पाक का वजूद खतरे में है!

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”धरती की सुलगती छाती के बेचैन शरारे पूछते हैं
जो लोग तुम्हें दिखला न सके, वो खून के धारे पूछते हैं
अम्बर की जुबां सुबकती है, सागर के किनारे पूछते हैं
ऐ रहबरे मुल्क, ओ कौम बता ये किसका लहू, किसका लहू।”

पाक का अवाम तहरीके तालिबान के वहशियाना बाल संहार से गमजदा है। पाक टीवी चैनल की एंकर सनम बलोच बिलख-बिलख कर कह रही हैं- अब कोई उम्मीद नहीं, अब तो लगता है कुछ नहीं बदलेगा।” एक के बाद एक जनाजे उठने के बाद भी अगर पाकिस्तान के हुक्मरानों को होश नहीं आया तो यह मान कर चलना चाहिए कि इस देश का वजूद खतरे में है। पाक का अवाम यह भी जानता है कि भारत ने हमेशा उनके गायकों, अभिनेताओं का अपने यहां स्वागत किया है। हमने यहां उनके कितने ही बच्चों के दिल के आपरेशन कर उनको जीवनदान दिया है। पेशावर बाल संहार के बाद भी भारत गम की घड़ी में उसके साथ खड़ा हुआ है। जितना दर्द सीमा के पार था उतना ही दर्द यहां भी है लेकिन अफसोस कि पाकिस्तान की न्यायपालिका और प्रशासन भारत के दर्द का अहसास ही नहीं कर रहे। मुम्बई हमले का मास्टर माइंड हाफिज सईद पेशावर कांड के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए बदला लेने की धमकियां दे रहा है तो दूसरी तरफ एक षड्ïयंत्र के तहत मुम्बई हमले के साजिशकर्ता जकी-उर-लखवी को जमानत दे दी गई। एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ आतंकवाद के खिलाफ लडऩे की कसम खाते हैं, दूसरी तरफ लखवी को जमानत की टाइमिंग अपने आप में काफी कुछ कह देती है। भारत के कड़े प्रोटैस्ट के बाद और बढ़ते दबाव के बीच नवाज शरीफ ने लखवी की जमानत को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात की है। लखवी को शांतिभंग की आशंका में गिरफ्तार कर लिया गया है। वह जेल में रहेगा। इस तरह के घटनाक्रम से पाक ने बच्चों के बलिदान को मजाक बना डाला लेकिन भारत को उन पर कोई भरोसा है ही नहीं। हाफिज सईद का करीबी लखवी लश्कर का दूसरा मुखिया है। लखवी ही वह शख्स है जिस पर मुम्बई हमले की पूरी जिम्मेदारी थी और जो हमलावरों को निर्देश दे रहा था जबकि हाफिज सईद सिर्फ एक दिमाग की तरह काम कर रहा था।

मुम्बई हमले में कसाब की गिरफ्तारी के बाद उसने लखवी के बारे में कई खुलासे किए थे। डेविड हेडली, अबु जिंदाल ने भी पूछताछ में लखवी का नाम लिया था। जब मुम्बई हमले में भारत के दबाव में लखवी को गिरफ्तार किया गया था तो उससे पहले उसने लश्कर के अपने साथियों से कहा था कि मुम्बई हमला तो शुरूआत है। उसने ‘भारत का खून बहाओ’ षड्यंत्र के तहत भारत में ऐसे कई हमलों की योजना बना रखी थी। लखवी ने भारत के खिलाफ फिदायीन तैयार कर रखे थे। भारत की मोस्ट वांटेड और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सूची में अन्तर्राष्ट्रीय आतंकी करार दिए गए लखवी को जमानत दिलाने के लिए वहां की सरकार और फेडरल जांच एजैंसी सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं।

पाक का अवाम इस समय काफी आक्रोश में है, अवाम शांति चाहता है। वह इस बात को समझता है कि अफगानिस्तान और भारत को चुनौती देने के लिए जेहादियों को गले लगाने की नीति उन्हें महंगी पड़ रही है। पाक मीडिया, जो हमेशा भारत को कोसता रहा है, अब यह स्वीकार करने लगा है कि पाक वही फसल काट रहा है जो उसने दशकों से बोई थी। पाक मीडिया ने खुलकर हाफिज सईद, उसके संगठन और अन्य संगठनों पर कार्रवाई की मांग की है, जो जेहादी जहर फैला रहे हैं।

पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पाक की सेना और खुफिया एजैंसी आईएसआई के पास मौका है कि वह आतंकवाद पर दोहरा नाटक छोड़ें और आतंकवाद के खिलाफ डट कर लड़ाई लड़ें और अवाम के आक्रोश को शांत करने का प्रयास करें। अगर वे अब भी कड़ा स्टैंड नहीं लेते तो अवाम का आक्रोश एक न एक दिन उन्हें ही निगल लेगा।

जिस इस्लाम में एक अल्लाह, एक कुरान, एक रसूल और एक लाख 24 हजार पैगम्बरों की सर्वमान्य स्वीकार्यता हो, उसी इस्लाम में कितने जातीय संघर्ष, कितनी विचारधाराएं पाक में देखी जा रही हैं। आखिर क्या कारण है कि दुनिया को मानवता का संदेश देने वाला पाक ऐसे लोगों की गैर इस्लामी हरकतों से आज ऐसी स्थिति में पहुंच गया कि पाक दुनिया का आठवां खतरनाक देश हो गया है। पाक गैर इस्लामी हरकतें नहीं करता तो बंगलादेश अलग क्यों होता? अफगानिस्तान में तालिबान की हकूमत बनने पर उसे मान्यता देने वाला पहला देश पाकिस्तान ही था। अगर पाक अभी नहीं सम्भला तो फिर हैवान खेलते रहेंगे हैवानियत का खेल, दम तोड़ती रहेगी इंसानियत और तड़प-तड़प कर दम तोड़ती रहेगी मासूमियत और एक न एक दिन पाक खुद-ब-खुद टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।

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One thought on “पाक का वजूद खतरे में है!

  • January 3, 2015 at 6:24 pm
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    Tejus सिकंदर हयात • 5 days ago
    सिकंदर साहेब आज आप पाकिस्तान प्रचार में भी लग गए.
    अगर उन पाकिस्तानियों का दिल इतना ही साफ़ है तो वहां से हिन्दुओं की आबादी लगातार और जबरदस्त रफ़्तार से कम क्यों होती जा रही है.? क्या वहां की हवा ने हिन्दुओं के प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर दिया है.?
    चलो अगर मान भी लें की ऐसा हुआ होगा तो भी एक ऐसी घटना पुरे पाकिस्तान का चेहरा नहीं हो सकती. और मैं ऐसा किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो कर नहीं लिख रहा हूँ बल्कि हमारे कुछ कुलीग पाकिस्तान आते जाते रहते हैं और उन्होंने जो बयां किये हैं वहां के हालत के बारे में और हिन्दुस्तानियों के प्रति दुर्भावना के बारे में वो इस खबर से बिलकुल भी मैच नहीं करता.
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    सिकंदर हयात Tejus • 5 days ago
    तेजस भाई आपके सवालो के जवाब यहाँ हे में इस विषय पर कई दफे लिख चूका हु http://mohallalive.com/2013/01
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    Tejus सिकंदर हयात • 3 days ago
    आप उसे यहाँ कॉपी पेस्ट कर दें. किसी कारण से मैं उपरोक्त लिंक को ओपन नहीं कर पा रहा हूँ.
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    सिकंदर हयात Tejus • 3 days ago
    बहुत बढ़िया अर्विन्द दास जी बहुत बहुत बधाई आप जेसे लोगो को, खेर उधर विस्फोट पर वरिष्ट पत्रकार निरंजन परिहार जी ने ”औकात पर उतरा पाक ” लेख लिखा जिस पर हमारी आपत्ति ये थी ”पक्का तो नहीं लेकिन सुना हे की शायद मुंबई में कई बंगलो के मालिक निरंजन परिहार जी हे वो लिखते हे की ” मूकदर्शक बनकर उसे देखनेवाले हमारे देश के राजनेताओं के मुंह पर भी जूते जड़ने का मन करता है। आपका मन भी कुछ कुछ ऐसा ही करता होगा !” सवाल ये हे की वो क्या चाहते हे क्या करे ?अब सारे नेता तो कायर हे अटल जी ने भी लाख उक्सावो के बाद भी हमला नहीं क्या था फिर क्या करे ? बस केसे भी हमला कर दे फिर क्या होगा ? ( फिर ये भी हो सकता हे की परिहार जी अपने परिजनों को फोन करेंगे की ” ऐसा करो कुछ दिन और वही लन्दन या ऑस्ट्रेलिया दुबई रह लो यहाँ तो जंग चल रही हे वेसे मुंबई पर कोई खतरा नहीं हे फिर भी एहतियातन वही रह लो हमारे ड्राइवर का बेटा जो फौज में हे जल्दी ही जंग खत्म कर देंगा ओके ) फिर उनके 20 लाख और अपने 5 -10 लाख सेनिक और लोग मरवा डाले ( इनमे न परिहार जी न इनके बच्चे न कोई परिजन उधर न कियानी न इनके बच्चे न कोई परिजन ) फिर क्या होगा सच तो यही हे की 25 -30 लाख लोगो के मरने के बाद भी उपमहादीप की 150 करोड़ आबादी में इससे भी कुछ भी नहीं बदलेगा सब कुछ वेसा का वेसा ही रहेगा सिवाय परभावित परिवारों के , चीन अरब देश पाकिस्तान को फिर से खड़ा कर देगे ,शक्ति से जमीन कब्जाने का जमाना अब नहीं हे विश्व समुदाय युद्ध विराम करवा देगा फिर उधर ज़ैद हामिद और ओरिया मकबूल जान जेसे लोगो को और भड़कायंगे इधर जे पि दत्ता इस पर फिल्म बनायेंगे फिर परिहार जी और उनका परिवार BMW में निकलेगा मल्टीप्लेक्स जायेगा और आइसक्रीम खाते हुए शहीदों को श्रधांजली देगा उधर पाकिस्तान में भी तलत- ज़ैद हामिद -कियानी अदि का परिवार भी यही कर रहा होगा बस उनकी फिल्म जरा कम बजेट की होगी”

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    सिकंदर हयात
    january 18, 2013 at 10:55 am
    sharad sharad 16/01/2013 23:59:22
    सिकंदर हयात भाई, )
    1947 से आज तक इतिहास की हर चोटी बड़ी घटना खंगाल मारी मगर पाकिस्तान नाम के पड़ोसी के खाते मे एक हाथ की उंगलियो पर गिने लायक भी अच्छी बाते नही है जब उसने पड़ोसी धर्म निभाया हो तो ऐसे पड़ोसी के लिये अपने घर के दरवाजे बंद रखने मे बुराई ही क्या है ..कुछ बातो पर गौर फरमाइये

    1-भारत के ट़ी वी प्रोग्राम्स मे पाकिस्तानी कलाकारो की लाइन लगी रहती है जबकि पाकिस्तान के ट़ी वी प्रोग्राम्स मे भारतीय कलाकारो की एंट्री बंद ?? कैसा पड़ोस है ए??
    2-कश्मीर मे खून खराबा, आतंकवादियो की घुसपैठ, पाकिस्तान मे 1947 मे 19 % हिन्दू आज 1% से भी कम रह गये ?? क्या ऐसे होते है पड़ोसी ??
    3-बार-2 सीमा पर नियंत्रण रेखा का उल्लंघन ?? शिमला समझौता, ताशकंद समझौता, लाहोर समझौता ए समझौता वो समझौता…इन सबको निभाने का ठेका क्या अकेले भारत ने ही लिया हुआ है ??
    4-पड़ोसी ऐसा कि हर बात मे झूठ बोलता है …भारत किसी आतंकवादी के पाकिस्तान मे होने की बात करे तो जवाब मिलेगा (पाकिस्तान मे नही है) … फिर भारत सुबूत दे भी दे कि वहा कराची मे है तब भी इतने झूठे है ए कि बोलते है ….कराची तो पाकिस्तान मे है ही नही :))

    5-काश्मीर सीमा पर भारतीय सैनिको का सर तीसरी बार काटा गया है और हर बार उनके झूठी फ़ौजी जनरल बोलते है “किसी जानवर का काम होगा” ?? हद हो गयी ?? पता नही कैसे रिश्ते है इन पाकिस्तानियो के उन जानवरो के साथ जो सिर्फ हिन्दुस्तानी फोजियो पर ही हमला करते है और आधे घंटे मे “सिर्फ सर” ही गायब करते है ??

    6- हयात भाई आपका समझाने बुझाने वाला तरीका कारगर नही है क्योकि ए लातो के भूत है उसी से काबू मे आयेंगे …पाकिस्तान वाले भी और अपने देश के पाकिस्तान परस्त भी !! शान्ति और अमन की बात इन चिकने घड़ो पर टिकेगी ही नही 1947 से तो कोशिशो का अंजाम देख ही रहे है ??
    7-हालांकि कहते हुए अच्छा तो माही लगता मगर जब रज़ा अकादमी जैसे मुस्लिम संगठन “दूसरे देश के मुस्लिमो” के लिये कभी भी 50,000 भारतीय मुस्लिमो को इकट्ठा कर तोड फोड़ करने की हरकत कर सकते हो और मुस्लिम समाज की तरफ से उनका लगभग नही जितना विरोध ही दिखे तो उनकी ऐसी हरकतो से आगे नुकसान ना हो इसके लिये शिवसेना जैसे संगठन शायद अब पूरे देश के हर कोने मे होने की जरूरत महसूस हो रही है ….ए और बात है कि खुद शिवसेना को अपनी सोच का संकुचित दायरा (मराठी-बिहारी) बढ़ा कर राष्‍ट्रीय स्तर के हिसाब से तैयार होना पड़ेगा

    8-आपकी बातो मे अक्सर पाकिस्तान का जिक्र मिलता ही रहता है इसीलिये वह बात की थी , बुरा लगा हो तो माफी चाहते है
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    Ajit 16/01/2013 21:03:58
    Sikandar bhai….
    Apke hisab se pakistan ko sqdhne ya sath lene ki kya keemat hai…kitne sipahiyo ka sar, jinse pakistani mulle football khelte hai…..
    Ya fir aur kitne hamle sansad, Ya mumbai par chahte hai aap..???
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    0
    सिकंदर हयात 16/01/2013 23:05:55
    कमाल हे अजित भाई सारी बातो के जवाब ऊपर हे फिर भी वाही सवाल ? खेर फिर से कहता हूँ एक तो ये भाषा मत पर्योग कीजिये क्या फायदा होता हे ये जली कटी बाते करने का सिवाय अपना ही ब्लड प्रेशर बढ़ने के ? आपने कहा कब तक तो में कहता हूँ की 5 साल – 5 साल के लिए हम तय कर ले की चाहे कुछ भी हो जाए हम शांति पर्किर्या नहीं रोकेंगे चाहे कुछ भी हो जाए चाहे कितने भी 26-11 हो जाए ( भले ही अगले हमले में या मेरा कोई प्रियजन भी मारा जाय ) हम ज्यादा से ज्यादा पाकिस्तानी लोगो लेखको पत्रकारों खिलाडियों कलाकारों को आने देंगे तो शर्तिया 5 साल में शांति हो जायेगी लेकिन ये हाफिज, कियानी, ज़ैद हामिद आदि लोग भी ये जानते हे की इसी कारण हर बार लंगड़ी मार दी जाती हे फिर लगता यही हे की 75 % पाकिस्तान में तो खेर हे ही लेकिन भारत में भी 25 % वो लॉबी हे वो हथियारों के दलाल आदि हे जो शांति चाहते ही नहीं हे वर्ना क्या जरुरत हे की इतने टाइम और इतनी मुश्किल से परवान चढाई गयी शांति पर्किर्या को रातो रात पटरी से उतर जाने पर मजबूर कर दिया जाता हे ऊपर शरद भाई कहते हे की ” हयात साहब हयात साहब, भारत मे जनता द्वारा चुनी हुई सिर्फ एक ही सरकार है जबकि पाकिस्तान मे सरकार आप किसको कहना चाह रहे है” बात सही हे लोकतंत्र हर हाल में बेहतर हे लेकिन ये भी सच हे की चाहे वो सर काटने वाला कियानी हो चाहे वो बदले में 10 सर चाहने वाली सुषमा जी हो आखिरकार तो सबको सत्ता चाहिए हे उसका आननद चाहिए हे लेकिन हमारे यानि जनता की बात और हे सिर तो जनता का ही जाना हे में जो कुछ कह रहा हूँ आपके और आपके बच्चो की भलाई के लिए ही कह रहा हूँ ( (मुझे तो शादी करनी नहीं हे ) जो तरीका हम बता रहे उसके अलावा और को भी ई रास्ता नहीं हे न्यूज़ चेनेलो मीडिया आदि में बेठे ये बचकाने लोग आपको यही बतायगे की हम पाकिस्तान का भुरता बना दे भाई मुझे बहुत दुःख से कहना पड़ रहा हे की हम नहीं बना सकते न हम अमेरिका हे न पाकिस्तान आफ्गानिस्तान हे पाकिस्तान की फौज भी बहुत मज़बूत हे कोरिया चीन की कृपा से उसके पास भारत से शायद बेहतर ही मिसाइल- बम हे तेल की दौलत से मालामाल कई अरब देशो के निरंकुश शेखो सुल्तानों की रक्षा का ठेका भी उसके पास हे उन्होंने भी बहुत कुछ नवाज़ रखा हे छोटी से छोटी जंग भी ( परमाणु युद्ध नहीं ) 50 लाख- 1 करोड़ लोगो की जान ले लेगी ( सारे आतंकवाद युद्ध झड़पो आदि में अब तक 10 लाख लोग भी नही मारे गये होंगे ) आप तय्यार हे इतना खून बहता देखने के लिए इसके बाद भी भारत क्योकि विश्व का एक जिम्मेदार देश हे इसी कारण जंग के बाद भी भारत कही भी 1 इंच भी जमीं न ले सकता न लेगा फिर बताइए हम क्या गलत कह रहे हे ऊपर देखिये शुक्ल जी इतनी गरज तड़प कर रहे हे लेकिन सच क्या हे कारगिल संसद आदि हादसों के बाद भी सारी जिन्दगी संघी संस्कारो में पले अटल जी ने भी युद्ध करके जीत की कीमत पर भी लाखो लोगो का खून अपने सर पर लेने से गुरेज़ ही किया था . कुल मिला कर जंग होगी भी नहीं और शांति भी नहीं होने दी जायेगी एक ही रास्ता हे जो हम बता रहे हे और हां पाकिस्तान में भी हमारी बातो से सहमती रखने वाले लोग बहुत ज्यादा नहीं तो बहुत कम भी नहीं हे उनसे ठीक से विचार विमर्श हो तो बात बन सकती हे में फिर पाठको से कहता हूँ की यही एक रास्ता हे और कोई भी नहीं हे और प्रेम शुक्ला जी की बातो पर ध्ययान मत दीजिये इन्हें तो सिर्फ कांग्रेस को हटाकर महाराष्ट्र और मुंबई की सत्ता चाहिए बाकि दुनिया जाए चूल्हे में और उधर पाक फौज के ये शांति विरोधी कियानियो की तो जेसा की इनके बारेमें अस्मा जहागीर कहती हे की ” इन्हें तो सिर्फ प्लाट ( पाकिस्तान के बड़े शहरो के पोश इलाको में ) कब्जाने में दिलचस्पी हे
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    इंडियन 17/01/2013 01:37:35
    प्रेम जी आज के लेख में मिर्ची कम तीखी थी……कमीने पाकिस्तान के हिंदुस्तानी कमीने आशिको के आंसू ठीक से नहीं आये……कृपया इनकी **** में अगली बार थोड़ी तेज़ मिर्ची डाले……धन्यवाद……
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    सिकंदर हयात 17/01/2013 09:34:29
    शरद भाई आपकी लाइन 1 तो भाई ये तो वाही बात हुई की हिंदी टीवी सिनेमा वाले तो भोजपुरी कलाकारों को काम देते हे पर भोजपुरी वाले हिंदी वालो को काम नहीं देते हे ? पाक में कोई एंट्री बेन नहीं हे लेकिन सवाल ये हे की कोई जायेगा ही क्यों ? भारत 120 करोड़ का मुल्क हे पाक सिर्फ 18 करोड़ का यहाँ पर इतनी बड़ी मार्किट छोड़ कर कोई छोटी मार्किट का रास्ता क्यों पकड़ेगा पाक वाले ही यहाँ आते हे क्योकि यहाँ उन्हें इतनी बड़ी मार्किट मिलती हे हिंदी वाले थोड़े ही भोजपुरी मार्किट में जाते हे वेसे ही इंडिया से कोई कलाकार क्यों जायेगा भला पाक की छोटी मार्किट में -वेसे पाक में तो इंडियन टीवी सिनेमा वालो के लिए इतनी दीवानगी हे की बोबी डार्लिंग और डॉली बिंद्रा को भी स्टार की तरह पेश किया जाता हे पाक में तो रात दिन कुछ लोगो का यही स्यापा रहता हे की यहाँ इंडिया इंडियन कल्चर इंडियन कलाकार इतने मकबूल क्यों हे ? में कहता हूँ की मकबूल इसलिए हे की वो उनके अपने हे कोई परायी चीज़ हे ही नहीं ——–
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    सिकंदर हयात 17/01/2013 10:20:44
    शरद भाई आपकी 2 से 5 तक की लाइनों के जवाब भी कई बार दिया जा चुके हे की पाक की फौज और कट्टर पांति चाहते ही नहीं हे की भारत और हिन्दुओ के साथ मिलजुल कर रहे उन्हें लगता हे की फिर उनकी ही क्या अहमियत रह जाएगी ? सत्ता और परभाव उनके हाथ से निकल जायेगा उनका असल मकसद ये मध्युगीन सपना हे की उपमहादीप के 60 करोड़ मुसलमानों को हिन्दू विरोध के नाम पर एक्जुट करके फिर से लाल किले पर कब्ज़ा किया जाए आगे आपने लाते चलाने की बात कही पाकिस्तान पर और रजा अकादमी जेसे लोगो पर तो शरद भाई गुसताखी माफ़ हो प्लीज़ मेरी बात को गलत मतलब मत निकालिएगा ,में बता दू की जेसे किसी पाक फौज या किसी कट्टर पांति मुस्लिम संघटनो में इतना दम बिलकुल नहीं हे की वो लाल किले पर झंडा गाड सके या हिन्दुओ को या हिन्दू आस्था को ख़तम करके भारत का इस्लामीकरण कर सके जी नहीं नहीं कर सकते ,वेसे ही आपसे भी कहता हूँ की जेसा की मेने यहाँ भी ऊपर और अपराधी अकबरुधीन लेख पर भी बहस में आपको बताया था की — आपकी लात में इतना दम नहीं हे की वो इन रजा अकादमी या पाक फौज और पाक के भारत विरोधियो को काबू कर सके भाई न आपकी लात में इतना दम हे न आपकी लातो में इतनी एकता हे न आपकी लातो का साथ देने के लिए चीन वेस्ट तेल वाले अरब देशो आदि की लाते साथ आएगी तो ये लातो वाली बातो भूल जाइये कोई फायदा नहीं हे ये बाते करना का अपना ही खून जलेगा और कुछ नहीं- हो सिर्फ ये सकता हे की शांति से तर्क के साथ समझा बुझा कर इनके समर्थको को अपने खेमे में लाया जाए ( ये काम छोटे पैमाने पर में कर भी रहा हूँ कुछ सफलता भी मिली हे ) यही काम सीमा पार भी करना हे 8 वि लाइन आपने कहा की -”आपकी बातो मे अक्सर पाकिस्तान का जिक्र मिलता ही रहता है इसीलिये वह बात की थी , बुरा लगा हो तो माफी चाहते है” हा में सच हे की में हिन्दू मुस्लिम एकता और आगे फिर पाकिस्तान के बारे में काफी जानकारी जुटा रहा हूँ की कोन कोन क्या क्या कहता हे क्या चिंताय हे शंकाय हे शिकायते हे क्योकि में चाहता हूँ की यहाँ के 60 करोड़ लोगो की गरीबी दूर हो सबको रोटी कपडा मकान मिले इसका यही रास्ता हे की पाक के रस्ते भारत ईरान और मध्य एशिया पहुचे इसके आलावा और कोई रास्ता नहीं हे न तो अब कोई खुनी रुसी चीनी फ़्रांस जेसी क्रांति यहाँ हो सकती हे इन्सान की फितरत के कारण न कभी भी भ्रष्टाचार पूरी तरह काबू में आ पायेगा न कभी बड़े छोटे टाटा बिडला अम्बानी अपनी सम्पति गरीबो में तकसीम करने वाले हे तो यही एकमात्र रास्ता हे वर्ना तो पाकिस्तान अदि की तो बात ही छोड़ो देश में गरीबी और असमानता हमें अराजकता की और ले जायेगी
    सिकंदर हयात 17/01/2013 10:45:26
    ऊपर की सब समस्याओ के सम्बन्ध में में अपनी मोटी बुद्दी से जो समझा हूँ वो ये हे की ठीक से विचार विमर्श नहीं हो पा रहा हे विचार विमर्श में खास लोगो की बात करे तो उनके विमर्श पर अंग्रेजी और अंगेरजी पिशाचो का कब्ज़ा हे जो खुद ही इस इलाके ठीक से न समझते हे और न ही सही मायनो में समस्याओ और उनके समाधनो में कोई विशेष दिलचस्पी रखते हे हिन्दू उर्दू आदि भाषोऔ की बात करे तो इनके बड़े छोटे नाम अंदर से खुद बुरी तरह से कुंठित होते हे इसी कारण वो भी अपना फर्ज़ ठीक से नहीं निभाते हे उधर न्यूज़ चेनेल ही नहीं बल्कि सभी दर्शय माध्यम जहालत फेलाने में जुटे हे यही कारण हे की मुद्दो मसलो पर आम जनता पूरी तरह से भ्रमित हे
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    सिकंदर हयात
    August 19, 2013 at 12:14 pm
    पाठको उमा शंकर सिंह एन डी टी वी के बहुत अच्छे पत्रकार है य कई बार पाकिस्तान गये है और हमेशा ही इन्होने अच्छी पॉजिटिव रिपोर्टिंग की है हालिया घटनाकर्म पर भी इन्होने पाक के एक न्यूज़ चेनेल पर अच्छी बहस की है वो भी 2 बहुत बड़े शैतानो ज़ैद हामीद और ओरिया मक़बूल जान के साथ जो बड़े से बड़ा झूठ बिना पलक झपकाय बोलने मे माहिर है हालाकी कुछ कसर रह गयी फिर भी उमा भाई को बधाई
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    Tejus सिकंदर हयात • 5 hours ago
    मैं इस बात में विस्वास नहीं करता की मार-पीट या गली गलोच ही समस्या का समाधान है, मगर विरोध करना और दवाब बनाना भी कभी कभी ज़रूरी हो जाता है.

    और अब पाकिस्तान के लिए ये ज़रूरी हो गया है की शांति के नाम पर हम उसकी नापाक हरकतें बर्दास्त न करते रहें बल्कि माकूल जवाब दें. ज़रूरी नहीं की उस से युद्ध छेड़ दें और लाखो मासूम और निर्दोष लोगों का खून बहा दें. बल्कि कूटनीतिक तरीकों से दवाब तो बना ही सकतें हैं और जो अभी की सरकार बखूबी कर रही है.
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    Tejus सिकंदर हयात • 5 hours ago
    सिकंदर जी, हम न तो इतना महान हैं की किसी को अपने बड़प्पन के लिए माफ़ कर दें न ही इतने गिरे हुए हैं की हमारी और आँख दिखने वाले को बार बार भाईचारे के लिए नजरअंदाज करते रहें.
    हाँ ये बात सही है की आज भारत पाकिस्तान की जो समस्या है उसमे राजनीती का बहुत बड़ा हाथ है, परन्तु राजनीती करने वाले भी उन्ही विषयों पर राजनीती करते हैं जिन पर उन्हें समर्थन मिले. इसका सीधा मतलब है की भारत विरोध का पाकिस्तान में समर्थन मिलता है ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान को गले लगाने को भारत में मिलता है.
    लेकिन अगर आपके पडोसी का एक मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति बार बार आपके बच्चे के साथ बात बे बात माप पिट करे तो आखिर कब तक आप उसे बस ये समझ कर चुप बैठे रहेंगे की इसमें परिवार के बाकि लोगों का समर्थन नहीं है.? क्या ये उस परिवार के लोगों का मूक समर्थन नहीं है की वो उस मानसिक रोगी का कोई समुचित उपाय नहीं कर रहे बल्कि अपने पडोसी को प्रताड़ित करने की खुली छूट दे रखे हैं.
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