पाकिस्तान में शैतानों का राज है !

meerut-hashimpura

by —- मोहम्मद जाहिद

पाकिस्तान में शैतानों का राज है !
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पाकिस्तान- एक नाकाम राज्य
क्रूर ,अन्यायी, आततायी, हिंसक, बर्बर !
नरक है
अल्पसंख्यको की जिंदगी वहाँ,
न इंसाफ़ न रोज़गार
न मान, न सम्मान
जब देखो उजाड़ दिये जाते हैं
दंगों के नाम पर,
औरतों का अपहरण-बलात्कार
जैसे कोई खेल है
जिसमें हमेशा शामिल होता है
कोई ऊपर वाला
जिसके नाम पर
स्तन काटे जाते हैं
और चीर दिये जाते हैं गर्भ !
उनके मर्दो को
नहर किनारे कतार में खड़ा करके
गोलियाँ से भून देते है पुलिस वाले
और अदालतें पचास साल बाद भी
तय नहीं कर पातीं
कि उस रात सुनी गयी चीखें
इंसानों की थी
या फिर काटे जा रहे थे सुअर !
सचमुच कितना घटिया है पाकिस्तान
और कितने गंदे है उसके कस्बे-शहर
ख़ून से तर-बतर
जैसे मेरठ !
जैसे मलियाना !
जैसे हाशिमपुरा !
जैसे शामली !
जैसे मुजफ्फरनगर !
जैसे अहमदाबाद !
पता नहीं,
पाकिस्तान में कैसे रहते होंगे इंसान
जहाँ हर दिशा में
राज करते हैं शैतान !!

(नकुल साहनी की फ़िल्म ‘मुज़फ्फ़रनगर बाकी है’ देखते हुये ।)

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2 thoughts on “पाकिस्तान में शैतानों का राज है !

  • March 28, 2015 at 9:56 pm
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    bahut achchi kavita hai. mubarakbaad.

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  • March 31, 2015 at 7:11 pm
    Permalink

    बेहद अच्छी कविता है,पर हिन्दुस्तान में दंगों में सिर्फ मुसमान ही पीड़ित होते हों ऐसा नहीं है,हिन्दू,सिक्ख की भी दुनिया उजड़ती है,और रही पुलिस की बात तो मुझे नहीं लगता कि पुलिसवाले हिन्दू मुसलमान का फर्क करते हों,आप ताक़तवर हो तो पुलिस सेल्यूट मारती है,गरीब हो तो लट्ठ मारती है,और गरीब मुसलमान हैं तो हिन्दू भी,किसानो के आन्दोलन को पुलिस ने भट्टा परसौल में जिस बर्बरता से कुचला है,वो हाशिमपुरा से किसी भी मायने में कम नहीं था,फर्क इतना है कि उसमें पीड़ित किसान थे (इस लेख के सन्दर्भ में हिन्दू कहना उचित होगा),हमारि न्याय्पालिक के न्याय की लेट-लतीफ़ी और कानूनी पेचीद्गियीं के बारे में कुछ कहना बस अपने ज़ख्मों पर नमक छिड़कना होगा,खैर पाकिस्तान में क्या होता है क्या नहीं उस से क्या फर्क पड़ता है,पर जब हमारे घर में (हिन्दुस्तान में )ऐसा होता है तो दुख और डर दोनों होना स्वाभाविक ही है.यहाँ मुसलामानों के खिलाफ भगवा ब्रिगेड है तो हिन्दुओं के खिलाफ़ ओवेशी बंधू हैं,डाक्टर जाकिर नाइक है,और इनकी हरक़तों को जानबूझ कर सहा जाता है,ताकि नेताओं के मजे होते रहें,भाई मेरे,खतरे में न हिंदुत्व है न इस्लाम ,बस इंसान खतरे में है,

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