झूठ और राजनीति मौसेरी बहन !

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by– मोहम्मद जाहिद

देश में झूठ बोलना और झूठ बोल कर अपने व्यक्तित्व और चरित्र को निखारने की एक नयी प्रवृति शुरू हो चुकी है जिसका ताजा उदाहरण लालू सुपुत्री मीसा भारती हैं ।मीसा भारती लालू प्रसाद यादव की राजनैतिक उत्तराधिकारी हैं और उनकी खो चुकी राजनैतिक जमीन को पाने के प्रयास में लगी हुई हैं और झूठ बोलकर अपने व्यक्तित्व को उभार रही है इसी प्रयास मे हावर्ड विश्वविघालय में उनके व्याख्यान देने के जिस महान कार्य को सोशल मीडिया से लेकर पार्टी में बढ़ा चढ़ा कर प्रसारित किया गया वह झूठ का पुलिंदा हावर्ड विश्वविघालय के खंडन से झूठा साबित हो गया है और मीसा भारती का उस प्रोग्राम में एक दर्शक के रूप में जाना और प्रोग्राम समाप्त होने के बाद मंच पर जाकर पोडियम के साथ फोटो खिंचवाने का और स्वयं के महिमामंडन का सच भी सामने आ चुका है ।ऐसा झूठ और इस स्तर पर सच में हिलाने वाला है कि राजनैतिज्ञों की सोच किस तरह साजिशें रचती हैं ।
मित्रों अब राजनीति झूठ बोल कर की जाएगी और झूठ का सहारा लेकर चरित्र का निर्माण किया जाएगा , देश की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी पार्टी के युवराज राहुल गांधी 15 दिनों से देश के परिदृश्य से गायब हैं और ठीक है कि यह उनका निजि कार्यक्रम या निजी जीवन है जिस पर किसी को भी आपत्ति होनी भी नहीं चाहिए परन्तु देश के प्रमुख विपक्षी दल के सबसे बड़े नेता का जीवन इतना रहस्यमयी होना चाहिए ? पारदर्शी व्यक्तिगत जीवन जीने की आवश्यकता नहीं है ? ऐसा कौन सा कार्यक्रम है जिसको देश की जनता से छुपाने की आवश्यकता पड़ती है और कभी उत्तराखंड और कभी थाईलैण्ड प्रवास की खबरों के बीच रहस्यमय तरीके से ऐसे गायब हो जाना क्या उचित है ? और यह उनका पहला कृत्य नहीं है “शक्तिमान” की तरह गायब होना और फिर प्रकट हो जाने की उनकी प्रवृति उनकी विश्वसनीयता को खंडित करती है जो उनके स्वयं के भविष्य के लिए उचित नहीं ।मेरा अनुमान है कि वह भी कुछ छुपा रहे हैं और इसके लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं और इस कारण वह देश के सबसे रहस्यमयी नेता हैं।देश जब संसद में मंथन कर रहा है तो घोघा बसंत रहस्यमयी छुट्टी मना रहे हैं ।

झूठ तो बोला ही जाता रहा है राजनीति में परन्तु इस प्रकार से स्तर निम्न हो जाएगा यह देखना दुखद है कि सैफई और दिल्ली तक में झूठ का प्रदर्शन किया गया और मुलायम सिंह यादव तथा लालू प्रसाद यादव के समधी समारोह में जिस राजशाही समारोह का आयोजन किया गया वह भी थोथे समाजवाद का ही एक रूप है ।मुझे हैरत होती है कि जीवन भर जिस झूठे समाजवाद का नारा यह तथाकथित समाजवादी पुरेधा करते रहे हैं वह ऐसे झूठे प्रपंच करने के पहले यह भी नहीं सोचते कि स्वर्गीय जयप्रकाश , राम मनोहर लोहिया इत्यादि जैसे समाजवादी देवताओं की आत्माएँ अपने चेलों के कुकृत्य को देखकर धिक्कारती होंगी।
मित्रों सच कहूं तो मुझे किसी भी नेता के बयान सच नहीं लगते और जब तक दूसरा पहलू सामने ना आजाए विश्वास नहीं करता।आप मुझे नकारात्मक सोच का व्यक्ति कह सकते हैं परन्तु इसके लिए इन नेताओं का ” चाल चरित्र और चेहरा ” ही जिम्मेदार है ।
भारत के इतिहास में सबसे बड़ी झूठी पार्टी यदि कोई आजतक हुई है तो वह भारतीय जनता पार्टी जिसके जन्म का आधार ही झूठ पर आधारित है और अपने झूठे वायदे सिद्धांतों के विपरित कार्य करना और उसको उचित ठहराने के लिए थोथे तर्क देना थेथरई बतियाना और इस कार्य के अंजाम देने के लिये तीन महानुभाव प्रवक्ता संबित पात्रा , नलिन कोहली और सुधांशु त्रिवेदी को सामने लाना ।तमाम बहसों में इनका झूठ और झूठे तथ्य पकड़े जा चुके हैं और यह थेथरई करके लीपापोती कर चुके हैं ।

भाजपा के इस सब झूठ को बढ़ाने वाले और उच्चतम स्तर तक ले जाने वाले व्यक्ति उसके नायक नरेंद्र मोदी हैं । सच यह है कि गुजरात से मेरा संबंध केशू भाई पटेल के मुख्यमन्त्रित्व काल से रहा है और मेरा आना जाना लगा रहा है परन्तु मैने कभी भी श्री नरेंद्र मोदी के देशहित में पत्नी त्याग और चाय बेचने के इतिहास के बारे में नहीं सुना और ना ही नरेंद्र मोदी ने ही इसकी कभी चर्चा की ।पत्नी से अलगाव को उनके व्यक्तिगत जीवन का अनबन समझा जाता रहा है और उन्हें संघ का एक स्वयं सेवक जो बचपन से ही घर छोड़कर संघ के लिए लगा रहा ।लोकसभा चुनाव के दौरान इस झूठे त्याग और चाय विक्रेता के झूठ का महिमामंडन करने का कार्य प्रारंभ किया गया और उनके चरित्र और व्यक्तित्व को उभारा गया जो कि शुद्ध रूप से एक बेहतरीन मार्केटिंग का उदाहरण मात्र है ।देश हित में पत्नी त्याग का सच सामने आ चुका है और एक आर टी आई से रेलवे ने भी स्पष्ट किया है कि उनके या उनके पिता जी के रेलवे में चाय बेचने के कोई प्रमाण नहीं हैं ।

इस विषय पर पोस्ट लिखने को मजबूर हुआ कल के नरेंद्र मोदी के एक और झुठ के रहस्योद्घाटन से कि संदिग्ध आतंकवादी मरशते आलम की रिहाई प्रक्रिया की कोई जानकारी केन्द्र सरकार को नहीं थी जैसा कि उन्होंने लोकसभा में बयान दिया था ।इस झूठ से भी पर्दा ठीक एक दिन बाद ही उठ गया कि यह प्रक्रिया उमर अब्दुल्ला के इस्तीफे के बाद लगे राष्ट्रपति शासन के दौरान ही प्रारंभ हुई और उसे मुफ्ती सरकार के गठन के ठीक बाद छोड़ा गया ।राष्ट्रपति शासन गृहमंत्रालय के अधीन होता है तो क्या मैं यह समझूं कि आलम की रिहाई की प्रक्रिया की जानकारी गृहमंत्री को नहीं थी ? और यह उनकी अक्षमता का उदाहरण नहीं है जिसपर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी है ? ऐसे अक्षम गृहमंत्री को क्या बर्खास्त नहीं कर देना चाहिए जिसे देश के लिए सबसे संवेदनशील और मान सम्मान प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गए जम्मू कश्मीर के इतने महत्वपूर्ण घटना की जानकारी ही नहीँ हो ? वह गृहमंत्री देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी कैसे निभा सकता है ? यह सवाल उठता है कि नहीँ ?

मैं ऐसा मानता हूँ कि ऐसा नहीं हुआ होगा और जिलाधिकारी से लेकर सभी संबंधित अधिकारियों ने गृहमंत्री को अवश्य सूचित किया होगा क्युँकि नौकरी जाने का खतरा और डर नौकरी करने वाला ही जानता है ।और प्रधानमंत्री ने इस मामले में भी गलत बयानबाजी ही की कि केन्द्र सरकार को नहीं पता था ।और यदि प्रधानमंत्री सच बोल रहे हैं तब तो यह चिंता की और बात है कि इतना नकारापन ? वो भी काश्मीर जैसे बेहद संवेदनशील राज्य के विषय के साथ ? क्या यही है गुड गवरनेन्स ? ये कैसा चौकीदार है जो एक संदिग्ध आतंकवादी के छोड़े जाने से ही अनभिज्ञ है ?
मित्रों आप एक बात समझ लें कि झूठा व्यक्ति जोर जोर से चिल्ला चिल्ला कर अपनी बात कहता है और सच्चा व्यक्ति तर्कों तथ्यों के साथ शालीनता और ठंडे दिमाग से बात कहता है ।और इसी तराज़ू पर आप किसी को मापें तो दूध का दूध और उसका मिलावटी केमिकल साफ हो जाएगा।

दो दिन पूर्व ही माननीय प्रधानमंत्री जी ने आंखे निकालते हुए चेहरे के डरावने रूप में लाते हुए “घातक फेम सनी देओल” स्टाइल में जैसे विपक्ष को धमकाया था कि “आप मुझे देशभक्ति मत सिखाईये” कहीं से भी पद की गरिमा के अनुकूल व्यवहार नहीं था ।सच यह है कि मुझे लगा कि वह बोलने वाले हैं कि ” मुझे आप लोग देशभक्ति मत सिखाईये , सरकार चलाना सिखाईये”
फेसबुक पर ही किसी मित्र की एक टिप्पणी कि “किसी चाय वाले से इससे अधिक व्यवहार की उम्मीद की भी नहीं जा सकती”
स्पष्ट कर दूँ कि सब झूठ बोलने और झूठ की खेती करने का कार्यक्रम का ही नाम राजनीति है इसलिए भक्ति करने से अधिक आवश्यक है वोट देने के बाद वादों के तराज़ू में तौलिये अन्यथा यह धुर्त नेता झूठ बोल बोल कर हम सब को लूटते रहेंगे और हम भक्ति में डूबे रहेंगे।
मेरी दृष्टि में आसाराम,रामपाल और इन नेताओं में कोई अन्तर नहीं है ।

निवेदन :- मीसा भारती जी आप मेरी मित्र सूची में हैं आपका स्पष्टीकरण अपेक्षित है ।

धन्यवाद टाटा गुडबाय नमस्कार खुदा हाफिज़ ।

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One thought on “झूठ और राजनीति मौसेरी बहन !

  • March 19, 2015 at 9:03 pm
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    जम्मु कश्मेीर मे राज्य्पाल शासन् था , न कि राश्त्र्पति शासन था कशमेीर के विधान के अनुसार पाह्ले ६ माह राज्य्पाल शासन रहता है इस्के बाद राश्त्र्पति शासन्,
    राज्नेीति मे बगै असत्य् के कुच नहेी होता क्योकि उस्मे नेीति होतेी है न कि सिद्धान्त ! और नेीति अस्थायेी होतेी है

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