काश्मीरी पंडित और मुस्लिम (नंगा सच)

kashmiri-pandits

इरफान नबी गनी सिर्फ 18 साल का था। बच्चा ही था। गायों को चराता था अचानक उसके पिता को उसकी लाश मिली जिसके सर पर भारतीय सेना ने बीचोंबीच गोली मारी और सर फटकर उसका भेजा बाहर आ गया यह घटना जून 2013 की है । कैसा होता होगा अपने बेटे के दिमाग को लोथड़े के रूप में जमीन पर गिरा देखना ? इरफान का कसूर ? वह भारत के एक ऐसे राज्य में रहता था, जहां सेना जब चाहे, जो चाहे कर सकती है।

28 जून 2013 को कश्मीर के बांदीपुरा में रविवार को दो युवक सेना की गोलीबारी में मारे गए थे तो 30 जुलाई को कश्मीर पूरा बंद था , शेष भारत जैसा नहीं कि दुकान का शटर आधा गिराकर दुकानदार चुपचाप अंदर बैठे रहते हैं और सामान बेचते रहते हैं बल्कि बियाबान सन्नाटा था पूरे काश्मीर में ।सेना ने बांदीपुरा की घटना के लिए माफी मांगी ली , इससे पहले भी कई बार मांगी है लेकिन वह ऐसा आगे भी करती रही है माफी मांगती रही है और जब हत्या करके माफी मांगने भर से काम चलने लगे तो समझ लेना चाहिए कि तानाशाही अपनी हदें पार कर रही है। क्या सेना के इस रवैये को सिर्फ इसलिए नजरअंदाज करते रहें कि कश्मीर में आतंकवाद है ? आतंकवाद है तो क्या मासूमों के कत्ल की सजा सिर्फ एक “माफी” है?

साल 2008 तक कश्मीर में 2000 से ज्यादा कब्रें बरामद हुई थीं। इस तरह की कब्रें दूसरे विश्व युद्ध के बाद मिला करती थीं जब हिटलर ने लाखों लोगों को कत्ल किया था।

कश्मीर को भारत अभिन्न अंग मानने वालों का खून ऐसी घटनाओं पर खौलता क्यों नहीं ? इरफान नबी गनी भारत का ही नागरिक था ना ? इस तरह एक मासूम भारतीय की मौत पर हमें गुस्सा क्यों नहीं आता ? हम मोमबत्तियां लेकर भारतीय सेना के खिलाफ सड़कों पर विद्रोह करते नजर क्यों नहीं आते ? दरअसल संघ ने जिस तरह औरंगज़ेब को हिन्दुओं के झूठे कत्लेआम का एक सबसे बड़ा हत्यारा बना दिया वैसे ही झूठ का सहारा लेकर काश्मीर के पंडितों की हत्याओं को आज़ाद भारत का सबसे बड़ा नरसंहार बना दिया और अपने समर्थकों के हृदय में यह भर दिया कि काश्मीर में मुसलमानों ने पचासों लाख काश्मीरी पंडितों को वहाँ से भगा दिया जो इधर उधर भटक रहे हैं और लाखों काश्मीरी पंडितों की हत्याएं कर दी ।जो विषय काश्मीर में एक समग्र आतंकवाद का था उसे हिन्दू और मुसलमानों में बांट कर काश्मीरी मुसलमानों को भारत से दूर कर दिया और वही काश्मीरी अब वह पाकिस्तान और आईएसआईएस का झंडा लहरा रहे हैं ।

इस लेख को लिखने का आशय उस सच को सामने लाना था जो संघ के लोग हर समय काश्मीरी पंडितों पर हुए अन्याय और कत्लेआम को शेष भारत के मुसलमानों के सामने रखकर उन्हें गालियाँ देना शुरु कर देते हैं ।इस लेख को लिखने के लिए जब मैने तथ्यों की पड़ताल करने के लिए गुगल किया तो हैरान रह गया देख कर कि काश्मीरी पंडितो की हत्या से संबंधित लगभग सैकड़ों भगवा वेबसाइट्स गलत आंकड़ों और तथ्यों के साथ किस तरह समाज में गलत तस्वीरें पैदा कर रही हैं और अधिकांश वेबसाइट एक ही लेखों और आंकड़ों के साथ झूठा प्रपंच फैला रही हैं , वेबसाइटों के नाम अलग अलग और उसपर उपलब्ध सामग्री सब एक जिसमें एक मात्रा का भी अंतर नहीं। उनके नामों से ही लगता है कि वह किस गिरोह की वेबसाइट्स हैं और किस उद्देश्य से हैं।

1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार भाजपा और वाम मोर्चा के सहयोग से बनती है और आज जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद तब भारत के गृहमंत्री बन जाते हैं , उनकी बेटी डाक्टर रूबिया सईद का आतंकवादी अपहरण कर लेते हैं तब देश को काश्मीर के आतंकवाद का पता चलता है , गृहमंत्री की बेटी देश से महत्वपूर्ण साबित हुई और विश्वनाथ प्रताप सिंह की नपुंसक सरकार काश्मीर के तब तक के सबसे बड़े पाँच आतंकवादियों को छोड़कर गृहमंत्री की लाडली की रिहाई कराती है , फिर हजरत बल दरगाह पर कब्ज़ा करके पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने देश को काश्मीर के आतंकवाद की ओर ध्यान दिलाया ।नरेन्द्र मोदी के पहले भारत में जगमोहन को मुसलमानों का सबसे बड़ा दुश्मन समझा जाता रहा है और वह इसलिए कि संघी जगमोहन संजय गांधी के गुंडा ब्रिगेड में टाप पर थे और दिल्ली के तुर्कमान गेट के झुग्गीवासियों पर जनरल डायर की तरह गोली चलवाकर जगमोहन ने 150 लोगों से अधिक को मृत्यु के काल में पहुंचा दिया था और 70000 से अधिक लोगों को बेघर कर दिया था ।संघ और भाजपा के दबाव में संघ के चहेते उसी जगमोहन को काश्मीर में राज्यपाल बनाकर भेजा गया और आतंकवाद प्रभावित काश्मीर को उन्होंने समग्र रूप से देखने की बजाए हिन्दू मुस्लिम के आधार पर विभाजित कर दिया ।पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की चपेट में सब आए सब मारे गये , कहीं काश्मीरी पंडित तो कहीं काश्मीरी मुस्लिम , हिन्दू भी मरे तो मुस्लिम भी मरे पर जगमोहन ने दोगलापन दिखाते हुए काश्मीर की घाटी से काश्मीरी पंडितों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया और संघ ने काश्मीरी पंडितों की लाशों को गिनना शुरु कर दिया जिससे पूरे भारत में बरगला कर ज़हर फैलाया जा सके , मुस्लिम काश्मीरी वहीं आतंकवाद से मरने के लिए छोड़ दिये गये ।दरअसल काश्मीर के आज की स्थिति के लिए जिम्मेदार जगमोहन ही है जिसने मुसलमानों से नफरत के कारण घाटी को निर्दोष लोगों के खून से लाल कर दिया और यह आजतक होता आ रहा है 2009 तक विकीपीडिया के अनुसार 47000 काश्मीरी मारे जा चुके हैं ( लिंक देखिए ) और इस 47000 में काश्मीरी पंडितों की संख्या कुल 209 मात्र है जिसमें 7 काश्मीरी पंडित संग्रामपुरा 21-22 मार्च 1997 , 25 जनवरी 1998 को वंधमा में 23 काश्मीरी पंडित , और नदीमार्ग में 25 जनवरी 1998 को 24 काश्मीरी पंडित मारे गये , बाकी जो हैं वह अलग अलग घटनाओ में मारे गये और यह आंकड़े “दी हिन्दू” और “इकनॉमिक्स टाईम्स” के दिए आंकड़ों के अनुसार हैं कोई मनगढंत आंकड़े नहीं हैं हालाकि 46600 अन्य मुसलमानों के मारे जाने की कोई चर्चा कहीं नहीं होती ।काश्मीरी विस्थापितों के संगठन “काश्मीर पंडित संघर्ष समिति” के अध्यक्ष संजय टिकू के अनुसार इन 20-25 वर्षों में काश्मीरी पंडितों की 399 तो प्रमाणित हत्याएं हुईं और यदि अप्रामाणित को भी जोड़ दें तो अधिकतम 600 काश्मीरी पंडितों की आतंकवादियों ने हत्याएं की जबकि इतने वर्षों में कुल लगभग 47000 ( 2009 तक ) हत्याएं काश्मीर में हुईं तो 46400 लोग कौन थे जिनको मारा आतंकवादियों ने ? निश्चित रूप से मुस्लिम थे।टिक्कू काश्मीरी पंडितो के 3000 या 4000 की हत्या होने की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हैं ।( लिंक देखिए ) ।

दरअसल संघ की अफवाहबाज टीम ने ऐसा प्रचारित कर दिया कि काश्मीर में केवल काश्मीरी पंडित ही मारे गये और यह मुसलमानों ने किया कि घाटी खाली हो जाए तो जो 46400 लोग मारे गये वह किस लिए ? क्या खाली करने के लिए ?

kashmiri-pandits-1जम्मू कश्मीर की सरकार के अनुसार मृतक काश्मीरी पंडितों के 399 परिवारों को लगभग 40 करोड़ का मुआवजा दिया जा चुका है ( लिंक देखिए ) । जगमोहन ने मुसलमानों को आतंकवाद से मरने के लिए छोड़ कर एक लाख चालिस हजार जो काश्मीरी पंडितों को घाटी से निकाला ( लिंक देखिए ) वह सरकारी मदद मुआवजे और पुनर्वास का सरकारी लाभ लेकर अपने अपने जगह पूरे भारत में या विदेशों में “सेट” हो गये हैं और सरकार की तमाम मदद और काश्मीर में फ्लैट देने के बावजूद भी वहां जाना नहीं चाहते क्योंकि वह यहीं रह कर सुखी हैं और काश्मीरी विस्थापितों के नाम पर मिल रहे सरकारी मदद को खाना चाह रहे हैं जैसे 84 के दंगों के प्रभावितों को सदैव कुछ ना कुछ मिलता रहता है ।ध्यान रहे कि केन्द्र सरकार ने सैकड़ों करोड़ का धन केंद्रीय बजट में इनके लिए दिया है ।कभी सुना है गुजरात मेरठ मलियाना हाशिमपुरा मुजफ्फरपुर कानपुर मुम्बई सूरत के दंगों में मारे गये परिजनों के लिए बजट मे एलोकेशन ? या रणवीर सेना के द्वारा बाथे लक्षमणपुर में 60 दलितों की हत्या हुई उनके परिजनों के लिए कोई एलोकेशन ? तब तो एक तरफ दंगा चलता रहा दूसरी तरफ सैफई में माधुरी दीक्षित ठुमके लगाकर सबका मनोरंजन करती रहीं । यही है दोगलापन । ध्यान दीजिये कि यदि देश सिर्फ काश्मीरी पंडितों के लिए रोता रहेगा और काश्मीर के अन्य लोगों को इग्नोर करता रहेगा तो हम कश्मीरियों को ना कभी अपना बना सकते हैं ना काश्मीर को बचा सकते हैं । जब मैं काश्मीर गया था तो एक काश्मीरी मुस्लिम ने मुझसे कहा था कि आप हिन्दू हो या मुस्लिम हम कश्मीरियों को फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हमारे घर से जब लाशें उठती हैं तो जो हमारे साथ हिन्दुस्तान का हिन्दू जो बर्ताव करता है वही आप जैसे मुसलमान , आप भी वही हो मेरे लिए जो हिन्दू है मेरे लिए ।

मेहरबानी करके मेरे सवालों के जवाब अब आगे कश्मीरी पंडितों का नाम लेकर मत दीजिएगा। कश्मीर में अब तक पिछले 30 साल में 70 हजार लोग मारे गए हैं। उनमें से कितने कश्मीरी पंडित हैं ? 399 या अधिकतम 600 ।अगर काश्मीरी पंडित काश्मीर को अपनी जमीन कहते हैं तो वहां जाएं, रहें और सामना करें जैसे वहाँ का मुसलमान कर रहा है । सच यह है कि उनके लिए भारत बाहें फैलाए खड़ा है और काश्मीरी मुस्लिम सेना और आतंकवादियों की दोहरी मार मार कर भी काश्मीर से कहीं अन्य नहीं जा पा रहा है । जबतक इस दोगलेपन को दूर नहीं किया जाएगा काश्मीर को पाने का बस सपना देखते रहिए ।

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http://www.bbc.com/…/04/150416_kashmiri_pandit_resettlement…

http://archive.indianexpress.com/…/209-kashmiri-pan…/305457/

http://articles.economictimes.indiatimes.com/…/29676901_1_k…

http://www.thehindu.com/…/219-kashmiri-pa…/article734089.ece

https://hi.m.wikipedia.org/…/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0…

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54 thoughts on “काश्मीरी पंडित और मुस्लिम (नंगा सच)

  • December 1, 2015 at 7:09 pm
    Permalink

    इस में कोई शक नहीं के जितना हंगामा किया गया के कश्मीरी पंडित के बारे में उतना कुछ कश्मीर में नहीं हुआ है , जब सरकारी आंकड़े ४००-६०० बता रहे है मेरे समझ से लाखो मुस्लमान मारे जा चुके है इस का कोई जिक्र नहीं होता- जाहिद साहब के एक सच्चे लेख के लये मुबारकबाद

    Reply
  • December 1, 2015 at 8:07 pm
    Permalink

    अब तो हमारा विश्वास पक्का हो गया कि इन लेखक महोदय के नाम जाहिद में “द” की जगह पर “ल” ही है.

    वैसे, तो हम बर्नार्ड शॉ के कथन में विश्वास करते हैं कि “Never restle with a …”

    फिर भी, ज्यादा समझदार लोगों के लिये बता दें कि जितने भी लिंक दिये गये हैं उनमें से एक भी खुलता नहीं. क्योकि लिंक खुलेगा तो असलियत सामने आ जायेगी.

    हमारा सवाल सिर्फ संपादक मंडल से है, क्या यह साइट सिर्फ मुसलमानों के हित को ध्यान में रख कर बनाई व संचालित की जा रही है जिसमें असत्य परोसा जाता है व फर्जी तरीके से आँकड़े बनाये जाते हैं. साथ ही दो बार हम भारत के नक्शे में विकृति देख चुके हैं, जो अपराध है.

    हम असहिष्णु तो नहीं पर हम निवेदन करते हैं कि विवेक से काम लेकर मूर्खतापूर्ण व असत्य लेख प्रकशित ना करें. लेखकों व सामग्री प्रदाताओं से भी अनुरोध है कि वे मर्यादा का उल्लंघन ना करें.

    Reply
    • December 1, 2015 at 8:34 pm
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      पहली बात तो यह कि आपको बात रखने और करने की बिल्कुल तमीज़ नहीं । वेबसाइट यहाँ नहीं खुल रही तो इसका अर्थ यह नहीं कि वेबसाइट्स गलत हैं । गुगल करके आप खुद भी यह आंकड़े प्राप्त कर सकते हैं ।मैने भी वहीं से लिया है । खुद बात करने की तमीज सीखिए भाई फिर सहिष्णुता पर प्रवचन दीजिए । हजार साईट्स हिन्दुत्व के प्रचार में बनाई गईं है और यदि एक वेबसाइट्स पर मुसलमानों के हक की कुछ पोस्ट आती हैं तो सच देखना और सुनने का जिगर रखिए।
      आपसे अनुरोध है कि गुगल कर लीजिए “काश्मीरी पंडित किल्ड इन काश्मीर” सारे डाटा मिल जाएगे ।

      Reply
      • December 1, 2015 at 9:01 pm
        Permalink

        तमीज पर प्रवचन देने की बजाय तमीज सिखने की जरुरत आप ही को हे !!… किल्ड का क्या मतलब हे ?? क्या विस्थापित को किल्ड की श्रेणी में रखा जाता हे ?? सैकड़ो ट्रेंड फौजी मार डाले कई लाख हिन्दुओ को उनके घरबार से बेघर कर दर-बदर कर दिया और अगर कुछ मुसलमानो की तो ब्लॉग पर ब्लॉग ?? शर्म भी नहीं आती ?? आणतंकियो के जनाजे में हज़ारो की भीड़ और ज्ञान बांटते हे अमन का ?? पता नहीं ऐसा दोहरापन बेशर्मी से दिखा कैसे लेते हे ?

        हर समय जाहिद साहब ब्लॉग के नाम पर झूठ का पुलिंदा उठाये घूमते रहते हे….

        Reply
        • December 1, 2015 at 9:06 pm
          Permalink

          कोई तथ्य दीजिए हवा हवाई संघी प्रोपगंडा किसी और को सुनाईयेगा महोदय। मैने जो तथ्य दिये हैं वह भारत सरकार के आंकड़े है ।सच कड़वा होता है मिर्च लगती ही है सच सुनकर। धन्यवाद

          Reply
          • December 1, 2015 at 10:52 pm
            Permalink

            मिर्ची हमें नहीं बल्कि आप सरीखों को ही लगती आई हे जो इस साइट को जी-तोड़ कोशिश के बाद भी उर्दू अखबार सरीखे कट्टरपंथ वाले साँचे में नहीं ढाल पाये ??
            अपनी बात शुरू करने से पहले हम आपको अपनी बात एक बार और पुख्ता तरीके से कहने की अर्ज करेंगे कि अलग-२ अखबारों और विकिपीडिआ में से कौन सा आपकी नज़र में “सरकारी आंकड़ा” हे ??

            चलिए शुरू करते हे १०अगस्त २०११ को ट्रिब्यून में छपी खबर से (हवा-हवाई नहीं बल्कि लिंक भी दे रहे हे) ….. जिसकी खबर भारतीय संसद में उस समय के डिप्टी होम मिनिस्टर जितेंद्र प्रसाद जी के हवाले से हे कि १९९०-२०११ के बीच (वे करीब दो दशक की बात कहते हे) ३९,९१८ लोग मारे गए जिनमे २१,३२३ आतंकवादी थे !!…… ((क्या आपके पास संसद में डिप्टी होम मिनिस्टर द्वारा रखी गयी गयी रिपोर्ट से भी विश्वसनीय कोई “सरकारी आंकड़ा हे” ?? आपके लिए विकिपीडिया सरकारी आंकड़ा हो सकता हे बाकियो के लिए नहीं क्योकि बाकियो का दिमाग घुटनो में नहीं हे और उनके लिए मुसलमान किसी दूसरे गृह का एलियन नहीं हे !! खैर जाने दीजिये और थोड़ा और खुलासा कीजिये कि आपके वाले ४६६०० और ४७००० वाले डेटा में से “सरकारी देता के अनुसार” मरने वाले आतंकवादियों की संख्या कितनी थी?? याद रखियेगा कि “सरकारी आंकड़ा” की बात पहले आपकी तरफ से आई थी )…….

            चलिए अब आपकी बारी , इस वार्म अप राउंड पर आपके जवाब के बाद आगे बढ़ते हे !!

    • December 1, 2015 at 8:52 pm
      Permalink

      http://www.bbc.com/hindi/india/2015/04/150416_kashmiri_pandit_resettlement_rd

      http://archive.indianexpress.com/news/209-kashmiri-pandits-killed-since-1989-say-jk-cops-in-first-report/305457/

      http://articles.economictimes.indiatimes.com/2011-06-19/news/29676901_1_kashmiri-pandit-jammu-and-kashmir-photo-exhibition

      http://www.thehindu.com/todays-paper/219-kashmiri-pandits-killed-by-militants-since-1989/article734089.ece

      https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6

      Reply
      • December 1, 2015 at 9:11 pm
        Permalink

        इसे अप्रूव्ड करें

        Reply
    • December 2, 2015 at 11:05 am
      Permalink

      मैं रंजन जी की बात से सहमत हूँ और इन्होने बिलकुल सही कहा … ये जाहिल एक आतंकवादी से कम नहीं है..
      मुस्लमान मरे हैं पर आतंकवादी, अगर ऐसा ही था, तो जो मुस्लिम पहले कम आबादी के थे उनका आज वर्चस्व कैसे हो गया..

      Reply
    • December 2, 2015 at 11:31 am
      Permalink

      रंजन सर मैं आपके पहले लाइन से सहमत हूँ और ये विचार मैंने इन महाशय के कई लेख इसी वेबसाइट पर पढ़ कर बनाया है! कई का तो मुहतोड़ जवाब भी दिया जिसके बाद ये महाशय तर्क करने की स्थिति में भी नहीं रह गए थे! आज तर्क कर रहे है (तर्क कहा भी नहीं जा सकता) क्योंकि इनके पास कुछ लिंक हैं! लेकिन ये मुसलमानो (? – क्योंकि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता) की हत्या (? – क्योंकि ये आतंकवादियों के खिलाफ करवाई थी) दिखा कर कश्मीरी पंडितो पर हुए अत्याचार की जघन्यता को काम कर के दिखाने की कोशिश कर रहे हैं!

      Reply
  • December 1, 2015 at 8:26 pm
    Permalink

    रंजन सर लेख से में भी सहमत नहीं हु लेकिन आपमें और हममे फर्क ये हे की हमने दूसरी साइट पर कश्मीरी पंडितो के नाम पर भड़का रहे संघियो की टिप्पणियॉ का और ” छी ” न्यूज़ की घिनोनी रिपोर्टिंग का भी तगड़ा विरोध किया था जबकि आपने वहाँ हमेशा की तरह चू तक नहीं की थी

    Reply
    • December 1, 2015 at 8:37 pm
      Permalink

      वेबसाइट यहाँ नहीं खुल रही तो इसका अर्थ यह नहीं कि वेबसाइट्स गलत हैं । गुगल करके आप खुद भी यह आंकड़े प्राप्त कर सकते हैं ।मैने भी वहीं से लिया है । खुद बात करने की तमीज सीखिए भाई फिर सहिष्णुता पर प्रवचन दीजिए । हजार साईट्स हिन्दुत्व के प्रचार में बनाई गईं है और यदि एक वेबसाइट्स पर मुसलमानों के हक की कुछ पोस्ट आती हैं तो सच देखना और सुनने का जिगर रखिए।
      आपसे अनुरोध है कि गुगल कर लीजिए “काश्मीरी पंडित किल्ड इन काश्मीर” सारे डाटा मिल जाएगे । मेरे डाटा बिल्कुल तथ्यों पर हैं कोई गलत साबित नहीं कर सकता ।यह पोस्ट करीब 2 लाख लोगों तक पहुंच चुकी है ।

      Reply
    • December 2, 2015 at 8:38 am
      Permalink

      “हमारा सवाल सिर्फ संपादक मंडल से है, क्या यह साइट सिर्फ मुसलमानों के हित को ध्यान में रख कर बनाई व संचालित की जा रही है जिसमें असत्य परोसा जाता है व फर्जी तरीके से आँकड़े बनाये जाते हैं. साथ ही दो बार हम भारत के नक्शे में विकृति देख चुके हैं, जो अपराध है.

      हम असहिष्णु तो नहीं पर हम निवेदन करते हैं कि विवेक से काम लेकर मूर्खतापूर्ण व असत्य लेख प्रकशित ना करें. लेखकों व सामग्री प्रदाताओं से भी अनुरोध है कि वे मर्यादा का उल्लंघन ना करें.”

      जवाब का इन्तजार है….

      Reply
      • December 2, 2015 at 2:04 pm
        Permalink

        अरे सर आप बात बात पर संपादक मंडल का गला क्यों पकड़ लेते हे ? लोकतंत्र में सबको” गलत बात ” कहने का भी अधिकार हे वो गलत कह रहे हे तो करेक्ट कीजिये जब तक भाषा शालीन हे तब तक गलत बात भी अफज़ल भाई प्रकाशित कर रहे हे तो इसमें हर्ज़ क्या हे ?

        Reply
        • December 3, 2015 at 5:33 pm
          Permalink

          भारत का नक्शा गलत छापने के लिये संपादक मंडल जिम्मेदार है. और बात बात पर मुस्लिमों पर अत्याचारों की फर्जी कहानी सुनाने वाले जाहिल साहब को थोड़ा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुसलमानों के बारे में भी सोचना चाहिये.

          और हाँ, यह तो हम भूल ही गये, कि पाकिस्तान ने उसी कश्मीर का एक हिस्सा चीन को दे दिया है जिस पर सारे कश्मीरी मुसलमान और कश्मीरियों के तथाकथित हमदर्द चुप्पी लगाये बैठे हैं.

          हद है, जहालत की…

          Reply
          • December 3, 2015 at 6:23 pm
            Permalink

            अरे कौन सा गलत नक्शा कब ? और कौन से गलत नक़्शे से ही भारत के हाथ से जमीं निकल कर कही और चली जायेगी ? कौन सा सिनेमा हाल के मूड में राष्ट्रगान पर खड़ा ना होने से आदमी देशभक्त हो जाएगा ये सस्ती देशभक्ति या सस्ती धर्मभक्ति किसी भी वैचारिक आदमी को शोभा नहीं देती और ये क्या हे की वहा ऐसा हो रहा हे ? वहा ऐसा क्या हम कोई भी मुद्दा ” जाओ पहले इसके उसके किसके किस किस के साइन लेकर आओ उस्तरा किस्तरा ” क्या इसके बिना भारत में कोई मुद्दा डिस्कस नहीं हो सकता जब भी भारत में आज की बात हो रही तो या तो मुस्लिम देशो की सेर या फिर इतिहास की सेर क्या ये अनिवार्य हे ?

  • December 1, 2015 at 8:46 pm
    Permalink

    मै चैलेंज देता हूँ कि मेरे तथ्यों को कोई गलत ठहरा दे। सारे आंकड़े सरकार द्वारा जारी आंकड़े हैं और गुगल कर के आसानी से प्राप्त किये जा सकते हैं ।

    Reply
    • December 1, 2015 at 11:06 pm
      Permalink

      शांत महाबली शांत इतने उतावले क्यों हो अभी सच सामने आ जाएगा !! मेहरबानी करके अपने द्वारा दी गयी ४७००० और ४६००० की संख्याओ को कौन से सरकारी आंकड़े से लिया हे उसका सोर्स बताइये (लिंक नहीं भी देंगे तो चलेगा) पर विकिपीडिया सरीखे खरे और नंगे सच नहीं क्योकि विकिपीडिया के डेटा की जिम्मेदारी तो उसके मालिक भी नहीं लेते 🙂

      Reply
  • December 1, 2015 at 8:54 pm
    Permalink

    http://www.bbc.com/hindi/india/2015/04/150416_kashmiri_pandit_resettlement_rd

    http://archive.indianexpress.com/news/209-kashmiri-pandits-killed-since-1989-say-jk-cops-in-first-report/305457/

    http://articles.economictimes.indiatimes.com/2011-06-19/news/29676901_1_kashmiri-pandit-jammu-and-kashmir-photo-exhibition

    http://www.thehindu.com/todays-paper/219-kashmiri-pandits-killed-by-militants-since-1989/article734089.ece

    https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6

    Reply
  • December 1, 2015 at 9:01 pm
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    जाहिद साहब आप की बात मन लेता हु सही है , मगर क्या वह पंडितो पे जुल्म नहीं हुआ है ? वह के नेता फारूक अब्दुल्लाह ने कहा के फ़ौज दहशतगर्द का मुक़ाबला नहीं कर सकती और कश्मीर पाकिस्तान का है .ऐसे ब्यान को किया कहा जाए . इस बात से सहमत हु के फ़ौज ने कुछ निर्दोष मुसलमानो को मार है , फ़ौज भी क्या करे आतंकवादी के चक्कर में कुछ निर्दोष मार दिए हो गे.

    Reply
    • December 1, 2015 at 9:10 pm
      Permalink

      बिल्कुल हुआ है पर सिर्फ काश्मीरी पंडितों पर नहीं मुसलमानों की भी हत्याएं हुईं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2011 तक 70000 मौतें हुईं। काश्मीरी पंडितों के लिए भारत हाथ फैलाए खड़ा था तो वह चले आये पर अन्य काश्मीरी के पास कोई विकल्प नहीं था तो वह मरने के लिये वहीं रह गये । यही है मुख्य समस्या है कि काश्मीरी अपने को भारतीय नहीं सभझते।धन्यवाद

      Reply
  • December 1, 2015 at 9:22 pm
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    आज गूगल अचानक विश्वसनीय हो गया:) जाहिद साहब उसी गूगल पर इस्लाम के बारे में हज़ारो वेब-साइट्स ने काफी कड़वी बाते लिखी हे आपकी इज़ाज़त लेकर अगर हम उनको यहाँ पोस्ट करे तो क्या आप उन पर यकीं करने का कलेजा रखते हो ?? यक़ीनन नहीं !! इसलिए अपने एकतरफा ब्लॉग्स लिखने से पहले दोनों पक्षों के बारे में सही बाते (कड़वी भी हो तो कोई बात नहीं) लिखेंगे तो बेहतर होगा अन्यथा मज़बूरी में हमें भी अपना स्तर आप तक उठाना पड़ेगा…..

    साइट के बाकी मुस्लिम पाठको से एडवांस में क्षमा अगर आप जाहिद साहब की एकतरफा बातो पर शांत रहते हो या उनको समर्थन देते हो तो प्लीज बाद में हमारे कमेंट्स पर गंगा-जमुनी तहजीब टाइप का ज्ञान देने मत आइये। …शुक्रिया

    Reply
    • December 1, 2015 at 10:27 pm
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      गूगल पर तो करोड़ो लिक है. लेकिन वो विस्वस्नीय नहीं हो सकते. लेकिन जो अकड़े सरकारी वेबसाइट पे है वो तो काफी हद तक विस्वस्नीय है.

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      • December 2, 2015 at 5:32 am
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        कौन सी सरकारी वेब-साइट दिख गयी आपको सामने मुस्लिम देखा और दिमाग का चलना बंद?? मुसलमान पोस्ट करे तो गूगल सबसे बड़ा सच और उसी गूगल के लिंक कोई और पोस्ट करे तो सिरे से नकारते हो ः)
        यही कुछ हरकते हे जिसकी वजह से आज दुनिया की कोई भी कम्यूनिटी मुसलमानो के साथ आकर राजी नहीं….हर समय दोहरापन झेलने का दम और टाइम हे किसके पास ??

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  • December 1, 2015 at 10:57 pm
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    चिश्ती साहब आग में घी डाल कर भागने की बजाय खुल कर तर्कपूर्ण तरीके से तथ्य सामने रख कर बात कीजिये खुले डिस्कसन की दावत आपको भी हे 🙂

    Reply
  • December 1, 2015 at 11:22 pm
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    This time something from your favorite Wikipedia link:)….

    https://en.wikipedia.org/wiki/Human_rights_abuses_in_Jammu_and_Kashmir#Exodus_of_Kashmiri_Pandits

    The violence was condemned and labelled as ethnic cleansing in a 2006 resolution passed by the United States Congress.[105] …….It stated that the Islamic terrorists infiltrated the region in 1989 and began an ethnic cleansing campaign to convert Kashmir to a Muslim state…….. According to the same, the population of Kashmiri Pandits in Kashmir ….”had declined”…. from 400,000 in 1989 to 4,000 in 2011.[106]

    The CIA has reported nearly 506,000 people, about half of which are Pandit Hindus are displaced due to the insurgency.[95]

    Post-1989, Kashmiri Pandits and other minority groups in Jammu and Kashmir have been targets of jihadi elements which India alleges and blames on the Inter-Services Intelligence.[109] …..The Kashmiri Pandits….., a community of Hindu Brahmins, “then comprising 5% of the population of the state”……. were the primary targets of Islamic militants, who also sought to also eliminate Kashmir’s record of 5000 years of Hindu Sanskrit culture and scholarship as well as the tolerant indigenous multiculturalism referred to as Kashmiriyat.[110] As many as 400,000 Kashmiri Pandits are estimate to have fled the state due to being targeted and threatened by militant groups.[111] In 1989, attacks on Pandits escalated and …..Muslim paramilitaries selectively …..”raped, tortured and killed Kashmiri Pandits”….., “burnt their temples, idols and holy books”…..contd…

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    • December 1, 2015 at 11:25 pm
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      Not only hindus but Other minorities such as Kashmiri Sikhs were also targeted.

      According to Chitkara, the killing of Sikhs near Anantnag in 2001, by the Jehadis was aimed at ethnic cleansing.

      Hindus have migrated from most of the Kashmir valley, Sikhs who form a very small percentage could be forced to migrate in the wake of such killings.[112]

      …………The Lashkar-e-Taiba has been blamed by Indian government for the Chittisinghpura massacre, which …..”killed 36 Sikhs”….. at the time of Clinton‘s visit to India.[113] ??

      Question–>Jahid sahab can you recall when Indian troops or other minorities killed 36 Muslims in a single incident ??

      Reply
  • December 2, 2015 at 11:14 am
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    हम्ने इस्मे कुच् लिखा था , अब उस्को हता क्यो दिया गया है

    Reply
  • December 2, 2015 at 11:22 am
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    ” 84 के दंगों के प्रभावितों को सदैव कुछ ना कुछ मिलता रहता है ।ध्यान रहे कि केन्द्र सरकार ने सैकड़ों करोड़ का धन केंद्रीय बजट में इनके लिए दिया है ” ये बात जायज़ लगती हे चौरासी के पीडितो के जख्मो पर कब का मरहम लग चूका हे कांग्रेस ने माफ़ी भी मांग ली एक सिख को दस साल के लिए पि एम भी बना दिया फिर भी चौरासी को ठंडा नहीं होने दिया जाता ताकि कोंगेस को जलील किया जा सके जबकि सिख इतने समृद्ध हे ही फिर सरकारों ने भी पूरी सहायता की ही हे फिर भी चौरासी चौरासी चौरासी का राग अलापा जाता हे वैसे इसमें दोष कांग्रेस और उसके समर्थको का ही हे जो खा खा के मुटियाते रहते हे लेकिन पार्टी के लिए कुछ नहीं करते हे दस साल तक सत्ता सुख भोगने वाले कपिल सिब्बल को देखिये सलमान खुर्शीद को देखिये जबकि इनकी तुलना मुख्तार अब्बास से करिये जो सौलह साल तक केंद्रीय मंत्रमंडल से दूर रहे मगर काम करते रहे

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  • December 2, 2015 at 1:16 pm
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    कितने भी परदे दाल लो।इस्लाम ने जो घाव भारत अपने प्रथम आक्रमण से ले कर अब तक दिए है।
    जितनी हत्याए बलात्कार लूटपाट इस्लाम ने भारत में की जितना घटिया रूप भारतीयो ने इस्लामिक अतगवाद का देखा है ।।उसके सामने तो वर्त्तमान में isis की ठीक वैसे ही इस्लामिक मानसिकता और अत्याचार कुछ भी नहीं।।
    मुसलमानो पर विस्वास करना इनसे किसी भी तरह के सम्बन्ध रखना या इनसे भाईचारे की बात सोचना भी आत्मघाती होगा।इस सत्य को कुदरत भी नहीं झुटला सकती।।
    रही बात कश्मीरी हिन्दुओ के कत्लेआम की।तो जितने भी परदे दाल लो इस्लामिक धोके क्रुरता और आतंकवाद की जीती जागती मिसाल है कश्मीरी हिन्दुओ का कत्लेआम।

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    • December 2, 2015 at 3:54 pm
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      बिलकुल सही कहा विशाल जी !! दरअसल कुछ मुसलमानो को लगता हे कि थोड़ा हल्ला ज़ोर से मचा लेंगे तो लोग उनकी फुंसी को केन्सर वाली सहानुभूति दे देंगे पर भला हो सोशल मीडिया का क्योकि जरा सी राई को पहाड़ बना कर दिखाने कि कुछ मुस्लिम ब्लोगर्स कि इस चाल से अब हर वैबसाइट पर लोग पहचान चुके हें

      कश्मीर मे छत्तीसिंघपुरा मे आतंकी ग्रुप लश्कर-ए-तैयब्बा ने एक साथ 36 निर्दोष सिखो को एक लाइन मे खड़ा कर गोलियो से भून दिया उस पर ज़ाहिद साहब के मुह से बोल नहीं फूटे और किसी एक युवक और दो युवको कि मौत पर राजनीति कर रहे हे ?? अरे मौत किसी भी निर्दोष कि हो उसका विरोध होना चाहिए पर 36 मौतों पर मुह पर फेविकोल चिपक जाये क्योकि वे गैर-मुस्लिम यानि सिख (या फिर हिन्दू हो) और 2-4 कि मौत पर छाती-पीट स्यापा क्योकि वे मुसलमान थे ?? क्या यह तरीका किसी कि निगाह मे भी सही हे ?? ज़ाहिद साहब पहले 36 अलग-2 मुस्लिमो कि मौत का डाटा इकट्ठा करने पर मेहनत कीजिये क्योकि 36 निर्दोष गैर मुस्लिमो कि मौत पर तो आप शुतुरमुर्ग कि तरह रेत मे गार्डन घुसए रहोगे??……..हम आपकी तरह बेसिरपैर के नफरत फैलाने वाले मैसेज से बचना चाहते थे पर लगता हे कि उससे आप जैसे लोग मजबूत होंगे इसलिए आगे से आपके ब्लॉग पर अपना नागरिक कर्तव्य अवश्य निभाएंगे !!

      ज़ाहिद साहब से सवाल–> कोई शक नहीं कि इरफान नबी गनी भारत का ही नागरिक था पर क्या वे 36 निर्दोष सिख भारत के नागरिक नहीं थे ?? क्या उन मासूमो कि मौत पर आपको गुसा आया था ?? अगर आया था तो ब्लॉग 36 मौतों कि बजाय इक्का-दुक्का मौतों पर क्यो जबकि 36 तो इक्का-दुक्का से ज्यादा ही होते हे ??
      माफ कीजिये आप अपने ब्लॉग मे बेगुनाहों कि हत्याओ को भी मजहबी आधार पर सोच कर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से राजनीति करो और आपको पाठको का समर्थन मिले ऐसा अब संभव नहीं हे।

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    • December 3, 2015 at 5:08 pm
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      आपकी बातो को एक बार के लिए सत्य भी मान लिया जाए तो आप की राय मे समाधान क्या है? डेढ़ अरब लोगो को गोलियों से भून दें? आप जैसे लोग ही आतंकवाद को जन्म देते हैं.

      Reply
      • December 3, 2015 at 6:11 pm
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        जैसे हुर्रियत की राय में समाधान ये हे की कश्मीर को स्विट्ज़रलैंड की तरह आज़ाद देश बना दो जहा यह लोग महाराजा हरी सिंह की तरह मौज़ से राज़ करे वैसे ही विशाल जैसे खफ्तियो की राय में समाधान ( जिसे रंजन सर जैसे लोगो का मौन समर्थन प्राप्त हे ) ये हे की मुसलमानो के अत्याचार बता बता बता कर हिन्दुओ को एकजुट किया जाए और इस फ़र्ज़ी एकता के सहारे मोदी भाजपा संघी बज़रंगी आर्य सभा सनातन सभा आदि आदि को सत्ता कुर्सी चंदा जमीन मिले और ये मौज़ करे इति सिद्धम

        Reply
        • December 3, 2015 at 11:09 pm
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          समस्या तो यह है हयात भाई कि समाधान तो हम चाहते ही नही ,चाहते तो अब तक निकाल लेते हम आज भी उसी जगह बैथे है जहा से ७० साल पहले चले थे वास्तव मे ना तो पाकिस्तान को कश्मीरी मुसलमानो मे इन्ट्रेस्ट है ना ही भारत को हिन्दुओ मे बल्कि कश्मीर मे गिरने वाला हर शव चाहे वो सैनिक हिन्दु या मुस्लिम किसी का भी हो उस बह्ते हुये खजाने की कीमत है जिस पर दोनो ही देश एकाधिकार चाहते है

          Reply
  • December 2, 2015 at 3:35 pm
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    ज़ाहिद साहब आपके जवाब का इंतजार हे उसके बाद आप ही द्वारा उठाए गए कई बिन्दुओ पर आपकी राय और पाठक मित्रो की प्रतिकृयाए लेनी बाकी हे।

    Reply
  • December 3, 2015 at 9:25 am
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    मोहम्मद ज़ाहिद साहब, आपकी इस बात से तो मैं पूर्ण सहमत हूँ कि कश्मीरी पंडितों पे ओछी राजनीति बीजेपी ने करी है और अब भी कर रही है. कश्मीर को लेके उसका पूरा स्टैंड, सिर्फ़ शेष भारत से ध्रुवीकरण कर वोट बटोरना है.
    लेकिन आपकी यह बात क़ाबिले एतराज है कि जितने भी कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड़ी, वो सरकार से मिली-भगत के तहत छोड़ी. कोई भी अपना मूल निवास तब तक नही छोड़ता, जब तक वहाँ के हालात, बहुत बुरी स्थिति तक प्रतिकूल ना हो.

    हमे यह बात उठानी चाहिए कि कश्मीरी अलगाववाद के शिकार, सिर्फ़ हिंदू ही नही हुए, कश्मीरी मुसलमान भी हुए हैं. सेना की ज़्याददती मे भी उनका नुकसान हुआ है. हमे यह भी बात याद रखनी होगी कि घाटी मे सेना के प्रवेश का द्वार, अलगाववादियो ने ही खोला, अब वो भी सेना के अत्याचार को अलगाववाद का कारण बता रहे हैं, लेकिन अलगाववादी आंदोलन के शुरुआत मे तो वहाँ सेना नही थी.

    आज कश्मीरी जिसमे अधिकांश मुस्लिम ही हैं, कि बदहाली और नारकीय जीवन के लिए, कश्मीर के अलगाववादी ही सबसे ज़िम्मेदार है, अत्याचार की लड़ाई मे उनका साथ तो हमे कतई नही देना.

    अलगाववाद को हिंदू-मुस्लिम रंग भी इन्ही कश्मीरी अलगाववादियो ने दिया. इन अलगाववादियो मे एक भी गैर-मुस्लिम नही है. और ये तमाम अलगाववादी लोग कम या अधिक राजनैतिक इस्लाम से प्रेरित हैं. राजनैतिक इस्लाम, दुनिया के हर हिस्से मे हिंसक और रक्तरंजित राजनैतिक संघर्ष मे तब्दील होता जा रहा है.
    कश्मीर की समस्या, कई पहलुओं मे चेचन्या, फ़िलिस्तीन, सीरिया, इराक़ या यमन और अन्य से मिलती है.
    राजनैतिक इस्लाम का विरोध, मुस्लिम समुदाय के भीतर से उठना शुरू हुआ है, लेकिन निर्णायक मुकाम तक पहुँचने मे इसे समय लगेगा. जितना जल्दी हम उस तक पहुँचेंगे, मानव-जाति के लिए उतना ही बेहतर होगा.

    Reply
    • December 3, 2015 at 10:52 am
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      जाकिर भाई यु समझ लीजिये की जो कुछ ज़ाहिद साहब ने कहा वो सब उर्दू अखबारों का व्यू हे ज़ाहिद साहब का हर लेख उर्दू अखबारों की प्रतिध्वनि होता हे बाकी जो लोग कश्मीरी पंडित को ही दुनिया का सबसे बड़ा पीड़ित मानते मनवाते हे ये सब पाञ्चजन्य की रिपोर्टिंग हे जुलुम हुए हे बेशक मगर ये सभी ( उर्दू अखबार पाञ्चजन्य छी न्यूज़ एंड पार्टी ) इन सब बातो को बेहद बढ़ा चढ़ा कर एकतरफा अंदाज़ में बताते हे कारण की इनमे इंसानियत की कमी हे और मेन मुद्दा इनके राज़नीतिक हित हे हालांकि इन मामलो में संघी प्रोपेगेंडा आज सबसे प्रभावी हे दूसरी तरफ ये कांग्रेस समर्थको की हरामखोरी हे की वो आज तक इतना भी नहीं करते की जिन कश्मीरी पंडितो और चौरासी के पीडितो को इतना मुद्दा पचीसियो बरसो से बनाया जा रहा हे उनकी सही हालात इतनी अधिक सहायता मिलने के बाद क्या हे ? ये ठीक से बताय ? असल में एक भी कांग्रेस समर्थक मिडिया हे ही नहीं दूसरी और छी न्यूज़ को देखिये और भी कई चैनेलो को देखिये

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  • December 3, 2015 at 11:45 am
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    जो अब तक होता आया हे उम्मीद के मुताबिक़ अब भी वाही हुआ:) सच को स्वीकारने में इस बार भी हयात भाई, जाकिर भाई और अफज़ल साहब टी तिकड़ी के अलावा किसी एक भी मुस्लिम की आवाज़ बाहर से नहीं जुड़ती दिखी जबकि इस साइट को कई देशो में देखा जाता है ?? कैसे बनेगा भरोसा ?? क्या लोग मुस्लिमो की सोच पर गलत सवाल उठाते हे ??

    हयात भाई यहाँ न “ज़ी न्यूज़ हे और न ही “एनडीटीवी” या कोई और चैनल जिसकी रिपोर्टिंग की आड़ लेकर हम अपने बचाव करे। … यहाँ हम और आप हे और हमें सच लिखने के लिए किसी और की तरफ देखने की जरुरत नहीं हे क्योकि हम नेता नहीं हे बल्कि तकलीफ झेलने वाले आम लोग हे पर जब हम ही राजनीति का हिस्सा बन जाएंगे तो फिर ऐसे दिन (अपनी अपनी नज़र में अच्छे या बुरे) आने से कोई नहीं रोक पायेगा !!

    १- कश्मीर से लाखो हिन्दू सिख परिवार विस्थापित हुए क्या सरकार की विफलता नहीं हे ?? इस्लाम अमन का मजहब होगा पर असलियत में कश्मीर में हिन्दुओ के साथ उनके मुस्लिम पड़ोसियों का व्यवहार किसर छुपा हे??

    २-आतंकवादी हज़ारो की संख्या में मारे गए यानी कई हज़ार अभी भी वह होंगे?? क्या यह कश्मीर राज्य की सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की विफलता नहीं हे ??

    ३-भीड़ के हुजूम जब तब सेना पर पथराव और गोलीबारी करते हे क्या यह कश्मीर सरकार की प्रशासनिक विफलता नहीं हे??

    ४-आतंकवाद के चलते राज्य को सबसे ज्यादा पैसा और निवासियों को रोजगार देने वाले कश्मीर के पर्यटन उद्योग की कमर टूट गयी और हालत या हैकि दाल झील पर एक ही दिन में अपने इकलौते शिकार (सजी-धजी नाव) के दम पर कई हज़ार कमाने वाले अब कई दिन में एक हज़ार नहीं कमा पा रहे हे ?? क्यों?? क्या इस हालात के पाञ्चजन्य की पत्रकारिता और बीजेपी जिम्मेदार हे ?? अपने काम-धंधे छोड़ कर आतंकवाद और अलगाववाद की अफीम की पिनाक में कश्मीर को बर्बाद करे वह के स्थानीय लोग और ठीकरा दुसरो के सर ?? वाह भाई बाह !!

    ५-कितने लोग खड़े हुए अपने ही राज्य मे आतंकवाद के खिलाफ ??

    कौन मुस्लिम लिखेगा कश्मीर का सच बयान करता हुआ ब्लॉग ??

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  • December 3, 2015 at 1:09 pm
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    शरद साहब, आप इसका दोषी किसको मानते हैं? फिर इसका क्या समाधान देखते हैं? समस्या बताने से तो कोई हल नही निकलता.

    आप ये देखिए कि कश्मीर के अलगाववादी आंदोलन मे शेष भारत का मुसलमान शामिल नही हुआ. यहाँ तक कि विश्व की एक तिहाई मुस्लिम आबादी के बावजूद, अन्य वैश्विक इस्लामिक चरमपंथी संगठनो मे भी भारत के लोग नगण्य है.

    इस साइट पे आपको तीन मुस्लिम ही नज़र आए, जो आपकी नज़र मे संतुलित नज़रिया रखते हैं, तो ये भी तो बताइए कि यहाँ कितने लोगो की प्रतिक्रियाए आई है? ये साइट कितने भी देशो मे देखी जाती हो, सक्रिय लोग कितने हैं?

    इसमे तो कोई भी शक नही कि मुस्लिमो का एक बड़ा वर्ग, सियासत से मज़हब को अलग देखने पे सहमत नही दिखता, इसकी मिसाल, अधिकांश मुस्लिम बहुल मुमालिको का गैर-सेकुलर होना है. लेकिन यह भी गौर-तलब है कि चरमपंथ के कारणो की पड़ताल मुस्लिम समुदाय मे भी बढ़ रही है. और राजनैतिक इस्लाम पे मुस्लिम समुदाय के भीतर भी चर्चा शुरू हो गयी है.
    हाल के वर्षो मे युवा लोगोके आंदोलन से बांग्लादेश के इस्लामिक राज्य से सेकुलर होने की घटना भी उल्लेखनीय है.
    आप समाधान की किसी भी थ्योरी को ले, अगर वो उदारवादी मुस्लिमो के साथ और विमर्श पे ज़ोर नही देती है तो अव्यावहारिक है, और समस्या को उलझाएगी ही.

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  • December 3, 2015 at 6:38 pm
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    ये सस्ती देशभक्ति या सस्ती धर्मभक्ति बहुत ही घिनोनी चीज़ हे इनका असली चेहरा हमने कई बार देखा हे मुंबई में तीन बंगलो का मालिक एक पत्रकार शहीद हेमराज का सर काटे जाने पर लिखता था की देश के नेताओ को यानी कांग्रेस मनमोहन राहुल सोनिया ही न को चार जूते लगाने का मन करता हे ( कांग्रेस की सहिष्णुता देखिये क्या आज किसी की मजाल हो सकती हे ये सब लिखने की ? ) मेने तब कई कॉमेंट दिए थे मेने कहा था साले जूते तो तुम्हे पड़ने चाहिए पत्रकारिता के नाम पर दलाली करते हो ये उसने खुद ही साबित कर दिया जब मोदी जी के आने के बाद भी सरहद पर इतने बेगुनाह मारे जा चुके हे मगर अब नहीं लिखता की चार ——- ? ज़ाहिर हे की इनका मकसद जनता के आक्रोश को एक खास पार्टी के समर्थन में मोड़ना था वास्तव में ये वही पांच सौ लोग और उनके एजेंट हे जिनके बारे में करामात अली ने लिखा था https://khabarkikhabar.com/archives/2318

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  • December 4, 2015 at 10:15 am
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    देरी के लिए क्षमा….
    जाकिर साहब समाधान किसी समस्या का होता हे हमें तो आज तक समझ में नहीं आया कि कश्मीर की समस्या क्या हे क्योकि आज तक कोई कश्मीरी नेता, अलगाववादी ग्रुप, ब्लॉगर ये साबित नहीं कर पाया कि कोई देश कभी इतिहास में रहा हो ?? जब कश्मीर कोई देश था ही नहीं तो आज़ादी किस बात की ?? हमारी नज़र में कश्मीर कोई समस्या नहीं बल्कि पाकिस्तान द्वारा फेके टुकड़ो पर पलने वाले कुछ कश्मीरी नेताओ की महत्वकांशा और निजीस्वार्थ हे !!

    ये तो पक्का हे कि कश्मीर को अलग देश की मान्यता न पाकिस्तान देगा न भारत और न ही चीन (कश्मीर भूभाग का एक-एक हिस्सा इन तीनो देशो के पास हे), अब कि पाकिस्तान में ही क्यों शामिल होना हे ?? ठीक हे हो जाइए शामिल पाकिस्तान में पर पहले वो समझौता तो दिखाइए जिससे साबित होता हो कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा हे ??………

    और इसके बाद भारत को भी एक्शन में आकर पाकिसतान को आपनेी नदियों से सप्लाई होने वाला पानी बंद कर देना चाहिए , याद रहे कि पाकिस्तान अपने ६५-७०% पानी के लिए भारत पर ही निर्भर हे !!

    Reply
  • December 4, 2015 at 10:17 am
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    कश्मीर नाम का कोई स्वतंत्र देश कभी इतिहास में रहा हो इसका कोई सुबूत दिलवा दीजिये !!

    Reply
  • December 4, 2015 at 11:45 am
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    बांलादेश नाम का भी कोई स्वतंत्र देश इतिहास में कभी नहीं था ? भारत उपमहादीप का हर हिस्सा एक भी था ( हे भी ) और अलग अलग भी रहा हे ( हे भी ) हिसा क्या यहाँ तो हर शहर तक में अलग अलग हिस्से रहे हे नया शहर पुराना शहर पौराणिक शहर सिविल लाइन ये लाइन वो लाइन वैसे आपके कहे सुझाव से पहले ही पाकिस्तानी भारत विरोधी रात दिन स्यापा करते रहते हे की भारत ने कश्मीरी नदियों पर बाँध बना बना कर पाकिस्तान के पानी को कंट्रोल कर रखा हे हर सूखे और बाढ़ के लिए वो भारत को दोषी बताते हे

    Reply
  • December 4, 2015 at 12:06 pm
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    हयात भाई कुतर्को और वहम् का इस दुनिया में किसी के पास कोई इलाज नहीं हे , बांग्लादेश और कश्मीर को एक तराजू में तौलने से पहले बेहतर होगा कि आप खुद पहले दोनों के बारे में गंभीरता से स्टडी करे , थोड़ा अफ़सोस जरूर होता हे आपकी इस कदर बदलती हुई सोच को ??

    और हा, पाकिस्तानियो की बातो को सच मानने की गलती मत कीजिये क्योकि पाकिसतान मे तूफ़ान भी आता हे तो उनके हिसाब से उसमे भारत का ही हाथ होता हे:)

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    • December 4, 2015 at 1:17 pm
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      कहने का मतलब ये था ( जो राजेन्द्र माथुर ने समझया ) की इस पुरे उपमहादीप में हर जगह एकता और विखंडन के तरह तरह के बीज बिखरे हुए हे आप चाहो तो किसी भी पर्कार के बीज को सींच सकते हो और कश्मीर या किसी भी समस्या का हल ताकत या लट्ठ नहीं हे यही शिमला समझोते या लाहोर घोषणापत्र का सार भी हे ( पानी रोकना सम्भव नहीं हे हमारा भी पानी चीन से आता हे )

      Reply
  • December 4, 2015 at 12:28 pm
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    खुलेी बहस के लिये सबसे जरुरेी शर्त खुले दिमाग है. वहेी कुच्ह लोगो के पस शिरे से खरिज है. येह लेख खन्दन के लिये जिस श्रम और बौध्दिकता कि मान्ग करता है उसे आलोचक कर नहि पा रहे.हर जगह मुफ्त्खोरी ठीक नही होती.

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  • December 4, 2015 at 1:57 pm
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    शरद जी कि नज़र मे कश्मीर मे कोई समस्या नही, हालात एकदम सामान्य है, तो फिर बहस की कोई गुंजाइश ही नही.

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    • December 4, 2015 at 2:38 pm
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      ठीक हे जाकिर साहब, फिर कश्मीर समस्या के बारे में बताने के लिए आपसे रिक्वेस्ट कर जिम्मेदारी आप ही को देते हे !! चलिए आप ही बता दीजिये कि क्या हे आपकी नज़र में कश्मीर की मूल समस्या !!

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  • December 4, 2015 at 2:03 pm
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    शरद साहब, आज तो राजनैतिक भारत नज़र आता है, वो ब्रिटिश दौर से पहले था ही नही. इतिहास बनते हैं, देशो की राजनैतिक सीमाए भी बनती बिगड़ती है. सिर्फ़ यही नही, जापान, यूरोप के देशो की भी राजनैतिक सीमाए ही एक सदी के भीतर बदल गयी, और अनेको नये देशो का भी जन्म हुआ.
    इसलिए सिकंदर भाई का, बांग्लादेश का उदाहरण ना सिर्फ़ तार्किक है, बल्कि इस चर्चा मे बहुत प्रासंगिक भी है. किसी भी देश या समुदायो का सरलीकरण के बजाय, उसकी परतो का माइक्रो-एनालिसिस करोगे तो कई सकारात्मक और नकारात्मक बदलावों का पता लगेगा. गहन विश्लेषण के बिना समाधान की उम्मीद बेकार है.

    Reply
  • December 4, 2015 at 2:35 pm
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    ज़ाकिर साहब इसीलिए बोला कि हयात भाई कुतर्को की तरफ जा रहे हे, किसी एक समय को जीरो मान कर ही बातचीत शुरू करनी पड़ेगी अन्यथा हम सब बेसिरपैर के कुतर्क देने में ही एनर्जी बर्बाद करते जायेंगे

    अंग्रेजो और मुगलो ही क्यों उससे पीछे भी जाया जा सकता हे जब धरती पर पहले इंसान की उत्पत्ति था और तब देश था और रियासत 🙂

    Reply
    • December 4, 2015 at 2:42 pm
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      ज़ाकिर साहब इसीलिए बोला कि हयात भाई कुतर्को की तरफ जा रहे हे, किसी एक समय को जीरो मान कर ही बातचीत शुरू करनी पड़ेगी अन्यथा हम सब बेसिरपैर के कुतर्क देने में ही एनर्जी बर्बाद करते जायेंगे

      अंग्रेजो और मुगलो ही क्यों उससे पीछे इंसान के पहली बार वजूद में आने की शुरुआत तक भी तो जा सकते हे (अपनी सुविधा से) जब धरती पर न कोई देश था और न ही रियासत , ना राजनितिक सीमाये थी और न ही भौगोलिक !!

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  • December 7, 2015 at 9:39 am
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    एक दूसरे के पैरादाईम को समझे बिना विन /विन स्थिति को प्राप्त नही किया जा सकता. हम जीते और वो हारे की स्थिति के प्रयास, स्वयं के हित मे भी नही होते, और ना ही इससे स्थाई समाधान निकलता है. अभी विन / विन स्थिति का फार्मूला नही मिला है, इसका अर्थ यह नही कि वो है ही नही. उसे ढूँढना होता है.

    Reply
  • December 7, 2015 at 12:09 pm
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    कम्प्रोमाईज तो करना ही पडेगा तभी विन /विन स्थिति को प्राप्त किया जा सकता

    Reply

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