चले जायेंगे साध्वी जी मगर….हम कुछ छोड़ेंगे नहीं !

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साध्वी जी, आप देश को मुसलमान मुक्त करना चाहती है बेशक करिये हम खुद उस देश में रहना नहीं चाहेंगे जहां आप जैसे लोग हमारी कौम को रोज कटघरे में खड़ा करते हो, हमारे मजहब को रोज गालियां देते हो, हमारी देशभक्ति और देशप्रेम पर रोज उंगलियां उठाते हो, हमें पाकिस्तानी और आतंकवादी कहते हो जैसे हम इस देश के नागरिक नहीं बोझ है देश पर…. मगर हम ऐसे नहीं जायेंगे साध्वी जी…हम कुछ छोड़ कर नहीं जायेंगे…..हम जायेंगे तो वो सब कुछ लेकर जायेंगे जो हमने पीढ़ी दर पीढ़ी देश को दिया है…हम तो कभी याद भी न रख पाये कि हमने देश को क्या क्या दिया है दरअसल ये देश हमारा रहा है और हमारी आन, बान और शान है ये देश…वतनपरस्ती हमारे लिये ईमान का अटूट हिस्सा है मगर आपको तो याद भी न होगा कि हमने देश को क्या दिया है और याद होगा भी तो आपको कहने में शर्म आती होगी मगर देश जानता है और कहता भी है कि हमने क्या दिया है देश को और हम जानते है कि इस देश की मिटटी में हमारी कई पीढ़ी सुपुर्देखाक हुई है, इसी मिटटी ने हमें जीवन दिया है, इसी मिटटी ने हमें जीना सिखाया है, इसी मिटटी में तामीर अपने इबादतगाहों में हम मुल्क की बेहतरी की दुआ मांगते है, इसी मिटटीे ने हमारे बचपन की शरारतें देखीं है, हमारी जवानी के सपनों को पंख दिया है, इसी मिटटी में हमारे बुढ़ापे का सहारा टिका है और इसी मिटटी कीे दो गज जमीन में हमें दफन होना है…ये देश सिर्फ आपका नहीं है और हमें आपसे कोई कम मोहब्बत इस देश से नहीं है मगर हम चले जायेंगे…देश को मुसलमान मुक्त कर देंगे….लेकिन थोडा रुक कर ज़रा हिसाब तो कर लेने दीजिये..हमें अपनी चीजे तो समेट लेने दीजिये…फिर हम जायेंगे आपके लिये… मुसलमान मुक्त भारत के लिये…

हम अपने साथ ले कर जायेंगे साध्वी जी मोहन जोदाड़ो और हड़प्पा की उन्नत सांस्कृतिक विरासत से लेकर अमीर खुसरो की रुबाइयाँ तक, हम लेकर जायेंगे अपने साथ ताजमहल, क़ुतुबमीनार, लालकिला और ऐसी हजारों स्थापत्य की बेजोड़ मिसालें, हम लेकर जायेंगे अलबरूनी का इतिहास, जायसी का पद्मावत, मिंया तानसेन का राग, मिर्जा ग़ालिब की शायरी, बिस्मिल्ला खान की शहनाई की धुन, जाकिर हुसैन के तबले की थाप, हम न ग़ज़ल छोड़ेंगे न कव्वाली, न मुजरा भी छोड़ेंगे, हम अजमेर शरीफ ले जायेंगे, निजामुद्दीन औलिया की दरगाह भी ले जायेंगे। अरे अभी कहाँ साध्वीजी अभी लिस्ट लंबी है…हम अशफाक उल्ला की शहादत कहाँ छोड़ेंगे, इकबाल का तराना तो हम अब छूने भी न देंगे, अब्दुल हमीद की कुर्बानी को याद करने का हक भी हम छीन लेंगे, हम गंगा किनारे के सारे कालीन बुनकरो को साथ ले जायेंगे और तुम्हारे घरों से उनकी बनायी कालीन उठा लेंगे, अलीगढ़ के ताले तो अब तुम्हारे दरवाजों पर पहरा न ही देंगे, हम ताजिये के जुलुस को उठाकर अपने साथ ले जायेंगे, हम महाभारत से राही मासूम रजा के लिखे संवाद भी निकाल लेंगे, हम शाहरुख, सलमान और आमिर खान को साथ ले जायेंगे।

हम वापस लेंगे अपनी बिरयानी, अपना कबाब, अपनी सेवईयां, हम अपनी शेरवानी भी न छोड़ेंगे, अपना कुर्ता पजामा और तुम्हारी औरतों का सलवार कुर्ता भी वापस लेंगे, हम कुछ न छोड़ेंगे साध्वीजी…..हमे वापस चाहिए वो सारा पानी जो गंगा में वजू करते हुए हमारी कौम ने गंगा जमुनी संस्कृति को संवृद्ध करते हुए बहाया है, हमें वापस चाहिए हमारे बच्चों का वो समय जो उन्होंने रामलीला देखते हुए बिताया है, हमें लौटाइये वो मोहब्बत वो दुआयें जो हमने भोर की अजान से लेकर पाँच वक्त की नमाज़ में इस देश के लिए दी है और मांगी है, हमें लौटाइये हमारे कौम के लोगो का अभिनय जो उन्होंने रामलीला में सदियों से आज तक किया है, बहुत लंबी लिस्ट है साध्वी जी ..ये तो सिर्फ बानगी है।

आइये हिसाब करते है…हम भी तो देखे कि आपकी औकात में इस देश से हमारी चीजे निकाल कर लौटाना है भी या नहीं…जिस दिन ये सब इस देश की संस्कृति और तहजीब से निकालने की औकात आ जाये उस दिन हमें निकाल कर दे दीजियेगा…यकीन करिये हम देश छोड़ देंगे…हम जानते है ये आपकी औकात में न कभी था, न है और न कभी होगा….ये हमारा प्यारा वतन है और हम वतन के है….हम मुसलमान है वतनपरस्ती से जिस दिन गिर जायेंगे उस दिन ईमान से भी जायेंगे। इसलिए हमको देशभक्ति तो मत ही सिखाइये

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One thought on “चले जायेंगे साध्वी जी मगर….हम कुछ छोड़ेंगे नहीं !

  • June 11, 2016 at 5:35 pm
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    Agar lejane ki bat kroge to itna dena padega ki ese hi bhagjaoge itihas padlo kitna katleaam kiya kitna luta is desh ko jo likhne pe aau to muh chipane ko jagah nhi milegi lutne aye the musalman ye banane nahi aay the hinduo ko jabardasti musalman banaya itna dard diya hai bo bapas karpaoge or bese bhi pakistan or bngladesh ke rup me apna hissa le chuke ho ab kya rhgya sarm nahi aai ye lekh likhne me

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