बात तनिष्ठा या सिखों की नहीं हे बात हे अल्पसंख्यको की!

tannishtha-chatterjee

पिछले दिनों जहां सिखों पर चुकटकुलों पर रोक के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी रही वही अभिनेत्री तनिष्ठा चटर्जी ने मुद्दा उठाया की कलर्स के शो कॉमेडी नाइट्स बचाओ में उनके रंग को लेकर इतना मजाक उड़ाया गया की दुखी होकर उन्होंने शो की शूटिंग से ही वाकआउट कर दिया इसके बाद से ही भारत में रंग के आधार पर लोगो का मजाक उड़ाया जाना चर्चा का विषय रहा . लेकिन बहुत ध्यान से देखे तो ये बाते ना केवल सिखों की हे ना ही तनिष्ठा के रंग की ही हे सिर्फ ? नहीं बल्कि ये तो बात हे भारतीय उपमहादीप की यहाँ के कुछ लोगो की इस मानसिकता की की वो मौका पड़ने पर अल्पसंख्यक को जरूर ही सताते हे और टॉर्चर सा करते हे सोचने वाली बात हे की अगर उसी शो पर तनिष्ठा जैसी दो या चार और भी सावंली लडकिया वहां होती तो क्या तब भी उनके रंग को लेकर चुटकुले बनाए और सुनाय जाते ? नहीं ना . बात दरअसल ये हे की भारतीय उपमहादीप विश्व की ऐसी अजीबो गरीब जगह भी हे जहां कोई भी कभी भी , किसी लोकेशन पर किसी हालात में किसी मौके पर होने को अल्पसंख्यक भी हो सकता हे फिर कुछ लोग उसके अल्पसंख्यक स्टेट्स का फायदा उठाकर उसका मजाक बनाते हे बल्कि लोगो को तत्कालीन अल्पसंख्यक कोटे में धकेल धकेल कर उनका मजाक उड़ाया जाता हे कुछ कायर लोग पहले हिसाब लगते हे की कहा किस आधार पर कौन अल्पसंख्यक हे फिर वही चोट की जाती हे और दूसरे लोग चुप रहते हे यही गलती हो जाती हे हमें चुप नहीं रहना चाहिए आवाज़ उठानी चाहिए वर्ना कल को हम भी कही अल्पसंख्यक होंगे तो हमारा भी मजाक उड़ेगा हम पर भी टॉर्चर होगा . सिखों पर चुटकुलों की बात करे तो ज़ाहिर हे ये चुटकुले वहां नहीं चलेंगे जहां सिख बहुमत में हे ये तो वही चलेंगे जहां सामने वाला देखेगा की सिख कम हे तो वही वो अपनी ये नीच मानसिकता दिखाएंगे . सिखों पर चुटकुले विवाद के सुप्रीम कोर्ट पहुचने में शायद एक महिला का हाथ था जिनकी शिकायत थी की स्कुल में उनकी बेटी सिखों पर चुटकुलों से दुखी होती रही हे सवाल वही हे की माँ बाप अपने बच्चो को ये क्यों नहीं बताते की आज अगर तुम किसी सिख का मजाक उड़ाए जाने पर चुपचाप देखोगे या हसोगे तो किसी क्लास या किसी भी जगह तुम्हारे भी क्षेत्र स्टेट , रंग कद भाषा , लहज़ा , आर्थिक इस्थिति किसी भी आधार पर तुम्हारा भी मजाक उड़ेगा —- ?

भारतीय उपमहादीप एक ऐसी जगह हे जहां कोई भी कभी होने को अल्पसंख्यक भी हो सकता हे चार गेर सिखों के बीच एक सिख चार नॉन मुस्लिम्स के बीच एक मुस्लिम चार सुन्नियो के बीच एक शिया चार पंजाबियो के बीच एक यु पि या बिहार वाला , चार अंग्रेजी वालो के बीच में एक हिंदी या कोई और देसी भाषा वाला चार देवबंदियों के बीच एक बरेलवी चार ब्राह्मणों के बीच एक दलित या एक ओबी सी या चार सवर्णो के बीच एक अवर्ण , चार अवर्णो के बीच एक बनिया या कोई और चार दिल्ली वालो के बीच एक नार्थ ईस्ट का आदमी चार मराठी लोगो के बीच एक उत्तर भारतीय चार दक्षिण भारतीयों के बीच एक उत्तर भारतीय या इसका उल्ट भी चार अमीरो के बीच एक मध्यमवर्गीय , चार मध्यमवर्गीय के बीच एक गरीब , चार मकान मालिको के बीच एक किरायदार यानी कुछ भी हो सकता हे कही भी कोई भी अल्पसंख्यक हो सकता हे फिर शुरू हो सकता हे उसको मजाक या किसी भी बात पर निशाना बने जाने का सिलसिला पिछले सालो में एक खबर आयी थी की हिमाचल के एक मेडिकल कालेज में कश्मीर के एक छात्र को इतना अधिक मजाक अपमान रैगिंग का निशाना बनाया गया की उसने खुदखुशी कर ली थी लड़का जीनियस बताया गया था और कुछ छात्रों को इससे जलन थी यहाँ ये भी गौर करे की कुछ बुरे लोग हिसाब लगाकर देखते हे की वो कोन सी बात हे जिसके आधार पर उसे ” अल्पसंख्यक ” बना कर उसे टॉर्चर अपमान तानो शोषण का निशाना बनाया जाए लोगो को तत्कालीन अल्पसंख्यक कोटे में धेकेल कर उनका अपमान किया जाता हे जैसे किसी जगह इक्का दुक्का लोग अक़ीदे विशेष के होंगे तो उन्हें इस आधार पर अपमानित किया जाएगा , स्टेट विशेष के होंगे तो इस आधार पर , रंग श्याम होगा तो इस आधार पर , या वर्ग की बेस पर लोगो को भला बुरा कहा जाता हे कुंठाय निकाली जाती हे उनसे ईर्ष्या निकाली जाती कोई अडवांटेज लिया जाता हे इसमें सबसे बड़ी गलती हम लोगो से ये हो जाती हे की उस समय हम चुप रहते हे हम भूल जाते हे की कल को हम भी वही या कही भी अल्पसंख्यक हो सकते हे तब हमसे भी यही सलूक होगा जब किसी के रंग का मजाक उड़ाया जाता हे तो हम भी हँसते हे तो हम भूल जाते हे की कल को हमारे कद पर भी मजाक हो सकता हे सिखों पर चुटकुलों पर जब हम हँसते हे तो हम भूल जाते हे की हमारे भी कास्ट या रेस पर भी चुटकुले बने हुए हे कल को हमें भी सुनने पड़ेंगे. किसी के स्टेट का मजाक उडाया जाता हे तो हम भूल जाते हे की उसके बाद हमारे स्टेट का भी नंबर आएगा!

हमेशा याद रखिये की भारत उपमहादीप दुनिया की एक ऐसी अजीबो गरीब जगह हे जहां कोई भी कभी भी ”’अलपसंख्यक ”” भी हो सकता हे फिर कुछ लोग उसके”अल्पसंख्यक ”स्टेटस का फायदा उठा कर उसका अपमान करते हे ये नहीं होने देना चाहिए मुझे इस बात का बहुत दुःख होता हे की बचपन में एक शिया परिचित हमारे यहाँ आते थे तो एक सुन्नी परिचित उनका खूब मजाक उड़ाते थे ज़ाहिर हे वो वहां उस समय पर ”अलपसंख्यक ”” होने के कारण चुपचाप झेंपते रहते थे अगर शिया साहब के साथ दो और शिया होते तब दूसरे सुन्नी साहब उनका मजाक उड़ाने का सहस नहीं करते खेर तब तो मुझे समझ नहीं थी खेर बड़े होते ही मुझे समझ आ गयी तो एक टाइम हमारे ग्रुप में तीन मुस्लिम थे और एक हिन्दू किसी बात पर बहस होने पर में ध्यान रखता था की भाई किसी मुद्दे पर लड़ो झगड़ो बहस करो वाद विवाद करो मगर ये में होने नहीं दूंगा की उस समय ”अलपसंख्यक ” उस हिन्दू लड़के का इस आधार पर कोई अपमान हो में होने नहीं देता था . तो यही अपील सभी से हे की कही भी किसी भी कायर के हाथो किसी ”अल्पसंख्यक ” का अपमान ना होने दे फ़र्ज़ कीजिये कोई किसी की जाती धर्म क्षेत्र का मजाक उड़ाए तो उससे चुनोती दे की वो ये मजाक वहां क्यों नहीं करता जहा दस में से चार लोग ऐसे हो कोई किसी के रंग कद चेहरे भाषा आदि का मजाक उड़ाए तो उससे पूछे की वो ये मजाक वहां करे जहा दस में चार सावंले हो या दस में से चार छोटे कद के हो आदि . इससे अल्पसंख्यको का मजाक उड़ाने वालो को अपने भीतर छिपी कायरता का अहसास होगा .

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2 thoughts on “बात तनिष्ठा या सिखों की नहीं हे बात हे अल्पसंख्यको की!

  • October 4, 2016 at 6:58 pm
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    एक बार एक क्लास में हम 9 लड़के थे जिसमे से चार उस लोकेशन पर अलग अलग वजहों से अल्पसंख्यक थे——- शर्मा था ब्राह्मण , मगर ये भी उस जगह पर एक अल्पसंख्यक था कैसे ? क्योकि उसका रंग बेहद श्याम था बेहद तो वो इस कारण एक ”अल्पसंख्यक ” था क्योकि बाकी सबका रंग साफ़ था में अकेला मुस्लिम था में अल्पसंख्यक, एक सिख था वो माइनॉरिटी एक और लड़का था वो भी अल्पसंख्यक ही था कारण की उसका कद बेहद छोटा था लगभग बौना तो होता यही था की बाकी पांच लड़के तो लोकेशन पर ” नार्मल ” थे तो वो हमारे चारो के अल्पसंख्यक स्टेटस का पूरा फायदा उठाते थे कोई भी बहस होने पर हम चारो के रंग कद धर्म को टारगेट किया जाता था और चारो अल्पसंख्यक अपनी अपनी नरम गरम बहस अकेले ही करते थे कभी कभी एक अल्पसंख्यक भी दूसरे के खिलाफ हो जाता था वो भी मजाक या बहस में उन पांच को ज्वाइन कर लेता था और खुद को सुरक्षित समझता था हम चारो को ये समझ नहीं थी की एक अल्पसंख्यक दूसरे का साथ दे ऐसे ही एक बार खेल मे मेने देखा की कुछ लोग गैंग बनाकर बाकी को टारगेट करते थे बईमानी स्लेजिंग करते थे में छह फुट का बन्दा तो खेर में तो उनसे नहीं डरता था पर वहां भी मेने देखा की उनके खिलाफ लड़ाई में में हमेशा अकेला पड़ जाता था और मेरे एक दो साथी डर कर बहुसंख्यक खेमे के आगे झुक जाते थे ऐसे ही एक बार जैसा की मेने पहले भी बताया था की एक महफ़िल में में कुछ पढ़े लिखे कट्टरपन्ति मुस्लिम्स से बहस में झूझ रहा था सामने पांच सात तो उधर हम सिर्फ दो थे तो उनमे से भी एक मेरा कज़िन ”अल्पसंख्यक स्टेटस ” से घबरा कर एन टाइम पर पाला बदल कर बहुसंख्यक खेमे को आदाब बजाने लगता हे मेरा अंदाज़ा हे की यही सब कहानिया पुरे उपमहादीप में दोहराई जाती रहती हे

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  • November 18, 2017 at 6:09 pm
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    किसी भी सच्चे इंसान को हमेशा सतर्क रहना चाहिए की चाहे जो हो जाए अपने आस पास किसी भी ”माइनोरिटी ” को अपमानित ना होने दे वास्तव में ये कायरो की अदा होती हे की वो कमजोर और अल्पसंख्यक की पहचान करके उसे टॉर्चर करते हे http://www.bbc.com/hindi/international-42035977

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