आप की जीत-साम्प्रदायिक सोच और संगठनो की हार है

delhi-election-2015

दिल्ली मे हुए चुनावो के नतीजे आ चुके हैं , आम आदमी पार्टी को इन चुनावो मे प्रचंड बहुमत मिला है शायद भारतीय राजनीति के इतिहास मे ऐसा पहली बार हुआ है की किसी विधानसभा चुनाव मे किसी एक दल को इतना समर्थन मिला |आम आदमी पार्टी ने इन चुनावो मे 70 मे से 67 सीटे जीती और वही पिछले चुनावो मे 32 सीटे जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी इन चुनावो मे 3 सीटो पर सिमट गयी | सवाल ये है की इतना बड़ा और चौकाने वाले उलटफेर का असल कारण है क्या ? कोई इसका कारण बेदी को बता रहा है , तो कोई दिल्ली बीजेपी को लेकिन मेरे हिसाब से बीजेपी की इस हालत के जिम्मेदार स्वयं नरेंद्र मोदी जी है | दिल्ली की जनता जैसा हम जानते हैं की बाकी देश की जनता से ज्यादा परिपक्व और समझदार है कारण है वहा पर हर धर्म , जाति ,वर्ग आदि के लोगो की मिश्रित आबादी | दिल्ली की जनता विकास को ज्यादा तरजीह देती है बजाए दूसरे राज्यो की तुलना मे जहा आज आज़ादी के 67 साल बाद भी राजनीति धर्म और जाति के चक्रवयूह मे उलझ कर रह गयी है |

दिल्ली मे हुई बीजेपी की इस शर्मनाक हार का कारण विकास का मुद्दा नहीं है | सभी को पता है मोदी के पास किसी भी तरह का जादू नहीं है की वो 9 महीनो मे ही सब ठीक कर देंगे विकास की रफ्तार धीमी तो है लेकिन आप इसे आम आदमी पार्टी की जीत का मुख्य कारण नहीं बोल सकते | इसका कारण मुख्य रूप से है बीजेपी के नेताओ का बेवकूफाना और सांप्रदायिकता से भरे बोल | दिल्ली की जनता मूर्ख नहीं है | जब से दिल्ली के चुनावो की आहट हुई तब से ही बीजेपी के नेता अरे नेता क्या सरकार मे मंत्री तक लगातार उल्टे सीधे और जहरीले भाषण दे रहे है | चाहे वो साध्वी निरंजन हो या साक्षी महाराज ये सब लगातार ऐसे भाषण और बोल बोलते थे की जिनसे आम जनता का मन गुस्से और खिन्नता से भर गया था | साध्वी निरंजन ने कहा की दिल्ली मे इस बार रामजादों की सरकार बनेगी या हरामजादो की और साक्षी महाराज ने तो गोडसे को ही राष्ट्रप्रेमी और देश भक्त बता दिया , गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ भी लगातार जहरीले बोल बोलते गए | क्या देश की जनता ने इन्हे सांसद इसीलिए बनाया की घूम कर उसे ही गाली दे ? क्या बीजेपी को जिताने वाले ही रामजादे हैं ? राम क्या इन पंडोहिया नेताओ की जागीर हैं ? इतना ही नहीं इसी बीच आरएसएस का घर वापसी का दुर्भावना से भरा कार्यक्रम भी शुरू हुआ | दिल्ली से सटे आगरा मे 300 मुस्लिम परिवारों का जबरन बेवकूफ़ बना धर्मांतरण कर दिया गया | आरएसएस के सर संघ चालक मोहन भागवत ने सालो पहले हिन्दुओ से धर्मांतरित हुए मुसलमानो को अपना माल बता दिया | कोई चार बच्चे पैदा करने को बोल रहा था तो कोई 10 बच्चे | किसी पर कोई रोक नहीं थी |

प्रधानमंत्री श्री मोदी की इन सभी मामलो पर साधी गयी चुप्पी ने इन जहरीले नागो का मन और बढ़ा दिया | एक गुरु जी ने तो ये तक कह दिया की पहले गांधी को मारा था अब केजरीवाल को मारेंगे | आरएसएस और बीजेपी दोनों बिलकुल ही काबू से बाहर और श्री मोदी चुप | इनकी यही चुप्पी जनता के घावो पर नमक रगड़ रही थी | इनहि विवादित और जहरीले बोलो के कारण संसद का पूरा का पूरा शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया | मोदी जी ने अपने इन नगीनो के खिलाफ किसी भी तरह का कोई सख्त कदम नहीं उठाया | विपक्ष हल्ला करता रहा और सरकार अध्याधेश पारित करती रही |

मोदी जी खुद ये कहते रहते हैं की वो सांप्रदायिक नहीं है लेकिन क्या उनके मंत्री भी वैसे ही हैं शायद नहीं | और यदि मोदी सांप्रदायिक नहीं हैं तो इन सांप्रदायिक लोगो को अपने मंत्री मण्डल मे शामिल क्यू किया ? और अगर किया तो उनके इन बयानो के बाद उन्हे पदमुक्त क्यू नहीं किया ? मेरे हिसाब से इन बयानो को मोदी जी ने जान बूझ कर नज़र अंदाज़ किया ताकि वोटो का ध्रुवीकरण हो सके | और अगर ऐसा है तो मोदी संप्रादयिक कैसे नहीं हुये ? विकास का मुखौटा लगा कर सांप्रदायिकता की राजनीति अब नहीं चलेगी | मोदी का इन लोगो को नज़र अंदाज़ करना खुद विकास के मुखौटे के पीछे छिप कर सांप्रदायिक लोगो को मौन स्वीक्रतिदेना भी बीजेपी की इस शर्मनाक और करारी हार का कारण है |

दिल्ली की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है अब इस फैसले का मोदी , उनके मंत्री, सांसद आदि की कार्यशैली और व्यवहार पर क्या असर पड़ेगा ये तो आने वाला समय ही बता सकता है | अगर मोदी जी अब नहीं जगेंगे तो आगे बहुत देर हो जाएगी क्यूंकी उत्तर प्रदेश और बिहार के चुनाव उनका इंतज़ार कर रहे हैं और अगर इसी तरह के बयान , बोल और सांप्रदायिक बाते होती रही तो इन चुनावो मे बीजेपी और मोदी की मिट्टी पलीद होने से कोई नहीं बचा सकता | उत्तर प्रदेश और बिहार के चुनावो की हार मोदी के राष्ट्रिय राजनीति के सफर पर ब्रेक लगा सकती है | बाकी “होइहे वही जो राम रची राखा”

(Visited 1 times, 1 visits today)

14 thoughts on “आप की जीत-साम्प्रदायिक सोच और संगठनो की हार है

  • February 11, 2015 at 7:37 pm
    Permalink

    फरवरी की 1 से 4 तारीख तक दिल्ली के चुनावों के सभी ओपीनियन पोल BJP और AAP में काँटे की टक्कर दिखा रहे थे । दोनों पार्टियों को 40% से 42% के आसपास वोट शेयर और किरण बेदी और केजरीवाल के बीच भी 2% वोट शेयर का फर्क दिखा रहे थे । दोनों की सीटें भी 28 और 34 के लगभग दिखा रहे थे । अचानक 6 तारीख को जुम्मे की नमाज़ के बाद जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी के मुसलमानों को AAP को वोट देने के फतवे के बाद दिल्ली के सभी ओपीनियन पोल AAP को 56 के लगभग सीटें क्यों देने लग गये थे ? अचानक शुक्रवार को चुनाव के ऐन एक शाम पहले जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी ने फतवा क्यों जारी किया ? अचानक चुनावों से एक शाम पहले AAP का वोट शेयर 40% या 42% से 52% कैसे हो गया ? कौई सभी सेक्युलर पार्टियों का नेता या AAP का समर्थक इसका जवाब दे दे तो आपको AAP के जीतने का राज़ समझ आ जाये गा । आप खुद देख लीजिये इस से पड़ने वाला फर्क, 34% वोटों पर BJP सिर्फ 3 सीटें मिलीं और AAP को 52% वोटों पर 67 सीटें मिलीं । ऐसा कैसे हुआ ? ये सारा खेल चुनाव के एक दिन पहले खेला गया, एक सोची समझी रणनीति और राजनैतिक षडयंत्र के साथ । फिर भी AAP अपने आपको ईमानदार और सेक्युलर कहती है, जबकी मुस्लिम वोटों की राजनीति केजरीवाल एन्ड कम्पनी कर रहे हैं, और वोही लोग BJP को कम्युनल कहते हैं

    Reply
    • February 11, 2015 at 9:28 pm
      Permalink

      अरे साहब इमाम बुखारी साहब के फतवे की ” तासीर ” अलग ही होती हे उनके फतवे मुस्लिम वोट की तो नहीं मगर कुछ डांवाडोल हिन्दुओ को संघी खेमे धकेलने की गारंटी होते हे लोक सभा चुनाव में जब सोनिया जी इमाम साहब से मिली थी तभी हमने कांग्रेस की भयंकर दुर्गत की भविष्यवाणी कर दी थी

