डोनाल्ड ट्रम्प जैसे लुच्चो की साइकी से सावधान!

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कुछ आतंकवादी हमलो के बाद मज़बूत नज़र आ रहे अमेरिका में राष्ट्रपति पद के दावेदार डोनाल्ड ट्रम्प का एक ऑडियो सामने आया जिसमे में वो महिलाओ को लेकर अश्लील टिप्पणियां करते दिखे जिससे उनकी हार तय बताई जारही हे खेर ट्रम्प विडियो में कहते पाए गए की ‘मैं सुंदर युवतियों के प्रति जबरदस्त आकर्षित होता हूं। विवाहित महिलाओं को भी पाना चाहता हूं -नोचता रहा हूं… और वे ऐसा सब कुछ करने देती हैं- अगर आप स्टार हे तो महिलाय आपको नहीं रोकती हे ” टेप की बहुत सी बाते लिखने योग्य नहीं हे कुल मिलाकर ट्रम्प की शेखी यही थी की वो महिलाओ पर और महिलाये उन पर मरती ही रहती हे उनमे कुछ ऐसी खास बात हे जिससे हर महिला जो उनके आ पास होती हे वो बावरी सी होकर उनके साथ आ ही जाती हे दिमाग पर जोर डाले तो याद आएगा की हमने अपने आस पास ऐसे लोकल ट्रम्प देखे हे जो सेम यही दावा करते मिलते हे . आइये डोनाल्ड जेसो की साइकी ( मन की बुनावट या मानसिकता ) और उस साइकी के क्या असर दूसरे लोगो पर होते हे उनकी चर्चा करे बात ये हे की हर जगह हर ऑफिस में हर माहौल में ऐसे ट्रम्प हम सभी ने देखे होते हे इनका अध्ययन करना और इनसे सावधान रहना और दुसरो को भी करना जरुरी हे ट्रम्प ने खुद को स्टार बताया और ये सभी ये ट्रम्प साइकि के लोग अपने को स्टार नहीं तो लोकल स्टार समझते हे या होते हे जो भी हे खेर ये सभी ये दावे करते मिल जाते हे की आस पास की सभी महिलाय लडकिया आदि इन पर मरती हे ये बढ़ चढ़ कर अपने किस्से सुनाते हे और इनके आस पास के लोग उनके इन सभी सेक्स और आकर्षण से पगे किस्सो को सौ फीसद सच भी मान लेते हे ज़ाहिर हे की स्त्री पुरुष के बीच अकेले में क्या हुआ क्या नहीं इसको आम हालात में पता करने का कोई तरीका भी नहीं होता हे तो आमतौर पर लोग ट्रम्प साइकि के किस्सो दावो को सच सा ही मान लेते हे!

कुछ इनसे इम्प्रेस होते हे तो कुछ हीनभावना का शिकार हो जाते हे कुछ बुरी तरह से फ्रेस्ट्रेट हो जाते हे की जिस लेडी को वो पसंद करने लगे थे वो तो इन साहब की दीवानी हे और ये साहब उनके साथ बहुत कुछ कर चुके हे इससे कई बेचारे लोग बुरी तरह तनावग्रस्त से हो जाते हे आपको ऐसे ट्रम्प हर जगह मिल सकते हे खेर सच तो ये हे की ये कोई सेक्स के सुपरमैन बिलकुल नहीं होते हे ये होते हे सिर्फ बेशर्म और लुच्चे इन लुच्चो की साइकी ये होती हे की ये अपने आस पास की हर लड़की या महिला को खुद पर फ़िदा बताते हे ये इनका मनोरोग सा होता हे मुख्य बात हे की ये मनोरोगी धीरे धीरे इस विषय में पूरी तरह से बेशर्म और सेंसलेस हो जाते हे इन्हें इस विषय में कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं होती हे इस मामले में ये निडर से हो जाते हे ये अपने आस पास दस में से हर लड़की पर डोरे डालते हे चाहे डाइरेक्ट चाहे इनडाइरेक्ट . उसके बाद होता यही हे की दस में से एकाध इनसे प्रभावित भी हो जाती हे जिसमे कोई ताज़्ज़ुब की बात नहीं होती हे आखिर कुदरत का कानून हे स्त्री पुरुष आकर्षण लाज़मी हे वही एकाध इसने अपना कोई काम निकलवाने को इन्हें थोड़ा या बहुत भाव भी देती हो सकती हे दो तीन महिलाये इन्हें इग्नोर कर देती हे या इनके मुह लगना इनसे भिड़ना बेकार समझती हे तो वही दो चार इनको रिजेक्ट करके इनकी जमकर बेइज़्ज़ती भी कर देती हे जिसे ये ट्रम्प साइकी छुपा जाती हे वो इस बात का कही जिक्र नहीं करते हे इन बातो को ये ट्रम्प साइकी दफ़न कर देती हे वही एकाध जो लड़की इनसे इम्प्रेस हुई भी हो उसका किस्सा बढ़ चढ़ा कर पेश करते हे कुल मिलाकर ये अपना स्कोर हर दस में से पांच लड़कियों का कम से कम , खुद से इम्प्रेस होने खुद के पीछे पड़ने उन्हें पाने का बताते हे !

ट्रम्प जैसे लुच्चो की ये मानसिकता ये बंडलबाज़ी ये शेखी बाकी समाज पर बड़ा घातक असर भी डालती हे जितने लोग लड़कियों के साथ छेड़छाड़ से लेकर बुरे व्यवहार और रेप तक के केसों में फंसते हे और अपनी और दूसरे की भी जिंदगी खराब कर लेते हे पूछ ताछ में यही सच सामने आएगा की ये सभी किसी ना किसी ” डोनाल्ड ट्रम्प ” के किस्सो दावो से प्रभावित थे जो इन्हें बताते हे की ”अरे सब पटती हे ” ” लड़कियों को भी छेड़छाड़ अच्छी लगती हे ” मेने उसके साथ साथ जबदस्ती की मगर उसने कुछ नहीं किया ” इन ट्रम्प नुमा बातो प्रभावित होकर से बहुत से लोग ऐसी बड़ी या घिनोनी हरकते तक भी कर जाते हे जिससे उन्हें भी बाद में बहुत पछताना पड़ता हे और अगर कानून के दायरे से बाहर की भी बात करे तो भी बहुत से लोग इन ट्रम्प लोगो की बात को सच मानकर ना केवल हीनभावना के शिकार होते हे बल्कि लड़कियों महिलाओ के प्रति उनके मन में इज़्ज़त प्रेम आदि भी कम होने लगता हे जिससे वो खुद ही परेशानी भी उठाते हे डोनाल्ड ट्रम्प जैसे लोगो की सबसे बड़ी ताकत इनकी आँख का पानी यानि शर्म का मर जाना होता हे जिस कारण इन्हें महिलाओ के हाथो अक्सर ही रिजेक्शन से लेकर बेइज़्ज़ती होने पर भी कुछ महसूस नहीं होता हे लेकिन अधिकतर लोगो में शर्म होती ही हे तो बेहतर यही होगा की लोग खुद भी डोनाल्ड ट्रम्प जैसे लोगो के किस्से सुनने और उन्हें खरा सच मानने से बचे और दुसरो को भी सावधान करे!

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10 thoughts on “डोनाल्ड ट्रम्प जैसे लुच्चो की साइकी से सावधान!

  • October 30, 2016 at 10:25 am
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    सिकंदर जी आप से सहमत डोनाल्ड एक छिछोरा है अगर अमरीका का राष्ट्रपति बन गया तो अमरीका को बर्बाद कर देगा , कुछ हिन्दू या कहे के भक्त डोनाल्ड को सपोर्ट कर रहे है वह हकीकत नहीं जानते !

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  • October 31, 2016 at 8:08 pm
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    रमेश जी , ये राष्ट्रपति तो खेर बनेगे ही नहीं उसकी बात नहीं हे बात हे ये हे की इन डोनाल्ड़ो की बंडलबाज़ियो की यानी इनके महिलाओ के सम्बन्ध में बड़े बड़े दावो का कुछ लोगो पर बहुत बुरा प्रभाव होता हे उससे हमें सभी को सावधान करना चाहिए इन लोगो की सबसे बड़ी ताकत इनका बेशर्म हो जाना ही हे यानी ये अपने आस पास हर महिला पर दावा करते हे और इस में रिजेक्शन से लेकर बेइज़्ज़ती जूते सब खाते हे मगर इन पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता हे यही इनकी ” सुपर पावर ” होती हे इनसे लोगो को सावधान रहना चाहिए और इनके किसी दावे को खरा सच नहीं मानना चाहिए

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  • November 12, 2016 at 11:31 pm
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    अमेरिका जैसे सबसे ताकतवर देश मे ट्रॅंप जैसे व्यक्ति का राष्ट्रपति बन जाना, वाकई मे आश्चर्यजनक है.

    ट्रॅंप ने अमेरिकी जनता मे मौजूद निराशा और असुरक्षा को बेहद सतही तरीके से उठाया, और किसी ठोस और स्पष्ट रणनीति को बतलाए, समाधान का वादा किया, जैसा हमारे यहाँ हुआ. इस असुरक्षा मे एक असुरक्षा मुस्लिमो के प्रति भी थी.

    एक ऐसा देश, जहाँ मुस्लिम महज सिर्फ़ 1% है, और 9/11 के बाद और पहले कोई आतंकवादी हमला नही हुआ, जहाँ मुसलमानो का इतिहास भी कोई ज़्यादा पुराना नही, अगर इस असुरक्षा मे फँस गया है, तो एक आम मुसलमान को समझना चाहिए कि उनके समुदाय और मज़हब की छवि पूरी दुनिया मे अच्छी नही.

    ऐसा नही है कि प्रगतिशील और सुलझे विचारो वाले लोग हमारे समुदाय मे नही है, हर जगह है, लेकिन शायद वो इतने मुखर और स्पष्ट नही कि वो दुनिया के बड़े वर्ग की राय बदलने मे सक्षम हो.

    इस स्तर पे, पूरी दुनिया मे फैली नकारात्मकता को “इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा और तेज़ी से फैलता मज़हब” के स्लोगन के पीछे नही छुपाया जा सकता.

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  • November 13, 2016 at 7:39 am
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    सही कहा जाकिर भाई ये मोदी ट्रम्प और पुतिन भी चेचेन दागिस्तान कार्यवाहिइओ से लोकप्रिय हुए सारी दुनिया में उभरता दक्षिणपंथ ये सब मुस्लिम कटरपंथ के कारण हुआ हे मुसलमानो के पढ़े लिखे कामयाब लोगो ने कभी अपना फ़र्ज़ नहीं निभाया किसी आसमानी बिजली के सीधे अपनी टाट पर गिरने के डर से कभी कठमुल्लाशाही के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई इसलिए ये सब हो रहा हे बढ़ती असमानता से सारी दुनिया में लोग कुंठित हो रहे हे इस्लामी कट्टरपंथ ने इस कोढ़ में खाज का काम किया और मोदी और ट्रम्प जेसो ने इसका पूरा फायदा उठा लिया हलाकि नतीजा अमेरिका में भी वही होना हे जो मोदी ने भारत में किया सिर्फ गन्द और लफ़्फ़ाज़ी

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  • November 13, 2016 at 10:22 am
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    Arun Maheshwariअमेरिकी चैनल एमएसएनबीसी पर ट्रम्प की जीत के बारे में हो रही अइस चर्चा को देखने की ज़रूरत है । सामाजिक-राजनीतिक सवालों पर वस्तुनिष्ठ ढंग से देखने का यह भी एक तरीक़ा है । मूल प्रश्न यह है कि हम आम लोगों के अंदर की सुगबुगाहट को कितना सुन रहे हैं या सुन पाते हैं ? यह नजरिया अपनाना कितना ही कठिन क्यों न हो, सचाई कभी भी सरल नहीं हुआ करती है ।
    वैसे प्रोफेसर ऐलन लिख्तमैन, जिन्होंने ट्रम्प की जीत की भविष्यवाणी की थी, उन्होंने ही अब एक और बड़ी भविष्यवाणी की है कि रिपब्लिकन पार्टी के स्नैचर ही ट्रम्प पर महाभियोग लगा कर उनका कार्यकाल पूरा होने के पहले ही राष्ट्रपति पद से हटा देंगे । ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में डेविस ब्रुक्स ने लिखा है कि साल भर के अंदर ही ट्रम्प कुछ ऐसा करेंगे जिससे उनका राष्ट्रपति बने रहना मुश्किल हो जायेगा ।

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  • January 22, 2017 at 9:32 am
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    Arun Maheshwariउत्ताल अमेरिकानरेन्द्र मोदी के चुनाव के बाद भारत के लोगों को जागने में अढ़ाई साल लगे हैं । वह भी मोदी के नोटबंदी की तरह के चरम तुगलकी कदम के बाद, अर्थ-व्यवस्था के अपने वेग को गँवाने, किसानों-मज़दूरों के जीवन में भारी समस्याएँ पैदा हो जाने के बाद ।
    लेकिन अमेरिका में स्थिति यह है कि ट्रंप की जीत के दूसरे दिन से ही पूरे देश में क्रमश: एक प्रकार की मायूसी छाने लगी और ट्रंप के शपथ लेने के साथ ही वह मायूसी गहरे आक्रोश के विस्फोट के रूप में सामने आने लगी है ।ट्रंप की विभाजनकारी और स्त्री-विरोधी मानसिकता, अमेरिकी जनतंत्र के इतिहास के प्रति उसके अंदर गहरे तिरस्कार के भाव ने वहाँ के लोगों में एक हिटलर के पैदा होने का ख़ौफ़ पैदा कर दिया है । अमेरिका ! अमेरिका !की उसकी थोथी रट के पीछे की सचाई को लोग अभी से समझ पा रहे हैं । वे साफ देख रहे हैं कि इस आदमी के पास आम मेहनतकश लोगों के हितों में ठोस रूप से कुछ भी करने की कोई समझ नहीं है । वह धर्म, रंग, भाषा और जाति के नाम पर आम लोगों को बाँटने की राजनीति पर चलने की योजनाएँ बना रहा है । वह सत्ता के मद में चूर, अमेरिकी समाज की अब तक की तमाम सकारात्मक और जनतांत्रिक उपलब्धियों के प्रति नफरत से भरा हुआ ऐसा शख़्स है जो इस धरती पर मानव मात्र के लिये ख़तरनाक साबित हो सकता है ।अभी अमेरिका का हर कोना ट्रंप के प्रतिवाद में सड़कों पर उतर कर उसे चेतावनी दे रहा है । वह ट्रंप के थोथे राष्ट्रवाद को ठुकरा रहा है, उसकी स्त्री-विरोधी कामुक दृष्टि का विरोध कर रहा है और सभी प्रकार के अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा की शपथ ले रहा है ।आज अमेरिका के कोने-कोने से लाखों की संख्या में औरतें वाशिंगटन में जमा हो रही है । कहा जा रहा है कि दुनिया में स्त्रियों की यह अपने प्रकार की सबसे बड़ी प्रतिवाद सभा होगी । कहना न होगा, दुनिया के स्त्री मुक्ति के आंदोलन के इतिहास में यह एक बड़ी घटना होगी ।अमेरिका के लोगों ने ट्रंप के चुनाव के बाद ही विरोध प्रदर्शनों का जो रास्ता पकड़ा है, वह सारी दुनिया में एक नये और समानतापूर्ण जनतांत्रिक समाज के निर्माण के आंदोलन का रूप लेने की संभावनाओं से भरा हुआ है । 2019 में भारत में जिस नये इतिहास के चरण का प्रारंभ होगा, अमेरिका के इस जन-उभार से मिल कर वह आने वाले समय की नई दिशा तय करे तो इसमें आश्चर्य नहीं होगा ।आज के ‘टेलिग्राफ़’ में वाशिंगटन में स्त्रियों के इस महा-प्रदर्शन के बारे में प्रकाशित रिपोर्ट को हम यहाँ साझा कर रहे हैं -Arun Maheshwar

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  • January 31, 2017 at 11:08 am
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    Arun Maheshwari
    1 hr · तुगलकी परंपरा का सबसे ख़तरनाक जीव है ट्रंप : अमेरिका के अटर्नी जैनरल ने अदालत में ट्रंप के आदेश का बचाव करने से किया इंकार
    -अरुण माहेश्वरीअमेरिका में ट्रंप के आप्रवासन -विरोधी तुगलकी आदेश का लगभग वही असर दिखाई दे रहा है जैसा भारत में मोदी के नोटबंदी का हुआ है । कई बड़ी-बड़ी अमेरिकी कंपनियाँ तक, वहाँ के सूचना उद्योग ने भी इसके खिलाफ वहाँ की अदालतों में जाने का फैसला किया है । वहाँ इस बात को साफ महसूस किया जाने लगा है कि बाहर से आने वाली श्रम शक्ति के बल पर ही अमेरिका की आर्थिक उन्नति टिकी हुई है । इसी कारण अमेरिकी स्टाक एक्सचेंज में भी मंदी आने लगी है ।इस क्षेत्र में आज की सबसे ताज़ा खबर यह है कि यहाँ तक कि अमेरिका की एटर्नी जनरल, अर्थात प्रमुख सरकारी वक़ील सैली येट्स ने कहा है कि वह ट्रंप के इस आदेश के बचाव में अदालत में नहीं खड़ी होगी । उन्होंने ट्रंप के इस आदेश को ‘अनैतिक’ और ‘ग़ैर-कानूनी’ भी बताया है ।विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति के पास आप्रवासन संबंधी नीतियों को तय करने के लिये काफी अधिकार होने के बावजूद वे ‘सीमाहीन अधिकार’ नहीं है । इस बारे में अंतिम निर्णय का अधिकार वहाँ की अदालतों के पास ही है ।
    ग़ौर करने लायक बात यह है कि हूबहू मोदी की तर्ज़ पर ट्रंप ने भी आनन-फ़ानन में घोषित किये गये इस फैसले के बारे में कहा है कि अगर उसने हफ़्ते भर बाद भी यह निर्णय लिया होता तो इस दौरान सारे आतंकवादी अप्रवासी अमेरिका में घुस गये होते । जैसे मोदी ने कहा था कि उसने थोड़ी भी देर की होती तो सारा काला धन ठिकाने लग गया होता!
    सचमुच, ट्रंप और मोदी की झूठ बोलने, डराने और मनमाने फैसले करने की इन भारी समानताओं को देख कर लगता है कि भारत में चौदहवीं सदी के प्रथमार्द्ध में मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने शासकों की जिस नई नस्ल के बीज डाले थे, शासकों की वह योजना-विलासी, ग़ैर-यथार्थवादी, जनता के सुख-दुख के प्रति चरम लापरवाह, सनकी, क्रूर, पागल और रक्त-पिपासु आनुवांशिक परंपरा तुगलक के सात सौ साल के बाद भी आज तक जारी है । इसी अनुवंश के शासक-जीव दुनिया के किसी न किसी कोने में बार-बार पैदा होते रहते हैं ।
    लेकिन सारी दुनिया के लिये सबसे बड़ी चिंता और ख़तरे की बात यह है कि ट्रंप नामक इस परंपरा के जीव ने नाना प्रकार की तिकड़मों के ज़रिये आज दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका में सत्ता की कुर्सी पा ली है । अभी उसे सत्ता संभाले दस दिन ही हुए हैं, इसीलिये इसकी उपलब्धि में मोदी जी की तरह जन-संहार की कोई कीर्ति शामिल नहीं हो पाई है, लेकिन अमेरिका का राष्ट्रपति होने के नाते ट्रंप इस तुग़लक़ी-हिटलरी वंश परंपरा का सबसे ताक़तवर और ख़तरनाक वारिस साबित हो सकता है, इसे अभी से दुनिया के लोग समझने लगे हैं ।-Arun Maheshwar

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  • January 31, 2017 at 3:19 pm
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    अमेरिका के नए राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस नए आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं उसका अर्थ समझते हैं आप ?

    वह नया आदेश कहता है जिन 7 मुस्लिम देशों के लोगों के पास ग्रीन कार्ड है लेकिन अमेरिकी नागरिकता नहीं है,

    वह लोग अगर इस समय अमेरिका से बाहर है और वापिस अमेरिकी एयरपोर्ट पर पहुंचते हैं तो उन्हें अमेरिका में न घुसने दिया जाए,

    इसका मतलब है जो कोई 20 साल से भी अमेरिका में रह रहा है,

    नौकरी कर रहा है उसका अपना घर है अपना परिवार है,

    वह यदि किसी काम से अमेरिका से बाहर गया हुआ है तो अब वह अमेरिका वापस नहीं लौट सकता,

    कुछ माऐं हैं जिनके बच्चे अमेरिका में हैं और वह किसी काम से बाहर गई थी,

    अब वह वापिस अपने बच्चों के पास नहीं लौट सकती,

    जो लोग अपने बिजनेस या नौकरी के सिलसिले में अमेरिका से बाहर गए थे वह भी वह वापस नहीं लौट सकते,

    उन लोगों की नौकरी चली जाएगी बिजनेस ठप हो जाएंगे परिवार उजड़ जाएंगे,

    लेकिन यह एक पागल वहशी जिसे सत्ता पर बिठाया गया है,

    वह लाखों लोगों की जिंदगी में तबाही घोल रहा है,

    हमें ऐसे समय में सावधान होकर सच में सोचना चाहिए कि हम अपने दिलों की नफरत की वजह से खूंखार सांप्रदायिक नेताओं को सत्ता ना सौंपें,

    वरना वह इंसानों का जीना हराम कर देंगे,
    Via …………..Himanshu Kumar

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  • January 31, 2017 at 3:47 pm
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    ट्रम्प बहुत कम वोटों से जीते है लोकतंत्र में विरोधी जनता के विचारों का सम्मान होना चाहिए
    ट्रंप केवल एक चुनावी वादा “प्रतिक ” में पूरा करने का नाटक कर रहे है वह केवल १२० दिन केलिए न की ४साल के लिए इसलिए कोई ज्यादा हायतोबा मुस्लिम देशो को नहीं करनी चाह्हिये

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  • January 3, 2018 at 12:50 pm
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    Ravish Kumar
    3 hrs ·
    पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ट्रंप ज़िंदाबाद तो भारत के ख़िलाफ़…..???

    जब ट्रंप ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैनिक मदद रोकी तो हमारा मीडिया नाचने लगा और ट्रंप ट्रंप करने लगा। भारत का मीडिया गीत गाने लगा कि मोदी की जीत है। 1 और 2 जनवरी को लगा कि ट्रंप और मोदी पार्टनर बन गए हैं। ऐसे फैसलों की बारीक़ी को मीडिया ने ट्रंप मोदी की जुगलबंदी में समेट दिया।

    दो दिन बीते नहीं कि अब ख़बर ऐसी आ रही है जो भारतीयों के लिए अच्छी नहीं है। उम्मीद है भारत के चैनल अब ट्रंप और मोदी को साथ साथ यानी अगल बगल में नहीं दिखाएंगे। दोनों को आमने सामने दिखाएंगे। ये सब करेंगे मगर कोई आपको शर्तें लागू वाले प्रावधान नहीं बताएगा।

    ट्रंप प्रशासन प्रस्ताव है कि जो लोग स्थायी निवास ( permanent residnecy) के लिए H-B1 वीज़ा का विस्तार हासिल करना चाहते हैं, उन्हें विस्तार न मिले। अगर यह प्रस्ताव लागू हो गया तो करीब पांच लाख भारतीयों को वापस आना होगा। चीन के नागरिक भी प्रभावित होंगे मगर सबसे ज़्यादा असर भारतीयों पर पड़ेगा।

    ट्रंप की जीत के लिए हवन करने वाले प्लीज़ हवन री-स्टार्ट करें ताकि ट्रंप के भेजे में बुद्धि का आगमन हो और ऐसा न हो। चैनलों को तुरंत ट्रंप के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल लेना चाहिए और प्रधानमंत्री मोदी से कहना चाहिए कि एक बार और जीत कर दिखाएं। पाकिस्तान को सैनिक मदद रोकवा दी, अब ये वीज़ा वाला प्रस्ताव रोकवा दें।

    Permanent Residency मिल जाने से आप अमरीका में रहकर किसी भी कंपनी में काम कर सकते हैं। बार बार वीज़ा लगाने की ज़रूरत नहीं होती है।
    किसी प्रायोजक की ज़रूरत नहीं होती है। नागरिकता के लिए आपको अमरीका में इम्तहान देना पड़ता है।

    कुतर्कियों और मूर्ख राष्ट्रवादियों की तरह कहा जा सकता है कि भारत में पैदा होकर कोई दूसरे मुल्क की नागरिकता कैसे ले सकता है। नागरिकता और स्थाई निवास अलग है। अब मैं उनकी बात कर रहा हूँ जो दूसरे देश की नागरिकता ले लेते हैं । ऐसे लोगों को भारत आ ही जाना चाहिए। मैं इस तरह की राय को सही नहीं मानता। लेकिन भारत की नागरिकता को छोड़ चुके लोगों को मतदान का अधिकार देने की बात को भी सही नहीं मानता। क्यों भाई जब नागरिकता छोड़ दी तो मतदान का अधिकार क्यों लोगे? एन आर आई कोटे से मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजो में एडमिशन क्यों लोगो? यह कोटा मेरिट से मिलता है या पैसा देकर ? जो भी बहस हो, अंध विरोध की तरह न हो। सोच विचार कर, सबका पक्ष सुनते हुए होनी चाहिए।

    माइग्रेशन दुनिया की एक सच्चाई है। दुनिया इसी तरह से बसी है। आगे भी ऐसे ही बसेगी। हम और आप अपने ही देश में एक भौगोलिक इलाके से दूसरे भौगोलिक इलाके में पलायन करते रहते हैं। सदियों से दूसरे देशों में पलायन करते रहे हैं। बांध कर भी ले जाए गए हैं।

    पलायन करना अवसरों का लाभ उठाना है। हम सभी को माइग्रेट करने या पलायन करने के अधिकारों का पक्ष लेना चाहिए और जीवन में पलायन करना चाहिए। दुनिया भर में माइग्रेशन को लेकर कुतर्कों का जाल बिछा हुआ है। इसे समझने के लिए आपको ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ना चाहिए। धारणाओं के आधार पर कुतर्क न गढ़ें। नौकरी मिल जाने और शादी हो जाने के बाद भी पढ़ते रहें।

    ईसाई धर्म गुरु पोप फ्रांसिस ने अपने नए साल के संदेश में दुनिया से अपील की है कि लोग अपने प्रवासियों और शरणार्थियों को गले लगा लें। उनके दिलों में आशा की किरणों को बुझने न दें। पोप फ्रांसिस लगातार इस बात पर बोलते रहते हैं। ट्रंप लगता है पोप की भी बात नहीं सुनते। बहुत से देश नहीं सुनते हैं।

    हमारे धर्म गुरु जो भारत को विश्व गुरु बनाने निकले हैं, उनका माइग्रेशन और रिफ्यूजी पर क्या मत है, कभी ठीक से जानने को नहीं मिला। अगर कुछ है तो ज़रूर अवगत कराएं। मैं अपनी अज्ञानता दूर करना चाहता हूं।

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