गांधी और गोडसे

gandhi-godse

30 जनवरी 1948 का दिन था ,शाम के यही कुछ 5:15 मिनट हुए थे, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अपनी शाम की प्रार्थना के लिए बाहर निकले | कुछ दूर चलने के बाद 39-40 साल की उम्र का आदमी उन्हे देख मुस्कराया और उनका आशीर्वाद लेने के लिए झुका और जैसे ही उठा तभी लगातार 3 बार गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी | देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मार दिया गया | उन्हे मारने वाला नीच इंसान था स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी नाथुराम गोडसे | नाथुराम आरएसएस का सेवक रह चुका था और हिन्दू महासभा का सदस्य था | उसने आरएसएस को छोड़ने के बाद 1940 मे हिन्दू रक्षा दल नाम का देश के पहले आतंकवादी संगठन की नीव रक्खी | गोडसे ने उससे पहले दो बार और गांधी को मारने प्रयत्न किया 1934 और 1944 मे | 30 जनवरी से पहले भी 20 जनवरी को भी गांधी को मारने के लिए बम फेंका गया था जिसमे वो बच गए |

इस साल देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को शहीद हुए 68 साल हो जाएंगे | अपनी पूरी ज़िंदगी देश को होम कर देने वाले महापुरुष और अहिंसा की मूर्ति गांधी की मौत इतनी हिंसक होगी शायद किसी ने कल्पना नहीं की होगी | 28 जनवरी को महात्मा ने एक सम्बोधन मे कहा की “अगर मुझे किसी पागल इंसान की गोली से ही मरना होगा तो कोई क्या कर सकता है | मै तो बस चाहता हूँ की जब मै मरू तो मेरे मुह मे बस ईश्वर का ही नाम हो ” और यही हुआ गोडसे और नारायण आप्टे नामक दो सनकी और पागल व्यक्तियों ने दो दिन बाद यही किया | जो आरएसएस आज राष्ट्रवादी संगठन बना फ़िरता है उसी का सेवक था ये गोडसे , हिन्दू महासभा का सदस्य है गोडसे इन इंतेहा पसंद और हिंसक दलों को जब मै देश हित और हिन्दू हित की रक्षा की बात करते सुनता हूँ तो ये महसूस करता हूँ की जो एक अहिंसा के पुजारी को मार सकते हैं उनसे देश हित की उम्मीद किस हद तक की जा सकती है |

सुनने मे आ रहा है की हिन्दू महासभा आतंकवादी गोडसे का मंदिर बनाना चाहती है और बकायदा प्राधानमंत्री मोदी से इस बात की विनती की गयी है | “गोडसे एक राष्ट्र भक्त” नाम की डॉक्युमेंट्री भी 30 रिलीज़ होगी | ये संगठन कहा से हिन्दू महासभा कहलाने का हक रखता है | हमे ऐसे किसी संगठन की आवश्यकता नहीं है| मै गोडसे को राष्ट्र भक्त मानने वालो से यह प्रश्न पूछना चाहूँगा की उस नीच और आतंकवादी गोडसे ने देश के हित मे और आज़ादी मे क्या योगदान दिया | चलिये एक बार उसे क्रांतिकारी भी मान लेते हैं ( उसे क्रांतिकारी भी नही कह सकते क्यूकी ये भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों की बेइज्जती होगी ) तो क्या कभी उसने किसी क्रूर अंग्रेज़ अधिकारी को मारा क्या कभी उसने कोई ऐसा कार्य किया जो आज़ादी मे सहायक हो ? शायद नहीं और अगर महातमा गांधी को मारना ही देश भक्ति और राष्ट्र हित है तो ये हमारा दुर्भाग्य है की जिस महापुरुष ने इस देश को आज़ाद कराया अब उसी की हत्या को राष्ट्र हित मान ले | थू है हम पर और थू है हमारी इस मानसिकता पर | एक बात और अगर गांधी के हत्यारे गोडसे को आप आतंकवादी नहीं मानते तो मै राजीव के हत्यारे प्रभाकरन और संसद पर आतंकी हमले मे शामिल अफजल को आतंकी नहीं मानता, अब बोलिए | अगर कल को कश्मीर मे या तमिल नाडु मे अफजल की मज़ार और प्रभाकरण का मंदिर बनेगा तो वो देश द्रोह नहीं होगा ? अगर गोडसे का मंदिर बनता है तो भारत की सभ्यता पर तमाचा होगा |

गोडसे के समर्थक जो भी हैं उनसे मेरा ये प्रश्न है क्या देश के इतिहास और दुनिया के इतिहास मे कही भी गोडसे का नाम भारत की आज़ादी की लड़ाई मे है | इस नीच इंसान और इसके संगठन ने पूरी जिंदगी गांधी को मारने मे बीता दी | क्या गोडसे मे इतनी ताकत थी की वो देश को आज़ाद करा सकता ? जो गोडसे समर्थक आज गोडसे का मंदिर बना रहे हैं उन्हे शायद इसका भान ही नहीं है की जो नोट वो इसमे खर्च करेंगे उन पर भी गांधी छपे होंगे | क्या दुर्भाग्य पाया है इस देश ने | जिस देश मे गांधी को मारने वाले का मंदिर बनेगा उसकी मूर्ति बनेगी वो देश गांधी का देश कहलाने का अधिकार नहीं रखता

|

हमे भारत की संस्कृति पर बहुत गर्व है लेकिन जब कभी इस संस्कृति की बात होगी तो ये बात भी होगी किस तरह इस देश मे गांधी को मार दिया गया जिसके सामने पूरी दुनिया नतमस्तक थी , है और रहेगी | इस भारत मे आज भी आतंकवादी गोडसे का नाम लेने वाले उसका समर्थन करने वाले है यही बड़े शर्म की बात है | गोडसे हिन्दू हित की बात करता था पता नहीं किस मुह से क्यूकी हिन्दू धर्म मे कही भी हिंसा को स्थान नही दिया गया | पाकिस्तान को 55 करोड़ देने को ही अगर गांधी की हत्या का कारण बनाया गया तो मै गोडसे समर्थकों से बात कहना चाहूँगा की जब भी पैत्रक संपत्ति का बटवारा होता है तो सभी को उनका हिस्सा मिलता है | पाकिस्तान को 75 करोड़ देने की बात समझौते मे थी जिसमे 20 करोड़ पहले दिये जा चुके थे और बाकी 55 करोड़ इस वजह से रोक दिये गए थे क्यूकी पाकिस्तान कश्मीर मे घुसपैठ करने लगा था | इस बीच देश मे सांप्रदायिक माहौल खराब होने लगा था और पाकिस्तान मे हिंदुस्तान के खिलाफ असंतोष बढ्ने लगा था | गांधी इसी को खत्म करना चाहते थे तभी उन्होने अनशन शुरू कर पाक को उसका हिस्सा देने की और दंगे रोकने की अपील की | इसमे क्या गलत था ?

गलत था गोडसे के मन मे, उसके चरित्र मे और जिस गोडसे हो हिन्दू धर्म का रक्षक बोला जा रहा है तब उसका खतना क्यू कराया गया ? इसीलिए ना की ताकि गांधी को मारने का इल्ज़ाम एक मुस्लिम पर जाए जिससे देश मे सांप्रदायिक माहौल बिगड़े और भारत एक हिन्दू राष्ट्र बने | लेकिन ये प्लानिंग फ़ेल हो गयी क्यूकी भीड़ मे एक आदमी ने गोडसे को पहचान लिया और ये बोला की “हे गोडसे तुमने ये क्या किया” | उसी रात नेहरू ने रेडियो पर बोला की “एक पागल हिन्दू ने आज गांधी की हत्या कर दी |” पटेल द्वारा आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था |

गोडसे आतंकवादी था , है और रहेगा इसमे कोई शक नहीं की गोडसे सार्थक नासमझ हैं और देश द्रोह के आरोपी हैं | मै केंद्र सरकार से अपील करना चाहता हूँ की गोडसे का समर्थन राष्ट्र द्रोह करार दिया जाए | उसका मंदिर बनाने वाली हिन्दू महासभा को बैन किया जाये उसपर रोक लगाई जाये और उसे एक राष्ट्र विरोधी दल माना जाए | हम हिन्दुओ को ऐसे संगठनो की आवश्यकता नहीं है जो देश के खिलाफ हो हमारे राष्ट्र पिता के सम्मान को ठेस पाहुचाए क्यूकी हम हिन्दू बाद मे है भारतीय पहले | गोडसे समर्थक देश हिट नहीं देश द्रोह कर रहे हैं |

रघुपति राघव राजा राम , पतित पावन सीता राम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम , सबको सन्मति दे भगवान
और खास कर गांधी विरोधियो और आतन्कवादी गोडसे के समर्थको कों

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40 thoughts on “गांधी और गोडसे

  • January 24, 2015 at 12:25 pm
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    आप्ने हेी लिखा कि गोद्से सन्घ से हत् चुका था ! फिर सन्घ से क्यो जोद्ते है
    गोद्से के आदर्श् वेीर सवर्कर ने अपना पुरा जेीवन् अन्ग्रेजो के विरुद्ध कारावास म बिताया था !
    जब गान्धेी जि भरत मे रहते थे तब उन्होने भारत क हित न देख्कर पाकिस्तान् का हेीत तब् देखा जब पकिस्तान कश्मेीर मे घुस्पैथ कर रहा था ! वह अप्नेी हेी नेहरु सर्कार के विरुद्ध अन्शन कर्ने बैथ गये थे !
    क्या इस्को देश द्रोह नहि कहा जयेगा ? फिर भि गान्धि जेी को जान सेनहेी मार् ना चाहिये था १
    आम जन्ता मे गन्धेी जेी का पर्दाफाश कर्ना चाहिये था
    नेहरु सर्कार भि गन्धि जि कि सुरक्शा कर्ने मे अस्फल रहि !
    पहलेी बार मे हि गोद्से गिरफ्तार क्यो नहि क्ये ब्गये /
    सन्घ पर रोक गलत्फहमि मे हुयि थेी बाद पतेल जेी ने हेी “खाना पुरेी” कर्के रोक हतायि भेी थेी !

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  • January 24, 2015 at 5:20 pm
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    hars singh jee tum sayad bhul rahe ho ki hame aajadi dilane ka kam sri chandr sekhar aajad sri bhagat shingh khudirambosh neta jee subhash chandr bosh jaese hajaro krantikariyo ne kiya neta subhash chandr jee ko rastrapita kahne me tmhari gad fatti h mahatma gandhi jee ko kebal desh batne ke liye jana jata h agar godse jee mahatma gandhi jee ko 3shal pahle hi mar dete to desh ke tukde nhi hote