      Reply
    • February 11, 2015 at 9:48 pm
      Permalink

      सब को बुखाररी नजर आता है मगर राम रहीम ने भाजपा को समर्थन दिया उस ने कहा के मेरे १५ लाख समर्थक भाजपा को वोट दे . वो किसी को नजर नहीं आता है .इसे कहते है साम्प्रदायिक नजरो से एक ही चीज को अलग अलग अन्द्दाज से देखना . किसी से समर्थ से इतनी बहुमत नहीं आती है . दिल्ली की जनता ने दिल से वोट दिया है .

      बेवक़ूफ़ लोग को नहीं मालूम अगर बुखारी का फतवा चलता तो एक भी मुस्लमान को नहीं हारना चाहिए था जब के ५-८ से अधिक ंमुस्लिम विधायक हारे है . आप से खुद मुस्तफाबाद का कैंडिडेट हार गया है.

      Reply
  • February 11, 2015 at 7:49 pm
    Permalink

    आप के जनादेश को एक अलग अंदाज मे देखा जाना चाहिये . भारत के सेक्युलर डांचा के लिये अच्छ खबर है . इस रिज़ल्ट ने उन सम्प्रदायिक पार्टीयो और सोच रखने वालो के लिये बहुत बड़ा तमंचा है . अब भी भाजपा को या मोदी को चाहिये के वी अपने जाहिल नेता और जो मंत्री समाज को बांट रहे है उन को रोक लगाये नही तो दिल्ली की तरह पूरे भारत मे उन की स्थिति हो जाये गी .

    Reply
  • February 11, 2015 at 9:02 pm
    Permalink

    बुरेी हार तो कान्ग्रेस् केी भेी हुई है ,
    लोक सभा चुनाव के बाद भाजपा हरियाना जम्मु महाराश्त्र ज्हार खन्द मेभेी जेीतेी है , क्या वहा केी जन्ता सम्प्रदयिक थेी ? असल मे पिच्ले साल से हेी दिल्लेी केी जनता विधान सभा के लिये केजरेी जेी केी मुरेीद् हो चुकेी थेी ! तभेी सब्को हार्ना पदा

    Reply
    • February 11, 2015 at 10:07 pm
      Permalink

      झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र के समय इस तरह के बयान नहीं आते थे भाजपा नेता दिसंबर मध्य में पागल हुए थे और एक बात और बुखारी तो खुद एक सनकी इंसान हैं जो फायदे के लिए कुछ भी कर सकते हैं वो तो भाजपा का भी समर्थन कर चुके है। आप ने उनके समर्थन को ठुकरा के एक स्वागतयोग्य काम किया हैकिसी भी दल में ये दम नहीं है

      Reply
      • February 12, 2015 at 5:47 pm
        Permalink

        इसेी फरवरेी माह मे मध्य प्रदेश के नगर् निगम, नगर पालिका आदि मे भेी चुनाव हुये थे उस्मे भे भाजपा जेीतेी है !
        आप ने बुखरेी जेी का समर्थन् थुकरा दिया यह काम् जरुर प्रशन्श्नेीय् कहा जायेगा !
        आगरा का घर वाप्सेी बहुत पहले हो चुकेी थेी

        Reply
    • February 11, 2015 at 10:11 pm
      Permalink

      कांग्रेस के तो दिन खराब है ही अब भाजपा का हनीमून पीरियड खत्म हो गया है अब जवाब देही का समय आ गया है

      Reply
  • February 11, 2015 at 9:47 pm
    Permalink

    उस समय हंसी आ गयी जब किरण बेदी ने अपने हार का कारण फतवा तो बताया . अगर बुखारी खुद जमा मस्जिद से चुनाव लड़े तो उन की जमानत जब्त हो जाये गई . मुझे तो उस समय दर हो गया जब बुखारी ने आप को समर्थन का एलान किया , मुझे लगा के आप हार जाये गई .अच्छा हुआ केजरीवाल ने उन का ऑफर नहीं लिया . बुखारी से एलान भाजपा ने कराया . आप ने समर्थन नहीं माँगा .

    सब को बुखाररी नजर आता है मगर राम रहीम ने भाजपा को समर्थन दिया उस ने कहा के मेरे १५ लाख समर्थक भाजपा को वोट दे . वो किसी को नजर नहीं आता है .इसे कहते है साम्प्रदायिक नजरो से एक ही चीज को अलग अलग अन्द्दाज से देखना . किसी से समर्थ से इतनी बहुमत नहीं आती है . दिल्ली की जनता ने दिल से वोट दिया है .

    Reply
    • February 12, 2015 at 5:53 pm
      Permalink

      चाहे बुखारेी हो या राम रहेीम हो दोनो पक्श् गलत है !
      अगर दोनो नेता अप्नेी अप्नेी पार्तेी के मन्च से ऐसि घोशना सभेी आम जनता से करते तो उस्मे बुराई नहेी थेी
      चान्दनेी चौक कि आप प्रत्याशेी अल्का लाम्बा का नाम बुखारेी जेी ने लिया था जिस्का खन्दन अल्का जि नहेी किया !

      Reply
  • February 12, 2015 at 11:02 am
    Permalink

    क्या आप घर वापसि के साथ साथ सभेी धर्मान्तरनो क विरोध कर्ते है? क़्या चार बच्चे केवल हिन्दुओन के नहि होने चाहिये या सभेी धर्म पालन कर्ने वालो के? आआप के विजय समारोह मे हरे और सफेद गुब्रेबारे किस बात क प्रतेीक है?

    Reply
    • February 17, 2015 at 7:25 pm
      Permalink

      जी मई हर उस धर्मांतरण का विरोध जो बेवकूफ़ बना और लालच देकर कराया गया है चाहे कोई भी हो | अरे भाई गुब्बारे कब से मुद्दा बन गए वाहा नीले गुबारे भी थे लेकिन शायद आपकी सांप्रदायिक आंखे उन्हे देखने मे चूक गयी |

      Reply
  • February 12, 2015 at 7:20 pm
    Permalink

    दिल्ली के नतीजे वही एक लोटा दूध की कहानी याद दिलाते हैं जिसमे सब यही सोचकर अपने अपने लोटे में पानी ले आते हैं की सब दूध लाने वाले हैं तो मेरे एक लोटे पानी से क्या फर्क पड़ेगा ? किसी को पता भी नहीं चलेगा !! लेकिन नतीजा सामने है !
    और मत भूलो मित्रों की यही बात हम सभी साम्प्रदायीकता विरोधियों पर भी लागू होती है ! इसीलिए कभी भी किसी भी वजह से किसी की भी साम्प्रदायीकता के विरोध में जरा सी भी ढील फिर से सेकुलर संविधान के ऊपर पानी फेरने वालों और उनके अंधभक्तों को मौका दे सकती है और ऐसे संकेत भी देने वाले दे ही रहे हैं ! इसीलिए सावधान ! अभी ताली बजाने से पहले इस मुश्किल राह पर हम कितने दुरी तक टिक सकते हैं इसकी समीक्षा भी जरुरी है ! क्यूँ की जरुरी नहीं की हर बार कोई केजरीवाल आ ही जाएगा |

    Reply
  • February 17, 2015 at 9:37 pm
    Permalink

    एक और बेहद ख़ुशी की बात ”बिन्नियो और इल्मियो की हार ” भी हे बेहद सुकून की बात ऐसे अवसरवादी लोग बहुत बड़ी मुसीबत होते हे ये क्या करते हे की जहा कोई अच्छा काम हो रहा होता हे वहा घुस जाते हे और मौका मिलते ही अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की टर्र टर्र करने लगते हे माहोल खराब करते हे बनी बनायीं लाइन तोड़ कर आगे बढ़ने की कोशिश करते हे एक बार इनके दुआरा लाइन तोड़ते ही ”भगदड़ ” मचने का खतरा बन जाता हे बहुत ही गलत लोग इल्मी जी को देखिये लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोट पाने के लिए उलजुलूल ब्यान दे रही थी और अब भाजपा की गोद में जा बैठी तो उधर बिन्नी ने पिछली सरकार में शुरू से खाना खराब किया अब बड़े शोक से चुनाव लड़ रहे थे एक दिन मुझे भी भाजपा कार्यलय की तरफ दिख गए थे देखा की चेहरा दमक रहा था सोच रहे होंगे की मोदी लहर में उछल मनीष सिसोदिया जैसे बड़े नेता को हराकर नयी सरकार में मंत्री पद पा जाएंगे जिसके लिए इतनी गंद इन्होने केजरीवाल के खिलाफ मचा राखी थी अब विधायकी से भी गए यानी दोनों का बुरा और सही अंजाम हुआ हे

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *