवान श्री कृष्ण ने गीता में ९(११,१२)में कहा है !कि जो बुद्धि जीवी मुर्ख लोग मेरे सम्पूर्ण प्राणिओं के महान ईश्वर रूप श्रेष्ठ भाव को ना जानते हुए मुझे मनुष्य शरीर के आश्रित मान कर मेरी अवमानना करते हैं !जो आसुरी और मोहिनी प्रकृति का ही आश्रय लेते हैं ऐसे अविवेकी मनुष्यों की सब आशाएं व्यर्थ होती हैं सब कर्म व्यर्थ होते हैं और सब ज्ञान व्यर्थ होते हैं ! तथा कथित बुद्धि जीवी तर्क से अवतार को सिद्ध करने में अपनी शक्ति को व्यर्थ करते हैं और साधक भक्त श्री राम को विष्णु का अवतार मान कर और उसको साधना से प्रत्यक्छ अनुभव कर अपने जीवन को धन्य करते हैं !

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  • April 15, 2015 at 9:34 am
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    धार्मिक मान्यताए भावना के आधार पे होती है, तर्क के आधार पे बात करेंगे तो सभी मज़हब त्रुटियुक्त है. लेकिन दुनिया मे हर मज़हब और उसकी मान्यताओ पे विश्वास रखने वाले लोग है. इसलिए हम यह मान ले की दुनिया मे सभी नास्तिक हो जाएँगे, एक अव्यवहारिक सोच होगी. लेकिन इतना ज़रूर है की दुनिया मे हर सोच को रखने का अधिकार होना चाहिए. मज़हबी लोग मज़हब माने, लेकिन जो मज़हब को बस एक काल्पनिक सिद्धांत मानते है, उन्हे भी उसपे टिप्पणी का हक होना चाहिए.
    इस मसले पे देखा जाए तो मुस्लिम क़ौम, बहुत अधिक पिछड़ेपन मे घुसी हुई है, और ये पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है. अधिकांश मुस्लिम मुमालिको मे इस्लाम की तार्किक आलोचना भी गंभीर अपराध माना जाता है. इस के लिए पूरे विश्व के लोगो जिनमे मुस्लिम भी शामिल है को अरब देशो पे दवाब बनाना चाहिए. हिंदुओं मे अजीबो ग़रीब धार्मिक मान्यताओ के उपरांत भी, यह उन टिप्पणियों के प्रति तुलनात्मक रूप से सहज और सहिष्णु है. बाकी इस प्रकार के लेख सकारात्मक प्रभाव, और अंतर्धर्मिक संवाद स्थापित करने मे मददगार ही होते हैं. आपका लेख अच्छा है.

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  • April 15, 2015 at 10:33 am
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    आप्ने अच्हे प्रश्न उथाये है , इस्से लग्ता है अप्के पास इसकेी क्शम्मता है !
    ऐसि हि प्रश्न् इस्लाम् पर रखिये !
    कौन माई का लाल इस्को प्र्मानित करेगा ?
    आपने माना है कि नासा ने श्रेी लन्का मे करेीब १० लाख वर्श पहले मनुश्य रहते थे !
    इस्ला पहला पुरुश आदम् का जन्म कब मान्तेी है ! किस जगह जन्म हुआ कौन प्रमनित करेगा ?
    कल्पित आदम के शरेीर से हव्वा का जन्म कौन प्रमनित करेगा ?
    आग से शैतान{ श्रेी इब्लेीस जेी क्या सम्भव है ?
    असन्ख्य कल्पित फरिश्तो का वजुद सम्भव है?
    कल्पित बुर्राक जन्वर, कल्पित मेराज कौन प्र्मनित कर सक्ता है ?
    सिर्फ सातवे अस्मान मे एक सिमित सिन्घसन मे कल्पित अल्लाह है कौन साबित करेगा ?
    कुरान कि आयते “किस तरेीके ” से आयेी ? कौन प्रमनित करेगा ? यह्सब तो हजारो सालो का है !
    मुहमम्द जेी कि पहलि बिबि खुदेीजा पहले पति क जन्म किस स्थन मे हुआ कौन सा कमरा था ? कौन साबित करेगा !
    आप्के दादा , पर दादा का जन्म् किस कमरे मे हुआ कौन् सबित करेगा ?तब क्या यह सम्ज्हा जाये कि उन्का जन्म हि नहि हुआ!
    हमारेी बेीबेी जेी का जन म किस दिन हुआ उन्को नहेीमालुम् तब क्या हम अप्निबेीबेी जेी का अस्तित्व नकार दे ?
    महर्शि पादनेी किस जगह पैदा हुये थे क्या उस्को साबित् किया जा सक्ता है क्या पदिनेी के ग्रन्थ मे चरक, सुश्रुत ,आर्यावर्त् आदि का जिकर है ? फिर राम का क्यो होगा ? या चरक सुश्रुत के ग्रन्थो मे पद्नेी का जिकर हो?
    क्या विश्नु के जन्म कोसाबित किया जा सक्ता है फिर उन्के अव्तार भेी कैसे हो सक्ता है ? राम जि का अस्तित्व था ! वह इश्वर् नहेी थे ,बल्कि राजा थे , गनेश कल्प्निक है !
    जब मुग्लो ने तक्शशिला और नालन्दा विश्व्विद्यलय के लाखो ग्रन्थ जला दाले तब बहुत सेी बाते साबित् भेी कैसे कि जा सक्तेी है ! यह देश ह्जार साल तक् गुलाम भि रहा है उसेी दौरान बहुत से ग्रन्थो मे मिलावत भि हो चुकि है !

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  • April 15, 2015 at 5:19 pm
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    रामायण एक महागाथा है जैसे महाभारत दोनो दुनिया के बड़े महागाथा मे है जैसे अल्फ लैला और शाहनामा है .इस लिये रामायण एक महागाथा है जिस का हक़ीक़त से कोई वास्ता नही है .

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  • April 15, 2015 at 5:39 pm
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    अफजल जी क्या आप ऐसी ही खोजपूर्ण विवेचना क़ुरआन, पैगम्बर और अल्लाह की करने की जहमत उठायेंगे?

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    • April 19, 2015 at 1:02 pm
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      बीरू यादव जी

      अगर आप ने मेरा पूरा लेख पड़ा होता तो आप ऐसा नहीं लिखते .आप से निवेदन मेरे लेख पड़े उस के बाद कमेंट करे .

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  • April 16, 2015 at 12:45 pm
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    धार्मिक ग्रंथो की अच्छी बातो पर किसी को मेहनत नही करते देखा जो अनगिनत है !! अगर हम गलत है तो बताइये कि दुनिया का कौन सा मजहब ऐसा है जो सिर्फ गलत बाते ही सिखाता है ??

    दरअसल आज का स्वार्थी इंसान हर बात मे शॉर्ट-कट इस्तेमाल करना चाहता है इसीलिये बार-2 धार्मिक ग्रंथो की कुछ बेहद कम ऐसी बातो / घटनाओ को कुरेद-2 कर उनका जिक्र सिर्फ अपने गलत कामो को जस्टिफाई करने के लिये ही करता है……जैसे इस्लाम मजहब वाले आतंकवादी इस्लाम के धार्मिक ग्रंथो मे जेहाद का जिक्र देकर बेगुनाह इंसानो और यहा तक कि बेहद छोटे-2 मासूम बच्चो की भी बेरहमी से जान लेते है ??…..क्या कोई बतायेगा कि उन नन्हे-मुन्ने मासूम बच्चो से “आतंकवादियो के धर्म” को कौन सा खतरा है ?? खतरा और वो भी इस हद तक कि उन बच्चो की जान ली जाये ?? पढ़ा तो कही नही मगर यकीन नही होता है कि इस्लाम की किसी भी किताब मे बेगुनाहो और मासूम बच्चो की जान लेना सही बताया गया होगा ?? पर ताज्जुब इस बात पर जरूर होता है कि बाकी मुसलमान उन मुट्ठी भर मुसलमानो को खुद पर हावेी क्यो होने देते हे ??

    राम कब पैदा हुए थे के अलावा भी रामायण की शिक्षा मे बहुत कुछ है जिस पर इंसान चलना शुरु करे तो माहौल खुशनुमा हो जाये….
    पिता की बात का मान रख कर 14 साल जंगल मे कष्ट झेलने वाले कितने सुपुत्र आपको नज़र आते है ??
    लक्ष्मन जैसे भाई हो जाये तो भाई-भाई के झगड़े ही ना हो
    सुग्रीव और राम की दोस्ती
    अंगद और हनुमान जैसे निस्वार्थ सेवी
    सीताजी जैसी पत्नी….कितना कुछ है !!

    मगर नकारात्मकता से फुर्सत मिले तब ना 🙂

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  • April 16, 2015 at 1:53 pm
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    sharad ji

    baat achche bure ki nahi hai , sawal RAAM JI ke astitv ki hai .ye haqeeqat hai fasana . india ke itihaas ke anusar sirf MAHAGATHA hai aur kuch nahi.

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    • April 16, 2015 at 5:40 pm
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      आपके हिसाब से तो सिर्फ इस्लाम् सत्य है !
      फिर भेी उप्रोक्त प्रश्नो का उत्तर नहेी है !

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      • April 19, 2015 at 6:32 pm
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        (चिश्ती साहब के अलावा बाकी सभी मुस्लिम पाठक क्षमा करे)
        चिश्ती साहब अगर आप इतने ही तर्कशील है तो अपने अल्लाह, क़ुरान और 1,20,000 फ़रिशतो को भी उसी अंदाज से शक की निगाह से क्यो नही देखते:)
        अल्लाह–>मुसलमानो को 14 वी सदी से पहले वजूद मे क्यो नही ला सका ? जबकि बाकी कई मजहब , धर्म वजूद मे आ चुके थे !! क्या मजबूरी थी अल्लाह की ??
        क़ुरान–> किसने लिखी? कब लिखी? सिर्फ अरबी मुस्लिमो के लिये ही क्यो लिखी?
        1,20,000 फ़रिश्ते–>सारी हादिसे, क़ुरान, मुल्ला, मौलवी, उलेमा, हाफ़िज़, हाज़ी, इस्लाम के जानकार, धर्मगुरु सब मिल कर भी सिर्फ 120 फ़रिशतो का नाम बता दीजिये !!
        अपनी कमिया नज़र तब आती है जब इंसान अपने गिरेबां मे झाँकने की ईमानदारी दिखाने की सोच रखता हो जिसकी उम्मीद आपसे करना शायद जयादा होगा:)

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        • April 19, 2015 at 6:35 pm
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          चिश्ती साहब अब तो मानेंगे कि झूठ का पुलिंदा आपके मजहब मे भी काफी है !! अगर नही तो हमारी बातो को गलत साबित करने वाले तर्क पेश कीजिये:)

          सोचा तो यही था कि शान्ति और संयम की भाषा आपकी समझ मे आ जाये मगर हम गलती पर थे….

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          • April 19, 2015 at 9:52 pm
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            चिश्ती साहब हमारे मेसेज मे आप तो एक भेी गलती निकाल नही पाये चलिये हम खुद ही सुधार कर देते है…14 की बजाय 04 वी या चौथी सदी पढ़ा जाये ….वैसे खैरियत से तो है जनाब चिश्ती साहब 🙂 खालेी पेीलेी टेंशन मत लिया कीजिये क्योकि मज़हबी माली हालत आपकी तरफ की भी दुरुस्त नही है ः)

    • April 19, 2015 at 6:31 pm
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      (चिश्ती साहब के अलावा बाकी सभी मुस्लिम पाठक क्षमा करे)

      चिश्ती साहब अगर आप इतने ही तर्कशील है तो अपने अल्लाह, क़ुरान और 1,20,000 फ़रिशतो को भी उसी अंदाज से शक की निगाह से क्यो नही देखते:) जबकि बाकी कई मजहब , धर्म वजूद मे आ चुके थे !! क्या मजबूरी थी अल्लाह की ??
      अल्लाह–>मुसलमानो को 14 वी सदी से पहले वजूद मे क्यो नही ला सका ?
      क़ुरान–> किसने लिखी? कब लिखी? सिर्फ अरबी मुस्लिमो के लिये ही क्यो लिखी?
      1,20,000 फ़रिश्ते–>सारी हादिसे, क़ुरान, मुल्ला, मौलवी, उलेमा, हाफ़िज़, हाज़ी, इस्लाम के जानकार, धर्मगुरु सब मिल कर भी सिर्फ 120 फ़रिशतो का नाम बता दीजिये !!

      अपनी कमिया नज़र तब आती है जब इंसान अपने गिरेबां मे झाँकने की ईमानदारी दिखाने की सोच रखता हो जिसकी उम्मीद आपसे करना शायद जयादा होगा:)

      Reply
  • April 23, 2015 at 4:39 pm
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    क्या टिप्पणी करते हैं विषय वस्तु से धर्म को सिरे से मानते ही नही उन की कोइ बात नही लेकिन जो अपने आप को किसी भी धर्म का नुयायी भी कहें
    और बहुत घमंड से मुस्लिमो से सभी फ़रिश्तों का नाम जानने का सवाल करें वहीं पर इस्लाम के संबंध में उन्के तथालथित ग्यान की पोल खुल जाती है ! कि उनको ये भी पता नही कि इस्लाम फ़रिश्तों का या संसार भर के जीवाधारियों के नाम जानना नही !इस्लाम में जितना कुरान और पैगमबर मुहम्मद साहेब ने बताया उस के प्रकाश में और बातें जानने को कहा गया ! इस्लाम के अनुसार सब को जनम देने वाला अल्लाह है ! अगर देवताओं का अस्तित्व है तो देवताओं की रचना भी इस्लम के अनुसार अल्लाह ने की होगी अब ३३ कोटि देवताओं का पूजने वाला जो खुद ही मुश्किल से ८०,९० देवताओं के नाम से भी अन्भिग्य हो किसी मुसलमान से पूछी कि ३३ कोटि देवताओं के नाम बताओ क्यों कि उनकी रचना अल्लाह ने कि है तो इस पर सवाल करने वाले की अकल पर हंसी ही आये गी ! इसलाम कहता है फ़रिश्ते इन्सानों को दिखायी नही देगें हां अल्लह चाहे तो और बात है ! हमे उनका नाम नही बताया गया कुछ को छोड कर, तो हम् अपने तरफ़ से उस का नाम नही रख सक्ते ! सीधा स जवाब है ! अब सवाल करने वाले को स्वयं अपने बहुत से संबंधियों के जीते जागते उसके सामने खेलते कूदते बच्चों का नाम नही पता होग ! उसके खेत में अपने आप उग आने वाली बहुत सारी घास फ़ूस के नाम का पता नही होगा हर रत नज़र आने वाले बहुत से सितारों के नाम का पता नही होगा ! फिर भी वो सम्झे कि मैं ऐसा सवाल करके जीत गया तो ये उसकी मंद बुद्धि है बाकी कुछ नही ! पोस्ट हर स्तर से सराह्निय है और लेखक ने बहुत मेहनत से सक्छ्य के साथ लिखा है इअस्लिये उस्को मुबारकबाद ! किसी बात की सच्चाइ की कसौटी आस्था नही है !

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    • April 23, 2015 at 5:21 pm
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      अगर कल्पित कुरानेी अल्लाह सब्को जन्म देने वाला है तो उस्के गुन{ सिफत्} भेी जन्म पाने वाले मे आने चाहिये थे जो नहेी है .
      देवता सिर्फ ३३ है , कोति का अर्थ प्रकार भेी होता है ! वह देव्ता भेी अपुज्य है !
      वह सन्सार् का भला करते है इस्लिये उन्को देवता कहा जाता है, जैसे जल धरतेी आदि !
      अगर फरिश्ते दिखलऐ नहेी देते तो कुरान कि अयते कैसे पेश करते थे .
      और हजरत लुत कि बस्ति वाले कैसे उनसे “होमो ” चाहते थे ? देखे कुरआन्११/ ७७-८१
      कल्पित कुरानेी अल्लाह् कोई पागल् या तानाशाह है क्या > वह नियम बद्ध नहेी है क्या ?
      फिर आप अपने लिये फिर से ” बचपना” मान्ग लिजिये लिजिये ! शयद दुआ कबुल हो जाये !
      याद रखिये कुच बाते अस्म्भव भि होति है ! वर्ना कहेी ऐसा न हो जाये कि सुबह जब आप उथे तब् आप्के पास बचपना वापस आ जाये ?
      क्योकि वह तो सब कुच कर सक्ता है ?

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  • April 23, 2015 at 4:43 pm
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    लेखक ने जो भी कहा है वह साक्छ्य के आधार पर कहा है ! लोगों का कमेंट ,पोस्ट पर न करके इधर उधर की बातों पर करना ये प्रदशित करता है की टिप्पणी करने वालों के पास कोइ प्रभाव कारी उत्तर नही है ! उनकी प्रविर्ति है टिप्पणी करना इस प्रकार वह अपने आचरण को प्रदर्शित करने का मात्र प्रयत्न कर रहे हैं ! लेखक इस सारगर्भित लेख के साथ ही इस बात के लिये भी बधायी का पात्र है कि उसने संदर्भ में अपने विवेकशीलता का सुन्दर परिचय देते हुये केवल हिन्दू धर्मविदों के कथनों को ही रीफ़र किया और उन की बात रखी है जिन के ग्यान के समक्छ मैं या जो भी कमेंट कियें हैं सभी तुच्छ हैं ! इस भी पर किसी को यदि सत्य स्वीकार नही तो ये उसकी अपनी मनोदशा है ! मै सत्य की कसौटी पर राम या रामयण को परखने के लेखक के तार्किक ,सुन्दर और सफ़ल प्रयत्न पर उसकी सराहना करता हूं एवं प्रकाशक से ये निवेदन करता हूं कि ऐसे तार्किक लेख यदि वो और प्रकाशित करें तो ग्यानप्राप्ति स्वरूप मै उनका आभारी होवूंगा !

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  • April 24, 2015 at 2:19 pm
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    मुस्लिम ब्लॉगर्स ? का धार्मिक और सामाजिक विषयो के प्रति जबरदस्त नकारात्मकता से लिखना हम पहली बार नही बल्कि कई सालो से देख रहे है, नकारात्मकता से लिखना है लिखिये कोई गलत बात नही है मगर “इस्लाम को छोड़ कर” बाकी सभी धर्मो के बारे मे लिखने का रवैया जरूर बदनियती पर सवाल खड़े करता है ??

    जिस तर्कशीलता के साथ हिन्दुओ, सिखो, ईसाइयो, यहूदियो आदि पर लिखते है वही तर्कशीलता इस्लाम का नाम आते ही क्यो बिल मे दुबक जाती है :)…..
    6-6 साल की बच्चियो से निकाह वाले दूसरो के धर्मो पर सवाल उठाये तो ऐसा लगता है काला भुजंग तवा किसी स्टील के बर्तन के कालेपन का मजाक उड़ा रहा है 🙂

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  • April 24, 2015 at 4:30 pm
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    महोदय आपकि गनना भि गलत है चलिये मान लेते है कि इसि चतुर्युग मे भगवन राम ने जन्म लिय तो—
    द्वापर- ८६४००० साल्( भगवान क्रिश्न=ान्तिम वर्शो मे )
    कलियुग्-४३२००० साल (अभि तक ५००० साल हि हुये है)
    अब्तक्कुल समय -८६४०००+५०००+११०००=८८०००० साल लग्भग
    ये इतना समय है कि आज के समय मे अव्शेश शायद ना मिले
    (२,३,४,५)अब अगर आप इस्लम को शन्ति प्रिय बतने के लिये ये कह्ते है कि isis सरागना यहुदि है उस्का इस्लाम से कोइ लेना देना नहि है तो हुम भि कहते है जिन लोगो कि गनना आप्ने दि है य तो उन्हे knowledge नहि है या फिर वो paid news dete hai ुनक हिन्दु धर्म से कोइ लेन देन नहि है

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  • April 30, 2015 at 6:24 pm
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    चलो “भारत् और भारतीय ज्ञान दर्शन झूँठा है? किन्तु „इलावर्त„ और्व„ हरिवर्ष„ अरण्यवर्ष„ शुक्राचार्य„ उशणा-काव्य और राजाबलि एवम् सम्राट विक्रमादित्य आदि क्या थे?

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  • July 25, 2015 at 7:17 pm
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    मुसलमान भाईयों को आहत करना हमारा उद्देश्य नहीं है परंतु मुस्लिम लेखकों द्वारा उठाए जा रहे इस तरह के सवाल हमें उत्तर देने पर विवश करते हैं । शादाब साहब ने तो श्री राम के अस्तित्व पे ही सवाल उठाया है । मैं मानता हुँ कि हिंदु धर्म मे भी कुछ कहानियाँ बाद मे जुड़ गई हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि राम और कृष्ण झूठ है । विडियो रिकाॅर्डिंग तो इसा और मुहम्मद साहब की भी उप्लब्ध नहीं है। श्री राम को अवतार माने या ना माने उनकी जीवनी पढ़ने वाला ये तो मानेगा ही कि वो एक महान व्यक्तित्व थे । और अगर संदेह की बात हो रही है तो फिर ये बताया जाए कि मुहम्मद साहब को अल्लाह या उनके दुत से बात करते हुए किसने देखा था ? जिब्राइल और मिकाइल नाम का फरिस्ता सच मे था भी या नहीं इसका क्या प्रमाण है ? अल्लाह के 124000 नबी हैं, फिर हमें भारत मे आए एक भी रसुल का नाम हमें क्युँ नहीं पता है ? जिन नबीयों के नाम आए वो अरब उससे सटे हुए क्षेत्रों के ही क्यों हैं ? और अब नबीयों की नियुक्ति क्यों बंद हो गई, क्या हर जगह अमन चैन कायम हो गया ?

    श्री राम को तो कहानी का एक पात्र बता दिया गया । अब, आदम, सुलेमान, नुह, इब्राहीम, मुसा आदि महानुभावों के बारे मे लेखक के क्या विचार हैं ? आदम साहब की कहानी क्या किसी परीकथा से कम है ! इस्लाम मे भी एक से एक चमत्कार हुए हैं । मुहम्मद साहब ने एक बार उंगली के इशारे से चाँद के दो टुकड़े कर दिए और एक बार तो वो एक उड़नेवाले जानवर पर चढ़ कर जन्नत की सैर करने भी गए थे । मुशा साहब ने अपनी छड़ी पटक के सात चश्मा निकाल दिया । सुलेमान साहब का तो हर चीज पे अधिकार हो गया । जिन्न भी उनकी गुलामी करने लगे और हवा भी उनकी मर्जी से बहने लगा । उनकी सेना मे जिन्न और पक्षी बहुत बड़ी संख्या मे थे । नुह साहब 1000 साल तक जिंदा रहे ।

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  • January 14, 2016 at 8:09 pm
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    सबसे पहले तो मैं इस लेख का खंडन करता हुँ ।
    जिस तरह श्री राम पर तुमने प्रश्न उठाए है क्या कभी अल्लाह प्रश्न उठाए हो ।

    अल्लाह कौन है? तुम मुसलमान कहते हो कि अल्लाह का कोई रुप नहीं है, तो भी मुहम्मद अल्लाह नाम का किस व्यक्ति से बात करता था ।

    अगर अल्लाह का कोई रुप नहीं है तो सातवें आसमान पर अल्लाह कैसे बैठा है ।

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