गलत व्याख्याओं ने इस्लाम के मूल स्वरूप को विकृत किया है

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किसी भी विचार की व्याख्या देश-काल और परिस्थिति के तहत भिन्न-भिन्न तरीकों से की जा सकती है. धर्म से जुड़े प्रावधानों की व्याख्या तो शायद अनगिनत तरीकों से मनुष्य ने अपने आरंभिक काल से ही की है.

इस्लामी धर्मग्रंथों में कुछ ऐसी अवधारणाएं हैं जिनकी गलत व्याख्याओं ने इस्लाम के मूल स्वरूप को विकृत किया है. गैरमुसलमानों ने यह काम अपने निहित स्वार्थों को सिद्ध करने के लिए किया तो कुछ मुसलमानों ने अपने गलत कामों को सही ठहराने के लिए इनका सहारा लिया. परिणामस्वरूप इस्लाम को एक हिंसक और कट्टर धर्म के रूप में जाना जाने लगा. इन गलत व्याख्याओं पर विचार करने से पहले इस्लाम शब्द की उत्पत्ति पर एक नजर डालते हैं.

इस्लाम शब्द अरबी भाषा के ‘स’ ‘ल’ ‘म’ धातु से बना है और जिसका अकेला और सीधा अर्थ है शांति. ‘स’ ‘ल’ ‘म’ धातु से जिन अन्य शब्दों का निर्माण हुआ है वे हैं इस्लाम, मुस्लिम, सलाम और इसी तरह के और कई शब्द. इस्लाम वह धर्म, वह पद्धति है जो शांति सिखाए, जो तस्लीम (समर्पित) होना सिखाए. शांति के धर्म को मानने वाला यानी मुसलमान. मुसलमान जब भी आपसे मिलेगा तो कहेगा सलामुनअलैकुम यानी ईश्वर आपको शांति प्रदान करे. तो इस्लाम के बारे में एक कुप्रचार तो यहीं खत्म हो जाता है कि इस्लाम तलवार का धर्म है, खूनरेजी है. क्या कोई धर्म जो इस तरह से शांति और सुलह की वकालत करे वह खूनरेजी को जायज ठहरा सकता है? तार्किक तौर पर तो यह परस्परिक विरोधी ही प्रतीत होता है.

समस्त धर्मों का मूल एक ही है, यह हर धर्म मानता है. सब धर्म उस मूल की ही आराधना करते हैं. मुसलमान उस मूल स्रोत को अल्लाह या रब्बेल आलमीन के नाम से पूजते हैं. रब्बेल आलमीन के मानी हैं समस्त ब्रह्मांडों और लोकों का स्वामी.

जब भी इस्लाम की मान्यताओं पर सवाल उठाए जाते हैं तो उनके केंद्र में दो चीजें हुआ करती हैं. एक है जेहाद और दूसरा काफिर, जिनकी गलत व्याख्याओं के परिणामस्वरूप इस्लाम को एक ऐसे धर्म के रूप में चित्रित किया जाता है जो अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णु न हो. कुरान पर एक निगाह डालने पर हम यह पाते हैं कि जेहाद का मूल विचार इसके प्रचलित स्वरूप से बहुत भिन्न है.

जेहाद: अरबी भाषा का शब्द जेहाद ‘जुह्द’ धातु से बना है जिसका अकेला अर्थ ‘संघर्ष करना’ है. इस धातु से जो शब्द बने हैं वे हैं जेहाद यानी संघर्ष और मुजाहिद यानी संघर्ष करने वाला. माना कि किसी व्यक्ति को तंबाकू, पान मसाला या शराब पीने की आदत है तो उसे समझाने वाला व्यक्ति मुजाहिद यानी संघर्ष करने वाला हुआ. कोई बच्चा यदि कुत्ते, बिल्ली या किसी अन्य प्राणी को अकारण ही मार रहा है और कोई आकर उसे ऐसा करने से रोकता है तो उस व्यक्ति का यह कार्य जेहाद हुआ.
दुर्भाग्यवश मीडिया एवं पश्चिमी देशों के इतिहासकारों की अनभिज्ञता या शायद अपने निहित स्वार्थों के तहत जेहाद का अर्थ धर्मयुद्ध बताया गया है. कुरान में युद्ध शुरू करना या युद्ध भड़काना – धर्म नहीं, बल्कि अधर्म है. इसलिए कोई भी युद्ध यदि शुरू किया जाए तो वह धर्मयुद्ध नहीं बल्कि अधार्मिक कार्य है. लेकिन क्या कुरान में युद्ध करने की संपूर्ण मनाही है? ऐसा नहीं है.

कुरान मात्र इन संदर्भों में ही युद्ध की इजाज़त देता है :
1. जब मनुष्यों पर अत्याचार हो रहे हों
2. न्याय के लिए
3. आत्मरक्षा के लिए
4. जब शत्रु की ओर से शांति समझौता भंग कर दिया जाए

उदाहरणार्थ कुरान के अध्याय 4, आयत 74-75 में उद्धृत है- …क्यों नहीं तुम युद्ध करते जब असहाय पुरुष, महिलाएं और बच्चे ईश्वर से याचना करते हुए कह रहे हों ‘ हे ईश्वर, हमें समाज के अत्याचारियों से निजात दिला. हे ईश्वर, तू ही हमारा स्वामी है.’

कुरान की इस आयत पर ध्यान देने पर पता चलता है कि अत्याचार चाहे किसी पर भी हो रहा हो, चाहे वे किसी भी धर्म एवं संप्रदाय के हों, यह बात बिल्कुल भी मायने नहीं रखती, बस इंसान होना काफी है. चाहे वे दलित हों या गरीब, असहाय, कमजोर, पुरुष, महिलाएं या बच्चे. वे हिंदू हों, मुसलमान हों, सिख हों, ईसाई हों या यहूदी या बौद्ध. वह बोस्निया का मुसलमान हो या अमेरिका की ढहती हुई इमारत का ईसाई. हिटलर के जहरीले गैस कक्ष में यहूदी हो या कश्मीर का निर्दोष हिंदू या मुसलमान. गुजरात में आठ महीने की गर्भवती मुस्लिम मां हो जिसके अजन्मे बच्चे को आग में भूना जा रहा हो या साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 और एस-7 डिब्बे में कोई हिंदू बिटिया या बेटा. दंगों में जलता हुआ एक सिख बूढ़ा या उड़ीसा में जीप के अंदर जलता हुआ मसीही पादरी क्यों न हो – इनका आर्तनाद सुनकर इनके न्याय के लिए पवित्र कुरान संघर्ष करने की इजाजत देती है. लेकिन युद्ध मात्र आततायी से, किसी अन्य से नहीं. कुरान के अध्याय 2, आयत 190 में कहा गया है :

तुम सिर्फ ईश्वर की राह पर युद्ध कर सकते हो और सिर्फ उनके खिलाफ जिन्होंने तुम पर आक्रमण किया हो लेकिन मानवीय सीमाओं के भीतर. ईश्वर आततायियों को अप्रिय मानता है.

इस आयत से स्पष्ट है कि युद्ध सिर्फ उनसे किया जाए जिन्होंने तुम पर आक्रमण किया है. उदाहरण के लिए, यदि ‘अ’ ने तुम पर आक्रमण किया है तो ‘अ’ से ही युद्ध किया जाए, न कि उसकी पत्नी, बेटी, बेटा या माता-पिता से. युद्ध सिर्फ़ आक्रमणकारी से.

जिहाद के ही संदर्भ में कुरान की कुछ आयतें जो कि दुष्प्रचार का माध्यम बनी हैं उनमें कुरान के नौवें अध्याय ‘तौबा’ की 5वीं आयत है जिसे बगैर किसी संदर्भ के प्रस्तुत किया जाता है.

यह आयत है: जब हराम (वर्जित) महीने बीत जाएं तो मुशरिकों (एक ईश्वर की सत्ता में अन्य को हिस्सेदार बताने वाला) के साथ युद्ध करो, उन्हें पकड़ो, घेरो और उनका वध करो.

कुरान में युद्ध शुरू करना या युद्ध भड़काना – धर्म नहीं, बल्कि अधर्म है. इसलिए कोई भी युद्ध यदि शुरू किया जाए तो वह धर्मयुद्ध नहीं बल्कि अधार्मिक कार्य है
इस आयत को पढ़कर तो सचमुच ऐसा आभास होता है कि कुरान मुसलमानों को युद्ध के लिए उकसाती है. इस आयत पर टिप्पणी करने से पहले यदि कहा जाए कि हिंदुओं के सर्वमान्य ग्रंथ गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को अपने ही गुरुओं, सगे संबंधियों और चचेरे भाइयों का वध करने के लिए प्रेरित करते हैं, तो क्या हमारे मन में इस तरह की शंका नहीं उठेगी कि भगवान का यह वचन जायज नहीं है क्योंकि यह श्लोक हिंसा को प्रोत्साहित करता हुआ प्रतीत होता है. बिना संदर्भों के किसी विचार को बढ़ावा देने वाला अर्ध सत्य किसी भी बड़े झूठ से खतरनाक होता है.

इस आयत को उसके संपूर्ण संदर्भ में समझने से पहले हमें इसी अध्याय की चौथी आयत को समझना होगा.

अध्याय 9 की चौथी आयत उस संदर्भ में कही गई है जब मुस्लिमों के साथ गैरमुस्लिमों का शांति समझौता था. लेकिन गैर मुस्लिमों ने वह समझौता तोड़ दिया और मुस्लिमों के विरुद्ध युद्ध घोषित कर दिया.
अध्याय 9 आयत 4:

इल्लालज़ीना आहत्तुम मिनल मुशरिकीन सुम्मा लम यन क़ुसूकुम शैयं व लम यु ज़ाहिरू अलैकुम अहदन् फअतिमू इलैहिम आ़हदाहुम इला मुद्दतिहिम पददं संसीं यु हिब्बुल मुत्तक़ीन.

इस आयत में पैगंबर को सख्त हिदायत दी गई है कि उन मुशरिकों के साथ शांति से रहना जो तुम्हारे साथ शांति से रहते हैं. और अपने बचाव के लिए उन्हीं के साथ युद्ध करना जिन्होंने तुम्हारे साथ शांति समझौता तोड़ दिया है और अब युद्ध पर आमादा हैं. फिर भी 5वीं आयत में कुछ संयम बरतने के लिए इशारा है, जब वह युद्ध का जवाब वर्जित महीनों के बीत जाने के बाद ही देने की बात करती है. हो सकता है इस दौरान युद्ध पर आमादा शत्रु शायद सदबुद्धि प्राप्त कर लें और शांति फिर से स्थापित हो जाए. लेकिन यदि वह तुम पर फिर भी आक्रमण करे तो तुम अपने बचाव में उस आक्रमण का प्रत्युत्तर दो. यह तो हर धर्म में कहा गया है कि आक्रमणकारी, आततायी के आगे हथियार डाल देना कायरता की निशानी है.

श्रीकृष्ण जब अर्जुन को युद्ध पर आमादा कौरवों की सेना दिखाते हैं तो अर्जुन करुणा से वशीभूत होकर हथियार डालने की बात कहता है. जिस पर श्रीकृष्ण उन्हें उपदेश देते हैं कि हे अर्जुन, आततायियों के आगे, आक्रमणकारियों के समक्ष घुटने टेक देने पर इस लोक में तुम्हे अपयश और पाप लगेगा एवं तुम्हें मोक्ष नहीं मिलेगा. (गीता: अध्याय 2 श्लोक 33-34)

अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित करने के अनेकों श्लोक गीता में. यदि महाभारत युद्ध के दौरान भी कौरव दल पांडवों के अधिकार उन्हें लौटा देते और शांति स्थापित कर लेते एवं पश्चाताप कर लेते तब कृष्ण अर्जुन को शांति का ही मार्ग चुनने के लिए कहते. कुरान की आयत 5 अध्याय 9 में भी यही कहा गया है कि यदि वे तौबा कर लें, ईश्वर भक्ति करें, दान (जकात) दें तो उनका मार्ग छोड़ दें यानी युद्ध न करें.

इस्लाम की एक और संकल्पना जिसे संदर्भहीन तरीके से व्यक्त किया जाता है वह है काफिर. इस शब्द के बारे में इतना कुप्रचार हुआ कि यकायक काफिर और गैरमुस्लिम समानार्थी लगने लगे हैं. काफिर शब्द का मूल अर्थ समझने से पहले इसका शाब्दिक अर्थ समझना जरूरी है.

काफिर: यह ‘शब्द अरबी के ‘क’ ‘फ’ ‘र’ शब्दों से बना है जिसका सीधे-सीधे अर्थ है, ‘सत्य को छिपाना’. उदाहरणार्थ, यदि मैं अपने हाथ में एक सिक्का लूं और मुट्ठी बंद कर लूं और कहूं कि सिक्का नहीं है तो उस समय मैं सिक्के की सत्यता को छिपाने के लिए ‘काफिर’ हुआ.

एक उदाहरण कुरान से- ईश्वर के समक्ष मनुष्यों के लिए सबसे अच्छा पेशा किसानी यानी खेतीबाड़ी का है और एक सच्चा किसान उसे बहुत प्यारा है. कुरान में ईश्वर ने कहा कि किसान बीज को धरती में छुपा देता है तो इस संदर्भ में ईश्वर ने किसान को काफिर कहा . क्या ईश्वर अपने ‘प्रिय’ किसान को ‘काफिर’ कहकर दुत्कारेगा! नहीं. किसान ने बीज को धरती में छिपाया इसलिए वह बीज की सत्यता को छिपाने के कारण काफिर कहा गया. इस तरह काफिर का सीधा-सीधा अर्थ हुआ ‘सत्य को छिपाने वाला’ या असत्य को सत्य कहने वाला .

यह हर हिंदू तथा हिंदू धर्म के जिज्ञासु को अच्छी तरह से मालूम है कि पांडव सत्य के साथ थे और कौरव असत्य के. श्रीकृष्ण सारथी के रूप में सत्य के योद्धा अर्जुन को महाभारत युद्ध में उपदेश देते हैं कि अपने तयेरे (ताऊ का लड़का) भाई दुर्योधन की सेना जो कि असत्य मार्ग पर है उसे नष्ट कर दो. असत्य को सत्य बतलाने वाले यानी ‘काफिर’ – कौरव और उनका साथ देने वाले तुम्हारे दुश्मन हैं.

तो कुरान में यदि यह आयत है कि निस्संदेह ‘काफिर’(सत्य को असत्य घोषित करने वाले) तुम्हारे खुले दुश्मन हैं तो यह बुरी बात कैसे है !

इस्लाम पर एक और लांछन यह लगाया जाता है कि वह दूसरे धर्मों के प्रति सहिष्णु नहीं है. जबकि यह वही धर्म है जो अन्य सभी धर्मों के प्रति समभाव रखने की हिदायत देता है.

क्या इस्लाम अन्य धर्मों के प्रति असहिष्णु है: कुरान के दूसरे अध्याय की 213वीं आयत कहती है कि ईश्वर ने हर समाज और कौम को पैगंबर व ईश्वरीय किताब दी है. कुरान ईसाइयों और यहूदियों को ‘ अहले किताब’ का खिताब देती है. यानी वे धर्म जिनकी ईश्वरीय किताब है.

कुरान के 60 वें अध्याय की 8-9 वीं आयत कहती है कि मुसलमानों को यह आदेश दिया जाता है कि उन गैरमुसलमानों के साथ सज्जनता के साथ और न्यायोचित बर्ताव करें जो उनके साथ मात्र मान्यताओं और आस्थाओं की खातिर बैर न रखते हों. लेकिन जो लोग मुसलमानों की आस्था की खातिर उनसे बैर रखते हों वे मित्रता के काबिल नहीं हैं.

इस्लाम का मूल संदेश कुरान की इन दो आयतों से अभिव्यक्त होता है:
1. ला इकराह फिद्दीन (धर्म पर किसी भी तरह जोर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए)
2. लकुम दीनकुम वली दीन ( तेरा धर्म तेरे लिए सही, मेरा धर्म मेरे लिए सही. और हम आपस में शांतिपूर्ण बर्ताव करें)

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26 thoughts on “गलत व्याख्याओं ने इस्लाम के मूल स्वरूप को विकृत किया है

  • July 5, 2014 at 12:28 pm
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    महाशय कुरान मे जादा करके एक आयते दुसरे आयते विरोधभास है! (धमॅ पर किसी भी तरह जोर जबरदस्ती नही होनी चाहिए) ” अल्लाह के अलावा किसी अन्य को मत पूजो ” ||और अल्लाह के सिवा किसी ऐसे को न पुकार , जो न तुझे लाभ पहूँचा सके और न हानि यदि तूने ऐसा किया तो तु जालिमो में से होगा(१०:१०६ पृ.४११) || जो इस्लाम के सिवा कोई और’ दीन’ चाहेगा तो वह कभी उससे (अल्लाह से) कबूल नही किया जाएगा (३:८५ पृ.१९८) गैर-मुस्लिम के लिए अपमान और जहन्नम की आग {आगे}

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    • July 5, 2014 at 3:39 pm
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      मैं अच्छी तरह से जनता हूँ की आपने कुरान को ठीक से नहीं पढ़ा होगा वरना ये बात आप नहीं लिखते । दीन पुजा पद्धति नहीं है बल्कि इंसानी जीवन को जीने का एक तरीका है ।

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  • July 5, 2014 at 12:47 pm
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    इनमे और उनमे बड़ा अंतर हैं मुहमद (सलल हु अलेवसलम ) ने जंग के अंदर कभी किसी बेगुनहा को नही मारा और ए लोग बचे, बुड्ढे , औरते और उनको मारते हैं जिनके पास हतियार भी नही होती बे गुनाहो को भी नही छोड़ते ए जिहाद नही बल्के गुंडा गार्दी हैं इस्लाम क्या हैं इन्हे तो ए भी पता नही होंगा इस्लाम मे सब से अव्वल क्या हैं ईमान और नमाज़ शायद ही इनके ज़िंदगी मे ए बाते हैं या नही मालूम नही लेकिन ए लोग जिहाद के नाम पर गुंडा गार्दी कररहे हैं इस्लाम मे यहा तक हैं के अगर दुश्मन को चोट लगा ज़ाए और वो हार मान ले तो उसको ज़ख्म़ पर मरहम लगाना हैं यहा तक के उसका हतियार गिर जाता हैं तो उसको मारने का भी नही हैं अगर दुशमन शान्ति चाहता हैं तो उसको लड़ना भी गुन्हा हैं और ए लोग चोरी से चुपके से मूह पर दस्ती बनकर लोगो को मार रहे हैं ए सारा सर शैतान हैं और ए इस्लामिक नाम लगाकर इस्लाम को बदनाम करने पर तुले हैं

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    • July 5, 2014 at 3:14 pm
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      इनमे और उनमे बड़ा अंतर हैं मुहमद (सलल हु अलेवसलम ) ने जंग के अंदर कभी किसी बेगुनहा को नही मारा और ए लोग बचे, बुड्ढे , औरते और उनको मारते हैं जिनके पास हतियार भी नही होती बे गुनाहो को भी नही छोड़ते ए जिहाद नही बल्के गुंडा गार्दी हैं इस्लाम क्या हैं इन्हे तो ए भी पता नही होंगा इस्लाम मे सब से अव्वल क्या हैं ईमान और नमाज़ शायद ही इनके ज़िंदगी मे ए बाते हैं या नही मालूम नही लेकिन ए लोग जिहाद के नाम पर गुंडा गार्दी कररहे हैं इस्लाम मे यहा तक हैं के अगर दुश्मन को चोट लगा ज़ाए और वो हार मान ले तो उसको ज़ख्म़ पर मरहम लगाना हैं यहा तक के उसका हतियार गिर जाता हैं तो उसको मारने का भी नही हैं अगर दुशमन शान्ति चाहता हैं तो उसको लड़ना भी गुन्हा हैं और ए लोग चोरी से चुपके से मूह पर दस्ती बनकर लोगो को मार रहे हैं ए सारा सर शैतान हैं और ए इस्लामिक नाम लगाकर इस्लाम को बदनाम करने पर तुले हैं

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    • July 5, 2014 at 3:43 pm
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      मोहतरम दोस्त मैं पहले भी कह चुका हूँ की इस्लाम अपनी जगह जैसे तब था आज भी है ॥ फर्क मुसलमानो मे आया है । आपने सही कहा की लोग इस्लाम को बदनाम करने पर लगे हैं ।

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      • July 14, 2014 at 5:45 pm
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        1 मिनट चैटिगँ छोडकर इस पोस्ट को जरूर पढेँ वर्ना सारी जिन्दगी चैट ही करते रह जाओग. . .

        1378 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना – नाम है इरान!

        1761 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना – नाम है अफगानिस्तान!

        1947 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना – नाम है पाकिस्तान!

        1971 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना – नाम हैँ बांग्लादेश!

        1952 से 1990 के बीच भारत का एक राज्य इस्लामिक हो गया – नाम है कशमीर!…

        और अब उत्तरप्रदेश, आसाम और केरला इस्लामिक राज्य बनने की कगार पर है! और हम जब भी हिँदुओँ को जगाने की बात करते हैँ, सच्चाई बताते हैँ तो कुछ लोग हमेँ RSS, VHP और SHIV-SENA, BJP वाला कहकर पल्ला झाङ लेते हैँ!

        वन्दे मातरम

        हाल की दो महत्वपूर्ण घटनाओ को देश ने जरूर देखा होगा —

        ( 1 ) उपराष्ट्रपति हमीद अंसारी ने अपने धर्म के महत्व को समझते हुए दशहरा उत्सव के दौरान आरती उतारने से मना कर दिया क्योकि इस्लाम मे ये करना ” मना ” है ।

        ( 2 ) टी॰वी॰ सीरियल बिग बॉस की एक प्रतियोगी गौहर खान ने दुर्गा पुजा करने से मना कर दिया और वो दूर खड़ी रहकर देखती रही , जबकि ये एक कार्य था जिसे करना सभी प्रतियोगी के लिए जरूरी था लेकिन गौहर खान ने इस कार्य को करने से साफ मना कर दिया क्योकि इस्लाम मे ये करना ” मना ” है ।

        मित्रो इन दोनों ( हमीद अंसारी व गौहर खान ) को मेरा साधुवाद क्योकि दोनों ने किसी कीमत पर भी अपने धर्म से समझौता नहीं किया , चाहे इसके लिए कितनी बड़ी कीमत भी क्यो न चुकनी पड़े । ये घटना उन तथाकथित ” सेकुलर ” हिन्दुओ के मुह पर जोरदार तमाचा है जो कहते फिरते है की कभी ” टोपी ” भी पहननी पड़ती है तो कभी ” तिलक ” भी लगाना पड़ता है , इस घटना मे मीडिया का मौन रहना सबसे
        ज्यादा अचरज का विषय है क्योकि सबसे ज्यादा हाय तौबा यही मीडिया वाले मचाते रहे है जब नरेंद्र मोदी जी ने मुल्ला टोपी पहनने से इनकार कर दिया था । उदाहरण लेना है तो मुस्लिम
        समुदाय के लोगो से सीखो जो अपने धर्म के लिए बड़ी से बड़ी कीमत चुकाने को तैयार रहते है , पर अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं कर सकते । वही हमारे हिन्दू लोग ” कायरता ” का दूसरा रूप ” सेकुलर ” होने का झूठा दिखावा करने से बाज नहीं आते । इस को गौर से एक बार पढ़ लो , अमल करो मत करो आप लोगो की मर्जी,,,,

        मैंने 10 लोगो को जो की हिन्दू है उनसे पुछा. . .

        किस जाती के हो…..??
        सभी ने अलग अलग जवाब दिया….

        किसी ने कहा राजपूत
        किसी ने कहा बामण
        किसी ने कहा जाट
        सब अलग अलग
        किसी ने जैन
        तो किसी ने अग्रवाल….

        लेकीन मैने 10 मुसलमानो को पूछा की कौन सी जाती के हो ?
        सभी का एक जवाब आया

        “मुसलमान”

        मूझे अजीब लगा मैने फिर से पूछा फिर वही जवाब आया

        “मुसलमान”

        तब मुझे बड़ा अफसोस हुआ और लगा हम कीतने अलग और वो कितने एक … …

        कुछ समझ मै आया हो तो आगे से कोई पूछे तो एक ही जवाब आना चाहीये

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  • July 5, 2014 at 12:48 pm
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    अफज़ल खान जी इस शानदार लेख के लिए आपका अभिनंदन करता हूँ । ईश्‍वर एक है चाहे हम उसे जिस रूप में पूजें। अगर किसी की पूजा पद्धति अलग है इसी आधार पर इंसान इंसान का दुश्‍मन हो जाए इसे बड़ा पाप कुछ नहीं। आज अगर इस बात को सब समझ लें तो दुनिया कितनी प्‍यारी हो जाएगी।

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  • July 5, 2014 at 12:50 pm
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    , नमस्कार. बहुत ही सुन्दर लेख लिखा है आपने. आपकी इस बात से में शत प्रतिशत सहमत हूँ की धर्मग्रंथ मे लिखे गये संदेशों की व्याख्या अपने स्वार्थ की वजह से से हम गलत करते हैं और इसकी वजह से ना सिर्फ दूसरे धर्म के लोग बल्कि सहधर्मी लोग भी धर्म से विमुख हो जाते हैं. ============= एक व्यक्तिगत संदेश – आपकी साइट बहुत ही अच्छी है. उम्मीद करता हूँ और भगवान से प्रार्थना भी की आप सपरिवार सकुशल होंगे.

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    • July 5, 2014 at 12:57 pm
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      लेख पसंद करने के लिये धन्यवाद, इधर लिखना मुश्किल हो रहा है क्यो के न्यूज़ पोर्टल के लिये बहुत मेहनत करनी पड रही है. उमीद है के आप कुशल से हो गे. आप भी लेख भेजे—-

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  • July 5, 2014 at 1:07 pm
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    इस्लाम क्या है ? इसलाम एक सत्य मार्ग है मे अगर कोई भी धर्म मे पैदा होता है तो उसकी जानकारी होना जरूरी है|अगर मे किसी जिज़ को पुजता हु उसकी इबादतकरता हु तो वो जिज़ कितनी स च है ए जानना मेरे लिये
    बहोत ज़रूरी है इस दुनया के अंदर भहोत धर्म है हमे धर्म को नही देखना हैं हमे सच्चाई को देखना है अगर आप बुरा ना मानो तो मे आप को सवाल करूंगा अगर आप पथर, चांद, सूरज, मृतआदमी, साँप इन जिज़ो को पूजते है तो क्या आप को ए आप मरने के बाद ए बात करेंगे या फिर ए आपको ज़िन्दा करेंगे ?
    आप का जवाब रहेंगा नही ए हमे जीते जी बात नही कर सकते वो हमे मरने के बाद क्या बात करेंगे और वो क्या ज़िन्दा करेंगेइसलाम मे ईश्वर ने कहा है| के ” वो लोग सोचते हैं हम कभी उठाए नही जाएंगे मरने के बाद” हम सब मरने के बाद उठने वेल है लेकिन जिस दिन हम उठ जाएंगे तो ईश्वर हमे प्रश्न पूछेंगा के अब बता तू सॅचा था तो इंसान कहेंगा नही मे ज़ूठा था अगर हमे सचाई को जानना है तो खूरान को मात्रभाषा मे पढ़ना ज़रूरी है|इस्लाम आतण्क के खिलाफ हैं पवित्र कुरान मे ईश्वर ने कहा हैं के धरती मे फसाद (आतंक) मत फायलाओ हम खुरन को कोई भी भाषा मे इंटरनेट पर पढ सकते अबआप लोग मुज़हेकहेंगे की इस्लाम मे तो एसा लिखा हैं
    लेकिन आतंकवादी मुसलमान क्यो ? क्योंकि आतनकव्वादी इस्लाम के दुश्मन है वो भलेहि इस्लाम का सहारा लेकर इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं|लेकिन उन्हे ए समज़ना चाहिए के हम सबको एक दिन मरना हैं और मरकर ज़िन्दा होना हैं| लेकिन वे लोग भटकेहुए हैं | लेकिन आतन्कवादी कभी खुरन नही पढ़ते कभी नमाज़ नही पढते वे सिर्फ इंसानो को मरना जानते हैं वो ना हिन्दू देखते हैं ना मुस्लिम अगेर वे इस्लाम के लिए लड रहे हैं तो मस्जिद मे भी तो बम ब्लास्ट होते हैं फिर तो कसे कहा जा सकता हैं के वा लोग इस्लाम के लिए लड रहे हैं| अग्र वो जिहाद कर रहेहैं तो मुस्लिम भी तो मर रहे हैं| बहोत लोग संज़हतेहैं के खुरन मे गलत लिखा हैं लेकिन खुरन पढता कौन हैं ? ईशवा ने 124000 पयगम्बार ( ईशवर का संदेशलाने वाले लोग) भेजा उन्हे समजता कौन हैं? इस्लाम ईशवरके संदेशो मे एक आखरी संदेश हैं जिन्हेमोहम्द पैगम्बेर ने लाये हैं| ए ज़िंदगी तो भोट थोड़ी हैं कब मरना हैं मालूम नही लेकिन हमे मरकर फिर ज़िन्दा होना हैं| जो ईश्वर के आखरी संदेश पे चलेंगा उसेस्वर्ग मिलना हैं | ए ईशवर का
    आदेश हैं|

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    • July 7, 2014 at 1:39 pm
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      ब्लोग BEBAK RAI देखे

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  • July 5, 2014 at 2:18 pm
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    माना की मे इस्लाम को नही समझ पा रहा हूँ पर आजकल जो कुछ भी ईरान ईराक अफ़ग़ानिस्तान आदि मुस्लिम देश मे मारकाट मची है, क्या उन्हे भी इस्लाम की कोई जानकारी नही?

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  • July 5, 2014 at 2:19 pm
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    ) कुरान का विमोचन करीब केवल १४०० वर्ष पहले ही हुआ है । उससे पहले नहीं । यानी इनके मुताबिक देखें तो दुनिया बिना ज्ञान के जी रही थी । (२) कुरान में बहुत सी आयतों की फेरबदल होती रहती है ये बात स्वयं कुरान में लिखी है ( कुरान 2:110, 6:101 ) ।(३) कुरान में ब्रह्माण्ड के सब पदार्थों की तो छोड़िए, जो पदार्थ दिखाई देते हैं उनको भी ऊटपटाँग तरीके से बताया गया है । जैसे आस्मान की खाल उतारी जायेगी ,पहाड़ उठ कर दौड़ेंगे आदि ।(४) कुरान को केवल अरब वालों के लिये लिखा गया है ( कुरान 14:4, 10:47, 41:44 ) और मुहम्मद के अरबी सामराज्य का विस्तार करने के लिए । जिसमें केवल मुसलमान और मोमीनों का ही नाम आता है सभी ईंसानों या मनुष्यों का नहीं ।(५) कुरान में केवल लूट,औरत खोरी,सम्भोग, हिंसा, घृणा आदि के आदेश हैं । ( कुरान 4:28, 9:5 ) (६) कुरान को अरबी जैसी महाभ्रष्ट भाषा में लिखा गया है जिसमें प्रकृति के संकेतों को समझने की बात तो दूर बहुत ही अश्लील और कठोर शब्द पाये जाते हैं, जैसे अरबी का शब्द है मुतेयार ( माँ बनने लायक औरत ) । लड़के को लाउँडे कहा जाता है । तो ये स्पष्ट ही घृणात्मक भाषा है । (७) जैसा कि कुरान के जानकार कहते हैं कि अल्लाह बार बार नये ईल्हाम नाज़िल करता है । एक किताब में कुछ भूल जाता है तो दूसरी किताब उतार देता है, ऐसे ही बार बार गलतियाँ करके पहले तौतेत, इंजील, बाईबल और कुरान । और ये बोलते हैं कि कुरान आखिरी है । जब इनका अल्लाह पहली किताबों की गारंटी न ले पाया तो कुरान की गारंटी कैसे लेगा ?(८) कुरान में परस्पर विरोधाभास है । एक आयत दूसरी आयत को काटती है । एक में कहीं कुछ लिखा है तो दूसरी में कहीं कुछ उसके उलट लिखा है । स्पष्ट है कि ये काम ईश्वर का नहीं हो सकता ।(९) कुरान केवल मानव को हिंसक और इस पृथिवी का सबसे घटिया जानवर बनाने के लिए काफी है ।(१०) कुरान में बुद्धि के प्रयोग का निषेध है । अल्लाह या उनके पैगम्बर ने जो लिख दिया उस पर शंका नहीं की जा सकती । ऐसा कुरानियों का मत है ।(११) ये कुरान अरब वालों के पास ही हुआ है और किसी के लिए नहीं । मुसलमान इसे जबरदस्ती थोपने का प्रयास करते हैं और उसके लिए निर्मम हत्यायें भी करते हैं ।(१२) कुरान कुतर्कों से भरी है । इसमें तर्क विरुद्ध बातें पाई जाती हैं जैसे कि अल्लाह छे दिन में दुनिया बना देता है, रूह को अल्लाह ने आदम के नाखून से दाखिल

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  • July 5, 2014 at 2:20 pm
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    विश्व के लगभग सभी धर्म (यहूदी छोड़ कर) सभी धर्म एकल अवदित्त्यम् अर्थात केवल् एक ईश्वर/ अल्लाह को मानने का निर्देश देता है फिर तो इस हिसाब से क़ुरान अर्थात अल्लाह भी अपने अनुयायों से यही कह रहा है के केवल मेरी ही इबादत करो. हर व्यक्ति चाहे वो किसी भी जाती/ धर्म से सम्बंध रखता हो एक ही बाप की सन्तान होता है परंतु यहूदियों का तो पता ही नहीं चलता के कौन किसकी सन्तान है अब जिनके बाप इतने सारे होंगें उनके ईश्वर भी कई होंगें. वैसे भी यहूदियों को ईश्वर से क्या लेना देना उनके लिये तो ए दुनियाँ और धन ही ईश्वर है जिसके लिये यहूदी निर्दोष लोगों को मारने से भी नहीं चूकते और विश्व में सभी प्रकार के विनाशकारी हथ्यारों के जन्मदाता भी यही है.

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  • July 5, 2014 at 2:22 pm
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    इस्लाम क्या है ? इसलाम एक सत्य मार्ग है मे अगर कोई भी धर्म मे पैदा होता है तो उसकी जानकारी होना जरूरी है|अगर मे किसी जिज़ को पुजता हु उसकी इबादतकरता हु तो वो जिज़ कितनी स च है ए जानना मेरे लिये बहोत ज़रूरी है इस दुनया के अंदर भहोत धर्म है हमे धर्म को नही देखना हैं हमे सच्चाई को देखना है अगर आप बुरा ना मानो तो मे आप को सवाल करूंगा अगर आप पथर, चांद, सूरज, मृतआदमी, साँप इन जिज़ो को पूजते है तो क्या आप को ए आप मरने के बाद ए बात करेंगे या फिर ए आपको ज़िन्दा करेंगे ? आप का जवाब रहेंगा नही ए हमे जीते जी बात नही कर सकते वो हमे मरने के बाद क्या बात करेंगे और वो क्या ज़िन्दा करेंगेइसलाम मे ईश्वर ने कहा है| के ” वो लोग सोचते हैं हम कभी उठाए नही जाएंगे मरने के बाद” हम सब मरने के बाद उठने वेल है लेकिन जिस दिन हम उठ जाएंगे तो ईश्वर हमे प्रश्न पूछेंगा के अब बता तू सॅचा था तो इंसान कहेंगा नही मे ज़ूठा था अगर हमे सचाई को जानना है तो खूरान को मात्रभाषा मे पढ़ना ज़रूरी है|इस्लाम आतण्क के खिलाफ हैं पवित्र कुरान मे ईश्वर ने कहा हैं के धरती मे फसाद (आतंक) मत फायलाओ हम खुरन को कोई भी भाषा मे इंटरनेट पर पढ सकते अबआप लोग मुज़हेकहेंगे की इस्लाम मे तो एसा लिखा हैं लेकिन आतंकवादी मुसलमान क्यो ? क्योंकि आतनकव्वादी इस्लाम के दुश्मन है वो भलेहि इस्लाम का सहारा लेकर इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं|लेकिन उन्हे ए समज़ना चाहिए के हम सबको एक दिन मरना हैं और मरकर ज़िन्दा होना हैं| लेकिन वे लोग भटकेहुए हैं | लेकिन आतन्कवादी कभी खुरन नही पढ़ते कभी नमाज़ नही पढते वे सिर्फ इंसानो को मरना जानते हैं वो ना हिन्दू देखते हैं ना मुस्लिम अगेर वे इस्लाम के लिए लड रहे हैं तो मस्जिद मे भी तो बम ब्लास्ट होते हैं फिर तो कसे कहा जा सकता हैं के वा लोग इस्लाम के लिए लड रहे हैं| अग्र वो जिहाद कर रहेहैं तो मुस्लिम भी तो मर रहे हैं| बहोत लोग संज़हतेहैं के खुरन मे गलत लिखा हैं लेकिन खुरन पढता कौन हैं ? ईशवा ने 124000 पयगम्बार ( ईशवर का संदेशलाने वाले लोग) भेजा उन्हे समजता कौन हैं? इस्लाम ईशवरके संदेशो मे एक आखरी संदेश हैं जिन्हेमोहम्द पैगम्बेर ने लाये हैं| ए ज़िंदगी तो भोट थोड़ी हैं कब मरना हैं मालूम नही लेकिन हमे मरकर फिर ज़िन्दा होना हैं| जो ईश्वर के आखरी संदेश पे चलेंगा उसेस्वर्ग मिलना हैं | ए ईशवर का आदेश हैं|

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  • July 5, 2014 at 3:11 pm
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    कहते है की हिन्दू धर्म सब से पुराना धर्म है, जबकि ये आज तक पता नही इनको की
    1) हिन्दू शब्द न किसी वेद में है, हिँदू शब्द ना पुराण, में ना महाभारत में, न रामायण में। जबकि हिन्दू नाम फारसियो का दिया हुआ नाम है, जिसका अर्थ है, काला, चोर,कायर।
    2) कहते है की वेद सब से पुराने है,जबकि ये तक पता नही वेद कब आये किसने लिखे, किसने सुने, वेद की असली पाण्डुलिपि कहा है. अगर कोई कहे की असली पाण्डुलिपि कहा है
    तो कहते है की वो तो अंग्रेज चुरा के ले गए।
    3) अगर कहो की वेदों में अवेज्ञानिक तथ्य है, और टकराव है वेदों की शिक्षा में जैसे की कही मूर्ती पूजा को मना किया गया है तो कही सही बताया गया है कही एक इश्वर को बताया गया है तो कही ३३ करोड़ बताया गया है, कही मॉस खाने को कहा गया है तो कही मना किया गया है, इन ग्रंथो में जात पात उच्च नीच ,सती प्रथा आदि अनेक कुरीतिया है , तो ये जवाब देते है
    की असली वेद तो अंग्रेज चुरा के ले गए। अंग्रेजो ने वेदों और पुराणों और मनुस्मृति और दुसरे ग्रंथो में मिलावट कर दी।
    4) अगर कहो की हिन्दू धर्म केवल भारत में ही क्यों है, तो जवाब देते है की हिन्दुओ ने कभी हिंसा नही की और अपने धर्म को दुसरे देशो में प्रचार नही किया। अगर हिन्दू इतने ही अहिंसक है तो वेदों पुराणों, रामायण, महाभारत, में केवल लड़ाई और खून ख़राबा क्यों भरा पड़ा है।
    5) यहाँ तक की हर भगवान् और देवी देवता के पास तरह तरह के हथियार है। और सब ही हिन्दू ग्रंथो में केवल लड़ाई ही लड़ाई है। यहाँ तक की सब से बड़े भगवान ब्रम्हा विष्णु और महेश भी लड़ाई करते हुए मिलेंगे।
    6) इतिहास अगर आप पढेंगे तो जानेंगे की न जाने कितने हिन्दू राजाओ हिन्दू धर्म छोड़ दिया। जैसे की चन्द्रगुप्त मोर्य ने जैन धर्म अपना लिया और उसके बच्चो ने भी। हर्षवर्धन ने जैन धर्म
    अपना लिया। अशोक ने बुद्ध धर्म अपनाया और बुद्ध धर्म का प्रचार किया आज बुद्ध धर्म को हिन्दू धर्म से ज्यादा माना जाता है, विश्व में सैकड़ो देश बुद्ध धर्म को मानते है। लेकिन हिन्दू धर्म केवल भारत में ही बचा हुआ है। गुरु नानक देव दे इस हिन्दू धर्म को छोड़ दिया और सिख धर्म की नीव रखी।
    7) अगर हिन्दू इतने ही अहिंसक है तो भारत में अन्य धर्मो को मानने वालो का क़त्ल अ आम क्यों किया जाता है, और दंगे करके उनको मारा काटा जाता है। जैसे कर्नाटक में इसाई का क़त्ल अ आम , गोधरा आसाम और भारत के कोने कोने में मुस्लिमो का कत्ल अ आम। १९८४ में सीखो का क़त्ल अ आम। सिक्किम मडिपुर में इसाई का क़त्ल अ आम। जबकि विश्व में कही भी हिन्दुओ के खिलाफ दंगे या क़त्ल अ

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  • July 5, 2014 at 3:56 pm
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    हिंदू धर्म ईश्वर को कर्ता-धर्ता नहीं मानता। वह तो एक ‘शुद्ध प्रकाश’ है। उसकी उपस्थिति से ही ब्रह्मांड निर्मित होते हैं और भस्म भी हो जाते हैं। जब कुछ नहीं था तब भी वही था और अब सब कुछ है तो तब भी वही है और प्रलयकाल में जब फिर से कुछ नहीं होगा तब भी सिर्फ वही होगा।

    भगवान शब्द संस्कृत के भगवत शब्द से बना है। जिसने पांचों इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली है तथा जिसकी पंचतत्वों पर पकड़ है उसे भगवान कहते हैं। भगवान शब्द का स्त्रीलिंग भगवती है। वह व्यक्ति जो पूर्णत: मोक्ष को प्राप्त हो चुका है और जो जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर कहीं भी जन्म लेकर कुछ भी करने की क्षमता रखता है वह भगवान है। परमहंस है।
    भगवान को ईश्‍वरतुल्य माना गया है इसीलिए इस शब्द को ईश्वर, परमात्मा या परमेश्वर के रूप में भी उपयोग किया जाता है, लेकिन यह उचित नहीं है। ब्रह्मा, विष्णु, महेष, राम, कृष्ण और बुद्ध आदि सभी ईश्वर नहीं है।
    भगवान शब्द का उपयोग विष्णु और शिव के अवतारों के लिए किया जाता है। दूसरा यह कि जो भी आत्मा पांचों इंद्रियो और पंचतत्व के जाल से मुक्त हो गई है वही भगवान कही गई है। इसी तरह जब कोई स्त्री मुक्त होती है तो उसे भगवती कहते हैं। भगवती शब्द का उपयोग माँ दुर्गा के लिए भी किया जाता है। इसे ही भागवत मार्ग कहा गया है।
    भगवान (संस्कृत : भगवत्) सन्धि विच्छेद: भ्+अ+ग्+अ+व्+आ+न्+अ
    भ = भूमि
    अ = अग्नि
    ग = गगन
    वा = वायु
    न = नीर
    भगवान पंच तत्वों से बना/बनाने वाला है।
    यह भी जानिए….
    भगवान्- ऐश्वर्य, धर्म, यश, लक्ष्मी, ज्ञान और वैराग्य- ये गुण अपनी समग्रता में जिस गण में हों उसे ‘भग’ कहते हैं। उसे अपने में धारण करने से वे भगवान् हैं। यह भी कि उत्पत्ति, प्रलय, प्राणियों के पूर्व व उत्तर जन्म, विद्या और अविद्या को एक साथ जानने वाले को भी भगवान कहते हैं।

    ***एक ईश्वर : ईश्वर एक ही है कोई दूसरा ईश्वर नहीं है। उसे ही ब्रह्म, परब्रह्म, परमात्मा और परमेश्वर कहा जाता है। वह निराकार, निर्गुण और अजन्मा है। उसकी कोई मूर्ति नहीं बनायी जा सकती। वेद अनुसार उसे छोड़कर और किसी की पूजा और प्रार्थना करने वाला उसके लोक में न जाकर जन्म-जन्मांतर तक भटकता रहता है। उसको जो याद करता रहता है उसके सभी दुख मिट जाते हैं। देवता, दानव, भगवान पितर आदि सभी उसी ईश्वर के अधिन है। वे सब भी उसी की प्रार्थना करते हैं।****
    इतना जानने के बाद अब तो समझ मेन आ जाना चाहिए की ईश्वर / अल्लाह सिर्फ एक है और ये कएनात /ब्रह्माण्ड उसी ने बनाया है …….. फिर जो भी झगड़े अब हैं या थे सब इन्सानो ने अपने बर्चस्व के लिए बनाए हैं ॥ कोई दीन या धर्म ने नहीं ॥

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  • July 5, 2014 at 4:15 pm
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    मैं संपादक मण्डल को तहे दिल से मुबारकबाद देना चाहता हूँ की आप सब के परयास से इतना बेहतरीन लेख पढ़ने को मिल रहा है । जनाब अंसारी साहब ने जो ब्याख्या की कोई शक नहीं की इंसानी अंत के बाद जो सही रास्ता है यही है ॥ लेखक को कोटी कोटी धन्यवाद

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  • July 5, 2014 at 7:42 pm
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    कोयले को कितना भी धोया जाये..कालापन नही निकलता वैसे ही नकली कागज के फूलो से खुस्बू नही आ सकती.. इस्लाम की सच्चाई का स्वीकार आप नही कर सकते चु की मुल्लो ने दिन रात अपनी “” बस्ती “” कैसे ज्यादा बढे उसीमे अपना दिमाग लगाया था और है.. क्‍वॉलिटी का द्यान रखा होता तो आप को इस्लाम के बार मे अच्छी अच्छी बाते बतानी नही पड़ती.. वो भी हिन्दू शास्त्रो की आड लेकर.. वेल.. जो निरीह जानवरो की निर्मम हत्या को सही मानता हो.. अपने ही बिरादारो को काफ़िर मानता हो.. मुस्लिम अंतकवदिओ के अन्याय के सामने चुप बैठा हो.. वो धर्म और अधर्म की बातें करे वो कुछ ज्यादा है.. सिर्फ दुनिया की हर कॉम (यहूदी, ईसाई, हिन्दू, जैन, सीख, बौद्ध, चीनी, अफ्रीकी, अमेरिकी, म्यामार, युरोप) नही अपने ही सिया, बरेलवी, सुन्नी, वोरा भाइओ को बुरी तरह से उनकी हत्या करता हो वो बड़ी बड़ी बातें करे उसका कोई मतलब नही अफ़ज़ल साहेब.. सोचने का समय आब है की भारत के मुसलमानो के पुरखो जो कभी अहिंसक हिन्दू थे उनके के साथ कैसा अत्याचार किया गया था इस बात को आप सिर्फ नजरअंदाज कर रहे हो ब्लकि गुणगान कर रहे हो.. आस्चर्यं…

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  • July 6, 2014 at 3:15 pm
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    मैने पह्ले हि लिखा है कि इस्लाम को जान्ने के लिये मुसल्मानो को इस्से अलग कर के देख्ना होगा तभि आप किसि थोस नथिजे पर पहुन्च पायेन्गे

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  • July 6, 2014 at 3:25 pm
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    Sir i an your great fan regarding your thoughts about Islam.
    Sir mujhe aaj tk aisa koi bnda nhi mila jisne Islam ko itna khubsurti se explain kiya ho ya Islam ki galatfahmiyo ko itne acche se samjaya ho..
    Aap jese samajdar log agr sab religions me ho jaae to ye riots wagerah terrorism jesi baate kbhi ho he na…
    Keep going sir and stay blessed with allah:-)

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  • July 6, 2014 at 3:29 pm
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    इस ेख के लिये सादर प्रनाम्….
    Sir i an your great fan regarding your thoughts about Islam.
    Sir mujhe aaj tk aisa koi bnda nhi mila jisne Islam ko itna khubsurti se explain kiya ho ya Islam ki galatfahmiyo ko itne acche se samjaya ho..
    Aap jese samajdar log agr sab religions me ho jaae to ye riots wagerah terrorism jesi baate kbhi ho he na…
    Keep going sir and stay blessed with allah:-)

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  • July 13, 2014 at 6:18 pm
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    सम्पादक महोद्य आप् के कारन बहुत हि बेह्तरेीन लेख पध्ने को मिला .धन्यवद . मैने भि इस्लम को बहुत नज्दिक से जान्ने कि कोशिश किय है और ज कुरान को देख्ता हु तो पत चल्त है कि मुसल्मन कोसो दुर हो चुकअ है ..

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  • July 14, 2014 at 5:42 pm
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    अति उत्तम्,
    मन प्रसन्न हुआ.

    जब आप हिन्दउइस्म को अचि तरह से नहि जान्ते तो क्रपा कर बाबा ना बहेइन्.िस्को देखो वहि हिन्दु धर्म पे कोमेन्ट्ट देते रह्तअ है

    १. ईस्लम के ारे मेइन कुच्च्ह भि कोमेन्त कर्ना गलत है.
    २.ुझुर के बारे मे कुच भि बोल्नआ गलत है.
    ३. ंउसल्मान से हइन्दु या यहुदि बन जन गलत है —ान से मनर्न होगा===येह पाबन्दि कुयोन्??===बौसे इस्लम को दर है.
    ४. ईस्लम सिर्फ ळोग को ंउस्लिम मे कन्वर्त कर्ने कह्त है —-उस्कि जरुरत क्या है====टुम अप्ने घर म रहो, हमेइन अप्ने….
    ५. क़ुरान शरिफ (माफ कर्ना) को मैन भग्वान कि किताब नहि मान सक्ता====भग्वआन किल्लिन्ग अन्द चन्गिन्ग शबद ईस्तेमाल नहि कर्ते
    भग्वान के लिये सभि हुमन बरबर हैन्=======

    Friends, I am not poking you===so kindly don’t poke me.
    Let me enjoy my religion. You enjoy your religion.
    Ansaari Ji—-Please don’t teach me Islaam —-Please.
    If you want to serve your religion please kill all those siyaah, wahabi, barelwi & others….
    Please teach your muslim brothers, to follow Quran
    ===Muh utha kar aa jate hain bhashan dene.

    ====If I will open my mouth against islam —- There will be a big fight (uselessly)
    =====So kindly stop these blogs.

    ====my email is not correct—-Sorry for the trouble

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  • July 14, 2014 at 5:43 pm
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    1 मिनट चैटिगँ छोडकर इस पोस्ट को जरूर पढेँ वर्ना सारी जिन्दगी चैट ही करते रह जाओग. . .

    1378 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना – नाम है इरान!

    1761 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना – नाम है अफगानिस्तान!

    1947 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना – नाम है पाकिस्तान!

    1971 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना – नाम हैँ बांग्लादेश!

    1952 से 1990 के बीच भारत का एक राज्य इस्लामिक हो गया – नाम है कशमीर!…

    और अब उत्तरप्रदेश, आसाम और केरला इस्लामिक राज्य बनने की कगार पर है! और हम जब भी हिँदुओँ को जगाने की बात करते हैँ, सच्चाई बताते हैँ तो कुछ लोग हमेँ RSS, VHP और SHIV-SENA, BJP वाला कहकर पल्ला झाङ लेते हैँ!

    वन्दे मातरम

    हाल की दो महत्वपूर्ण घटनाओ को देश ने जरूर देखा होगा —

    ( 1 ) उपराष्ट्रपति हमीद अंसारी ने अपने धर्म के महत्व को समझते हुए दशहरा उत्सव के दौरान आरती उतारने से मना कर दिया क्योकि इस्लाम मे ये करना ” मना ” है ।

    ( 2 ) टी॰वी॰ सीरियल बिग बॉस की एक प्रतियोगी गौहर खान ने दुर्गा पुजा करने से मना कर दिया और वो दूर खड़ी रहकर देखती रही , जबकि ये एक कार्य था जिसे करना सभी प्रतियोगी के लिए जरूरी था लेकिन गौहर खान ने इस कार्य को करने से साफ मना कर दिया क्योकि इस्लाम मे ये करना ” मना ” है ।

    मित्रो इन दोनों ( हमीद अंसारी व गौहर खान ) को मेरा साधुवाद क्योकि दोनों ने किसी कीमत पर भी अपने धर्म से समझौता नहीं किया , चाहे इसके लिए कितनी बड़ी कीमत भी क्यो न चुकनी पड़े । ये घटना उन तथाकथित ” सेकुलर ” हिन्दुओ के मुह पर जोरदार तमाचा है जो कहते फिरते है की कभी ” टोपी ” भी पहननी पड़ती है तो कभी ” तिलक ” भी लगाना पड़ता है , इस घटना मे मीडिया का मौन रहना सबसे
    ज्यादा अचरज का विषय है क्योकि सबसे ज्यादा हाय तौबा यही मीडिया वाले मचाते रहे है जब नरेंद्र मोदी जी ने मुल्ला टोपी पहनने से इनकार कर दिया था । उदाहरण लेना है तो मुस्लिम
    समुदाय के लोगो से सीखो जो अपने धर्म के लिए बड़ी से बड़ी कीमत चुकाने को तैयार रहते है , पर अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं कर सकते । वही हमारे हिन्दू लोग ” कायरता ” का दूसरा रूप ” सेकुलर ” होने का झूठा दिखावा करने से बाज नहीं आते । इस को गौर से एक बार पढ़ लो , अमल करो मत करो आप लोगो की मर्जी,,,,

    मैंने 10 लोगो को जो की हिन्दू है उनसे पुछा. . .

    किस जाती के हो…..??
    सभी ने अलग अलग जवाब दिया….

    किसी ने कहा राजपूत
    किसी ने कहा बामण
    किसी ने कहा जाट
    सब अलग अलग
    किसी ने जैन
    तो किसी ने अग्रवाल….

    लेकीन मैने 10 मुसलमानो को पूछा की कौन सी जाती के हो ?
    सभी का एक जवाब आया

    “मुसलमान”

    मूझे अजीब लगा मैने फिर से पूछा फिर वही जवाब आया

    “मुसलमान”

    तब मुझे बड़ा अफसोस हुआ और लगा हम कीतने अलग और वो कितने एक … …

    कुछ समझ मै आया हो तो आगे से कोई पूछे तो एक ही जवाब आना चाहीये

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  • March 14, 2017 at 9:20 pm
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    “ग़लत व्याख्याओ ने इस्लाम के मूल स्वरूप को विकृत कर दिया”

    दुनिया का हर मुस्लिम (प्रचलित परिभाषाओ के तहत) ये मानता है, लेकिन फिर सही राह पे जाने के लिए, फिर उन्ही कम अकल मौलानाओ के पास जाके, इस्लाम की ग़लत व्याख्या के चक्कर मे पड़ कर, उसी दलदल मे फँसता जा रहा है, जहाँ से निकलने की वो कोशिश कर रहा था.

    Reply

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