बकरीद पर सोशल मीडिया पर सालाना भाजपाई प्रोपगेंडा का जवाब !

                 By — सिकंदर हयात   

  हर साल की तरह इस साल  भी भाजपा समर्थको  ने  अपने फ़र्ज़ी पशु प्रेम की आड़ में  बकरीद   पर  उधम  मचा रखा हैं , ये सब   बाते इसलिए की जाती हे की   घूमफिरकर भाजपा को फायदा पहुंचाया   जाए   .  खेर  मुझे इस विषय पर इनके  विचार जानने थे  bhaskar news    ऑस्ट्रेलिया  में  करोड़ो  चूहों की हत्या के लिए  भारत  से ज़हर के रूप में का सहयोग  माँगा जा रहा हैं  , तो  सोशल मीडिया पर पशु प्रेम की आड़ में  बकरीद का विरोध करने वाले  भाजपाई  कब  भारत से जाने वाले   चूहे  मारने  वाले ज़हर के ज़हाज़ के सामने आमरण अनशन  पर बैठ रहे हैं कब —————-? . इसके अलावा  सोशल मीडिया पर   भाजपा spoter  बकरीद का विरोध  ना करने के लिए हर साल की तरह इस साल भी पेटा को भी खूब गरिया रहे हैं  खूब मजाक  बनारहे   हैं ,  जबकि पेटा  या कोई भी सच्चा पशु पर्यावरण जंगल प्रेमी  अपना काम ही कर रहा होगा कुत्ता  बंदर गधा सेकड़ो जानवरो  पक्षियों जंगलो के लिए वो काम कर रहे होंगे .    मगर खानपान और करोड़ो लोगो और करोड़ो गरीब परिवारों  की  ” रोजी  भी रोटी  भी ”   में वो  भला क्यों दखल देंगे ————–?

सही हैं की पेटा  बकरीद  में नहीं पड़ता हैं बाकी  वो अपना काम करते रहे सही हैं पेटा का काम जैसे फ़र्ज़ करे की   जैसे मांझे से चिडियो को बचाने की कोशिश  आदि photo    .  ये सब झक  भाजपाई   बकरीद  पर खूब  मारते हैं ताकि जनता को बहकाया जाए .   अब देखिये  तो पेटा  वाले चिडियो की चिंता कर रहे हैं तो ठीक ही हैं  क्योकि ब्रीडिंग कराकर  चिडियो की संख्या   तो  नहीं बढ़ाई जा सकती हैं  ना  ,  इतने सालो से गौरेय्या   और सबसे जरूरी की गिद्ध की संख्या  बढ़ाने की हरचंद कोशिश हो रही हैं ,  कही बढ़ी आसानी से गौरेय्या गिद्ध की संख्या  ——————?   .

बकरीद और  बकरा  मुर्गा etc  ब्रीडिंग के जानवर अलग  हैं इनकी संख्या आसानी से बढ़ाई जा सकती हैं इसलिए ये  भोजन व्यापार आदि में इस्तमाल हो रहे हैं  ,  और पशु पक्षी जानवर जंगल अलग हैं  दोनों अलग  बात हैं  . सो ब्रीडिंग के जानवरो की चिंता  छोड़िये और   बाकी सभी  जानवर जंगल पक्षियों की चिंता कीजिये  , और   भाजपा को  सपोर्ट  मत कीजिये  ,उसमे जानवर इंसान जंगल  इंसानियत पर्यवरण सामाजिक पर्यावरण कला सबका नुकसान –  सबका एक समान नुकसान हैं  .   शाकाहार सेहत के लिए और लम्बी आयु के लिए  अच्छा होता हैं   जरूरी हैं अगर कोई शुद्ध शाकाहारी हैं  वो  भी बहुत अच्छी ही बात हैं ,  मगर ये  भी हैं की ,  स्वस्थ रहना अलग  विषय हैं ताकत पावर अलग  चीज़ हैं  ,  आपकी सेहत अच्छी हैं तो आप  घंटो दौड़ सकते हैं  मगर 100 200 400 800 मीटर की रेस  में गोल्ड medal के लिए ताकत  चाहिए होती हैं  ,  ताकत अलग  विषय  हैं  . साइना नेहवाल शुद्ध  शाकाहारी हैं  . – उनके कोच  pulela गोपीचंद  ने उन्हें चिकन शुरू करवाया और उन्हें चैम्पियन  बनवाया  . अब चाहे तो खेल से रिटायरमेंट के बाद वो फिर से शुद्ध शाकाहारी  बन जाए   , तो उधर फुटबॉल तो सबसे अधिक ताकत  और स्टेमिना का ही खेल हैं तो 90 %फुटबॉलर  मांसाहारी होते ही हैं और उन्ही फुटबॉलरों को ये editor   सुशोभित   उनकी इबादत  सी   करता हैं उनके  महान खेल का आनंद लेता हैं .   और उधर  इनडायरेक्टली भारत  में सारे  माँसाहरियो को  राक्षस  बता रहा हैं .  शायद एक आम स ये नहीं  चाहता की  दलित पिछड़े आदिवासी गरीब खेलो के माध्यम से तरक्की कर पाए ———? .   

