क्या हम मुसलमान हैं?

muslims

अफ़ज़ल ख़ान

क्या सचमुच हम मुसलमान है?, क्या हम इस्लाम के बताये रास्ते पे चल रहे है? अगर आज हम अपने आप को और दुनिया के 61 इस्लामिक मुल्क के 1.50 अरब की आबादी मुसलमान को देखे तो जवाब न मे मिलता है. मुसलमान उसे कहते है जो एक अल्लाह और आखिरी रसूल हज़रत मुहम्मद( सल्ल) को माने और इस्लाम के जो अरकान है उन पर अमल करे. इस के अतिरिक्त मुसलमानो का चरित्र भी अच्छा होना चाहिये. चरित्र जब ही अच्छा हो गा जब आप मे ये खूबीया हो गी जैसे ईमानदारी, हार्दिकता, वादा निभाना, सच्चाई और इंसाफ. लेकिन बदकिस्मती से पूरे इस्लामी दुनिया मे अब नही पायी जाती.जब तक ये खूबीया मुसलमानो मे थी दुनिया ने देखा के हम कैसे पूरे विशव पे छा गये थे.

सब से पहले आप ईमानदारी को देखिये, एक समय था जब मुसलमान को सब से ज्यादा ईमानदार समझा जाता था, आज मुसलमानो से ईमानदारी खत्म हो गयी है. आप देखियेके अरब मुल्को मे खाने पीने का सामन और दवा सभी अमेरिका और युरोप से आते है. डेनमार्क की कंपनी साउदी अरब और दुबई मे डेरी प्रॉडक्ट और गोश्त सप्लाइ करती है. पूरी मुस्लिम देश जर्मनी,अमेरिका,फ्रॅन्स,स्विज़ेर्लंड से दवाये लेती है. अब आप देखिये के एक इस्लामिक मुल्क दूसरे इस्लामिक मुल्क से कोई समान नही लेती, क्यो के व़े जानते है की क्वालिटी अच्छी नही होती. मुसलमान होने के बावजूद हम मक्का मे हज और उमरे के दौरान हाजियो के जेब काटते है वहा पे भीख मांगते है और पाकिस्तानी मुसलमान को हज़ और उमरे के नाम पे जा कर चरस, अफीम, हेरोईन ले जाते है, पकड़े जाने पे सब को फांसी भी हो जाती है.

पहले मुसलमान की खासियत हार्दिकता थी अब मुसलमानो मे ये खत्म हो गयी है और हम तंगदिल हो गये है. अब मुसलमानो मे भी छोटे-बड़े, गोरे काले, अमीर-गरीब जैसे भेद भाव आ गये है. अरबी और गैर अरबी मुसलमानो मे भेद भाव जितना इस्लामिक मुल्को मे पाया जाता है पूरे दुनिया मे कही देखने को नही मिलती. दुनिया मे बहुत से ऐसे इस्लामी मुल्क है जहा लोग 30-40 साल से रह रहे है उन्हे नॅशनॅलिटी नही देते, आप मुसलमान हो कर भी अरब मुल्को की लड़कियॉ से शादी नही कर सकते. आप स्वंय अपना बय्पार नही कर सकते बगैर किसी local Sponser की सहायता से , मुसलमान 72 फिरको मे बंटी है और हर एक दूसरे को काफ़िर कहता है. सब की अपनी अपनी मस्जिदे और अपना क़ब्रिस्तान है. आज सब से ज्यादा बेचैनी इस्लामिक मुल्को मे है. 61 इस्लामिक मुल्को मे से 25 मुल्को मे बादशहत है.

इस्लाम दुनिया का पहला मज़हब है जी शिक्षा पे सब से ज्यादा जोर दिया है. क़ुरान की पहली आयत ही नाज़िल हुई के इक़रा-पडो. हदीस है के तुमे अगर शिक्षा लेने के लिये चीन भी जाना पड़े तो जाओ मगर आज शिक्षा मे इस्लामिक मुल्क और पूरे मुसलमान भारत के भी और क़ौमो से बहुत पीछे है.ईसाई दुनिया के 40% नौजवान यूनिवर्सिटी तक पहुंचते है जब के इस्लामी दुनिया के 2% नौजवान यूनिवर्सिटी तक पहुंचते है.इस्लमि दुनिया मे 20 लाख लोगो मे से सिर्फ 230 लोगो को विज्ञान की जानकारी है जब के अमेरिका मे 10 लाख लोगो मे 4 हज़ार विज्ञान की जानकारी है पूरे इस्लामिक मुल्क मे 35 हज़ार रिसर्च स्कॉलर है जब के सिर्फ अमरीका मे इन की सांख्या 22 लाख है.इस समय दुनिया के 200 बड़ी यूनिवर्सिटी मे एक भी यूनिवर्सिटी मुस्लिम मुल्क का नही .

इस्लाम ने सब से ज्यादा जनहित,परोपकार या समाज सेवा के लिये मुसलमानो को प्रेरित किया है. इस्लाम ही एक ऐसा धर्म है जिस मे गरीबो की मदद के लिये ज़कात देने को कहा गया है, मगर अफसोस आज मुसलमान इन कामो से दूर होता जा रहा है. अगर हम दुनिया के 50 सब से जयदा दान देने वालो की सूची देखे तो उस मे एक भी मुस्लिम का नाम नज़र नही आता है साथ मे कोई हमारे हिन्दू भई भी नही है इस कम मे सिर्फ ईसाई धर्म के लोग आयेज है. रेडक्रॉस जो दुनिया का सब से बड़ा मानवीय संगठन है. इस के बारे मे बताने की जरूरत नही है. आप को मालूम हो गा के बिल- मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन मे बिल गेट्स ने 10 बिलियन डॉलर से इस फाउंडेशन की बुनियाद रखी है. जो के पूरे विशव के 8 करोड़ बच्चो के सेहत का ख्याल रखाता है, इस के अतिरिक्त एड्स और आफ्रिका मुल्क के गरीब देशो को खाना और मानवीय सहायता पहुचता है. दुनिया इस समय दांग रह गयी जब वॉरेन बफे ने इस फाउंडेशन को 18 बिलियन डॉलर दान मे दे दी मतलब वॉरेन ने 80 % अपनी पूँजी दान मे दे दी. दुनिया के 50 सब से ज्यादा दान देने वाले मे एक भी मुसलमान नही है अरब का अमीर शहज़ादा अपना स्पेशल जहाज पर 500 मिलियन डॉलर खर्च कर सकता है मगर मानवीय सहायता के लिये आगे नही आ सकता है.

इस्लाम ने मुसलमानो को जिन बुराईयो से रोका था आज सब से ज्यादा मुसलमानो मे और इस्लामिक मुल्को मे पायी जा रही है. शराब, जुवा, ब्याज, अय्याशी से इस्लाम मे सख्त मनाही है, मगर आज मुसलमानो मे आम हो गया है.यही कारण है के आज हम अल्लाह के सब से अच्छी क़ौम होने के उपरान्त भी पूरी दुनिया मे हम बदनाम और रुसवा हो रहे है. हमारी नमाज़े और दुवाये कबूल नही हो रही है. इस लिये मुसलमानो को चाहिये के इस्लाम के बताये रास्ते पे चले, शिक्षा पे धयान दे, बुरे कामो से तौबा करे और वक़्त के साथ चले अगर ऐसा न हुआ तो वो दिन दूर नही जब मुसलमा दुनिया से पिछड़ जाये गे इसी लिये अभी भी समय है के मुसलमान जागे नही तो बहुत देर हो जाये गी. बकौल एक शाएर तुम्हारी दास्तां तक न हो गी दस्तानो मे.

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19 thoughts on “क्या हम मुसलमान हैं?

  • June 26, 2014 at 8:12 pm
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    Uparwale ke wahan se to sab ek jaise hi aate hain, Hindu ya Musalman to hum jameen par aakar bante hain…..!!!

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  • June 27, 2014 at 10:28 am
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    हकीकत बात तो ये ही है के हम लोग कुरान और हदीस को छोड चुके है कुरान की किसी बात पे अमल नहीं करते, आज मुस्लमान शराब पिने लगा है, ब्याज खाता है अल्लाह के खौफ की जगह दुनिया का खौफ आ गया, आज हमने हक की दावत देना छोड दी सही को सही और गलत को गलत नहीं कहते पहले किसी रस्ते पे कोई झाड झाँगड या ईट पत्थर पड़ा होता था तो लोग कहते थे के ओहो यहाँ से कोई मुस्लमान नहीं गुजर नहीं तो ये रास्ता इन तकलीफ देह चीजो से साफ होती.
    अल्लाह को इसे मुसलमानों की कोई जरुरत नहीं जो सिर्फ नाम के मुस्लमान हो कुरान में भी है जिसका मफूम है के अगर हमने इस दावत के काम को छोड दिया तो अल्लाह हम पे इसी कौमों को मुसल्लत कर देगा जो हमारे बडो की ताजीम न करेगे ………. … और ये भी है के अगर हम अपना काम नहीं करेंगे तो अल्लाह हमारे जगह किसी दूसरे लोगो को या कौम को ले आये गा … आज ये ही हो रहा है सारी दुनिया में मुस्लिम परेशान है किसी न किसी रूप में आप अल्लाह हमारी जगह दूसरों को हिदायत दे रहा है देखे यूरोप में और अमेरिका में किस तेज़ी से इस्लाम बढ़ रहा है २३५% की दर से आज भी अगर हमने कुरान और सुन्नत को छोड दिया तो अल्लाह को हमरी जरुरत नहीं वो किसी दूसरों को मुस्लिम बना ले आएगा ……

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    • June 27, 2014 at 8:48 pm
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      एक हदीस शरीफ के ही मुताबिक बहुत सी ऐसी समस्याए भी सामने आ भी सकती हे जिनमे अपनी अक्ल से ही फैसला लेना होता हे तो अपनी अक्ल का भी पूरा पूरा पूरा इस्तेमाल भी करे औरो को भी सलाह दे जरुरी नहीं हे की हर एक बात आज की हर एक समस्याको ही मज़हब से जरूर ही जोड़ा जाए

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      • June 27, 2014 at 8:57 pm
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        अधिकांश मुस्लिम नेता रहनुमा बदमिजाज हे बददिमाग हे भरष्ट हे हे तो हे उनके खिलाफ जनता को एकजुट किया जाए ये बाते हे समस्याए हे इनसे लड़ना हे इसका मज़हब से क्या लेना देना हे – ? दुनियादारी की हर बात में इस्लाम को लाना गलत हे

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      • June 27, 2014 at 9:31 pm
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        जैसे देखे तो परिवार नियोजन का मसला कुछ लोग बेमतलब में ही इसे भी मज़हब से जोड़ते हे और लोगो को परिवार नियोजन से ( हज़ारो हज़ारो सालो में जो सिर्फ आज की सिर्फ आज की हो सकता हे 100 साल बाद की भी न हो प्रॉब्लम हे ) दूर रहने की सलाह देते हे वाही कुछ लोग बैंक बीमा आदि आदि को लेकर दिमाग की दही करते रहते हे

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        • June 27, 2014 at 10:15 pm
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          एक सवाल में नदीम भाई से ये पूछना चाहूंगा की परिवार नियोजन के मसले पर एक विद्वान धार्मिक मुस्लिम ब्लॉगर लिखते हे की सच्चा मुसलमान परिवार नियोजन नहीं कर सकता वाही दूसरे विद्वान धार्मिक मुस्लिम ब्लॉगर से जब हमने पूछा तो उन्होंने कहा की नहीं सच्चा मुसलमान भी चाहे तो परिवार नियोजन कर भी सकता हे आप इस विषय पर क्या कहेंगे दोनों में से कौन सही हे कौन गलत ? कौन इस्लाम की सही व्याख्या कर रहा हे कौन नहीं – ?

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  • June 27, 2014 at 10:29 am
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    अफजल जी, बहुत सुन्दर. हकीकत है ए की आज अच्छे बुरे लोग हर धर्मो मे हैं और समान अनुपात मे. दरअसल आज के समय मे लोगो मे अच्छाई बुराई धर्म से नहीं पैसे और उसकी लालच से आती है. हालांकि मुझे लगता है की आज हर किसी को पहले एक सच्चा इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिये ना की सच्चा हिन्दू या फिर सच्चा मुसलमान.

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  • June 27, 2014 at 10:30 am
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    एक अच्छे और सच्चाई भरे लेख के लिये आप को धन्यवाद. इस मे कोई शक नही है के मुसलमान धर्म के नाम पे जल्दी बहकावे मे आ जाते है जैसे पाकिस्तान के मुसलमान.

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  • June 27, 2014 at 10:36 am
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    GREAT CUTE CHILDREN GIVING RIGHT MESSAGE TO ALL ADULTS !!! PRAY AND RESPECT EVERY ONE !!!

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  • June 27, 2014 at 2:54 pm
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    http://visfot.com/index.php/current-affairs/11197-sufi-shanti-aur-sunni-kranti.html sikander hayat • 3 minutes ago
    सबसे अधिक दुःख इस बात का हे की एक तरफ पूरी मुस्लिम दुनिया में क्लेश हुआ पड़ा हे और उधर उपमहादीप का मुस्लिम इक़बाल साहब के ”एक हो मुस्लिम हरम की पासबानी के तरानों ” यानी मुस्लिम यूनिटी सुप्रियॉरिटी और एकवेल्टी के यूटोपिया में ही खोया रहता हे सच्चाई जमीनी हालात से आँख ही नहीं मिलाना चाहता हे पेश हे एक बहस

    सिकंदर हयातJune 23, 2014 3:16 am

    सिकंदर हयात 19 Days Ago(+1) VoteREPORT
    पूर्ण बहुमत से मोदी बी जे पी की सरकार बन रही है इसका एक बड़ा क्रेडिट जाता है काबुल से कोहिमा तक फेले हुए मुस्लिम कट्टरपन्तियो का जिन्होने पाक बांग्लादेश कश्मीर से हिन्दुओ को लगातार भगाया जिन्होने अपना यहा की लड़कियॉ को बुरके पर्दे हिज़ाब की सलाह दी और सुन्दर स्मार्ट गेर मुस्लिम लड़कियॉ से शादिया की ( पाकिस्तान मे जबरदस्ती यहा लॉव मेरिज ) जिन्होने मुज्ज़फारनगर मे 2 जाट लडको को मारने के आरोपियो को छुड़वाया जिन्होने मुम्बई हमले को आर एस एस की करतूत बताया जिन्होने खुले आम परिवार नियोजन की मुखालफत की जिन्होने आतंकवाद और आक्रामकता की निन्दा मे हमेशा 100 बहाने किन्तु प्रणतु किये मेने 3 साल से लगातार लिखा की था की देर सवेर इस सबका फायदा संघ परिवार को मिलेगा ही क्योकि य बाते बड़े से बड़े सेकुलर हिन्दू को भी बदल देगी खासकर य लड़कियो के विष्य तो बेहद सवेंदानशील होते है मेरा अपना दोस्त जो एक बड़े हिन्दी अखबार मे है और 100 % सेकुलर था और पत्रकारिता मे सवरणो के वर्चसाव से परेशान रहता था उसके रवेयया मे भी मेने मुज्ज़फारनगर के बाद बदलाव देखा था जिसका ड़र था वही हुआ खेर कोई बात नही हम फिर से पूरी ताकत से अपने मिशन मे जुटेंगे और इंशाल्लाह अब मुस्लिम समाज हमारी भी सुनेगा आमीन Aslam Khan 15 Days Ago(0) VoteREPORT
    आपकी तमाम बातो से इत्तेफाक रखते हुए मुज़फ्फरनगर मामले को साफ़ कर दूँ की जो गलत प्रचार किये गए आप भी उसी की ज़द में हैं! मुज़फ्फरनगर में किसी ने किसी को नहीं छुड़ाया, वहां दो हिन्दू लड़को के साथ एक मुस्लिम लड़के की भी हत्या हुयी थी जिसका कारण आपसी लड़ाई रही लड़की का कोई मामला नहीं था! और ये दंगा इतनी आसानी से संगठित नहीं हो सकता था ये किया गया था! इस पर पिछले दिन चार साल से लगातार काम चल रहा था
    रही बात पाकिस्तान और बांग्लादेश की तो आप या हम वहां जाकर कुछ नहीं बदल सकते अलबत्ता यहाँ बेहतर काम कर सकते हैं तार्किक बातें की जा सकती है!
    वैश्विक स्तर पर ही बहुसंख्यक कट्टर हो रहे है ये सच है इस कट्टरता से बिना किसी भेदभाव के लड़ना होगा और हम इस में सफल भी होंगे! केवल आलोचना भाव होता है तर्क नहीं हो सकता! इस लिए तार्किक समाज की बात की जाए आपके अखबारी मित्र भी हवा के शिकार मात्र हैं सिकंदर हयात 14 Days Ago(0) VoteREPORT
    असलम भाई पहले तो मेरा ये दावा सुन ले की हिंदी नेट पर हिन्दू कठमुल्लाओं और कटटरपन्तियो से जितनी बहस मेने की हे उतनी शायद ही किसी ने की हो य बात इसलिए कह रहा हु की कही आप मेरे बारे में कोई ग़लतफ़हमी न पाल ले मेंरा ये लेख देखे
    https://khabarkikhabar.com/?p=7
    आगे में य कहूँगा असलम भाई की मुस्लिम यूनिटी अधिकांश एक ”यूटोपिया ” ही रही हे इसी के तहत हम पर ”दबाव ” डाला जाता हे की हम दुनिया के किसी कोने में कोई भी केसा भी पंगा हो हम उस पर आँख मूंद हमेशा मुस्लिम्स का ही पक्ष ले हम ऐसा करते भी हे मेरा मन्ना हे की इससे कोई मुस्लिम यूनिटी नहीं आती प्रेक्टिकल में -हा गैर मुस्लिमो से ( और आपस में भी ) रिश्ते जरूर ख़राब हो रहे हे लेकिन में इस ” दबाव ” में नहीं आता में तो पैगम्बर हज़रत मोहम्मद साहब की इस हदीस का पालन करता हु की ” इन्साफ होना ही चाहिए भले ही आसमान फट जाये ” तो में तो इन्साफ की ही बात करूँगा में मूल मुज्जफरनगर का ही हु मेरा मुस्लिम ही दोस्त मुज्जफरनगर में डॉक्टर हे उसके पास उस इलाके के मरीज़ आते हे उसने ही बताया की बात लड़की की ही बात थी और खुद भी सोचिये की अगर बात कुछ और होती तो वो उस लड़के को कही न्यूट्रलइलाके में घेरते न की उसी की गली में जाकर हमला करता जहा उन्हें भी खतरा होना ही था और हुआ भी दोनों मारे गए. मुसलमानो को बताया जा रहा हे य आर इस इस की साज़िश थी बाद में जो कुछ हुआ ( सी डी सर्कुलेशन ) वो जरूर हो सकती हे मगर उन २ जाट लड़को का वहाँ जाना साज़िश नहीं हो सकती हे क्योकि य अत्यधिक गुस्से में उठाया आत्मघाती कदम था क्या आर एस एस के पास आत्मघाती भी हे ? बाद में जो हुआ वो जरूर भाजपा सपा की मिलीभगत लगती हे मगर शरू में क्या सन्देश था की भाई ” लड़की आपने छेड़ी फिर 1 के बदले २ आपने मारे फिर कुछ आरोपिया को छुड़वा भी लिया ? आगे भी कुछ मुस्लिम नेताओ की मूर्खता देखिये की उसी लड़के के पिता ( 13 बच्चो का उसका परिवार ऐसा सुना हे मेने ) से चुनाव प्रचार करवा रहे थे जो सुना हे की कह रहे थे की सिर्फ ”अपने लोगो पर भरोसा करो ” ज़ाहिर हे इसी का भाजपा को पूरा फायदा मिलना ही था मिला भी — जारी
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    सिकंदर हयात
    सिकंदर हयात 14 Days Ago(0) VoteREPORT
    भारी मुस्लिम आबादी वाले वेस्ट यु पि में सभी मुस्लिम नाम चुनाव हांर गए क्यों ? मुज्जफरनगर काण्ड के बाद जनवरी की बात हे में वेस्ट यु पि में गया हुआ था रस्ते में पता चला फिर एक जगह एक दबंग सी जाती के लोग अपनी लड़की के मुस्लिम लड़के से शादी पर हल्ला कर रहे थे और बी जे पि संघ इसे लवजिहाद का नाम देकर इसकी फसल काटने में लगे थे मेने तभी कह दिया था की इन्हे इसका बहुत फायदा होगा भारत जैसे देश में जहा कही भी कही भी आज भी अंतर्जातीय शादी भी आसान नहीं हे अधिक अंतर्धार्मिक शादियों पर कुछ तो होना हे आजकल अक्सर ही हम हिन्दू लड़कियों की मुस्लिम लड़को से लवमैरिज सुनते हे संघ ने इसका खूब प्रचार किया और उसे चुनाव में इसका फायदा मिला मेरे अपने भाई ने कहा की तू बार बार ये शादियों का मुद्दा क्यों उठा रहा हे ? शादी करना क्या गुनाह हे मेने कहा की कोई गुनाह नहीं हे लेकिन मेने कहा की अगर मुस्लिम समाज में एक नयी रौशनी आ रही हो जिसके तहत अशराफ अज़लाफ शिया सुन्नी देवबंदी बरेलवी अमीर मुस्लिम गरीब मुस्लिम की भी आपस में सरलता से लव या अरेंज्ड मेरिज हो रही हे तो फिर उसी वे में हिन्दू मुस्लिम शादिया भी हो तो बड़ी अच्छी बात होती मगर ऐसा नहीं हो रहा हे आप ही बताय ? हो ये रहा हे की उधर बहुत सी जगह लोग 5 10 साल की लड़कियों को भी हिज़ाब करवा रहे हे बहुत सी पढ़ी लिखी लडकिया तक भी अरबी ईरानीहुलिये में आ गयी हे ( नवभारत पर ब्लॉगर ज़ीशान ज़ैदी से उनके नवम्बर के ब्लॉग बेगानी शादी में — पर इस विषय पर बहस ) वही दूसरी तरफ कोई मुस्लिम लड़का किसी खूबसूरत स्मार्ट घूँघट का नामोनिशान भी नहीं रखने वाली गैर मुस्लिम लड़की से लवमैरिज करेगा तो संघ परिवार तो इसे लवजिहाद का नाम देकर इसका फायदा उठाएगा ही संघ की तो दिली इच्छा हे की ऊपर से लेकर निचे तक बटे हुए हिन्दू समाज को मुस्लिम ईसाई खतरा दिखा कर एकजुट करे वोटबैंक बने और भाजपा को फायदा हो वैसा ही हुआ भी मेने इस सम्बन्ध पिछले 3 साल से लगातार लिखा था जो मेने चेतावनियां दी थी वही हुआ मोदी साहब को इसका पूरा फायदा मिला किसे ने सपने में भी नहीं सोचा था की अपने डैम पर बहुमत आ जाएगा बहुत अफ़सोस–जारी ( नवभारत ब्लॉग पर इन सब विषयो पर अफज़ल खान भाई के ब्लॉग पर मेने अनगिनत बहस की हे आप भी देखे मेरी कोई 1 सिंगल लाइन भी गलत लगे तो बताय में जरूर जवाब दूंगा )सिकंदर हयात 13 Days Ago(0) VoteREPORT
    भाई आपने कहा की ”रही बात पाकिस्तान और बांग्लादेश की तो आप या हम वहां जाकर कुछ नहीं ” सही कहा लेकिन बात य हे की पाकिस्तान के ये कटटरपन्ति इस बात पर अन्धविश्वास करते हे की भारत के मुस्लिम बहुत ही परेशान हे और वो भी उनके साथ हे उनकी साइकि ये हे की उपमहादीप के 60 करोड़ मुस्लिमो को हिन्दुओ से नफरत के आधार पर एकजुट करके फिर से दिल्ली पर कब्ज़ा किया जाए हमेशा याद रखे की सिर्फ कश्मीर कोई मसला नहीं हे हमें उनके इस अन्धविश्वास को तोडना होगा आगे एक पुराना कॉमेंट ”महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश तक एक भी मुस्लिम सांसद नहीं पहुँचा । बिहार में जाकर इस प्रजाति के कुल दो जीते । झारखंड में फिर नदारद ।
    ये नई गंगा जमुनी सच्चाई है, दर्ज किया जाय -!!
    जवाब दें ”smith को जवाब )- सिकंदर हयातजवाब दें ”smith को जवाब )- सिकंदर हयात
    May 19,2014 at 12:31 PM IST
    हो सकता हे की इन मुस्लिम सांसदों को पाकिस्तानी हिन्दुओ और उनकी लड़कियों की हाय लगी हो जिन्हे पिछले2- 3 सालो से उनके ही बाप दादाओ की जमी से निकला जा रहा हे उनकी लड़कियों से ज़बरदस्ती शादिया की जा रही हे क्या इस सम्बन्ध में इन मुस्लिम सांसदों का फ़र्ज़ नहीं था की ये सब दलगत राज़नीति से ऊपर उठ कर संसद में इनके लिए आवाज़ उठाते पाकिस्तान एम्बेसी के सामने इस विषय पर धरना प्रदर्शन करते क्या कुछ किया इन्होने ? कुछ भी तो नहीं अब अगर आप कहते हे की य दूसरे देश का मसला था तो फिर इन मुस्लिम सांसदों को उन लोगो की खबर लेनी चाहिए थी जिन्होंने आज़ाद मैदान में बर्मा के मसले पर हिंसा की थी क्या किया इन्होने कुछ भी तो नहीं अगर ये सब करते तो य इंसानियत और इनकी राज़नीति दोनों के लिए ही अच्छा होता गंगा जमुनी संस्कर्ति का जहा तक सवाल हे तो उपमहादीप में 60 करोड़मुस्लिम और 90 करोड़ हिन्दू हे मुस्लिम हर जगह हर कोने कोने में हे जबकि हिन्दुओ से अनगिनत इलाके खाली करवा लिए गए हे य सब सोचना पड़ेगा गंगा जमुनी संस्कर्ति की जिम्मेवारी सिर्फ हिन्दुओ की ही तो नहीं हे ?

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  • June 27, 2014 at 5:45 pm
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    क्या हम मुसलमान हैं ?
    अच्छा बहुत अच्छा लेख अफज़ल भाई सराहना करनी होगी आपके लेख की !
    ( क्या हम इस्लाम के बताये रास्ते पे चल रहे है ?
    यह बहुत बड़ा और वाज़िब सवाल किया है आपने क्यू कि धर्म चाहे इस्लाम का हो हिन्दू हो, ईसाई हो सबमे
    मानवता को सर्वोच्च माना गया है किन्तु समाज में आज धर्म की कैसी परिभाषा गाढ़ी जा रही है की धर्म रक्षक ना होकर भक्षक हो गया है मानवता के लिए ….
    मैंने आपके लगभग अबतक के सारे लेख पढ़े किन्तु इस लेख ने मुझे कुछ लिखने पर मजबूर किया मै इसके लिए कुछ लाइन लिखू आपके कमेंट बॉक्स में ऐसी जिज्ञाषा हुई मेरे भीतर ! विषय अच्छा , सवाल अच्छे दूरदर्शी सोच ….बधाई हो अफज़ल भाई आपको इस लेख के लिए ………………..

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    • June 28, 2014 at 9:32 am
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      लेख पसंद करने के लीउए धन्यवाद
      धार्मिक लेख लिखने का मक़सद किसी के धार्मिक भावना को आहत करने और न ही धार्मिक उन्माद फैलाना है. असल मे लोगो को जगाना है. बात है के हिन्दू और मुस्लिम भई दोनो आपने मूल धार्मिक शिक्षा से दूर हो गये और लोग धर्म की असल पुस्तक को छोड़ कर मुल्ला , साधु और संत के बात पे धयान देने लगे है जिस से शर्म के अंदर बहूर्त बुरैइया आ गयी है. इसे ही दूर करना है.

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  • June 28, 2014 at 10:09 am
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    Aapki kuch baato se 100% sahamat aur kuch baato se 100% asahmat.detail me aapko batata hu.afzal sahab allah aur uske rasul ko to har musalman maanta hi hai kyoki wo to base hai islam ka.aur jaha tak arkaan ki baat hai to beshak iimandari,hardikta,vaada nibhana,sachchai aur insaf islam ki pahchan hai lekin aapka ye kahna galat hai ke ye sari visheshtaaye islami duniya me ab nahi paayi jati.beshak paayi jaati hain.har haal me aur har kaum se zyada paayi jaati hain.agar aap puri duniya me har community se tulna karenge to muslim community sabse kam sharab piye,sharab kam piyegi to zahir si baat sabse kam balatkar kare hai ye muslim community,aur aap daan me kisi ek do aadmiyo ko dekh rahe hain.lekin agar aap overall community wise dekhenge to aap payenge ke muslim community hi sabse zyada daan deti hai.aur afzal sahab kis dharm me nahi hai bhatke hue log.ye kaliyug hai.bhatakna to hoga hi.ye hamare upar hai ke hum bhatke hue logo se prerna lete hain ya un iimandar logo se jo un bhatke hue logo ki apeksha kai guna zyada maujud hain.achche musalmano ko dhundna nahi padega,aapke aas paas hi mil jayenge.lekin agar t.v par ya news paper me dhundna chahoge to bure musalmano se hi mulakaat hogi.kyoki aajkal media me bure musalmano ka hi ghar bana diya gaya hai.baki apni kamiyo ko door karna bahut hi achchi baat hai.har dharm me unke anuyaiyo dwara laayi hui kamiyo ko door karna hi hoga is baat me aap se sahmat hu.
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  • June 28, 2014 at 10:13 am
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    विषय अच्छा है नसीहत भी अच्छी है लेकिन मुसलमानों में बहुत सी बुराईयाँ उन्ही के पास से आयी हैं या उनकी ही लगाई हैं जिन्हें आप तरक्की की ओर जाता बता रहे| हैं | आज बुराईयाँ केवल मुसलमानों में नहीं सारे इंसानों में आती जा रही हैं | हर धर्म के इंसानों का यही हाल है | हाँ दुःख की बात यही है की मुसलमानों के पास कुरान है फिर यह कैसे गुमराह होते जा रहे हैं |

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    • June 28, 2014 at 1:15 pm
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      ”हर धर्म के इंसानो का यही हाल हे ” इस कड़वी सच्चाई से हमें अब रूबरू होना ही होगा सबका आज ये हाल नहीं हे पुरे ईसाई जगत में मुझे बताइये की कहा अब कैथोलिक प्रोटेन्स्टेंट की लड़ाई हो रही हे कही भी नहीं यहाँ तक की आयरलैंड में भी नहीं फीफा में देखिये हर गोरे देश में काले खिलाड़ी भी मौजूद हे और इधर मुस्लिम जगत का हाल देखिये पूरा मुस्लिम जगत शिया सुन्नी अरब गैर अरब में बटा हुआ हे क्या ईरान की टीम में कोई सुन्नी हे ?

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  • June 28, 2014 at 1:38 pm
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    अफज़ल भाई आपसे एक दरख्वास्त है आप की खबर की खबर साइट के अच्छे लेख होते है यहाँ बहुत अच्छे अच्छे लेख पब्लिश हो रहे है समय समय पर जिनकी सराहना भी होती रहती है जैसे प्रदीप दुबे जी के आर्टिकल दूरदर्शी , समयानुकूल , और जानकारियो से भरे होते है हमेसा कुछ नयापन होता है उनके आर्टिले में सच्चे अर्थो में कहे तो एक नयापन लिए होता है प्रदीप दुबे जी का आर्टिकल ! , आप के आर्टिकल भी बहुत रोचक और जानकारी भरे होते है सीमा के बंधन तोड़ते हुए मानवता के लिए लिखते है आप ! , प्रशून सर के आर्टिकल ब्यंग के साथ साथ जागरूकता पैदा करने वाले होते है ,! सिकंदर जी के आर्टिकल मानवता के प्रति संवेदना जगाने वाले होते है ! किन्तु एक लेख जिसने हमे बेहद आहात किया है दुखी किया है -( ब्रह्मणवादियो ने भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण दिया.)……लेखक = लायंस हन्नान अंसारी !
    उसे खबर की खबर से हटाने का आपको सुझाव भी देना चाहूंगी क्यों की आज के टाईम में ऐसे बेतुके लेख का कोई मतलब नहीं है यह विश्व मानवता के
    खिलाफ है ! इससे समाज में आराजकता कायम हो सकती है कृपया ऐसे काल्पनिक और बेबुनियादी लेख न प्रकाशित करें अपनी साइट पर वार्ना हम जैसे संवेदनशील लोग आपकी साइट से खुद को अलग करने पर विवस होंगे !

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  • October 30, 2017 at 11:54 pm
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    भाई muslaamnaao कुरआन और हदिसो पर चलो तुम धर्मके लिए जिओ हम पृथ्वी पे मस्त मौज करते जाएंगे
    एक दिन मुसलामन धर्म के लिए मारेंगें
    फ़ालतू की बात है इतिहास एक झूट हो सकता है हम सिर्फ उन्ही बातो को माने जो इंसानियत सिखाती हो…
    अगर मै इसलाम में रहता तो कुरआन और हदीस नही पढता बल्कि इंसानियत का धर्म पढ़के आगे बढ़ता…
    धर्म कुछ देता नही है बल्कि बुद्धि कुछ देती है…….
    अलाह होया भगवन बुद्धि मत बेचदो

    मुस्लिम राष्ट एक भी लोकतान्त्रिक नही है तुम धर्म के लिए मरो हम तुम्हारी मारेंगे ऐसा हो रहा हैपुरी दुनिया
    जीवनजीने के लिए संघर्ष करो नाकि धर्म के लिए जिओ धर्म कही भगा नही जा रहा है….shitty islam bulshit islamic country’s…

    कुरआन की हर एक बात अगर तुम दुनिया के रेडियो पर सुनाओगे तो हँसी के पात्र बन जाओगे…
    इसलिए विज्ञान पढो और विज्ञान पे चलो…
    कम से कम एक टीवी तो बानोलगे खुद्की…

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