क्या यज्ञ और हज एक ही है !

hajj
by– फरहाना ताज

काबा जो बैलुल्लाह यानी अल्लाह का घर माना जाता है, उसका अति प्राचीन नाम मक्ख-मेदिनी है और मक्ख-मेदिनी का मतलब होता है यज्ञभूमि। मक्का का काबा मंदिर वास्तव में काव्य शुक्र का मंदिर है। काबा काव्य का ही अपभ्रंश है। शुक्र का अर्थ जुम्मा अर्थात् बड़ा होता है और गुरु शुक्राचार्य बड़े ही माने जाते हैं।

यज्ञ करने वाला अपनी सांसारिक इच्छाओ और वासनाओ को छोड देता है और यज्ञ में पाक एवं बिना सिले सफेद वस्त्र पहनने की परम्परा वैदिक काल में रही है और यही सब हज के दौरान भी होता है, हाजी एहराम पहनते हैं यानी दो बिना सिले सफेद कपडे के टुकडे होते हैं।

यज्ञ हिंसा से रहित होता है और हज भी हिंसा से रहित होती है। मक्का का पाक क्षेत्र पूरी तरह सम्मानित है, ये लोग वेदो को तो भूल गए, लेकिन यहां पर फिर भी अल्लाह की सबसे पहली किताब वेदो के ही कानून का पूरी तरह पालन किया जाता है, वेद में किसी भी प्रकार की हिंसा या बलि का विधान नहीं और मक्का में यही वेदो का कानून आज भी चलता है, इस पाक क्षेत्र में कोई भी हाजी किसी भी जानवर, यहां तक की मक्खी और इससे भी आगे बढकर किसी प्रकृति यानी किसी पौधे को तनिक भी हानि नहीं पहुंचा जा सकते। हज यात्री का पूरा अस्तित्व अल्लाह को समर्पित हो जाता है। यदि अल्लाह को कुर्बानी पंसद होती तो काबा जो बैलुल्लाह यानी अल्लाह का घर माना जाता है, फिर यहां पर सबसे अधिक बकरे काटने के लिए हाजी साथ लेकर जाते? लेकिन यह क्षेत्र तो हिंसा से रहित है, क्योंकि यहां वेदो का कानून चलता है। पांच वक्त की नमाज का बहुत महत्व है। नमाज खुद संस्कृत का शब्द है यानी पंच और यज्ञ। और पांच का महत्व वेदो में ही है, जैसे पंचाग्नि, पंचपात्र, पंचगव्य, पंचांग आदि।

हज शब्द ही संस्कृत के व्रज का अपभंश है, वज्र का अर्थ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना है।

सफेद वस्त्रधारी हाजी काबा की सात परिक्रमाएं करते हैं, सात परिक्रमा का विधान पूरी तरह वेदो का है। सप्तपदी मंदिरो में होती है, सप्तपदी विवाह संस्कार में होती है यज्ञ के सामने। John Lewis Burckhardt लिखते हैं कि मुसलमानों में हज की यात्रा इस्लाम पूर्व की है। उसी प्रकार Suzafa और Merana भी इस्लाम पूर्व के पाक क्षेत्र हं और क्योंकि यहा Motem और Nabyk नाम के देवताओ के बुत होते थे। अराफात की यात्रा कर लेने पर यात्री प्रकार Motem और Nabyk की यात्रा करते हैं। N. J. Dawood ने कुरान के अंग्रेजी संस्करण की भूमिका में लिखा है कि कुरान का प्रत्येक शब्द स्वर्ग में लिखे हुए शिलालेख से अल्लाह ने देवूदत ग्रेबियल द्वारा मोहम्मद को जैसा सुनाया, वैसा लिखा गया। बाइबिल कहती है और स्वर्ग में ईश्वर का मंदिर खोला और उसके नियम का संदूक उसके मंदिर में दिखाई दिया। ईश्वर का ज्ञान चार संदूको में है। अब सच यह है कि सृष्टि के आरम्भ में ही अल्लाह ने चार मौलाओ यानी ऋषियों को अपना ज्ञान दिया, इसलिए अल्लाह का कानून वेद हैं।

हिन्दुओ में आचमन अंगस्पर्शन उसी आधार पर मुस्लिमो में वुजू ,मश्ह ..
हिन्दुओ में स्नान मुस्लिमो में गुसल ,,
हिन्दुओ का शोच मुस्लिमो का तय्युम (शौच में मिटटी लगाने के बाद पानी से धोते है मतलब शुधि करते है जबकि वहा तय्यम के बाद पानी से धोने के बारे में नियम नही है मिटटी लपटने के बाद बिना पानी धोये भी नमाज पढ़ सकते है )
हिन्दुओ में जप माला फिरना ,,,मुस्लिमो में तस्बीह ,तहलील करना …
हिन्दुओ का पाठ करना मुस्लिमो का तिलावत
हिन्दुओ का उपवास मुस्लिमो का रोजे
हिन्दुओ में दान पुन्य मुस्लिमो के खैरात व जकात
हिन्दुओ में बलिदान मुस्लिमो में सदक:
हिन्दुओ की तीर्थ यात्रा मुस्लिमो की हज्ज
हिन्दुओ की प्रदक्षिणा मुस्लिमो की तवाफ़ ..
हिन्दुओ का प्रायश्चित मुस्लिमो का कफार
हिन्दुओ का श्राद मुस्लिमो का फातिह:
हिन्दुओ का स्वर्ग मुस्लिमो की बहिश्त …
हिन्दुओ का नर्क मुस्लिमो की दोजख ..
हिन्दुओ का अक्षयवट मुस्लिमो का तूबा ..
हिन्दुओ की अप्सरा ,धर्मराज ,गण मुस्लिमो की हुरे , रिज्वान ,मलाइक
हिन्दुओ का चित्रगुप्त मुसलमानों का करामन
हिन्दुओ का यमराज मुस्लिमो का इज्राईल
हिन्दुओ का वेतरणी मुस्लिमो का पुले सिरात
हिन्दुओ का कल्पवृक्ष मुस्लिमो का सद्रह
हिन्दुओ की वारुणी मुसलमानों का शराबे तहुर
हिन्दुओ का ध्यान मुस्लिमो का मुराब्क
हिन्दुओ का कैलाश मुस्लिमो का अर्शे अजीम

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4 thoughts on “क्या यज्ञ और हज एक ही है !

  • September 12, 2015 at 9:41 am
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    क्या बेवकूफी भरा लेख है . यज्ञ और हज एक कैसे हो सकते है . लेखिका ने पता नहीं कहा कहा से के ला कर ताना -बना जोड़ा है . ऐसे लेख प्रकाशित नहीं होने चाहिए .

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  • September 12, 2015 at 9:46 am
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    अल्लाह ने सारे दीनों को और सारी आसमानी किताबों को एक दीन और कुरान में दे दिया और अल्लाह का हुकूम हुआ जो कल़मा पड़ेगा और मेरे नबी की बात मानेगा वो ईमान वाला होगा अब दूसरे पिछले धर्मों में इस्लाम की झलक मिलेगी ही इस में कोई शक नही अब सवाल ये है की जो अल्लाह पे ईमान लाएंगे नबीयो पे ईमान लाएंगे पिछली किताबों पे ईमान लाएंगे कलमा पड़ने के बाद पिछले जो करते थे वो सब छोड़ देंगे वो मुसलमान हैं

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  • September 12, 2015 at 2:59 pm
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    लेख़क जैसा जालेी है वैसा हेी इस्का लेख भेी जालेी है ये अष्ट वक्र से बकरा भेी बना सक्ता है ! हज से भज भेी बना सकता या सकतेी है ! उए और सफल प्रयोग होता !

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  • September 12, 2015 at 9:47 pm
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    Writer ek dam jahil hai…

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