 मोदी  और भाजपा की लापरवाही के कारण  आयी दूसरी लहर  जिसमे  हज़ारो बच्चे  अनाथ हो गए  ,  माँ बाप दोनों  नहीं रहे .  करोड़ो  लोगो को कई साल पीछे ले जाने वाला और बेहद असुरक्षा  में ले जाने वाला आर्थिक झटका लगा  और 30 to  50  लाख लोगो की मौत पर  भी जिन संजय तिवारियों और सुशोभितो के कानो पर जू भी  नहीं रेंगी थी ,   वो दोनों आज बकरीद के दिन उदास थे ———–? ,  सोचिये क————–? .ये    बकरीद  विरोधी और पार्टी समर्थक       लोग कितने दोगले होते हैं की अंदाज़ा लगाओ की जब ये सत्ता में नहीं थे तब भी भारत में सर्वाधिक माल इन्ही के पास था , आज तो ये सत्ता में हैं ही पुरे देश का खून चूस ही रहे हैं सोचिये कितना माल होगा अब – और अब कई सालो से बकरीद पर इनका स्यापा चल रहा हैं , मगर कभी ये नहीं कहते की हम गए थे बकरा बाजार और बकरीद से ठीक पहले हमने अपने दलित आदिवासी किसान भूमिहीन पशुपालक भाई से हमने 100 बकरे खरीद लिए गरीब का भी भला , और हमने सौ बकरे खरीद कर उन्हें उन्हें कटने से भी बचा लिया , सभी बकरे हमारे फार्म हाउस बंगले या भाजपा के आलिशान कार्यालयों में और पांचएडिटर  सुशोभित और पांच  एडिटर संजय तिवारी के घर में सुरक्षित बांध दिए हैं ,  ये कभी नहीं करते हैं इसका तो कभी जिक्र तक नहीं करते हैं  . अगर कोई फालतू में  किसी  जानवरो को  मार रहा हो  ,  पक्षियो को सता रहा हो ,  तो  वो   बिलकुल गलत हैं ,  ये धरती सबकी हैं जानवरो की भी उनकी तो पहले हैं  . जंगल जानवर सबके लिए अधिक से अधिक काम होना चाहिए  ,  मगर  वो जानवर बकरे मुर्गे  भेड़    भला क्यों नहीं कटेंगे ———–? जिन्हे ब्रीडिंग के तहत लाया ही इसलिए दुनिया  में जाता हैं की कल को उन्हें  भोजन और चमड़ा आदि  दूसरे कार्यो  के लिए इस्तमाल  किया जाना हैं वर्ना तो ये होते ही नहीं .

 हां ये कर सकता हैं कोई  जैसे की मार्किट जाकर  बकरा  मुर्गा खरीद ले और अपनी छत पर पाल ले और उन्हें सारी जिंदगी प्यार से रखे ,  भाजपा सरकार चाहे तो तेल पर और टेक्स लगाकर ऐसे लोगो को छत पर बकरा मुर्गा सुरक्षा केंद्र  बनाने को अनुदान दे  .

(Visited 68 times, 1 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *