इमरान रेहाम तलाक से कुछ सबक !

imran

हाल ही में एक धमाका सा हुआ जब पता चला की सिर्फ दस महीने पहले हुए इमरान खान रेहाम की शादी टूट रही हे ये कोई सीधा सीधा बेमेल विवाह भी नहीं था दोनों ही चालीस पार के थे दोनों ही लंदन में पढ़े लिखे थे दोनों की ही ये दूसरी शादी थी दोनों के ही पहली शादी से बच्चे भी थे दोनों ही राजनितिक रूप से जागरूक थे इमरान खान तो खेर हे ही पाकिस्तान के बड़े नेता और भविष्य में अवश्य ही कभी न कभी बनने वाले पाकिस्तान के पी एम फिर भी ये विवाह इतनी जल्दी टूट गया विवाह टूटने पर जो खबरे आ रही हे और जो रेहाम खान ने कहा http://www.bhaskar.com/news-ht/INT-imran-khans-ex-wife-says-they-wanted-me-to-cook-chapatis-stay-indoors-5169173-PHO.htmlउसका विश्लेषण करने से पता चलता हे की इस तलाक में काफी सारे सबक उपमहादीप के बहुत से लोगो के लिए छुपे हुए हे आइये देखते हे वो क्या क्या सबक हे!

सबसे पहले तो यह बात की बहुत से लोगो की ( खासकर पढ़े लिखे मुस्लिमो के लिए थोड़ा ज़्यादा वैसे सबके लिए ) की वो अपने लिए पढ़ी लिखी स्मार्ट लड़की चाहते हे और जरूर चाहते हे सही हे इसमें कोई बुराई नहीं हे मगर उसी स्मार्ट लेडी को पाने के बाद आप उनसे अगले ही दिन एकदम घरेलू घर में रहने वाली सारे दिन घर की चिंता में मशगूल रहने वाली पारम्परिक भूमिका में देखना चाहते हे ये बहुत बड़ी मूर्खता हे इससे बाज़ आना चाहिए इमरान को रेहाम की जो स्मार्टनेस पसंद आई होगी वो स्मार्ट नेस घर से बाहर निकलने पर ही आती हे ( टीवी सीरियलों को छोड़ दे तो भला कौन घर पर स्मार्ट बन कर रहता हे ) ? दूसरा इमरान जैसे लोग ये भूल जाते हे की अगर रेहाम कोई पारम्परिक घर चलाने घर बैठने वाली लेडी होती ( जिसमे ज़रा भी बुराई नहीं हे ) तो भला वो इमरान को क्यों मिलती ? क्यों दिखती क्यों इंटरव्यू लेने आती ? कैसे आपको प्रभावित करती ? क्यों आपको प्यार होता ? क्यों फिर आपकी लवमैरिज होती ? सबक ये हे जिन्हे सिर्फ घर पर रहकर घर चलाने वाली बीवी चाहिए तो वो लवमैरिज भूल जाए अरेंज्ड मेरिज करे अरेंज्ड मेरिज करे तो स्मार्ट नेस भूल जाए स्मार्ट नेस चाहिए तो परम्पराओ को भूल जाए दो नाव की सवारी न करे

दूसरी बात जो रेहाम खान और बहुत सी महिलाओ को समझनी चाहिए की जैसा की आजकल हर दूसरे टीवी सीरियल में ये बकवास दिखाई जा रही हे की कोई भी लड़की हो सीरियल में उसका रिश्ता सिर्फ कंपनी के मालिक से ही होता हे क्लर्क से नहीं हमेशा याद रखिये की आमतौर पर हर आदमी या परिवार अपनी बराबरी में ही रिश्ता जोड़ना चाहता हे अब अगर आपके यहाँ आपकी हैसियत से बहुत ऊपर का रिश्ता अगर आ रहा हे तो समझ जाइए की उसमे कुछ न कुछ एक राज़ होगा अवशय ही होगा वो राज़ बहुत छोटा भी हो सकता हे और बहुत बड़ा भी पता करना उस राज़ को समझना उस राज़ के बावजूद शादी करना सही होगा नहीं होगा ये समझना आपका काम हे रेहम खान को सोचना चाहिए था की वो एक आम रिपोटर थी वो भी लंदन में तो शायद सिर्फ वेदर रिपोटर थी और आपका रिश्ता आ रहा हे एक ऐसे आदमी से जो बहुत ही बड़ा नाम हे सारी दुनिया जिसे जानती हे और जो कल को दुनिया के दस बड़े देशो में से एक का पी एम भी हो सकता हे यानी बहुत बड़ा फर्क तो रेहाम को तभी समझ जाना चाहिए था की एक इतना बड़ा और व्यस्त आदमी मुझसे शादी करना चाह रहा हे तो इसके पीछे कुछ राज़ तो होगा ही इसके पीछे राज़ यही था की इमरान को आपसे शुद्ध प्यार शायद नहीं था उन्हें सिर्फ अपना घर संभालने वाली अपनी कुछ जरूरते पूरी करने वाली लेडी चाहिए थी न की कोई कंधे से कन्धा मिलाकर चलने वाली लेडी ऐसी बात नहीं हे की इमरान को ऐसी लेडी पाकिस्तान में या अरेंज्ड मेरिज से नहीं मिल सकती थी मिल सकती थी मगर इन्हे अपनी इगोसेटिस्फ़ेक्शन के लिए एक स्मार्ट डेशिंग लेडी की भी दरकार होती हे इन बातो को रेहाम को पहले ही समझ कर किलयर कर लेनी चाहिए थी जो उन्होंने नहीं किया!

तीसरी बात जो सभी औरतो मर्दो को समझनी चाहिए ये की उपमहादीप में इस तरह की जो शादिया होती हे जिनमे हैसियत का भारी फर्क होता हे उसमे ऊँची हैसियत वाले के परिवार वाले हमेशा यही तम्मना रखते हे की कम हैसियत वाला फरीक जरा झुक कर अदब में रहेगा और हर हुकुम की तामील करेगा घर के मालिक नहीं बल्कि कर्मचारी जैसा वयवहार करेगा बताया जा रहा हे की इमरान की बहनो की खासकर रेहाम से बिलकुल नहीं पटी उन्हें रेहम हमेशा एक ऐसी मामूली लेडी लगी होगी जिसने आकर उनके ऊँची हैसियत वाले भाई के घर पर कब्ज़ा कर लिया तो ये सब सबक इमरान रहम की शादी से मिलते हुए दिखाई दे रहे हे यहाँ हम ये नहीं कह रहे हे की अलग अलग हैसियत बैकग्राउंड सोच समझ सामाजिकता वाले लोग आपस से शादी ना करे जरूर करे अरेंज्ड भी करे और प्यार तो खेर कुछ भी कितना भी बड़ा फर्क देखता ही नहीं हे सही हे शादी जरूर करे मगर इन सब बातो को भी समझ ले सोच विचार कर ले तो हर्ज़ नहीं हे

(Visited 23 times, 1 visits today)

22 thoughts on “इमरान रेहाम तलाक से कुछ सबक !

  • November 18, 2015 at 1:40 pm
    Permalink

    लेख का मकसद ये कतई नहीं हे की अलग अलग उम्र पढाई लिखे पेशे हैसियत जाती धर्म विचारो आकांक्षाओं वाले लोग आपस में शादी न करे जरूर करे अरेंज्ड भी करे और प्यार तो खेर होता ही अँधा हे वो तो कुछ देखता ही नहीं हे सही हे मगर शादी से पूर्व इन बातो को भी अच्छी तरह सोच समझ ले विचार कर ले ये समस्याएं आयेगे ही ( जैसे इमरान की बहनो और रेहाम के बीच खट पट ये तो होना ही होना था अब फ़र्ज़ कीजिये इमरान पाकिस्तान के किसी बड़े नामी परिवार की परम्परावादी महिला से शादी करते तो यही ननदे भाभी को इज़्ज़त बख्शती यही उपमहादीप का चरित्र हे ) इन समस्याओ से कैसे निपटना हे निपटना सम्भव न हो तो कैसे एडजस्ट करना हे इन पर पहले ही विचार कर ले तो हर्ज़ नहीं हे भारत में भी अब लोग अपनी पसंद से शादिया करना चाह रहे हे हो भी रही हे अधिकतर टूट या ढह भी रही हे इससे परंपरावादियों या कटरपंथियो का हौसला भी बढ़ रहा हे तो इन बातो पर विचार कर ले फिर शादी करे

    Reply
  • November 18, 2015 at 2:40 pm
    Permalink

    जब इस तरह की शादिया इस स्पीड से टूटेगी तो काटरपन्तियो का हौसला ही बढ़ेगा अब इस समय शर्तिया इमरान के घर में बाते हो रही होगी ”पहले ही कहा था इस मिनी स्कर्ट पहन चुकी चुडेल से शादी मत कर हमने इतनी अच्छी लेडी बताई थी नमाज़ रोजे की पाबंद हिज़ाब की पाबंद दीन दार बहुत ही नेक पढ़ी लिखी भी थी इंटर कर रखा था पत्राचार से पर ये बेवकूफ तैयार ही तो न हुआ अब तो उसकी भी शादी हो गयी ”

    Reply
  • November 18, 2015 at 4:12 pm
    Permalink

    शादी तो टूटनी ही थी , रिहाम खान एक खुले माहौल में रहने वाले लड़की पाकिस्तान में वह भी पेशावर जैसे कट्टर माहौल में कैसे रह सकती थी ही थी ,

    Reply
  • November 18, 2015 at 6:36 pm
    Permalink

    इमरान खान पेशावर जैसे पुरातन शहर में नहीं बल्कि चंडी गढ़ की तरह साठ के दशक में नए बसाय गए बेहद आधुनिक शहर इस्लामबाद में रहते थे जिसके बारे में मनोहर शयाम जोशी ने लिखा था की ” इसके सामने हमारा अपना आधुनिक शहर चंडीगढ़ भी कही नहीं ठहरता हे इसके निवासी हमारे पेज 3 लोगो से भी अधिक मॉडर्न हे ” इमरान जेसो की यही भूल हे की ये बेहद आधुनिक महिलाओ को पसंद करते हे उनसे शादी करते हे और अगले ही दिन उन्हें शुद्ध पारम्परिक भी देखना चाहते हे दूसरी तरफ रेहाम जैसी लेडीज़ भी अपने से बेहद बेहद ऊँचे पुरुष को ही पाना चाहती हे मगर अल्लाह का – कुदरत का कानून हि समझिए की एक ” इस दुनिया में हर चाहत की हर चीज़ की कीमत चुकानी होती हे ” और ” ”कभी किसी को मुक़्क़मल जहाँ नहीं मिलता ”

    Reply
    • November 18, 2015 at 6:46 pm
      Permalink

      एक ये देखिये की आजकर हर सीरियल में ये दिखाया जाता हे की कोई भी आम लड़की हो वो जहा जाती हे वही सबसे ऊँचा पुरुष ही उसे चाहने लगता हे शादी करता हे वो नहीं तो हम आपके हे कौन की तरह अरब पति बाबू जी ही ”भुट्टे भुनने वालो ” – ( हमारे गुरु कृपा शंकर भारदवाज़ के अनुसार ) – के यहाँ रिश्ता लेकर आ जाते हे हर सीरियल की यही कहानी लड़की ऑफिस पहुंची नहीं की सीधे ऑफिस के मालिक के घर से रिश्ता . जेंट्स तो खेर ऐसे थे ही महिलाओ पर भी इसका भारी प्रभाव हो रहा हे अरेंज्ड हो या लव हर कोई अपने से काफी ऊँची हैसियत में शादी चाह रहा हे यही मेरी चेतावनी हे की जिंदगी कोई एकता कपूर सूरज बड़जात्या कारन जोहर की नॉनसेंस नहीं हे हमेशा याद रखिये की अगर आपके यहाँ लड़का या लड़की किसी के लिए भी आपकी हैसियत से काफी ऊँचा रिश्ता आ रहा हे तो समझ जाइए उसमे कुछ न कुछ राज़ अवश्य होगा छोटा होगा बड़ा होगा पर राज़ अवश्य होगा रेहाम खान भी इस राज़ को पहले ही बुझ लेती तो तलाक की पीड़ा से ना गुजरना पड़ता

      Reply
  • November 18, 2015 at 8:31 pm
    Permalink

    रहम खान कोई पवित्र नहीं थी आप गूगल कीजिये इन के बहुत ही कहानिया है और नंगी बीच पे लेटने वाली लड़की थी , वह इतने बंधन में नहीं रह सकती थी वह भी एक पाकिस्तानी कट्टर समाज में , इस लिए उस ने तलाक़ ले लिया .

    Reply
  • November 18, 2015 at 9:04 pm
    Permalink

    वैसे तो शादी और तलाक पति-पत्नी के बीच मामला होता हे और हमें इसमें दखल देने में कोई इंटरेस्ट नहीं हे पर अगर इमरान रहम मैडम की बात करे तो हमें रेहम मैडम जयादा मेच्योर और सही लगी हे !!
    १-सुन्दर हे पढ़ी-लिखी हे अपने पैरो पर खड़ी हे और अगर अपने बच्चो को साथ रख कर किसी दूसरे तलाकशुदा से निकाह करती हे तो इसमें गलत क्या था ??
    २-आज इमरान साहब पाकिस्तान के बड़े राजनेता हे ऐसे में रेहम मैडम भी राजनीति ज्वाइन करना चाहती थी तो इसमें अजूबे जैसा क्या हे ?? पाकिस्तान की राजनीति में परिवारवाद कोई नई बात तो नहीं हे ??
    ३-रेहम खान ने दो निकाह किये पर चरित्रहीनता जैसा तो कुछ नहीं किया फिर उन पर टोकाटाकी की कोई एक भी वजह हमें नहीं आती !!

    बाकी सारे बाते हयात भाई ने बेहद सलीके और खूबसूरती से अपने ब्लॉग में बयान कर ही दी हे!!…. बात सही हे कि हम किसी महिला से आकर्षित तो दुनिया की गतिविधियों को देख कर होते हे और बाद में चाहते हे कि वो पूरी तरह घर में घुसी रहे 🙂

    Reply
    • November 18, 2015 at 11:54 pm
      Permalink

      बहुत बहुत शुक्रिया शरद भाई की आपको लेख पसंद आया वार्ना में तो लेख अफज़ल भाई को ये लेख भेज़ते भी डर रहा था की कही मेने कोई बहुत महामूर्खता की बाते तो नहीं लिख दी हे में खुद कुंवारा हु लेकिन बात आपको पसंद आया इसका मतलब प्राण साहब ने जंजीर में सही कहा था ” शेरखान ने शादी नहीं की मगर बराते तो बहुत देखि हे ” लास्ट लाइन जो आपने कही वो उपमहादीप के शायद सारे लोंडो लपाड़ो मर्दो पर सही हे हमें पता नहीं क्या बीमारी हे की हम लड़कियों को भोली भाली सीधी साधी चाबी से चलने वाली गुड़िया सी देखना चाहता हे यहाँ उपदेश हाँकने वाला में खुद भी इसी साइकि से पीड़ित था तीन चार जो घिसे पिटे अफेयर चलाए हर बार मुझे सख्त तकलीफ होती थी की लड़की गुड़िया जैसी मासूम क्यों नहीं हे हम ढक्कन ये भूल जाते हे की अगर इतनी सीधी साधी होती तो हमें मिलती ही क्यों ?

      Reply
      • November 19, 2015 at 12:13 am
        Permalink

        हयात भाई ये प्राण साहब की बात आपने खुद के लिए की हे या हमारे लिए (हम थोड़ा कन्फुजिया गए हे)
        बहुत खूबसूरत लड़की से शादी करके उससे रोटिया सिकवा कर उसके हाथ जलवाने की सोचने वालो को कौन उपरवाला जन्नत में जगह देगा 🙂

        Reply
        • November 19, 2015 at 8:14 am
          Permalink

          अपने लिए ही कही थी एक और बात कहूँगा की इमरान की तरह ही नेहरू जी भी एक बेकार पति साबित हुए थे जिस तरह से ऊँचे खानदान से ना होने के कारण रेहाम को सम्मान नहीं मिला वैसे ही कहते हे की पढ़ी लिखी ना होने के कारण कमला नेहरू उनका नेहरू परिवार में सम्मान नहीं होता था जबकि इन्ही कमला नेहरू की सुंदरता और ऊँचे खानदान के कारण हाई प्रोफाइल नेहरू जी से उनकी शादी करायी गयी थी दुनिया को न्याय दिलाने वाले नेहरू घर की राज़नीति से दूर ही रहे और पत्नी को न्याय नहीं दिलाया ये उन्होंने गलत किया कमला नेहरू ने कौन सी केम्ब्रिज की फ़र्ज़ी डिग्री दिखा कर नेहरू जी से रिश्ता पाया था ? जो उन्हें सम्मान नहीं मिला ? ताजुब हे की इस मामले में ”सदाबहार चाइल्डिश ” संजय दत्त बेहतर साबित हुए कहते हे की उनकी भी बहनो ने शुरू में ऐसे ही वयवहार किया था की मानो ये कौन मामूली आइटम गर्ल दिलनवाज़ शेख उर्फ़ मान्यता उनके भाई के घर में आ गयी हे लेकिन संजय दत्त ने सख्ती से बता दिया अब ये मिस्टर एंड मिसेज दत्त का घर हे

          Reply
  • November 18, 2015 at 9:24 pm
    Permalink

    इमरान जेी क़ा पहले वाला निकाह १० साल चल् सका !
    दुसरा निकाह १० माह् चला !
    अस्थायि भेी चल्ते रहे होन्गे आज के नेता कौन ज्यादा शरिफ होते है !
    अग्ला निकाह १० हफ्ते या अजिवन भेी चल सक्ता है !
    जब तलाक कि “खिद्केी ” खुलेी रखेी जयेगेी तब बाहर कि हवा कभेी भेी आ सक्ति है !
    क्या बच्हे बुरे नहेी होते है उन्को तो निभाया हेी जाता है !माता पिता भेी बुरे होते है उन्को भेी निभाया जाता है !
    फिर पत्नेी जेी को अजिवन के लिये क्यो नहेी निभाया जा सक्ता है ?
    आखिर “बिबियो के भन्दार” रख्ने वाले मुहमम्द जेी ने भेी तो परिवारिक तकरार होते हुये भेी किसि भेी बिबि को तलाक् नहेी देी थेी तब “अशिकाने रसुल” का दम भर्ने वाले मुस्लिम् सिरफ् एक बिबि को क्यो तलाक देते है ?

    Reply
  • November 19, 2015 at 12:03 am
    Permalink

    इस विषय में शायद उपमहादीप के सबसे सेंसिबल और अक्लमंद सितारे आमिर खान का उदहरण सबसे अच्छा हे तलाक के बाद दूसरी शादी के लिए वो कोई कम उम्र या कोई बेहद सुन्दर या कोई अरबपति या कोई है प्रोफाइल लेडी चुन सकते थे मगर उन्हें पता था की उन्हें सिर्फ उन्हें केसी लेडी चाहिए हे सिर्फ सच्चे साथ के लिए और कुछ नहीं दुनिया दिखावो वो में नहीं पड़े और उन्होंने पसंद किया किरण राव को जिनमे शायद अक्ल के सिवा कोई खूबी नहीं हे मगर आमिर को सिर्फ अक्ल ही चाहिए थी ( उन्हें पता होगा की इस दुनिया में सब कुछ न किसी को मिला हे ना मिल सकता ) बाकि चीज़ो की उन्हें दरकार नहीं थी या फिर उन्हें पता था की बाकी चीज़ो की बहुत कीमत चुकानी ही पड़ती हे नतीजा आमिर की दूसरी शादी फिट चल रही हे काश इतनी अक्ल इमरान और रेहाम में भी होती तो आज दोनों सर पकडे ना बैठे होते

    Reply
  • November 19, 2015 at 10:43 am
    Permalink

    बहुत हि अच्चा लेख – ये जबर्दस्ति कि शादि थि काम्यब तो होनि हि नहि थि .

    Reply
    • November 19, 2015 at 11:17 am
      Permalink

      ज़बरदस्ती की तो खेर कोई बात नहीं थी हर उम्र या स्टेटस में भी आदमी औरत में एकदूसरे के लिए चाहत शारीरिक फिर शारीरिक से भी बहुत अधिक इमोशनल आवशयकतय होती ही हे वो सब ठीक हे मेरा पॉइंट ये हे की हम सभी उपमहादीप के लोग रिलेशन में बच्चे ही बने रहते हे मेच्योर नहीं होते हे बहुत सी बातो पर पहले से विचार नहीं करते हे वो कौन कौन सी बाते हे वही इस लेख का विषय हे खेर कोई नी इमरान रेहाम फिर से प्यार तलाशे मगर कुछ जरुरी बातो का ध्यान रखे

      Reply
  • November 19, 2015 at 10:47 am
    Permalink

    इमरान के अपने अड़ियल रुख के कारन शादी कामयाब नहीं हुई है .ऐसे भी जब क्रिकेट का कप्तान था उस समय भी किसी खिलाड़ी से नहीं पत्त्ति थी . वैवाहिक जीवन में ऐसा नहीं चलता है.

    Reply
    • November 19, 2015 at 11:26 am
      Permalink

      इमरान उपमहादीप में ऐसे शख्स रहे हे जिन पर शायद सर्वाधिक महिलाय फ़िदा थी जिंदगी में उन्हें सब कुछ सब कुछ मिला इज़्ज़त नाम शोहरत और शायद पि एम पद भी मिलने वाला हे मगर कुदरत का कानून हे कभी किसी को मुक़्क़मल जहा नहीं मिलता सो इमरान को भी मोहब्बत नहीं मिली रेहाम पर भी वो मोह्हबत की ही तलाश में फ़ौरन फ़िदा हुए होंगे मगर शायद जिन तानशाही के गुणों के कारण इमरान जैसे लोग भारी कामयाबी हासिल करते हे वही तानशाही परवर्ती” शुद्ध इश्क़ ” में रोड़ा बन जाती हे ” हे ये वो आतिश ग़ालिब जो लगाय ना लगे और बुझाय ना बने ” इमरान के पास सब कुछ सब कुछ हे मगर फिर भी वो ये ” आग ” लगाने में असफल रहे

      Reply
      • November 24, 2015 at 7:41 pm
        Permalink

        इस तरह के और करेक्टर सलमान भी हे सलमान भी बेहद खूबसूरत और बेहद अच्छे नेकदिल इंसान हे मगर फिर भी वो किसी भी महिला में अपने प्यार की शुद्ध लगन लगाने में असफल ही रहे हे उनके पास सब कुछ हे प्यार दौलत शोहरत बड़ा परिवार सब कुछ मगर ” इश्क़ ” नहीं हे इसका कारण एक तो ये हे की दीपक असीम उर्फ़ अनहद के शब्दों में की ” लम्बी और सार्थक बातचीत करना सलमान के बस का रोग नहीं हे ” ये बड़ी बेहतरीन बात उन्होंने कही वाकई सलमान के इंटरव्यू देखे तो वो महाबोर होते हे और महिलाओ के साथ लम्बी और अच्छी बातचीत करना बहुत जरुरी होता हे दूसरा सलमान में भी तानशाही के गुण हे वो एक सह्रदय तानाशाह हे उनके हिसाब से चलो तो वो तुम पर कुर्बान हे मगर ज़रा भी मतभेद उन्हें बर्दाश्त नहीं होते माफ़ वो कर नहीं पाते ये तानाशाही इश्क़ में रोड़ा ही बनती हे

        Reply
  • November 19, 2015 at 5:48 pm
    Permalink

    लडके की सास और लडकी की शादी शुदा ननद इन दोनो पर कन्ट्रोल रखा जाये तो काफी हद तक शादियो को बचाया जा सकता है

    Reply
  • November 20, 2015 at 8:36 pm
    Permalink

    हयात भाई क्या आपको नहीं लगता कि एक बेचलर ऐसे विषयो पर लिख कर खुद पर चौतरफा दवाब से घिर सकता हेः)
    वैसे हम ऊपरवाले से आपके हक मे दुआ करते हे कि उस खूबसूरत और ज़हीन खोज पर जल्द ही खुशनमा फुल-स्टॉप लगाए !!

    Reply
  • November 24, 2015 at 7:32 pm
    Permalink

    एक और समस्या जो रेहाम को इमरान के घर में आई होगी वो ये की रेहाम एक दुनियादारी की समस्याओ में भाग लेने वाली उनका सही या गलत हल सोचने वाली महिला हे जबकि इमरान के घर वाले पारंपरिक सोच के ही होंगे अब होता यही हे की रेहाम जैसे लोग तर्क की दुनिया में होते ही हे ऐसे में ये लोग उतने धार्मिक कतई नहीं रह पाते हे जितने पारम्परिक सोच वाले लोग होते ही हे ऐसे में टकराव लाज़िम हे ये टकराव और भी जगह होता हे मगर मुसलमानो में ये टकराव सर्वाधिक हे ही क्योकि इस्लाम एक ईश्वर पर सबसे गहरी आस्था का नाम हे ही ऐसे में स्वभाविक हे की टकराव हो इस टकराव को कैसे रोकना हे या कैसे एडजस्ट करना हे ? ये भी सभी रेहामो और इमरानो को भी सोचना होगा ? हम पारम्परिक सोच को भी पूरी तरह ख़ारिज नहीं कर सकते हे वार्ना सारी दुनिया का पश्च्मिकरण हो जाएगा और न ही तर्कों को भी दफना सकते हे न हम पारम्परिक जैसे बन सकते हे न पारम्परिक सोच वाले लोग हम जैसे बन सकते हे ? तो क्या हो कैसे हो ? ये भी एक बड़ा मुद्दा हे

    Reply
  • February 1, 2016 at 7:33 pm
    Permalink

    ”मंटो का जवाब ” कहते हे की एकबार इस्मतचुग्ताई ने मंटो से पूछा था क्या मंटो साहब कभी इश्क़ भी किया हे आपने ? मंटो ने अपनी बड़ी बड़ी आँखे इस्मत के चेहरे पर गढ़ा दी और बोला की हां इस्मत ने उसे कुरेदा हां तो कह सुनाइए अपने इश्क़ का किस्सा मंटो साहब मंटो ने किस्स्सा सुनाया जब में कश्मीर में था तो मुझे भेढ़ चराने वाली एक सुन्दर कश्मीरी लड़की से प्रेम हो गया था इस्मत ने चुटकी ली इस इश्क़ में क्या क्या तीर मारे मंटो साहब आपने ? इतना सुनना था की मंटो की त्योरी चढ़ गयी बोला तीर क्या मारने थे चुपचाप विदाई के समय उसने मिशनी के तौर पर मिस्री की एक डली मुझे दी जिसे मेने यादगार के तौर पर आज तक अपने पास सुरक्षित रखे हुए हु मंटो ने मेज़ की दराज़ से वह मिस्री की डली निकाल कर इस्मत को दिखाई . इस्मत ने अपने स्वभाव के अनुसार एक जोरदार ठहाका लगाया और बोली इतना फुसफुसा इश्क़ मंटो साहब लाहौल विला कुवत . मंटो सुनकर क्रोधित हो उठा बोला ” तो क्या इस्मत तुम यह चाहती थी की में उसकी गोद में एक हरामी पिल्ला छोड़ कर लोट आऊ ? “

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *