गजवा ए हिन्द की गुहार!

gazwa
by — संजय तिवारी

तहीरुल कादरी वैसे मुसलमान मौलवी नहीं हैं जैसे मौलवी पाकिस्तान में पाये जाते हैं। वे कट्टर सुन्नी जमातों से अलग सूफी मत को माननोवाले हैं और शायद इसीलिए इस साल जब भारत में सूफी कांफ्रेस आयोजित की गयी तो सम्मानित अतिथियों में एक नाम तहीरुल कादरी का भी था।

लेकिन यह जानकर घोर निराशा होती है कि हिन्द के बारे में तहीरुल कादरी भी वही सोचते हैं जो आइएसआई स्पांसर्ड मुल्ला सोचता है। गजवा ए हिन्द (हिन्दुस्तान की फतेह) पर वे भी वही बोलते हैं तो जो कोई भी कुरान और हदीस का जानकार बोलता है। वैसे यह गजवा ए हिन्द भारत के पूरब में नहीं है। पूर्वी बंगाल से बांग्लादेश बनने के बाद अभी मौलवियों की जमात ने हिन्दुस्तान को फतेह करने का कोई फतवा तो नहीं दिया है लेकिन हिन्दुस्तान से पश्चिम में हर रोज यह फतवा दिया जाता है। कभी टीवी पर बैठकर। कभी तकरीरों में। कभी जलसों और जुलूसों में।

हिन्दुस्तान को जीतने के ये फतवे कुरान और हदीस की रोशनी में दिये जाते हैं जब मोहम्मद साहब ने अपने चाहनेवालों से कहा था कि दो फौजें निकलेंगी। एक वहां से पश्चिम जाएंगी और दूसरी हिन्द की तरफ। हिन्द के लिए जो फौज जाएगी वह जीत हासिल करेगी और वहां के राजा या राजाओं को जंजीरों में जकड़कर ले आयेगी। इस जंग में जो कुर्बान होंगे वे जन्नत जाएंगे और जो बच जाएंगे वे नर्क की आग में नहीं फेंके जाएंगे। इस तरह यह जंग आगे चीन तक जाएगी और वहां भी इस्लाम का परचम लहरायेगी और इस तरह इस खित्ते में खिलाफत कायम हो जाएगी।

मोहम्मद साहब को गये जमाना हो गया। इस बीच मोहम्मद बिन कासिम ने सिन्ध पर हमला किया। भारत में इस्लाम फैला। सदियों तक मुस्लिम शासक रहे। मुस्लिम शासकों की पनाह में सूफी संत आये और दोनों ही अपनी अपनी तईं गजवा ए हिन्द का फरमान लागू करते रहे। हजार साल की इन कोशिशों का नतीजा यह हुआ कि हिन्द का आधा हिस्सा मुसलमान हो गया। दो अलग अलग मुल्क बन गये। तीसरा बनने की मांग कर रहा है। दुनिया की कुल मुस्लिम आबादी का चालीस फीसद मुसलमान हिन्द (बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित) का वासी हो गया। तो क्या इतना सब होने के बाद भी गजवा ए हिन्द का ख्वाब पूरा नहीं हुआ जो मौलवी हजरात आज भी गजवा ए हिन्द के हुक्म की तामील करने में लगे हुए हैं?

शायद सच्चाई यही है। अभी भी हिन्द की सौ करोड़ की आबादी ने कलमा नहीं पढ़ा है। हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन जैसे मजहब अलग अलग तरह से बुतपरस्ती में लगे हुए हैं जिसे आखिरकार खत्म किया जाना है। तो यह अधूरा काम पूरा कैसे होगा? जवाब पाकिस्तान में बैठे मौलवी और इस्लामिक विचारक देते हैं। वे मानते हैं कि मुहम्मद बिन कासिम ने तो महज जंग की शुरूआत की थी। उस जंग को अंजाम तक पहुंचाना पाकिस्तान का काम है। टीवी पर बैठकर सिर्फ जैद हामिद जैसे मसखरे ही यह दलील नहीं देते। मौलाना मौदूदी और डॉ इसरार अहमद जैसे कट्टर इस्लामिक दार्शनिक भी यही कहते थे और तहीरुल कादरी जैसे उदारवादी मौलवी भी इस बात पर एक राय रखते हैं कि गजवा ए हिन्द अधूरा है जिसे पूरा होना है।

डॉ इसरार अहमद मानते थे कि सिन्ध पर फतेह के साथ ही हुजूर (मोहम्मद साहब) का फरमान पूरा हो गया। लेकिन बाकी मौलवी इससे कम इत्तेफाक रखते हैं। आईएसआई स्पांयर्ड मौलवियों ने इसमें एक और सिरा जोड़ दिया है कि पाकिस्तान की फौज ही वह फौज है जो गजवा ए हिन्द के ख्वाब को पूरा करेगी। अगर आप पाकिस्तानी फौज के घोषित उद्देश्य को पढ़ें तो यह बात उतनी बेतुकी भी नहीं लगती। पाकिस्तानी फौज अरबी में कहती है कि वह “जिहाद फी सबिलियाह।” मतलब, वह अल्लाह के कायदे के लिए जिहाद पर है। अल्लाह का कायदा अर्थात, इस्लाम।

पाकिस्तान के ज्यादातर मौलवी अपनी तकरीरों में अब यही दलील देते हैं कि पाकिस्तान बना ही है गजवा ए हिन्द के लिए। यह इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वह हिन्दुस्तान के खिलाफ गजवा ए हिन्द की जंग लड़े और मुसलमानों के आका (मोहम्मद साहब) की उस इच्छा को पूरा करे जो उन्होंने हिन्द के बारे में जाहिर की थी। पाकिस्तानी पंजाब के मौलाना इरफान उल हक अपनी तकरीरों में हमेशा यह कहते हैं कि सिर्फ दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां बुतपरस्ती (मूर्तिपूजा) जिन्दा है इसलिए मोहम्मद साहब के हुक्म का तालीम करने के लिए जरूरी है कि भारत से बुतपरस्ती और बुतपरस्तों को नेस्तनाबूत कर दिया जाए। अब क्योंकि यह मोहम्मद साहब का हुक्म था इसलिए हर मुसलमान इसी मिशन पर होना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि इसकी चर्चा उस तरह सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं होती तो उन्होंने कहा कि कुछ बातें मस्जिद की तकरीर में होती हैं और कुछ बातें मस्जिद में पर्दे के पीछे। गजवा ए हिन्द हर मुसलमान के लिए आका (मोहम्मद साहब) का हुक्म है जिसे उसका तालीम करना है। पूछनेवाले ने उनसे अगला सवाल यह पूछा कि इसमें पाकिस्तान का क्या रोल है तो उन्होंने साफ कहा, “पाकिस्तान बनने का और कोई मकसद ही नहीं है। इसका मकसद ही है गजवा ए हिन्द।”

जाहिर है पाकिस्तान ने अपने वजूद की बुनियाद विकसित कर ली है। पाकिस्तान और भारत में सुन्नी और सूफी भले ही बाकी सभी बातों पर अलग राय रखते हों लेकिन इस बात पर एक राय हैं कि “बुतपरस्ती (मूर्तिपूजा) और बुतपरस्तों को खत्म करना है। तहीरुल कादरी उसी परपंरा को आगे बढ़ा रहे हैं। जबकि बाबा इरफान उल हक इसे पाकिस्तानी फौज से जोड़कर इस वजूद को और मजबूत कर रहे हैं कि असल में पाकिस्तान कोई मुल्क नहीं बल्कि दूसरा मदीना है जिसे मूर्तिपूजकों को खत्म करने के लिए ही अल्लाह की मर्जी से अस्तित्व में लाया गया है।
अगर आप भारत पाकिस्तान के कभी सामान्य न रह पाने वाले रिश्तों को समझना चाहते हैं तो उसकी बुनियाद इसी सोच में है। भारत और पाकिस्तान के बीच समस्या कश्मीर नहीं है। समस्या है दो कौमी नजरिये वाली सोच जो एक मुस्लिम को सभी गैर मुस्लिमों से अलग कर देती है। इरफान उल हक बड़ी साफगोई से बताते हैं कि “यह दो कौमी नजरिया कोई आज वजूद में नहीं आया है। यह दो कौमी नजरिया उस दिन वजूद में आया जिस दिन मक्का में पहला मुसलमान बना। वहां से दुनिया दो हिस्सों में बंट गयी।” इसी बंटवारे में एक एक करके दुनिया के दूसरे हिस्से को मक्का की तरफ खींचने की कोशिश ही इस्लाम है। इसलिए भारत पाकिस्तान रिश्तों में कश्मीर को पाकिस्तान मुख्य मुद्दा बनाकर रखता है। इसलिए नहीं कि सैंतालिस के बंटवारे में कोई गड़बड़ हो गयी थी, बल्कि इसलिए कि कश्मीर में जब मूर्तिपूजकों को खत्म किया जा चुका है तो फिर उसको हिन्द में रहने का तुक क्या है?

पाकिस्तान के हुक्मरान, बौद्धिक लोग या फिर सेना में भी कुछ लोग भले ही कश्मीर को मुख्य मुद्दा न मानते हों लेकिन वे कश्मीर को भूलने या छोड़ने की बात कभी नहीं कहेंगे। कारण है वही मानसिकता जो गजवा ए हिन्द के रूप में उनके जेहन में जिन्दा है। यह पाकिस्तान का मुद्दा नहीं, मकसद है। इसमें कश्मीर का सूफी आंदोलन उनकी मदद कर रहा है। कश्मीर के बाद यह जंग दूसरे हिस्सों की तरफ आगे बढ़ाई जाएगी। पीढ़ी दर पीढ़ी यह जंग जारी रखी जाएगी और कयामत से पहले वह दिन आयेगा जब हिन्दोस्तान से सभी मूर्तिपूजक खत्म कर दिये जाएंगे और गजवा ए हिन्द की जो गुहार मोहम्मद साहब ने लगायी थी उसे पूरा कर लिया जाएगा। आमीन।
http://visfot.blogspot.ae/2016/05/blog-post.html

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6 thoughts on “गजवा ए हिन्द की गुहार!

  • October 27, 2016 at 2:55 pm
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    यह झूठी और मनगढ़ंत हदीस है गजवा उस जंग को कहते हैं जिसमें मुहम्मद स अ व खुद शामिल हों । हिन्दुस्तान पर कब्ज़ा करके मुसलमान बतायेंगे इससे यही सिद्ध होता है की हिन्दूओं को मार पीट कर मुसलमान बनायेगा क्योंकि भारत में अपने धर्म के प्रचार करनी की पूरी छूट है और व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन कर सकता है इसके बावजूद ये लोग प्रचार करने के बजाए कब्जा करेंगे।
    आज के हिन्द में कोई राजा महाराजा नहीं है और तो और कई उलेमाओं की राय यह भी है कि गजवाऐ हिन्द मुहम्मद बिन कासिम के सिन्ध विजय के साथ पूरा हो गया था और मेरा मानना है की औरंगज़ेब ने गजवा ऐ हिन्द पूरा हो गया था उसने 70% भू भाग पर अधिकार कर लिया था और 15% भू भाग पर दूसरे मुसलमान शासकों का अधिकार था

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    • October 29, 2016 at 9:16 pm
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      शहजाद साहब

      आपका स्वागत है खबर की खबर पर , शायेद ये आपका पहला कमेंट है , खैर आप अपने विचार या लेख भेज सकते है प्रकाशन के लिए !

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  • October 29, 2016 at 4:27 pm
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    सही कहा की एक तो सभी हदीसो की मान्यता हे ही नहीं फिर अगर किसी के लिए हो भी तो भला कोई ज़ैद हामिद जैसा पागल ही अब ऐसी बात सोच सकता हे अब तो ना भारत पाक की ना पाक भारत की ही एक किलोमीटर भी जमीन ले ही सकता हे बात इतनी सी हे की एकतरफ इन ज़ैद हमीदों का भी ये कॅरियर हे मौज़ हे ऐसी बकवास उड़ाना फिर ये संजय तिवारी जेसो की अतिचालाकी हे की ऐसी बकवास की हिंदूवादी प्रतिकिर्या देना, कोई फायदा – ? नहीं इन्हें सिर्फ दक्षिणपंथ में अपना कॅरियर बनाना होता हे सत्ता में आने के बाद भी संघ के पास बुद्दिजीवी नहीं हे संघ में अब इस बात पर खासा जोर दिया जा रहा हे की हमारे पास बुद्धिजीवी लेखक चिंतक फिलॉस्फर आदि क्यों नहीं हे जब सत्ता में हमारा ये हाल हे तो बिना सत्ता के क्या होगा — ? स्वप्नदसगुप्त जैसे आम को राज्यसभा में भेजा जा रहा हे अर्णव और सुधीर जैसे थर्ड क्लास पत्रकार इनके चहेते हे चेतन भगत जैसा फालतू लेखक भी धीरे धीरे इनकी तरफ आ रहा हे तो जिंदगी और कॅरियर से परेशान संजय तिवारी ने सोचा की में भी अपना बायोडेटा पेश करू—- ?

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  • January 26, 2019 at 11:07 am
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    तिवारी खामखा डर रहा हे ये करेंगे गज़वा ए हिन्द इनसे डर रहे हो तुम ? ————————————————————————————
    Abbas Pathan22 hrs ·
    मुल्ला जी का फेसबुक अकाउंट

    Day 1 – औये जुम्मन चुम्मन ग़य्यूरे गुलाम दरी उठा पत्तल चाट माकक़्क़ा भेंन्नक़ा

    I reacted – hahaha भाई मज़ा आ गया, क्या भिगोकर मारा है

    Day 2 – प्यारे नबी ने फरमाया कभी किसी को गाली मत दो, जलील मत करो … औलिया अल्ल्लाह पीर पैंगम्बर अगड़म बगड़म धमधड़म चकड़ मकड़ सकड़ मक्का मदीना काबा इमाम …

    I reacted – wow, सुब्हान अल्लाह, माशा अल्लाह, ईमान से ईमान ताजा हो गया

    Day 3- अश्लील चुटकुला, नंगी फब्तियां

    I reacted – hahahahaha, भाई हंस हंस कर पागल हो रहा हूँ, नीचे गिर जाऊंगा।

    Day 4- ओये बीजेपी के दलाल, कांग्रेस के टुकड़ेखोर, इमरान के चमचे, शिवपाल के गमछे, सपा के कुत्ते मायावती के जूत्ते, ओवेशी के पतंग की डोर चल हट हरामखोर .. बत्ती बुझा रद्दी उठा, निकल

    Apun reacted- hahahaha भाईजान, माँ कसम महफ़िल लूट लिये, मज़ा आ गया।

    Day 5- ATTITUDE शेरो शायरी और साथ मे खुद का फैंसी फोटो

    I reacted- हीरो लग रहा है मेरा भाई। nice pic

    Day 6- इत्तेहाद एकता भाईचारा मुहब्बत, बहुत दुख होता है जब सियासी पार्टियों के चलते उम्मत एक दूसरे से बदजुबानी करती है। प्यारे नबी ने ये फरमाया वो फरमाया…………… तमीज़ तहजीब नेकियाँ

    I reacted – lovely, सलाम है आपकी सोच को, मेरे दिल की बात कह दी आपने।
    Day 7- जुम्मा की नमाज़ पढ़ने के बाद … धींगा चिका धींगा चिका, है है है है। 12 महीने में 12 तरीको से तुझसे प्यार जताउंगा मैं …..
    अपुन सोचिंग एंड सोचिंग एंड सोचिंग, विचित्र नमूने केवल टिकटोक पर नही पाए जाते।
    ये है एक हफ्ते का रंग बिरंगा आमाल-नामा।Abbas Pathan—————————————————————————————————————————————–और ये हे ये हे पाकिस्तान का गज़वा ए हिन्द का सिपाही https://www.youtube.com/watch?v=1PEbiTaBWh4

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  • February 12, 2019 at 9:15 am
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    मेने भी ये नोट किया हे की अर्थी के साथ जा रहे लोगो की संख्या कम हो रही हे काफी कम ——————————————————– —————————— Pawan S बरेली · मेरे व्यक्तित्व के निर्माण का एक पहलू यह भी है कि मैंने मोमिनों के साथ लगभग पूरी शिक्षा पाई…उनके साथ खेला… झगड़े किये और दोस्ती भी की ! शाहाबाद बरेली का ज़फर, पुराने शहर के शम्सुल, फखरुल , फरीद,अकील मियाँ… कन्नौज के डाक्टर मुज़म्मिल अंसारी और बाबू अयूब… यह वह लोग थे,जिनसे ऐसी दोस्ती रही कि आज भी मिल जाएं तो बेसाख्ता गले लग जाएं… यह स्वीकारने में मुझे कोई गिला नहीं है कि मुझे ज़्यादा सम्मान मोमिनों से मिला है… हिंदुओं ने मेरे विश्वास को अक्सर तोड़ा है…मेरे मोमिन दोस्तों को यह हमेशा मलाल रहा कि मैं उनकी इज़्ज़त करता हूँ,मगर उनके मज़हब की नहीं !! मेरा खुद का मानना है कि इसी जिजीविषा के साथ यदि इस्लाम का अंग रहते हुए… मैंने यदि इस्लाम की सेवा की होती तो शायद वह लोग मुझे प्यार-मोहब्बत और इज़्ज़त से लाद देते… हिन्दू तो मुझे ‘टका के तीन सेर’ की दर से बेचते हैं ! आप खुद देखिए मेरे ऊपर लगाए गए तमाम निकृष्ट आक्षेप और कुछ लोगों की वितृष्णात्मक भाषा शैली !मेरा मानना है कि स्पष्ट और तीखी भाषा शैली मुझे… कुछ सांस्कारिक और शेष अपनी मुस्लिम संगत से प्राप्त हुई है !! हिन्दू भाई-चारा जैसी कोई चीज़ इस देश तो क्या सम्पूर्ण ब्रह्मांड में नहीं है !… लेकिन मैंने… प्रत्येक मुस्लिम में दूसरे मुस्लिम के लिए जो तड़प-अपनापन देखा है…. वही भाव हिंदुत्व के लिए मैंने भी अंगीकार किया है ! युहीं मैंने सावरकर, श्रद्धानंद,गोडसे और वर्तमान में यति नरसिंहानंद सरस्वती और सुरेश चव्हाणके को अपना पथप्रदर्शक नहीं माना है !!
    अक्सर मुस्लिम दोस्तों को आपस मे प्यार से गाली देते हुए… मग़र आपस मे खाना बांट कर खाते देखा है…. रमज़ानों में साथ मे रोज़ा इफ्तार… मोहब्बत और खुलूस से भरा ऐसा अवसर होता है….जिसका अंदाज़ा कोई हिन्दू लगा ही नहीं सकता !! इसी की देखा-देखी-नकल में मैंने पिछले कुछ वर्षों से…हिंदुओं को नौ-दुर्गे व्रत रखने की प्रार्थना करने की परंपरा कायम रखी है !! सायंकाल व्रत साथ मे तोड़ने या स्वल्पाहार लेने की सलाह भी देता हूँ !! साथ मे भोजन… साथ मे इबादत…साथ मे नमाज़…साथ मे तराबीह सुनना…. यह इस्लाम की मजबूती का प्रमुख कारण है !!आपने गौर किया होगा,हिंदुओं में अन्तयेष्टि के लिए शमशान जाने वालों की संख्या घटती जा रही है… वहीं नमाज़े जनाज़ा और कफ़न-दफन के समय 300-400 मुस्लिम पुरुषों का उपस्थित होना मामूली बात है ! जो अंत तक साथ रहते हैं ! दरअसल हमे कुरान में अनेक बुराइयां नज़र आती हैं क्योंकि हम कुरान को अपने नज़रिए से देखते हैं !! कुरान एक आदर्शवाद और आचार संहिता पर लिखी पुस्तक #नहीं है…. कुरान व्यक्ति के मनोविज्ञान…. व्यक्ति की स्वाभाविक सोच को दिशा देने वाली पुस्तक का नाम है !! हमारे पास ऐसी कोई पुस्तक नहीं !! हमारे पास कुम्भ हैं… मग़र 13 अलग-अलग अखाड़े भी हैं !!!Pawan S बरेली

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  • March 28, 2019 at 10:23 am
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    सिकंदर हयात
    मै आपकी बात से सहमत नहीं हूं। लोगो को ये लगता है कि इस्लाम प्यार मुहब्बत का कौम है। मै ये कह रहा हूं आप क़ुरआन को जाकर पढ़िए फिर यहीं उसकी कोई आयत लोगो को बताइए जिसमें ये लिखा हो कि इस्लाम दूसरे धर्म के साथ प्यार मुहब्बत से रहना सिखाता है। फिलहाल इतना कीजिए आप।

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