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    • January 25, 2015 at 11:54 am
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      वाह ! नाम से तो नहीं लगता की आपने कहीं गालियाँ भी पढ़ी होंगी !
      अब श्रीमान शुक्ला ! अब अगर ,अगर मगर की ही बात करनी है तो आपको ये नहीं लगता की आपस से लड़ लड़ कर मरने वाले हिन्दू राजाओं ने अग्रेजों को ही मार दिया होता, या फिर उससे भी पहले हिन्दू के नाम पर एक हो अफगान और मुग़ल शासको को ही मार भगाया होता न ये देश गुलाम होता और न बाद में किसी को कायरों की तरह गांधीजी को मारने की जरुरत पड़ती ! आप को जरा अपनी नस्ल की बहादुरी का इतिहास पता है ? अगर गोडसे भी उसी नस्ल की पैदाइश है तो इस नस्ल ने डेढ़ शतक तक अंग्रेजों की गुलामी सहते वक्त क्या अपनी बहादुरी और बन्दुक, तलवारों की गिरवी रख दिया था ?
      और जरा बताएँगे की ये देश एक कब था ? बाद में तोड़ने की बात करना |इस देश को एक तो किया अंग्रेजों ने, अंग्रेजो के आने के बाद ही यह देश न किसी मुस्लिम शासक के शासन में था और न किसी हिन्दू ! था तो एक विदेशी शासक के शासन में ! और उसके बाद जो आपके रामायण महाभारत और कुरआन नहीं समझा पाए वो अंग्रेजों ने समझा दिया की आप एक दुसरे के लिए चाहे जो हो लेकिन दुनिया के लिए सिर्फ कुत्ते हो जिनका अंग्रेजो के हमारे ही देश के निवास में आना तक मना था ! तो बताइये महोदय आपकी उस बहादुर नस्ल ने अंग्रेजो के आते ही इस अपमान का बदला लिया हो ! अरे ब्राह्मण तो अंग्रेजो के टैक्स से बचने के लिए अपने आप को भी विदेशी बताने तक नहीं हिचकिचाए थे !

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  • January 24, 2015 at 5:21 pm
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    जय भवानी जय गोडसे
    दोरुतो देश जाग चुका है
    यह सब गोडसे के बारे मे
    जो लिखे हो सोच समज
    के टिपनी किया करो अगर
    गोडसे की गोली दोगले गांधी
    के सिने मे नहीं जाती तो आज
    हर हिन्दू का सिर मंजीत मे जुकता
    सब अब तो जय गोडसे नवनिर्माण
    गटीत होगी ही जय गोडसे

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    • January 25, 2015 at 12:04 pm
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      वाह रे आपकी नींद ! और आपकी गोडसे भक्ति !! कभी तो डंका पिटते हो की हम बहुसंख्यक है !! और फिर भी गोडसे को फांसी पर लटकाए जाने के बाद इतने वर्षो बाद जाग रहे हो ! वैसे आपकी डेढ़ सौ वर्षों की नींद के आगे तो यह कम ही है !
      हम तो बाद में सोच समझ लेंगे लेकिन आप कितना सोच समझ लिए हो जरा इसका सबुत देंगे ? हिम्मत हो तो जाओ राजघाट पर मोदी और ओबामा को काले झंडे दिखाओ ! और देश के जाग जाने का सबुत दो ! क्या गोडसे नवनिर्माण भी आर एस एस की भाँती केवल समाजसेवा और देशसेवा का नाटक करने के लिए ही होगा ?

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  • January 24, 2015 at 5:22 pm
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    ज्यादा बच्चे तो सूअर पैदा करता है, शेर तो सिर्फ एक ही बच्चा पैदा करता हैं.
    और इस आत्ममुग्धता में हिंदू हिन्दुस्तान में राजनितिक रूप से कमजोर होते जा रहे हैं. ऐसा कहनेवाले भूल जाते हैं की लोकतंत्र वोट की शक्ति से चलता है मसल्स की शक्ति से नहीं तथा जनबल जिधर है सत्ता और शक्ति उधर है. जब मसल्स की शक्ति की जरुरत थी तब भी आपसी फूट और द्वेष के कारण हम गुलाम बनने को बाध्य हो गये थे और आज भी सेकुलरिज्म और वामपंथ के षड्यंत्र में फंसा हिन्दुस्तान में हिंदुओं की हालात उस इतिहास से बेहतर कतई नहीं है. दूसरी बात, अगर आप सिर्फ एक ही बच्चे पैदा करोगे वो होगा सिर्फ अपने बुढ़ापे की लाठी बनने के लिए. क्या देश की सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी नहीं है? आप अपनी एकमात्र सन्तान को अपने बेहतर भविष्य की इच्छा से उसे डॉक्टर, इंजिनियर और बिजनेसमैन बनाएंगे पर देश के भविष्य का क्या होगा? देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए मानव शक्ति क्या बंगलादेश से आएगा? या जिसे आप सूअर की तरह बच्चे पैदा करने वाला कहते हैं वे करेंगे हिन्दुस्तान की सुरक्षा. यदि आपको ऐसा भ्रम है तो बता दू देश की सुरक्षा व्यवस्था में उनका योगदान १% से भी कम है उस पर यह रिकार्ड रहा है की पाकिस्तान से युद्ध करते समय वे पाकिस्तानियों के साथ हो गए हैं या हथियार डाल दिए हैं (क्रमशः कश्मीर-१९४७, भारत-१९६६). इसलिए मेरी आग्रह है की डिंग मारना छोडकर यथार्थ की धरातल पर आईए और नारा दीजिए- हम दो हमारे चार, दो बच्चा आपका दो बच्चा राष्ट्र का. हिंदू है तो हिन्दुस्तान है. जय हिंद, जय भारत!

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    • January 25, 2015 at 10:06 am
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      अरे कीजिये न आप 10 बच्चे पैदा कौन रोक रहा है |लेकिन क्या आप उन्हे पाल पायेंगे ? मुस्लिमो की गरीबी का सबसे बड़ा कारण है ज्यादा बच्चे | कीजिये आप बच्चे क्या उन्हे खिला पाएंगे ? बोल्न बहुत आसान है साहब पैदा कर के आप फिर उनसे ही पंचर बनवाओगे | समझिए मेरी बात को आशा है की आप समझेंगे | ज्यादा बच्चे देश के लिए भी बोझ है देश हित नहीं करेंगे वो| हमारी जितनी जनसंख्या है वो भी आज नहीं खा पा रही और आप 10 बच्चो की बात करते हो |

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  • January 24, 2015 at 6:11 pm
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    मैं आपसे पूर्णतः सहमत हूँ हर्षजि ! इसपर पहले भी मैं बहोत लिख चूका हूँ और बहस में खुलकर गोडसे को पूजने की चुनौती भी देता रहा लेकिन उस समय मेरी चुनौती पर बगले झाँकने वाले अब गोडसे का महिमामंडन करने की हिम्मत केवल इसीलिए जुटा पा रहे हैं क्यों की उन्हें लगता है की मोदी उनके साथ है लेकिन ये तय है की जिस तरह धर्मान्तरण कराने वाले भागवत को वो घास नहीं डाल रहे इन्हें भी नहीं डालेंगे !
    क्यों की ये आज भी किसी से छिपा नहीं है की पाकिस्तान को जन्म से ही दुश्मन मानकर गांधी को गलत साबित करने पर तुले लोगो ने सत्ता में आने के बाद क्या किया है ! और आज भी क्या कर रहे हैं ! कल भी गांधी को दोष देकर उन्हें सिर्फ सत्ता चाहिए थी और आज भी गांधी को न सिर्फ खुद पूजकर बल्कि दुनिया से भी पूजवा कर इन्हें सिर्फ सत्ता में बने रहना है !
    आज मैं इन गोडसे पूजको को फिर एक चुनौती देना चाहता हूँ की अगर है दम तो ओबामा और मोदी को काले झंडे दिखाकर अपना गोड्डे छाप देशप्रेम साबित करें !

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    • January 24, 2015 at 10:17 pm
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      गोद्से केसमर्तहक कित्ने है ?
      हिन्दु महा सभऐ कित्ने है
      गोद्से के पुजक चल नहि पयेन्गे . मोदि को तो काला ज्हन्दा दिख्लाया जा सक्ता है
      बेचारे ओबामा को क्यो दिख्लाया जाये ?

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      • January 25, 2015 at 9:58 am
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        राज भाई ये कितने भी हो उससे मतलब नहीं लेकिन सवाल ये है की भारत मे इन जयसो की क्या जरूरत है आज ?

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        • January 25, 2015 at 8:54 pm
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          अदर्निय श्रेी हर्श जेी , राम के साथ रावन् भेी था क्रिश्न् के साथ कन्स भेी था वैसे हेी गान्धेी जेी के साथ गोद्से व उस्के कुच समरथक् भि हो सक्ते है !

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    • January 25, 2015 at 9:54 am
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      धन्यवाद सचिन जी |यही मै इन्हे भी समझाने की कोशिश कर रहा हूँ | हमारे दादा के पिता भी स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे और हमारे दादा हमे बताते थे की गोडसे बहुत दूषित मानसिकता का था | इन धर्म के ठेकेदार जो गोडसे का समर्थन करते हैं मै उनसे यही पूछना चाहूँगा की गांधी हत्या देश हित है तो कल को अगर मोदी की हत्या होती है तो उसके बारे मे क्या बोलेंगे | क्या मोदी गांधी से ज्यादा देश सेवक हैं | आज तो खुद वो गांधी के सामने बिछे है

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  • January 25, 2015 at 12:20 pm
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    एक जानकारी अपने पाठक मित्रो को देना चाहेंगे कि देश के पहले बजट के अनुसार देश के रक्षा बजट पर 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 का खर्च 92.74 करोड़ का था …… यानि 92.74 करोड़ के रक्षा बजट वाले देश मे गाँधी जी जैसे दानवीर कर्ण मौजूद थे जिन्होने तब पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपया दिलवाने के लिये अनशन किया और देश की बेहद खराब आर्थिक हालत के बावजूद वह रकम पाकिस्तान को दिलवा कर ही माने ???? …..

    गाँधी जी के एहसाणो तले दबे पाकिस्तानियो का उनके प्रति प्यार देखिये कि वहा की किताबो मे भी उनका जिक्र किसी महामानव सरीखा नही है ….ना ही वहा के किसी बड़े संस्थान, असेम्बली आदि का नाम ही गाँधी जी के नाम पर रखा गया है …….जानकारी समाप्त हुई पाठक मित्रो प्लीज़ आप डिस्कसन जारी रखिये 🙂

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    • January 25, 2015 at 5:46 pm
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      पहला रक्षा बजट था वो ओर 55 करोड़ तो पाकिस्तान का हिस्सा थ। उसे वो मिलना ही था और पाकिस्तान का का हिस्सा रोक कर हमें क्या मिलता गांधी नियम और वादे के पक्के इंसान थे गांधी राजनीतिक नहीं थे जिस 55 करोड़ रुपये के लिए गांधी को मारा गया उससे ज्यादा के घोटाले हो जाते है। पाकिस्तान क्या सम्मान देगा गांधीको जब हम ही गाली देंगे शरद जी पाकिस्तान तो वैसे भी एहसान फरामोश देश है जो दूसरों के टुकड़े पर पलता ह। इतन कम रक्षा बजट इसलिए भीथा क्योंकि नेहरू सोचते थे कि जब तक हम किसी से नहीं लडेंगे तोकोई हमला क्यों करेगा उनकी आंखे तो62 में खुली

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      • January 25, 2015 at 6:24 pm
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        हिस्सा ?? कैसा हिस्सा ?? क्या आप किसी समझौते, कोई सन्धि या कोई और दस्तावेज का हवाला दे सकते है जिससे साबित होता हो कि पाकिस्तान का भारत पर 55 करोड़ रुपया बकाया था ?? गाँधी जी क्या वित्त मंत्री थे जो उनके अलावा किसी और को इस बारे मे मालूम ही नही था ??

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        • January 25, 2015 at 7:55 pm
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          जी हां जब बटवारा हुआ तो देश की सारी चल अचल संपत्ति का बटवारा हुआ चूंकि अचल संपत्ति पाकिस्तान नहीं जा सकती थी इसलिए यह प्रावधान किया गया की राष्ट्रीय कोश से पाक को पैसे दिए जायें और देश के बटवारे के बाद क्षेत्र और जनता संख्या के हिसाब से पाक को 75 करोड़ रुपये देने थे ताकि पाक शुरुआत में वो सारी सुविधाएं ला सके जो वहाँ नहीं थी

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        • January 25, 2015 at 8:01 pm
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          और बात 75 करोड़ रुपये की हुई जिसमें 20 पहले दिये गये और 55 तब रोक लिए गये जब पाकिस्तान कश्मीर में घुस गया वरना गांधी पागल तो थे नहीं की बेजा देश को कंगाल करे वो भारत का सम्मान विश्व में बने रहने देना चाहते थे

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          • January 25, 2015 at 8:13 pm
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            अब कौन बहस करेः) क्या आप्ने वे डॉक्युमेंट्स खुद कभी पढ़े भी है या सुनी सुनाई बोल रहे है

        • January 25, 2015 at 9:22 pm
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          आदर्नेीय श्रेी शरद जेी , अगर कोइ सम्ज्हौता था भि तो वह भारत् सर्कार् के लिये था , जब पकिस्तान कश्मिर मे युद्ध कर्ने को उतारु हो तब उस्को यह धन देकर कैसे उस्को मज्बुत किया जा सक्ता था!
          गान्धेी जेी उस सम्ज्हौते कि “पार्तेी ” नहि थे ! फिर उन्होने उस अव्सर पर अन्शन कर्के क्यो भारत् सरकार् को बाध्य कर्ने केी कोशेीश केी, युद्ध के महौल के दौरान दुश्मन देश के प्रति सहानुभुति रख्ना , समर्तहन कर्न खुले आम मदद कर्वाना भि देश द्रोह कहा जा सक्त है , फिर भि उस्कि सजा देने का अधिकार् अदालत् ,सर्कार अदि को होता है न कि किसेी व्यक्ति विशेस् को ! उस समाय का देश द्रोह आम जन्ता मे एक प्रभावेी भुमिका गान्धेी जेी निभाकर जन्ता कोविभाजित कर्ने कि कोशिश भि कर रहे थे ! कोई भेी अभिभवक आदि को भेी अप्नि सन्तान पाल्ने का अधिकार है लेकिन मौत या उस्को नुक्सान पहुनचाने का अधिकार नहि होता है !
          गान्धेी जेी ने देश के लिये आम् जन्ता के लिये जो भेी योग्दान किया वह सदैव सिर माथे रहेगा , वह मौत के काबिल् भेी नहेी थे ! आम जन्त मे उन्के खराब् विचारो के पर्दाफाश कर्ने के जरुर काबिल् हो गये थे
          गोद्से ने तो उन्केी सिर्फ हत्या हेी केी थेी ! लेकिन नेहरु सर्कार और बाद केी सभेी सर्कारो ने गान्धेी जेी के वैचारिक हत्यारो मेशामिल् थे जैसे शराब अन्य कोइ नशा गो हत्या स्व्देशेी विचार , खादेी अदि को हतोत्साहित् कर्ना ! वैचारिक हत्यारा ज्यादा बदा गुनाह्गार होता है

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          • January 25, 2015 at 9:32 pm
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            राज जेी इस मुद्दे पर नवभारत टाइम्स पर प्रसन्न प्रभाकर साहब सरेीखे धुरनधर से हमारा काफी लम्बा डिस्कसन हो चुका है और 75 करोड़ के जिस डॉक्युमेंट की बात यहा हो रही है उस पर दो सरकारो के किसी ऑफीसर या अंग्रेजो के किसी भी ऐसे प्रतिनिधि के हस्ताक्षर नही है जो भारत द्वारा पाकिस्तान को ये रकम देने को बाध्य कर पाते हो…

          • January 25, 2015 at 11:35 pm
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            राज जी गांधी जी ने कभी पाक का समर्थन नहीं किया और किसी को उसका हिस्सा देना कब से राष्ट्र द्रोह हुआ?

    • January 25, 2015 at 5:52 pm
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      और अगर गांधी जी कुछ साल जीवित रहते तो बटवारे को बेमानी कर देते उस समय के लोग गांधी का बहुत सम्मान करते थे चाहे हिंदुस्तानी हो या पाकिस्तान क। काश गोडसे नाम। क राक्षस पैदा होते ही मर जाता

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      • January 25, 2015 at 9:35 pm
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        कल्पनिक बतो का कोइ अर्थ नहि होता !
        बत्लऐये पकिस्तान् मे कित्नेी सद्के, विद्यालय मुहल्ले कस्बे नगर आदि गान्धेी जेी के नाम” अब तक्” बने है !
        कल्प्ना केी बात हम भेी कर सक्ते है केी गान्धेी जेी अगर”कुच माह ” जिवित रहते तो पकिस्तान नेपाल अफ्गान अदि भेी भारत् मे शमिल हो जाते !
        अगर उस समय के लोग गान्धेी जेी का सम्मन् कर्ते होते तो करेीब १० लाख वयक्तियो केी हत्या केी केीमत् पर भेी पकिस्तान नहेी बन्ता ! गान्धेी जि “भेी ” इन हत्याओ और देश् विभाजन को रोक्ने मे बुरेी तरह अस्फल रहे है!

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  • January 25, 2015 at 12:38 pm
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    हमारा एक कॉमेंट जिसमे सचिन परदेसी जी के दो ब्लॉग्स का लिंक और उनसे हमारे डिस्कसन और डिस्कसन से उपर उठे अच्छे सम्बंधो का भी जिक्र किया था ….पोस्ट नही हो पा रहा है जबकि व सारा कॉमेंट अंग्रेज़ी मे ही था…हयात भाई इस बार वेब अड्मिनिस्ट्रेटर के रोल मे आकर हमारे उस मेसेज को चेक करने की मेहरबानी तो कीजिये.

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    • January 25, 2015 at 2:08 pm
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      मुझे हैरत होती अगर आप यहाँ तशरीफ़ न लाते ! शरदजी !!

      यक़ीनन हम आप से ज्यादा बेरहम होते
      अगर गोडसे मौका देते
      लेकिन वो खुद किसी के लिए
      तब भी मौका बने ,और …आज तो मौके के लायक भी न रहे !
      ऐसा ही कुछ गांधीजी के साथ भी है !
      इनका नाम लेने वाले राज करते हैं
      इनके नाम पे लड़ने वाले …या तो पकिस्तान परस्त
      या फिर हत्यारे कहलाते हैं !

      चराग को बुझाकर भी कोई उसकी पहचान बदल न सका
      ये बात और है की अब बुझाने वाले ही रोशनी को तरस रहे हैं !
      अब चाहे जीतनी सफाई दे दे कोई
      अँधेरे में सबुत नजर नहीं आते !

      Reply
      • January 25, 2015 at 2:42 pm
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        सर जेी, आनाकानी वे करते है जो किराये पर लिखते है हम जो भी लिखते है पूरे होशोहवास मे और हम संभव सुबूत के साथ लिखते है , आपके साथ हुए कुछ डिस्कसन अब उस स्तर तक दोबारा किसी के साथ होंगे इस पर हमे संदेह है 🙂 …..ऐसा ही आपका और हमारा आमने-सामने वाला एक डिस्कसन आपके ब्लॉग “अच्छा होता अगर आम्बेडकरजी भी गोडसे बनते!” पर हमे आज भी याद है मानो कल की ही बात हो !!…….

        और फिर एक दूसरा डिस्कसन आपके दूसरे ब्लॉग ….धर्म परिवर्तकों को खुली चुनौती-अंतिम भाग…. पर हमारे बीच के संवाद को देख कर कोई सोच भी नही सकता कि क्या वाकई मे ए वही दोनो है जो एक दूसरे को रटती भर बख्शने के मूड मे नही था :)….आप और विजय सिंघल जी, प्रसंना प्रभाकर जी और हयात भाई सरीखे महारथियो के उस दौर का डिस्कसन आज टी-20 के दौर मे दोबारा देखने को मिलेगा, इसकी आशा नही है.

        हो सके तो अपने उन दोनो ब्लॉग्स के लिंक पोस्ट तो कीजिये.

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        • January 25, 2015 at 3:30 pm
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          बिलकुल शरद भाई ! वह मेरा शुरूआती दौर था ! और आपके साथ बहस के बाद ही मेरा भी पाठकों के प्रति नजरिया बदला था ! उसके लिए मैं सदैव आपका आभारी हूँ ही क्यूँ मेरा आज लेखक या पाठक होने के नाते जो कुछ भी स्तर है उसमे आपके साथ हुवे डिस्कसन का ही योगदान है ! वर्ना मैं विजय सिंघल और अनवर जमाल अदि के कट्टरपंथियों विचारों से उकताकर इस क्षेत्र से विदा ले लिया होता ! लेकिन आज विजय सिंघल जी तो मेरे व्हाट्स अप मित्र भी हैं और रोज उनसे गुफ्तगू होती है ,अर्थात जहाँ विचारों की बात आई दोनों की तलवारे म्यान से बाहर होती है और टी टाइम में अन्य सुख दुःख की बातें भी ! और मेरे उनके लिए प्रतिकूल लेख भी उनकी अपनी पत्रिका की साईट जयविजय ,www.yuvasughosh.com पर बड़ी शान से लगते हैं !
          और मुझे ख़ुशी इस बात की ज्यादा है की आप गोडसे के कुछ विचारों के पक्षधर होते हुवे भी मुझे आपने गोडसे नहीं बनने दिया !! वर्ना मेरा पहला लेख “अच्छा होता अगर आम्बेडकरजी भी गोडसे बनते!” हिन्दुत्ववादियों और गोडसे समर्थको के लिए मात्र ताना नहीं था !

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          • January 25, 2015 at 3:53 pm
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            कहावत है कि दुधारु गाय एकाध लत मार भी दे तो बुरा नही मानना चाहिये !! इस साइट पर आने से पहले (और अब भी) अफ़ज़ल साहब और हयात भाई से हमारे नवभारत टाइम्स पर कई तीखे डिस्कसन हो चुके है , अगर कड़वाहट हम लोग दिल मे रखते तो पहली बात तो हम यहा आते ही नही और अगर आ कर कुछ लिखने की कोशिश करते भी तो ये दोनो उसे छापते ही नही (आखिर मालिक है इस साइट के) ….मगर ऐसा नही है, हम यहा आते भी है और हमारे कॉमेंट्स 100% छापे भी जाते है:)

            मेच्योर्ड पाठक का गुस्सा और खुशी सिर्फ उसी ब्लॉग तक सीमित रहती है और अगले ब्लॉग पर उसकी शुरुआत ज़ीरो से ही होती है 🙂

    • January 25, 2015 at 2:50 pm
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      शरद भाई माफ़ी चाहूंगा इस सम्बन्ध में अफज़ल भाई ही कुछ कर सकते हे में सिर्फ लेखन में हु प्रशासन में नहीं हु ये सही हे की वो वाले लिंक यहाँ पेस्ट नहीं होते हे ?

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  • January 25, 2015 at 10:42 pm
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    ऐसा लग्ता है कि कुच लोगो को देश का हित्कारेी नेता बनने के बजाये विश्व नेता , नोबुल शान्तेी पुरस्कार का चस्का लग जाता है,
    उस्मे गान्धेी जेी ,भेी हो सक्ते है ,नेहरु जेी भेी , बाद मे अतल् बिहारेी जेी और अबशायद मोदेी जेी भेी !

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    • January 25, 2015 at 11:46 pm
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      राज जी गांधी को कभी नोबेल शांति पुरस्कार का चस्का नहीं लगा, वे नेता नहीं थे वे उनसे भी बडे थे अगर वो नेता होते भारत की आजादी के बाद सारी ताकत अपने हाथ रखते

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      • January 26, 2015 at 9:32 am
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        अनेक बार इस्लमि अतन्क्वदियोका बैन्क मे जमा धन् सरकारो ने जब्त या रोक लिया था ! इराक का जमा धन को अमेरिका ने रोक् लगायेी थेी ! युद्ध के महौल मे शत्रु देश् का धन् हि क्या बहुत सेी चेीजे रोक लेी जातेी है !
        गान्धेी जि चुप्चाप भि तो नेहरु जेी से कहकर पकिस्तान को धन् देने कि बात कर सक्ते थे लेकिन् उन्होन अन्शन कर्के एक खुले आम अन्दोलन का माहौल बनाया ! यह् वहेी गान्धेी जेी थे ! जिन्होने जाते हुये मुस्लिमो कोभारत् मे रोका था !
        और पाकिस्तान् से अये हुये पेीदित हिन्दुओ के लिय कहते थे तुम वहेी पक्सितान मे रहो ! वह पकिस्तानेी मुस्लिम कित्नेी हत्या करेन्गे एक दिन हत्या करते करते थक जयेन्गे ! जनवरेी ४८ सर्देी के दिनोमे हिन्दु शर्नार्थियो के विरुद्ध बयान देते थे कि तुम पकिस्तान लौत जाओ, वह उन्का एक कायर्ता पुर्न बयान था !क्योकि उन्को विश्व् नेता का चस्का या बहुत ज्यादा सेकुलर्ता दिख्लानेी थेी !
        फिर भेी गान्धेी जेी हत्या के काबिल नहेी थे ! उन्के कुच राज्नैतिक् विचारो का पर्दाफाश आम जनता के बेीच् होना चाहिये था ! जो उन्कि हत्या के बाद नहि हो सका !

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        • January 26, 2015 at 11:01 am
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          पेहले तो आप ये बताएं राजजी किं क्या हिन्दू इस राष्ट्र को हिन्दुराष्ट्र बनाने की मांग तक करने के लायक हैं ? इन्होंने अंग्रेजो के आने से पहले कौन सा हिन्दुराष्ट्र बनाया था ? और आजादी की लड़ाई में भी किसने हिन्दुराष्ट्र के लिए अपनी जान दी थी ? भगतसिंग नें? राजगुरु ने ? या फिर सुभाष ने ?

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          • January 27, 2015 at 4:59 pm
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            हिन्दु इत्ने उदार थेकि उन्को अप्ने लिये देश बननेकि जरुरत भि नहि थि ! जैसे सन्घ वाले अखन्द् भारत् कि बात कर्ते थे अब उस्को भुल चुके हैवैसे हि हिन्दु राश्त्र कि बात भि भुल सक्ते है! अगर देश विभाजित् भेी नहेी होता तो यह् नारा भेी नहि लग्ता!

        • January 27, 2015 at 9:13 pm
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          राज भाई युद्ध के समय दुश्मन देश का वो धन रोका जाता है जो उसे भीख मे दिया जाता है | वो नहिउ जो उसका हिस्सा हो | मैंने पहले ही कहा की गांधी राज्नीतिक नाही थे वो अहिंसा के पुजारी थे | और अगर वो जीवित रहते तो विभाजन बेमानी हो ही जाता सीमा होती पर लोग नहीं बटे होते

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          • January 27, 2015 at 10:14 pm
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            एक ही बात बार-2 दोहराने की बजाय कोई एक भी सुबूत देकर साबित करते कि पाकिस्तान का कौन सा पैसा भारत पर बकाया था ??

            वैसे विभाजन होने पर ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान साहब ने गाँधी जेी समेत सभी नेताओ के सामने अपनी वेदना जाहिर भी थी थी कि विभाजन गलत हो रहा है ,आपके हवाहवाई “ये होता तो वो होता” क़ी तर्ज पर हम भी आपसे जानना चाहते है कि आखिर वो कौन सी मजबूरी थी जिस वजह से उस समाज गाँधी जी ने विभाजन रोकने के लिये अनशन नही किया ??

          • January 28, 2015 at 8:01 pm
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            देश विभाजन मे हेी १० लाख मनुश्य मारे गये थे उस जमाने मेभेी १ ० लाख मनुश्य बहुत होते थे !इस्के बाद भेी पक्सितान अप्नेी खुनेी प्यास आगे भेी पेश करता रहा १ तभेी उसने कश्मेीर पर कब्जा करने के लिये पाकिस्तानेी सेना को घुस्पैथिये के रुप मे भेजा था ! जब कोइ हमला कर्ता है तब अप्नेी जान बचाने के लिये अहिन्सा का पुजारेी नहेीबना जाता है १ उस्को कायर ता भेी कहा जा सक्ता है ! गान्धेी जि अगर रज्नैतिक नहि होते तो अन्ग्रेजो के विरुद्ध अन्दोलन नहि कर पाते सत्ता केी राजनेीति उन्होने जरुर नहेी केी थेी !
            अमेरिक ने इरान का जमा धन भेी जब्त् किया था जब् खुमैनेी समरथको ने ४० अमेरिकेी नागरिको को बन्धक बना लिया था ! साथ मे इराक का भेी जब् उस्ने कुबैत पर हम्ला किय था १

  • January 25, 2015 at 11:39 pm
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    जी हां ABP NEWS के शो प्रधान्मंत्री में देखा शरद जी और प्रभात खबर में भी एक लेख में पढा भी, इन मुद्दों और बातों पर बहुत दुविधा है इन्हें सरकार को क्लीयर करना होगा

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  • January 28, 2015 at 12:03 am
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    शरदजी पहले तो यह तय हो की हम गांधी- विरोध कर रहे हैं या गोडसे- समर्थन ? क्यूँ सारी भैसे यही पर आकर पानी में चली जाती है !

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  • February 1, 2015 at 8:02 pm
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    GANDHI JI MAHAN

    Mahanta no.1 …
    शहीदे आजम भगतसिंह को फांसी दिए जाने पर अहिंसा के महान पुजारी गांधी ने कहा था…. ‘‘हमें ब्रिटेन के विनाश के बदले अपनी आजादी नहीं चाहिए।’’ और आगे कहा… ‘‘भगतसिंह की पूजा से देश को बहुत हानि हुई और हो रही है । वहीं (फांसी) इसका परिणाम गुंडागर्दी का पतन है फांसी शीघ्र दे दी जाए ताकि 30 मार्च से करांची में होने वाले कांग्रेस अधिवेशन में कोई बाधा न आवे ।”अर्थात् गांधी की परिभाषा
    में किसी को फांसी देना हिंसा नहीं थी ।
    भगत सिंह की फांसी को रोकने के लिए आज़ाद ने ब्रिटिश सरकार पर दवाब बनाने का फैसला लिया इसके लिए आज़ाद ने गांधी से मिलने का वक्त माँगा लेकिन गांधी ने कहा कि वो किसी भी उग्रवादी से नहीं मिल सकते।
    गांधी जानते थे कि अगर भगतसिंह और आज़ाद जैसे क्रन्तिकारी और ज्यादा दिन जीवित रह गए तो वो युवाओं के हीरो बन जायेंगे। ऐसी स्थिति में गांधी को पूछनेवाला कोई ना रहता।

    Mahanta no.2 ….
    इसी प्रकार एक ओर महान्क्रा न्तिकारी जतिनदास को
    जब आगरा में अंग्रेजों ने शहीद किया तो गांधी आगरा में ही थे और जब गांधी को उनके पार्थिक शरीर पर मालाचढ़ाने को कहा गया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया
    अर्थात् उस नौजवान द्वारा खुद को देश के लिए कुर्बान
    करने पर भी गांधी के दिल में किसी प्रकार की दया और सहानुभूति नहीं उपजी, ऐसे थे हमारे अहिंसावादी गांधी ।

    Mahanta no.3 …
    जब सन् 1937 में कांग्रेस अध्यक्ष के लिए नेताजी सुभाष और गांधी द्वारा मनोनीत सीतारमैया के मध्य मुकाबला हुआ तो गांधी ने कहा… यदि रमैया चुनाव हार गया तो वे राजनीति छोड़ देंगे लेकिन उन्होंने अपने मरने तक राजनीति नहीं छोड़ी जबकि रमैया चुनाव हार गए थे।

    Mahanta no.4 ….
    इसी प्रकार गांधी ने कहा था, “पाकिस्तान उनकी लाश पर बनेगा” लेकिन पाकिस्तान उनके समर्थन से ही बना । ऐसे थे हमारे सत्यवादी गांधी ।

    Mahanta no.5 …
    इससे भी बढ़कर गांधी और कांग्रेस ने दूसरे विश्वयुद्ध में अंग्रेजों का समर्थन किया तो फिर क्या लड़ाई में हिंसा थी या लड्डू बंट रहे थे ?
    पाठक स्वयं बतलाएं ?

    Mahanta no.6 …
    गांधी ने अपने जीवन में तीन आन्दोलन (सत्याग्रह) चलाए और तीनों को ही बीच में वापिस ले लिया गया फिर भी लोग कहते हैं कि आजादी गांधी ने दिलवाई ।

    Mahanta no.7 ….
    इससे भी बढ़कर जब देश के महान सपूत उधमसिंह ने इंग्लैण्ड में माईकल डायर को मारा तो गांधी ने उन्हें पागल कहा

    इसलिए नीरद चौधरी ने गांधी को दुनियां का सबसे बड़ा सफल पाखण्डी लिखा है

    इस आजादी के बारे में इतिहासकार CR मजूमदार लिखते हैं “भारत की आजादी का सेहरा गांधी के सिर बांधना सच्चाई से मजाक होगा । यह कहना कि सत्याग्रह व चरखे से आजादी दिलाई बहुत बड़ी मूर्खता होगी।इसलिए गांधी को आजादी का ‘हीरो’ कहना उन क्रान्तिकारियों का अपमान है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना खून बहाया ।”

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