झूला झूलने और चाय पिलाने से विदेश नीति नहीं चलती !

xi-modi

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति की एक बैठक में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी क्योंकि उसने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन करते हुए मुंबई हमले के इस मास्टरमाइंड को रिहा कर दिया है, लेकिन चीन के प्रतिनिधि ने यह कहते हुए इस प्रस्ताव को रोक दिया कि भारत ने पर्याप्त सूचना मुहैया नहीं कराई है। सूत्रों ने बताया कि मोदी ने चीन नेतृत्व के साथ इस मसले पर बात की है।स्वरूप ने कहा कि भारत के प्रस्ताव को चीन द्वारा रोके जाने के मामले पर प्रतिबंध समिति के अध्यक्ष के साथ भी चर्चा की गई। समिति की अध्यक्षता इस समय न्यूजीलैंड के पास है। लखवी की रिहाई पर अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और जर्मनी में भी चिंता है। अमेरिका उसकी पुन: गिरफ्तारी चाहता है55 वर्षीय लखवी को दिसंबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था और 25 नवंबर 2009 को छह अन्य के साथ मुंबई हमले के सिलसिले में अभ्‍यारोपित किया गया था। इस मामले में 2009 से ही मुकदमा चल रहा है। पाकिस्तान की एक अदालत ने 9 अप्रैल को लखवी को मुक्त कर दिया था। भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए सीमापार आतंकवाद को रोकने की दिशा में पाकिस्तान की ओर से दिए गए आश्वासनों का मोल कम करने वाला कदम बताया था।

गुजरातियों में गुण बहुत होते हैं पर उनमें कुछ अवगुण बहुत बुरे भी होते हैं , एक तो आत्ममुग्धता और अति आत्मविश्वास , आत्म विश्वास ऐसा कि उनको लगता है कि वह जो कह रहे हैं , कर रहे हैं वही सही है , आतिथ्य संस्कार पर इतना भरोसा होता है कि उनको लगता है कि किसी की सेवा सत्कार करके अपनी बात मनवाई जा सकती है ।भारतीय संदर्भ में ऐसा होता भी है , यदि आप व्यापारी हैं और गुजरात व्यापार के लिए जाएं तो जिसके यहाँ जाएंगे वह मीठा बोल कर मीठा खिला कर आपको लूट लेगा और आप उसके आतिथ्य से दबे , संकोचवश कुछ नहीं कर पाएंगे और वह अपना सब हित साध लेंगें ।यह मेरा 15 वर्षों का अनुभव है। भाषण कला और सामने वालों को अपनी बात से प्रभावित करने में लगभग हर गुजराती निपुण होता है और सच यह है कि आप “उनकी बातों में आए तो गच्चा खाए”।

अपने प्रधानमंत्री भी कुछ ऐसे ही हैं , और विदेश नीति को उसी गुजराती फार्मूले से चलाना चाहते हैं , 13 महीने में तमाम 19 राष्ट्रों के दौरे पर उनका लप्पो चप्पो हो या विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की भारत यात्रा पर उनके लिए बिछ जाने की गुजराती स्टाईल , सच यह है कि उनको यह पता ही नहीं कि विदेश की राजनीति देश की राजनीति से भी धुर्तता भरी होती है।यह चाय पिला कर झूला झुला कर तय नहीं की जाती ना ही दूसरे देश से बदलवाई जाती है ।

चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा याद करें , चीनी राष्ट्रपति के सामने चपरासी की तरह आवभगत करते हमारे प्रधानमंत्री यह समझ रहे थे कि चाईना उनकी सेवा से अभीभूत होकर उनके सामने नतमस्तक हो जाएगा पर चाईना जैसे धुर्त राष्ट्र का राष्ट्रपति प्रधानमंत्री जी को तौल रहा था और इनका हल्कापन उसने तौल लिया ।

हमारे प्रधानमंत्री चाईना को झूला झुला कर चीनी राष्ट्रपति से व्यक्तिगत संबंध बघाड़ रहे थे चाईना इसी का फाएदा उठा रहा था दबाव डालकर पाकिस्तान से अपने पक्ष में एग्रीमेंट करने के लिए तोलमोल करने में लगा था , एग्रीमेंट के जिन 52 मुद्दों पर पाकिस्तान असहमत व्यक्त कर रहा था पर भारत से बढ़ती नजदीकी दिखाकर चाईना पाकिस्तान से अपनी शर्तें मनवाने में सफल रहा और चीनी राष्ट्रपति ने तुरन्त पाकिस्तान का दौरा करके एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिया, ऐसे चलती है विदेश की राजनीति ।

फिर हमारे प्रधानमंत्री का चाईना दौरा हुआ , मोदी जी टेराकोटा की मुर्तियों में उंगली कर रहे थे चाईना फिर पाकिस्तान पर दबाव डालकर उन सहमति पर तिव्र गति से आगे बढ़ रहा था ।प्रधानमंत्री घूम टहल कर चले आये और उनके भक्त उनको विश्व विजयी योद्धा समझ कर सीना कूट रहे थे और चाईना अपनी शर्तों पर पाकिस्तान से वह समझौता कर के बहुत आगे बढ़ गया जो भारत के लिए दिर्घ अवधि में बेहद हानिकारक होगा। और अंत में संयुक्त राष्ट्र में चाईना ने अपनी असलियत दिखा कर पाकिस्तान का साथ दिया और भारत की किरकिरी कराई ,पूरे विश्व के सामने भारत की विश्वसनीयता खंडित की ।संयुक्त राष्ट्र में भारत की हार हुई और मुंबई हमले का मुख्य अभियुक्त और मजबूत हुआ और मोदी तथा भक्त योगा डे से ही खुश हो गये ।
मेरा अपना व्यक्तिगत विचार है कि प्रधानमंत्री विदेशी दौरों पर देश की नीति को मजबूत करने से अधिक घूमने टहलने मंदिर में दर्शन करने , अपने चेलों की डील कराने में अधिक व्यस्त रहते हैं , भाषणबाजी करके आत्ममुग्ध रहते हैं और उनके भक्त इसी में खुश हो जाते हैं कि भगवा रंग का कुर्ता पहना , विदेश जाकर भी मंदिर में दर्शन करने गये , यही है हिन्दू हृदय सम्राट ।
अपरिपक्व और अल्लहण नेतृत्व का यह आचरण दुनिया समझ चुकी है और तमाम विश्वप्रसिद्ध समाचारपत्र खिल्ली उड़ा रहे हैं । मुझे संशय है कि कुटिल चतुर पड़ोसी चीन और महा धुर्त पाकिस्तान की सफल राजनीति से निपट पाना इन भोपूँ के बस का नहीं, बेहतर होता विदेश मंत्री को ही पूरी आजादी से कार्य करने दें और स्वयं देश को आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था की मजबूती के लिए कार्य करते । वैसे गुजराती चरित्र में उपलब्ध घुमक्कड़ स्वभाव ऐसा करने देगा मुझे असंभव लगता है । ईश्वर से प्रार्थना है कि देश को कहीं गच्चा ना दे जाएं अपनी बकलोली की आदत से।

खून में व्यापार :-

मैं ना कहता था कि झूला झुला कर चाय पिलाकर विदेश नीति नहीं चलाई जाती भक्तों ।
चाईना ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का साथ देते हुए भारत को ही उलहना दिया ।

सीखो सीखो कि भाषण से कुछ नहीं होता ।

एक आंकड़े के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भारत ने 2000 करोड़ खर्च कर डाले ।और चाईना ने पूरी दुनिया में इसी दिन 2000 करोड़ से अधिक की चटाई बेच डाली ।

खून में व्यापार भी जुमला ही था । सीखो सीखो ।

(Visited 3 times, 1 visits today)

4 thoughts on “झूला झूलने और चाय पिलाने से विदेश नीति नहीं चलती !

  • June 24, 2015 at 6:36 pm
    Permalink

    बहुत बढ़िया लेख ज़ाहिद साहब को बहुत बहुत बधाई आत्ममुग्द मोदी सरकार को तो सही रगड़ा आपने इसके आलावा ये भी बात हे की कैसे रात दिन भारत और हिन्दुओ को ”काफिर ” बताने वाले पाकिस्तान के भारत विरोधियो ने कैसे इस्लाम और मुसलमानो पर तरह तरह की पांबंदिया लगाने वाले शुद्ध ” काफ़िर ” ( नास्तिक और सभी हराम चीज़ खाने वाले ) चीन सरकार के तलवे चाट चाट कर अपना काम करवाया इससे पता चलता की कितने फ़ालतू होते हे ये कटटरपन्ति

    Reply
    • June 24, 2015 at 7:46 pm
      Permalink

      गुजरात से बाहर भी मोदी समर्थक शायद लूटने वाले और खून चूसने वाले ही ( छुठभैयो को छोड़ कर ) में जिस मोदी समर्थक मेडिकल स्टोर वाले से पिछले पांच साल से अपनी मदर और सिस्टर की हज़ारो रूपये महीने की दवाइया खरीद रहा था वो कटटर मोदी समर्थक हे अब मुझे पता चला की इतनी खरीद पर तो बड़े आराम से दस % की छूट मिल जाती हे जो उसने मुझे कभी नहीं दी जानकार बड़ा दुःख हुआ लेकिन ख़ुशी भी हुई की ऐसे ही लोग 2019 में मोदी जी से छुटकारा दिलवायेंगे क्योकि ये शोषण से बाज़ आ ही नहीं सकते जैसे कोई मुस्लिम कटरपन्ति इरिटेट करने से बाज़ आ ही नहीं सकता वैसे ही ये संघ मोदी समर्थक खून चूसने से बाज़ आ ही नहीं सकते हे

      Reply
  • June 25, 2015 at 2:22 pm
    Permalink

    चीन के पूर्वी तुर्केस्तान या जिसे वह शिनजियांग कहता है वहां वीगर मुसलमानों के बढ़ते विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है.
    शायद जब तक चरमपंथ की चुभन बुरी तरह खुद उसे नहीं होने लगती तब तक पाकिस्तान प्रायोजित चरमपंथ को लेकर चीन के दोहरे मापदंड खत्म नहीं होंगे.अपनी ओर से भारत को चीन को साफ़ कर देना चाहिए कि द्विपक्षीय संबंध तब तक नहीं फलेंगे और क्षमता से कम ही रहेंगे जब तक चीन भारत की संवेदनाओं को समझना शुरू नहीं करता और इस सूची में चरमपंथ सबसे ऊपर है.
    हालांकि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर चीन के सहयोग की भारत ने सराहना की थी लेकिन जो भी साख चीन ने अर्जित की थी वह लखवी मामले पर वीटो कर खो दी है.
    दूसरे शब्दों में चीन के लिए यह ठीक नहीं होगा कि वह योग दिवस जैसे हल्के मुद्दों पर तो भारत का समर्थन करे लेकिन चरमपंथ जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर टका सा जवाब दे दे, ख़ासतौर पर जब इसमें पाकिस्तान शामिल हो.
    चरमपंथ और इसके प्रायोजक के पक्ष में मतदान कर चीन ने भारत को बेहद नकारात्मक संकेत दिया है द्विपक्षीय संबंध पर इसका असर आने वाले कुछ महीनों में महसूस किया जाएगा.

    Reply
  • June 26, 2015 at 6:32 am
    Permalink

    आपका यह लेख बहुत ही तार्किक तथा बिल्कुल सही है ।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *