आईएसआईएस इजराइली खूफिया एजेंसी मोसाद का संगठन है !

isby — मुहम्मद जाहिद

अब तो सब लोगों को समझना होगा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किस किस तरह की साजिशें होती हैं और पर्दे के उस पार कैसे साजिशें करके पर्दे के इस पार एक धर्म पर आक्रमण करके बदनाम करने के लिए कैसे कैसे कुकर्म किये जाते हैं और जब आपको पता चले कि ऐसा करने वाले कौन लोग हैं तो निश्चित ही आप आश्चर्य चकित हो जाएंगे कि ऐसा करने वाले विश्व के शांति के ठेकेदार हैं ।

789अब यह लगभग निश्चित हो गया है कि खुद को इस्लाम का खलीफा ( नेता ) घोषित करने वाला आईएसआईएस और उसका मुखिया अबू बक्र अल बगदादी दरअसल खतरनाक इजराइली खूफिया एजेंसी मोसाद का पिट्ठू एजेन्ट “शिमोन एलियट” है जिसके माता-पिता एक यहूदी हैं ।एडवर्ड्स स्नोडेन और पश्चिमी देशों की मीडिया ने जो विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत किये हैं उससे यह शिमोन एलियट उर्फ बगदादी और उसका बाप मोसाद दुनिया के सामने नंगा हो गया है, इजराइल और अमेरिका की मदद से मुस्लिम देशों में मुसलमानों की मारकाट करने के उद्देश्य से पैदा किये गये इस संगठन के पास मौजूद अत्याधुनिक टैंक राकेट लांचर और अत्याधुनिक तकनीक के हथियार यह प्रमाणित करते हैं कि इसके पीछे कौन से लोग हैं , इतने अत्याधुनिक हथियारों को उपलब्ध कराने वाले लोग कौन हैं । निश्चित ही इनके आकाओं की साजिश यह है कि बगदादी और आइएसआइएस के कुकर्म दिखा कर इस्लाम को बदनाम किया जाए । अमेरिका में ऐसे स्टूडियो सामने आए हैं जहाँ शूटिंग करके पूरी दुनिया के भाँड़ मीडिया में इस्लाम के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा सके कि इस्लाम के नाम पर आईएसआईएस और बगदादी यह कुकर्म कर रहा है ।

isisदरअसल अमेरिकन प्रभाव में दुनियाभर की मीडिया का प्रयोग केवल ऐसे दुष्प्रचार करके इस्लाम को बदनाम करना रहा है , इसी दुष्प्रचार में इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को लटका दिया गया जबकी सारी दुनिया के सामने उनपर लगे आरोप पर केमिकल हथियारों की जांच एजेंसी ने कहा कि इराक में ऐसा कुछ नहीं पाया गया । फिर भी लटका दिया गया इराक को बर्बाद कर दिया गया तो यह अमेरिका और इजराइल की साजिश और दुस्साहस का एक उदाहरण ही है ।मोसाद अपने एजेंट “शिमोन एलियट” के माध्यम से सीरिया इराक तबाह करने के बाद सऊदी अरब को निशाने पर लेगा जिसकी घोषणा शिमोन कर चुका है , और क्योंकि सऊदी अरब पर आक्रमण करने के कारण पूरे विश्व के देशों और मुसलमानों के क्रोध का सामना करना पड़ता तो बगदादी के नाम के ढोंगी गुड्डे को अमेरिका और मोसाद ने मिलकर पैदा किया है ।

दोगलापन देखिए कि सब सामने आ चुका है फिर भी दुनियाभर के देश हिजड़े बनकर अमेरिका के लिए ताली बजा रहे हैं ।

भारत और भारत के लोगों को ऐसी साजिशों का स्तर देख और समझ कर आपस में एकजुट रहना चाहिए , विशेष कर जुबेर जैसे मंदबुद्धि के लोगों को जो बगदादी से प्रेरित हैं और समझ लें कि बगदादी इस्लाम का खलीफा नहीं वरन मोसाद का एक एजेंट “शिमोन एलियट” है , यह अमेरिका यह मोसाद किसी के भी नहीं और अपने लाभ के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं , आईएसआईएस और बगदादी इस का प्रमाण है ।

आप खुद प्रमाण देखिए । शिमोन और जान मेक्केन के चित्र जिसकी सत्यता प्रमाणित हो चुकी है ।

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42 thoughts on “आईएसआईएस इजराइली खूफिया एजेंसी मोसाद का संगठन है !

  • August 12, 2015 at 8:50 am
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    You are drawing adverse conclusion. You shouldn’t dilute the seriousness of the matter. ISIS is threa to whole world.

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  • August 12, 2015 at 8:51 am
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    You are drawing adverse conclusion. You shouldn’t dilute the seriousness of the matter. ISIS is threat to whole world.

    Reply
    • August 12, 2015 at 11:58 am
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      रोहित सिंह जी ये आपका शायद पहला कॉमेंट हे आपका इस साइट पर संपादक अफज़ल भाई की तरफ से बहुत बहुत स्वागत हे आते रहिये शुक्रिया

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  • August 12, 2015 at 11:09 am
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    आश्चर्य है कि यह “इल्हाम” सिर्फ आप्को हुआ !
    और वह भेी बहुत साल बाद
    अनेक मुस्लिम देशो कि सर्कारो को भेी यह “इल्हाम ” नहि हो सका !
    उन्के पास तो गुप्तचरो के भारेी भन्दार् भेी होते है !
    चिन्ता मत किजिये अप्नि सुचना मुस्लिम देशो कि सर्कारो को पह्उन्चऐये वह आप्को भारेी इनाम जरुर देन्गे
    आखिर पेत्रो दालर का कुच हिस्सा आप्का भेी तो बनता है
    बहुत भाग्य्शालेी है आप ,
    अफ्सोस ,लाखो मुस्लिम जान् से मारे जा रहे है
    फिर भेी अप्नेी मुस्लिम कौम को बचाने नहेी गये आप !
    जरुर जाये अप्ना सन्देश उन्लोगे पास पहुन्चऐये !

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  • August 12, 2015 at 12:18 pm
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    राज साहब

    क्या आप इस बात से इंकार करे गए के अलकायदा को अमरीका ने पैदा किया सिर्फ रूस को तोड़ने के लिए . इस के लिए उन्हों ने भले -भले मुस्लमान को इस्लाम का हवाला दे कर रूस को अफगानिस्तान में पटकनी दी . आईएसआईएस को अमरीका चाहे तो एक मिनट में ख़त्म कर सकता है मगर नहीं क्यों के उन को उल्लू सीधा करना है और इस्लाम को बदनाम करना है .

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    • August 12, 2015 at 1:12 pm
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      श्रेी वहाब जि, इस्मे विशय आई एस, आई एस वालो पर् है !
      कित्ने दुर्भाग्य केी बात है कि अमेरिका ने कहा तो मुस्लिम तैयार हो गये उन्कि अप्नि बुद्धि क्या घास चर्ने गयेी थेी !
      जो मुस्लिम् नहि है उन्के मोहरे मुस्लिम क्यो बनतेहै और इस्लाम् को बद्नाम् करने मे आगे क्यो हो जाते है!
      आप अमेरिका से हेी यह आशा भेी करते है कि वह एक मिनत मे आई एस आई एस वालो नश्त कर सक्ता है
      ५९ मुस्लिम देश किस दिन काम आयेन्गे !
      वह मिल्कर् इस्केी कोशिश् क्यो नहि करते है
      साथ मे कल्पित कुरानेी अल्लाह क्या कर रहे है ?
      क्योकि उन्के बन्दो को पुरा पुरा विश्वास है केी
      “वहेी होता है जो मन्जुरे खुदा होता है “!
      करोदो उस्के बन्दो ने दुवाये भेी कि होगि कि. “या अल्लाह !” इस्लाम को बद्नाम होने से बचाओ !
      फिर वह कल्पित अल्लाह उनकेी दुवाये क्यो नहि पुरेी करता है ?
      वहाब जेी, कुच सोचिये,विचारिये और हम सब्को जवाब् भेी देीजिये !

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      • August 12, 2015 at 1:19 pm
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        राज जी

        इस में कोई शक नहीं के मुस्लमान मोहरे बन जाते है अमरीका और उरोप के . असल में कुछ बाइक हुए उलेमाओं के बहकावे में आ कर , मगर क्या आप इस से इंकार कर सकते है के पुरे विशव को खास तौर से मुस्लिम देशो को अमरीका और यहूदी लॉबी बर्बाद कर रहा हा, कुछ मुस्लिम देश भी अमरीका के हाथो कटपुतली बना हुआ है.

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        • August 12, 2015 at 1:38 pm
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          मुस्लिम देश कोइ एक इन्सान नहेी है. आपका अर्थ् बहुत से प्रभावशालेी, मुस्लिम समुदाय के लेीडरान् इस्लाम को बदनाम करने मे लगे हुये है अब आप अमेरिका को क्य गालेी दे रहे हो, मुसल्मान को दो ना.
          इन्सान् जुते को चाटे, तो गलतेी जुते केी नहेी.

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        • August 12, 2015 at 1:39 pm
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          श्रेी वहाब जेी , कुच मुस्लिम् देश तो तेल के कारन बहुत धन्वान् भेी है वह क्यो अमेरिका केी गुलामेी करते है! जब अप्ना सिक्का हेी खोता {खराब्} हो तो दुसरो को दोश देने से भला कैसे हो सकेगा ?

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    • July 26, 2016 at 5:28 pm
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      अगर अमेरिका एक मिनट मे ख़त्म कर सकता है तो सौदी अरब और तुर्की 1 महीने मे तो ख़त्म कर सकते ही हैं. वो क्यूँ नही कर रहे? वो तो उसके पड़ौस मे है.

      जहाँ तक बात अल-कायदा से जुड़ने वाले भोले भाले मुसलमानो की तो वो भोले-भाले हैं तो मुसलमान ही, यहूदी तो नही. सवाल फिर यही है कि ऐसा हमारी क़ौम मे क्या हैं कि कोई भी हमसे इस्लाम के नाम पे हिंसा करवा लेता है? जब तक कोई हमसे हमारी धार्मिक परंपराओं के पालन से हमे रोके, हम हिंसा नही करेंगे, इस बात पे हम क्यूँ सहमति नही बना पाए?

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  • August 12, 2015 at 1:04 pm
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    वहाब चिश्ती साहब, अमेरिका को तो इस्लाम को बदनाम करना है, लेकिन क्या भोले भाले मुसलमानो को भी इस्लाम को बदनाम करना है? वो इस्लाम को बदनाम करने के लिए कैसे तैयार हो जाते हैं?
    भोले भाले मुसलमान कैसे शरीयत और पॉलिटिकल इस्लाम से मोहित होकर, अंजाने मे इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं.
    इस्लाम के नाम मे जान लेने और देने के लिए तैयार, मुसलमान ही तो इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं.
    कहीं पे किसी ने कुछ कह दिया, लिख दिया, बना दिया, ये भोले भाले लोग, पागल हो जाते हैं. ग़लती आप जैसे लोगो की भी है, जो ऐसे पागलपन का विरोध नही करते. बस यही चिल्लाते रहते हैं कि ये अमेरिका बहुत दिमाग़ वाला है, हम बेचारे बुद्धू, हम बार बार इस्लाम के नाम पे ऐसी हरकते कर बैठते हैं की बदनाम हो जाते हैं.
    वैसे ये भोले भाले मुसलमान, इतने भी भोले नही है, इन्हे बहला फुसला कर ईसाई, बौद्ध, हिंदू या नास्तिक बना के दिखाओ. मतलब ये पागल है, लेकिन इतने भी नही.
    मियाँ, कभी तो अपने गिरेबान मे भी तो झाँको.
    वैसे कभी अमेरिका के जुल्मो, सितम, कभी पुलिस के अत्याचार, कभी सरकारी भेदभाव की आड़ मे इन आतंकियो का बचाव करने वाले, ये भी सोचे कि अहमदियो पे अत्याचार क्यूँ हो रहे हैं. उनका तो देश भी नही, उन्होने तो किसी पे हिंसा भी नही की.
    इस बात को स्वीकारने मे क्या हर्ज़ हो रहा है की इस्लाम के दुश्मन नाम का वेहम एक बड़े वर्ग मे मानसिक रोग के स्तर तक घुस गया है. जिसमे अमेरिका ही नही, पूरी दुनिया दुश्मन नज़र आती है, दुसरे फिरके के मुसल्मान भेी.
    इस्लाम को लेके असहिष्णु लोग, इस्लाम को सियासी अवधारणा बताने वाले लोग तो आपके इर्द-गिर्द भी मिल जाएँगे. अधिकांश मुस्लिम देशो मे इस्लाम को राजनैतिक माना गया है, क्या हम इसके खिलाफ बोलते हैं. तो जनाब, मज़हब को सियासत से जोड़ोगे तो मज़हब के नाम पे झगड़े तो होंगे ही ना.
    इस्लाम को मुसलमान बदनाम कर रहे हैं, जिनमे आप भी शरीक हो.
    हमे पुरजोर तरीके से ये बात उठानी पड़ेगी कि इस्लाम का सियासत से कोई लेना देना नही. हमे इस बाबत, कठमुलाओ से लड़ना पड़ेगा.

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    • August 12, 2015 at 1:32 pm
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      श्रेी जाकिर जेी , आप्ने कहा कि “इस्लाम का सियासत से कोई लेना देना नहेी है ”
      मुहमम्द जेी ने जब मक्का पर कब्जा किया था तब गैर मुस्लिम क्यो मक्का से निकाले गये थे, क्यो उन्को जान् से मारा गया था ! तब से आज तक गैर मुस्लिमो का प्रवेश मक्का और मदेीना” नगर ” मे वर्जित है १
      लदाई काबा के लिये थेी या मक्क नगर केी भेी ?
      क्या यह् सियासत् मे नहेी आता है ?
      अबुबकर जि को जहर क्यो दिया गया था ?
      उमर जेी केी हत्या क्यो हुयेी थेी ?
      उस्मान जेी को दाधेी पकदकर कर मुस्लिम भेीद ने घेर कर हत्या क्योकेी थेी ?
      हजरत अलेी जेी कि रमजान मे हेी मस्जिद मे नमाज पधते हुये हत्या क्यो हुयेी थेी ? फातिमा जेी कि भरेी जवानेी मे गर्भवतेी होते हुये भि उन्केी हत्या क्यो हुयेी थेी ?
      हुसैन जेी केी हत्या मे भेी क्या सियासत शामिल नहेी थेी ?
      जब इत्नेी “मुल् ” {बुनियादेी} बातो मे सियासत शामिल है तो आज भेी इस्लाम से सियासत् कैसे निकालेी जा सक्तेी है?
      ध्यान दिजियेगा जब सियासत होगि, तब उस्मे असत्य भेी शामिल रहेगा , असत्य पक्श लदाई केी बुनियाद भेी बन जातेी है

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  • August 12, 2015 at 1:17 pm
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    अमेरिका ने कहा, इस्लाम के नाम पे रूस से लडो, और आप लड़ लिए?
    चलो अब अमेरिका कह रहा है, ईसाई बन जाओ, यहूदी बन जाओ, फ़िलिस्तीन छोड़ दो, छोड़ दोगे. नही ना. तो बताओ, उस समय लड़ने के लिए कैसे तैयार हो गये? याद रखो, उस समय भी लड़ने वाला, अमेरिका के लिए नहेी, बल्कि इस्लाम के लिए ही लड़ा था. भले ही अमेरिका ने अपने स्वार्थ के लिए उसका सपोर्ट किया हो.

    हम वो जाहिल क़ौम है, जिसे मज़हब के नाप पे किसी पे भी छोड़ दो, और खिसक लो. ये हालत होती जा रही है, मुसलमान क़ौम की.

    ऐसे मे एक भाई, वाहिद रजा साहब कह रहे थे, की आँखे बंद करके ओवैसी साहब के पीछे चल पडो. अबे आँखे खुली ही कहाँ है, जो बंद करे.

    अब आँखे खोलने का समय है, बंद करने का नही. आँखे ही नही दिमाग़ भी खोलो. बच्चो को गणित, विज्ञान पढाओ.

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    • August 12, 2015 at 2:44 pm
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      जाकिर भाई -राज़ साहब आपसे जवाब मांग रहे हे बता दू ये हमारे बहुत ही पुराने मित्र हे अगर इनसे बहस करनी हे तो आज से ही दूध बादाम खाना शुरू कर दे ताकि सर फटने से बच सके ये कुछ कुछ ऐसे ही करेक्टर हे जैसे जुदाई 1997 फिल्म में परेश रावल था तो या तो आप बादाम खाए या फिर कादर खान की तरह अंत में इन्हे बेहोश कर सके तो —

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      • August 12, 2015 at 5:36 pm
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        श्रेी सिकन्दर जेी ,अफ्सोस तो इसेी बात का है कि आप ह्म्को मित्र नहेी समज्ह पाते है !
        जब हम्को बादाम आदि नसेीब नहेी हो पाता तो अन्य को भेी इस्केी जरुरत क्यो पदेगेी!
        हम् तो अहिन्सक व्यक्ति है , शरिरिक नुक्सान् पहुन्चाना हर्गिज् पसन्द नहेी करते है हमारे विचारो से कुच लोगो को दिल मे तक्लेीफ जरुर हो सक्तेी है !
        फिल्मे हम्को पसन्द नहि है इस लिये फिल्मो के आशय हम समज्ह्ने मे भेी असमर्थ् है !

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    • August 12, 2015 at 3:16 pm
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      बहुत अचचा

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  • August 12, 2015 at 1:34 pm
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    चाची 420 में परेशान होकर बनवारी चाची से पूछता हे ” अरे चाची कुछ तो बता दो कौन क्या कन्वर्ट हुआ ? ” वही गाल मगरिबी एशिया का हे कुछ समझ नहीं आता हे कौन क्या कर रहा हे ? अमरीका अरब इज़राइल शिया सुन्नी तेल यूरो डॉलर वहाबी तानाशाह तेल राज़नीति इनके बीच तार बेहद उलझ चुके हे कुछ पता नहीं चलता कौन क्या खेल खेल रहा हे ? रातो रात एक खतरनाक संघटन आ जाता हे अलकायदा कहा घुस गया कुछ पता नहीं ? अमेरिका ईरान का समझोता हो गया जिसमे आई एस से डर मुख्य घटक था आई अस इज़राइल का भी दुश्मन हे ईरान का भी और अब सऊदी अरब के रक्षा अधिकारियो पर भी हमला कल तक अमेरिका सीरिया की असद सरकार को बदलना चाहता था यही काम आई एस भी चाहता हे मगर अब अमेरिका उस पर हमले कर रहा हे सारी खबरे वेस्टेरेन मिडिया से आती हे और यही वेस्ट मिडिया सद्दाम पर रासयनिक हथियारों पर सबसे बड़ा झूठ बोल चूका हे ————

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    • August 13, 2015 at 9:50 am
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      मामला बहुत पेचीदा है. हम तो इस पच्डे मे पश्चिम के हाथ से इनकार नही करते. बस इस बात की ओर सोचने के लिए कह रहे हैं क़ी कुछ तो सोच मुस्लिम समुदाय की ऐसी है कि मज़हब से झुकाव के बाद भी वो मज़हब के नाम पे भी आपसी सौहार्द नही बना पता, बल्कि अन्य मजहबो की तुलना मे अधिक झगडो मे पड़ा है.
      इसका एक कारण हमे, इस्लाम का राजनैतिक पहलू लगता है. अगर किसी को ये लगता है कि इस्लाम को उसके राजनैतिक पहलू से अलग नही कर सकते तो, ये मान लीजिए कि हमे कयामत तक आपस मे लड़ना ही है. अमेरिका, रूस नही होंगे तो भी हम लड़ेंगे.

      वैसे तुर्की एक मिसाल है कि जिस जगह से खिलाफत सबसे आख़िरी मे गयी, वो ही देश, आज मुस्लिम बहुल होके अपने सेक़ूलेरिज़्म की एक सदी पूरा करने वाला है. जो इस बात की ओर इशारा करता है कि सेक़ूलेरिज़्म, एक मुसलमान की धार्मिक अभिव्यक्ति के खिलाफ नही है.

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  • August 12, 2015 at 2:18 pm
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    And Now It Is Confirmed, The Islamic State Is A U.S. Creation
    NEW DELHI: The Islamic State, like Osama bin Laden and al Qaeda has been consciously created by the U.S. This has now been confirmed by the release of classified documents of the US Defense Intelligence Agency by Judicial Watch that obtained these through a federal lawsuit in the US. It was doubly confirmed in an interview to Al Jazeera more recently by Lt General Michael T.Flynn , the director of the Defense Intelligence Agency, commander of the Joint Functional Component Command for Intelligence, Surveillance and Reconnaissance, and chair of the Military Intelligence Board from July 24, 2012, to August 2, 2014.

    The first reports of this filtered out from the Syrian government over three years ago under the US-Turkey sponsored siege by rebel groups. Senior advisor to President Bashar al Assad, Bouthaina Shaaban told this writer in Damascus in 2012 that the al Qaeda had joined the rebels being pumped with arms and money by the governments opposing the Syrian government. Shortly after she said that new forces had joined the Opposition and could be more dangerous than even the al Qaeda.

    These claims from the Syrian government were stoutly denied by the U.S, Turkey and other countries involved in pushing the rebels through the conflict. A denial that has continued till recent days, despite the emergence of the more lethal Islamic State that is controlling large tracts of land now in both Syria and Iraq.

    The DIA report, formerly classified “SECRET//NOFORN” and dated August 12, 2012, was circulated widely among various government agencies, including CENTCOM, the CIA, FBI, DHS, NGA, State Department and others.

    The DIA report states that

    “THE WEST, GULF COUNTRIES, AND TURKEY [WHICH] SUPPORT THE [SYRIAN] OPPOSITION… THERE IS THE POSSIBILITY OF ESTABLISHING A DECLARED OR UNDECLARED SALAFIST PRINCIPALITY IN EASTERN SYRIA (HASAKA AND DER ZOR), AND THIS IS EXACTLY WHAT THE SUPPORTING POWERS TO THE OPPOSITION WANT, IN ORDER TO ISOLATE THE SYRIAN REGIME…”

    The cynicism and the manipulations that have laced US strategy for West Asia are again visible in the following:

    Reply
    • August 13, 2015 at 9:52 am
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      उसने खडा करवाया, हम क्य इस साजिश मे शामिल हो गये. हमारे दिमाग मे गोबर भरा है क्या?

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    • August 13, 2015 at 11:27 am
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      भारत मे जो आईएसआईएस के झंडे फहराए जा रहे है क्या उनमे भी अमेरिका का हाथ है???
      एक कहावत गधा सुनाये बकरा सराहे जरूर आप पर लागू हो रही है

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  • August 12, 2015 at 3:22 pm
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    यहा पर भहि लेखक ने सारि बात इज्ररऐल पर दाल देी , मात्लब इत्ने मुर्ख हैन मुसाल्मन

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  • August 12, 2015 at 4:10 pm
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    सर…गुस्ताखी माफ़….अगर आपकी बात से पूरी तरह सहमत हुआ जाए तो फिर.. इसमें तो आपके.. मुला मौलवी.. और मुस्लिम बुद्धजीवी.. सभी २ कारणों से….बुरी तरह से नाकामयाब हो गए है.. ..

    १. पूरी दुनिया को मोसाद/सी आई ए की साजिश बताने में…..
    २. अपने ही मुस्लिम भाइयों को जो रोज़.. पूरी दुनिया में आई एस आई एस ज्वाइन करने जा रहे है.. और उनके बताये इस्लाम को ही सही इस्लाम मान रहे है.. और वाकई दुनिया को काफ़िर…??? आअप सब जब अपने ही मुसलमान भाइयों को नहीं समझा प् रहे.. की आई एस आई एस.. मोसाद/सी आई ए की साजिश है.. उनके बहकावे में मत आओ.. तो आप बाकी दुनिया को कैसे समझाओगे…

    या आप भी बाकी मुस्लिम समाज की तरह.. सट्टे ऑफ़ डिनायल में रहना चाहते है… की आई एस आई एस से बाकी दुनिया को तो जो ख़तरा है वो है हि९… सबसे ज्यादा ख़तरा.. इस्लाम को है???? या आप भी… अंदर-खाने ..उनकी इस सोच को समर्थन देते है… अगर उनकी सोच का विरोध नहीं कर रहे और यहूदी साजिश बता रहे है इस इसे…तो ????

    Reply
  • August 12, 2015 at 9:22 pm
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    इस POST को लिखने वाला पुरी दुनिया को बेवकुफ समझ रखा है अगर बगदादी यहुदी होता तो नमाज अदा ना करता ,
    और अगर अमेरीका इसराइल ISIS बनाए होते तो ISIS के खिलाफ युद्ध नही छेडतेँ और IS वाले यहुदी इसाइयो को मारते नहीँ और रही इस्लाम कि बात तो इतिहास गवाह है ये लुटेरे और मारकाट करने वाली जमात रही है

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  • August 13, 2015 at 12:13 am
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    कहिं ओसामा बिन लादेन इसाई तो नहीं था ? हो सकता है कि बोको हराम भी यहुदीयों का संगठन हो । तालिबान वाले भी इसाई हो सकते हैं । और हाफिज सईद तो पक्का हिंदु ही होगा ….हा हा हा….दुसरों को बेवकुफ बनाने के लिए लोग कैसी कैसी कहानि गढ़ते हैं !

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    • September 10, 2016 at 6:54 pm
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      Osama ek bhana hai daulat asal nishana hai

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  • August 13, 2015 at 12:56 am
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    जो लोग काफ़िर और कुफ़्र की सही परिभाषा जानना चाहते हैं, उन्हें यह पोस्ट ज़रूर पढ़ना चाहिये।

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  • August 13, 2015 at 9:50 am
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    आईएसआईएस का भारत पर प्रभाव —मेरा आकलन कुच्ह इस तरह से है
    आईएसआईएस को भारत तक आने के लिये पहले इरान सेना से भिदना पदेगा
    अब भारत कभि नहि चाहेगा कि इरान के शियाओ का कतलेआम हो जाये क्योकि भारत कि निति इरान से अच्हे सम्बन्ध बना कर पाकिस्तान को घेरने कि रहि तो मेरे आकलन के अनुसार भारत इरान कि हेल्प करेगा इससे सन्घि सरकार और शियओ के बिच कि खायि घतेगि और २०-२५ % मुस्लिम बि जे पि कि तरफ जायेगा जो मुस्लिमो कि इस्लाम के नाम पर एकता को तोद देगा और एक नया धुर्विकरन समाज मे पैदा होगा

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    • September 10, 2016 at 6:58 pm
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      Daish attangwadi Shia or Sunni dono ko mar rhe hai. Sirf yahodiyo ko chod kar

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  • August 13, 2015 at 1:17 pm
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    एक बात बताइए की कोई भी गैर मुस्लिम व्यक्ति, दाढ़ी बढ़ाकर, टोपी पहन कर, 5 वक्त नमाज़ पढ़ कर, माथे पे जेबिबा का निशान बनाकर, ख़तना कर के, अपने को मुस्लिम बता के मुस्लिम समुदाय का हिस्सा बना ले.
    इस्लाम को बदनाम करने के लिए, इस्लामी क़ानून या शरीयत आधारित राज्य की माँग करके, एक राजनैतिक युद्ध का आह्वान कर दे, उसे वो जिहाद नाम दे दे. वो भले ही दिल से इस्लाम का दुश्मन हो, लेकिन अपने आप को इस्लाम का सिपाही बताए, तो आप उसकी पहचान कैसे करोगे?
    आवरण को तो देख सकते हो, दिलो दिमाग़ को कैसे पढ़ोगे? कैसे मान ले की मोहम्मद ज़ाहिद साहब, मुसलमान ही है? या वहाब चिश्ती, हसन ख़ान, वाहिद रजा मुसलमान ही हैं.
    या ओवैसी बंधु, मुसलमान ही हैं. वो मुनाफिक भी तो हो सकते हैं.
    कैसे मियाँ, कैसे पता करोगे?
    मोहम्मद ज़ाहिद जी, इस्लाम का दुश्मन, ज़रूरी तो नही अमेरिका या मोसाद ही हो. मुनाफिक की अवधारणा तो क़ुरान मे भी दी हुई है. इस्लाम के दुश्मन की परिकल्पना तो इस्लाम के जन्म से है, और इन दुश्मनो के सर पे सींग तो होते नही है.
    वैसे भी जब, मुस्लिम समुदाय, इस्लाम त्यागने वालो और उसकी आलोचना करने वालो को बर्दाश्त नही करता, तो अपना एजेंडा लागू करवाने के लिए, लोग दिखावे के लिए मुसलमान बन ही जाएँगे ना.
    सिस्टम को बदलने के लिए, सिस्टम मे रहना ज़रूरी है. इसलिए इस्लाम की अपनी सहूलियत के अनुरूप व्याख्या के लिए, मुसलमान दिखना और जताना ज़रूरी है.
    अब करो, सब पे शक, बग्दादी ही नही, मोहम्मद ज़ाहिद, जिन्ना, इकबाल, जाकिर नायक, चिश्ती, मिस्त्री, लादेन सब के सब अला-फला, के एजेंट.
    फिर तो दुनिया मे सिर्फ़ मुहम्मद साहब के मुसलमान होने की गारंटी है, बाकी का अल्लाह को ही पता है.

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  • August 13, 2015 at 1:28 pm
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    फिर बग़दाडी जैसे खून ख़राबा करने वाले ही क्या. मिर्ज़ा गुलाम जैसे प्रेम का संदेश देने वाले भी मुनाफिक होते है. क़ुरान मे अल्लाह ताला ने फरमाया है कि मुनाफिक की बाते सुनोगे तो सुनते रह जाओगे.
    इसलिए इस्लाम के नाम पे जान देने लेने की बाते करने वाले, बग्दादि, ओवैसी, ज़ैद हामिद, हाफ़िज़ सईद, वहाब चिश्ती ही नही, इस्लाम को अमन पसंद मज़हब बताने वाले, सिकंदर हयात, जाकिर हुसैन, अफ़ज़ल ख़ान भी मुनाफिक हो सकते हैं.
    क़ुरान के मुताबिक, मुनाफिक को कई बार खुद को भी पता नही होता कि वो ग़लत राह पे है. इसलिए अपने आप को मुसलमान समझने वाला भी अंजाने मे मुनाफिक हो सकता है. अल बकरा की 12 और 13 नंबर की आयात पढ़ लो.

    जनाब, सब झोल झाल है. इसलिए कहता हूँ कि दूसरो मे मुसलमान देखना छोड़ो, खुद बन जाओ. पॉलिटिकल इस्लाम, मुनाफिक बनाता है.

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  • August 13, 2015 at 1:45 pm
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    ISIS का प्रभाव बढ़ने से मुस्लिम भाईयों का भी नुकसान ही होगा ।मुस्लिम युवाओं को बहकाकर बली होने के लिए तैय्यार किया जाएगा । प्रतिक्रिया मे गैरमुस्लिमों मे भी धार्मिक कट्टरता बढ़ेगी । अगर ISIS भारत आता है तो फिर उनका क्या अगला निशाना चीन, बर्मा और श्रीलंका आदि होंगे और ये देश भी फिर चुप नहीं बैठेंगे । हर जगह युद्ध, अशांति और मार काट का वातारण होगा ।

    कुछ लोगों का कहना है कि सभी जगह के मुसलमानों की सोच एक ही है । वो ये भी कहते हैं कि सभी मुसलमानों को देश, संस्कृति या रक्त संबंधों से कोई लेना देना नहीं है। ये गलत है । अरब के मुसलमानों और इरान के शिया मुसलमानों की सोच मे काफी अंतर है । तालिबान और पाकिस्तानी पंजाबी मुसलमानों मे लडाई हो रही है । भारत के मुसलमानों की सोच और भी अलग है । ऐसे ही इंडोनेशिया और मलेशिया के मुसलमानों की सोच और रहन सहन काफी अलग है । भारतिय प्रायद्वीप, इंडोनेशिया, मलेशिया आदि की संस्कृति भिन्न है । वहाँ मुसलमानों की बहुत बड़ी आबादी पश्चिमि कपड़े पहनती है, क्लीन सेव होती है और गीत संगित और फिल्मों का आनंद लेती है । बहुतों के गैर मुस्लिमों से नीजी, व्यापारिक और समाजिक संबंध है । क्या ISIS के लिए वो ये सब छोड़ पाएंगे ? अगर भारत की बात करें तो यहाँ न तो मुसलमान वैसे कट्टर हैं न हिंदु, जैसा कुछ लोग दिखाना चाहते हैं ।

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  • August 13, 2015 at 7:00 pm
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    कुछ लोग ISIS की शक्ति को बहुत बड़ा समझ रहे हैं । वो इस भ्रम मे हैं कि ये संगठन इस्लाम का सबसे बड़ा रक्षक है और ये पुरे विश्व पर कब्जा कर लेगी। इसी भ्रम मे वो कई बार इस संगठन से जुड़ने की कोशिश भी करते हैं । इसी मृगतृष्णा के कारन वो अपने परिवार को छोड़ देते हैं, अपने देश से गद्दारी करते है और चले जाते हैं बली का बकरा बनने । जबकि सच ये है कि ISIS अभी तक पुरे इराक पर भी कब्जा नहीं कर पाई है । कई जगह कुर्द लड़ाकों से इनकी हालत खराब कर दी । ये एक आतंकि संगठन है और ये मुसलमानों का या विश्व का कोई भला नहीं कर सकती ।

    पहले इस संगठन को कुर्द सेना को हराना होगा फिर इरान से निपटना होगा । उसके बाद पाकिस्तान की सेना को भी हराना होगा, तब जाकर कहीं ये भारत के सामने आएंगे । ये तो असंभव ही है लेकिन अगर वो सामने आ भी जाते हैं तो क्या भारत की सेना से मुकाबला कर पाएगी ? इस संगठन की माने तो वो 2020 तक भारत और चीन समेत आधी दुनीयाँ पर कब्जा करने वाले हैं, पर ये मुंगेरीलाल के हसीन सपने का अलावा कुछ नहीं है । जिस सेना को कुर्द लड़ाकों की सेना ने परेशान कर रख्खा है वो भारत और चीन के सामने कब तक टिक पाएगी ?

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  • August 14, 2015 at 10:56 pm
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    बेताल को काबू कर विक्रम ने उसे पीठ पर लाद लिया तब बेताल ने कहा कि है राजन समय काटने के लिये एक कहानी सुनाता हु…..

    प्रतविलोक के जम्बू नामक द्वीप पर जमील और खलील नाम के नेकदिल इंसान रहा करते है और उन दोनो मे इतना भाईचारा (बिरादर-वाद) था कि जमील, खलील लिये और खलील , जमील के लिये औरो का खून बहाने तक मे कोई हिचक नही रखते थे…..

    अमूमन दोनो एक दूसरे के साथ खुश रहते थे पर एक दिन जमील कुछ उदास था जिस पर खलील ने उदासी का कारण पूछा, जमील ने कहा कि वह खलील को अपनी जान से जयादा चाहता है मगर अब उसे खलील का खून बहाना ही पड़ेगा क्योकि “अमेरिका ऐसा चाहता है”…….

    यह सुन कर खलील नाराज होने की बजाय खुशी से उछल पड़ा और बोला कि जमील भाईजान खून तो मुझे भी आपका बहाना पड़ेगा क्योकि “इज़राइल ऐसा चाहता है”…….और दोनो एक दूसरे पर देसी हथियार लेकर टूट पड़े और अमेरिका और इज़राइल की इच्छा पूरी कर दी :)……पर आश्चर्य की बात कि दोनो के ही बिरादरी वालो ने अमेरिका और इज़राइल को इसके लिये 100% कुसूरवार ठहराया 🙂

    हे पाठक मित्रो सब कुछ जानते हुए भी उन दोनो बिरादरो की एक-दूसरे के हाथो हुए मौत पर अपनी राय नही रखोगे तो ये बेताल फिर से उद जायेगा !!

    (नोट: काल्पनिक कहानी है, किसी भी हालात मे संयोगवश किसी घटना से सच मे ऐसा हो जाये तो हमारी जिम्मेदारेी नही है)

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    • August 15, 2015 at 6:50 pm
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      बेताल (शरद) की बात सुन कर विक्रम ने कहा…

      सुनो बेताल…. पहली बात तो यह है कि तुम्हें हर हाल में उड़कर पेड़ पर लटकना ही है, तुम तो हर विक्रम (लेखक) की पीठ पर लद कर उसके विवेक और अंतरात्मा को हिलाते रहते हो. अगर उड़कर जाओगे नहीं तो अगली ब्लॉगपोस्ट पर कैसे अपनी टिप्पणी डालोगे.

      फिर भी, कहानी की आत्मा की रक्षा के लिये मैं तुम्हें उत्तर देता हूँ.

      बेताल, पहली बात तो यह कि दोनों में यह बिरादराना व्यवहार सिर्फ इसलिये था कि दोनों एक ही किताब के अनुयायी थे. उस किताब का हर आदमी अपने अनुसार अर्थ निकालता है और अपने आपको सच्चा और दूसरे को गलत साबित करने पर तुला रहता है. उस किताब के सभी अनुयायी इस बुनियादी बात को समझते हुए भी ना समझने का अभिनय करते रहते हैं.

      सबसे बड़ी बात यह है कि किताब वाले लोग समझदार होते हुए भी अपने दुश्मनों के झांसे में फंसने को सदा तैयार रहते हैं, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण है किताब वालों का एक नापाक मुल्क, जो अमेरिका से पैसा भी लेता है, उसे गाली भी देता है और फिर भी उसकी मर्जी से काम करता है यहाँ तक कि अमेरिका को अपने मुल्क में बम गिराने देने के लिये भी इजाजत देता है. हमारा तो आकलन है कि इजरायल भी अगर ठीकठाक पैसा दे तो ये इजरायल को भी अपने मुल्क में दखल देने देंगे.

      अफसोस यह है कि जैसी कहानियाँ उस नापाक मुल्क में प्रचलित हैं, वैसी ही कहानियाँ, जम्बू द्वीप के इस महान मुल्क में भी लोग सुनने सुनाने लगे हैं. अधिकतर किताब वाले लोग गोयबेल्स की प्रमेय पर भरोसा करते हैं कि एक झूठ को सौ बार दोहराया जाये तो वह सच से भी अधिक विश्वसनीय हो जाता है. मजेदार बात यह है कि गोयबेल्स के देश के लोग गोयबेल्स से घृणा करते हैं पर उसके अनुयायी जम्बूद्वीप में अधिक हो गये हैं.

      तो किसी से पैसा लेकर किसी की हत्या करना महान मुल्क की मुम्बापुरी में सुपारीसेवा कहलाती है. यदि ये दोनों सुपारी सेवा कर रहे हैं तो कुसूरवार भले अमेरिका और इजरायल हों, इनकी मूर्खता किसी कुसूर से कम नहीं.

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      • August 16, 2015 at 2:35 pm
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        रंजन सर आप एकदम सही बोले, मगर बोले तो कहानी वाले बेताल की तरह अब इस पोस्ट से बेताल उड़ा और ये उड़ चला अपने ठिकाने पर अगली बार फिर किसी विक्रम के काबू मे आने के लिये और रास्ता काटने के लिये नई कहानी के वादे के साथ 🙂

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  • July 26, 2016 at 4:54 pm
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    होने मे कुछ भी हो सकता है, तो यहूदी षड्यंत्र भी संभव है.

    लेकिन मेरा सवाल है कि इस्लाम तो माता-पिता या आनुवांशिक पहचान नही. किसी के माता-पिता के आधार पे तो किसी के मुस्लिम या गैर-मुस्लिम का निर्णय नही हो सकता है. हम तो इस्लाम को एक दावती मज़हब कहते हैं. जाकिर नायक साहब तो अपनी सभाओ मे कितने ही गैर-मुस्लिमो को मुसलमान बना चुके हैं. जहाँ तक यहूदियों का सवाल है तो इस्लाम का शुरुआती इतिहास तो अरब के यहूदियों के मुसलमान बनने की कहानियों से भरा पड़ा है. मुहम्मद साहब की बीवी साफिया भी यहूदी परिवार मे जन्मी थी. इसलिए बग़दाडी की परिवारिक पृष्ठभूमि से कुछ हासिल नही होगा, हम कुछ भी साबित ना कर पाएँगे. मुसलमान एक मानसिक अवस्था है, किसी के दिमाग़ मे हम नही घुस सकते.

    हम उसकी इस्लाम की व्याख्या और उद्देश्य, तरीक़ो पे ही सवाल कर सकते हैं. उसपे चर्चा इस लेख मे गायब है.

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    • July 26, 2016 at 8:38 pm
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      इसलिए गायब हे की ये ज़ाहिद साहब के बस का रोग नहीं हे ये बहुत ही मेहनत ज़हमत और सरदर्दी का काम हे और कामो में सफल होने पर आपकी सरदर्दी कम होती हे मगर ये ( मुस्लिम समाज में सोच का नया तरीका ) काम ऐसा हे की इसमें आप जितने कामयाब होंगे आपकी ज़हमत मेहनत और भेजा फ्राई और बढ़ेगा बढ़ेगा बढ़ेगा और एक दिन हो सकता हे की ————— खेर ज़ाहिद साहब फेसबुक पर काफी लोकप्रिय हे पैसे वाले हे औलाद शायद एकाध ही हे सो इनके लिए फेसबुक बेहद अच्छा टाइमपास हे ये खूब करते हे और ” सेलिब्रेटी सिंड्रोम ” का आनद लेते हे मगर क्या मजाल हे की एक लाइन भी ” नदी की उलटी धार ” की लिख दे कोई नयी बात कोई नयी सोच— ? अजी सवाल ही नहीं हे हमेशा ये लोग मेन स्ट्रीम में रहते हे संघियो की मूर्खता की बातो का जवाब डबल ——- से देते रहते हे फिर एक एक लाइन के कमेंट में इनकी जयकारे होती हे यानी कोई सरदर्दी वाली बात नहीं करते . खेर अल्लाह भला करे इनका और एक बात की इस साइट की सबसे बड़ी उपलब्धि ये हे की इस साइट की वजह से जाकिर हुसेन जैसा विद्वान मिला हे बहुत बहुत बधाई जाकिर भाई और अफ़ज़ल भाई दोनों को . मुस्लिम मन मानस पर मदरसे के छात्र से लेकर फरीद जकारिया ( रफीक जकारिया के शायद हॉवर्ड में पढ़े बेटे भविष्य में अमेरिका के पहले मुसलमान विदेश मंत्री बनने की इनके लिए अमेरिकियों की भविष्वाणी इनके लिए बहुत बड़े विद्वान ) तक लिख रहे हे मगर मुझे नहीं लगता की कोई भी हे जो जाकिर हुसेन के जैसे डीप लिखता हो

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  • July 26, 2016 at 5:17 pm
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    इस लेख मे हसन ख़ान साहब का कमेंट्स है, जो उन्होने अँग्रेज़ी मे लिखा है, किसी सोर्स से कॉपी करके.
    उन्होने इस्लामिक स्टेट को अमेरिका द्वारा खड़ा किया गया संगठन साबित करने के लिए सीरिया के राष्ट्रपति असद द्वारा लगाए गये आरोप बताए हैं.

    जिसके मुताबिक, अल कायदा ने इस्लामिक स्टेट से हाथ मिला लिए. अमेरिका के अलावा, तुर्की और सौदी अरब से देश भी इस्लामिक स्टेट की मदद कर रहे हैं.

    तो मेरा सवाल, हसन ख़ान और इन जैसे अन्य लोगो से जो, इस थ्योरी मे यकीन रखते हैं से ये है कि;
    इस साजिश मे हम सिर्फ़ अमेरिका या इजरायल को ही क्यूँ दोष दें, सौदी अरब और तुर्की जैसे देशो के हुक्मरानो को भी यहूदी या काफ़िर क्यूँ नही माने?

    इस्लामिक स्टेट के सवाल पे हम सिर्फ़ अमेरिका और इजरायल पे ही भडास निकाल के क्यूँ रुक जाते हैं? सौदी अरब को क्यूँ नही दोषी ठहराते?

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    • July 26, 2016 at 9:05 pm
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      ज़ाहिद साहब ( व्यक्ति विशेष नहीं बहुत लोग हे और पढ़े लिखे हे मेरे कज़िन भी ) से में ये बताना चाहूंगा की आखिर आप लोग क्यों सोशल मिडिया में बेमतलब में अपना समय और एनर्जी बर्बाद करते रहते हे ———– ? अरे भाई आपके पास पैसा हे समय हे तो बहुत ही अच्छी बात हे निकलिए घर से चारो तरफ देखिये कितनी बेबसी हे दुःख हे लोग कितनी तकलीफ में हे उनके काम आइये अपने इलाके के ”अब्दुल सत्तार ईदी ” ( ईदी साहब कभी फालतू बातो में समय और एनर्जी खराब नहीं करते थे ) बनिए दुनिया और आख़िरत दोनों में आपकी ज़बरदस्त कामयाबी होगी हम भी सेल्यूट करेंगे अब रही बात लेखन की तो आपके लेखन का कोई भी फायदा नहीं हे ये सब बाते तो रोज उर्दू मिडिया में छपती ही हे घिसी पिटी जनरल सी बाते लिखने से आपका या भारतीय उपमहादीप में सबकी भलाई का सेकुलरिस्म का न्याय का कोई फायदा नहीं हे संघी रात दिन बेवकूफी की बाते करते हे उससे भला आम हिन्दू समाज का क्या फायदा हुआ हे – ? और तो और सबसे बड़े संघी प्रोपेगेंडे बाज़ सुरेश चिपलूनकर तक को अभी संघी खेमे से ही करारा अपमान सहन पड़ा हे उनकी बेवकूफी की बात का जवाब आप लोग देते हे उसी अंदाज़ में हे कोई लाभ ———? कुछ नहीं . रही बात सोशल मिडिया पर मिलने वाले लाइक शेयर कमेंट की तो भाई उनकी भी कोई वेल्यु नहीं हे ( उस्से आपको ”सेलिब्रेटी सिंड्रोम ” होता हे और कुछ नहीं उसका भी असल में कोई फायदा नहीं हे पहले ही पता नहीं कितने सेलेब्रेटी एड़िया रगड़ रहे हे ) वेल्यु इसलिए नहीं की आप जिसे अपनी वेल्यु या जयकार समझते हे वो आपकी नहीं पुराने घिसे पिटे थेके हुए जनरल विचारो की टी आर पि हे जनरल सामान्य सोच की हमेशा ही बहुत टी आर पि होती ही हे फ़र्ज़ कीजिये आप नही होंगे तो कोई और ये पिटी हुई बाते लिख रहा होगा और लाइक बटोर रहा होगा हे कोई फायदा ———- ? आशय ये हे की आसान काम मत पकड़िये उसकी कोई वेल्यु नहीं हे नदी की उलटी धार में तैरने वाले ही अगर ला सकते हे तो वो ही बदलाव ला सकते हे सीधी धार में तैरना आसान हे मगर उससे कुछ नहीं बदलेगा ( बात व्यक्ति विशेष की नहीं बहुत लोग हे )

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      • July 26, 2016 at 9:27 pm
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        दुनिया में बदलाव वही लाते हे जो सरदर्दी मोल लेकर लंबा रास्ता चुनते हे नदी की धार मोड़ देते हे हे जनरल बाते नहीं करते . आज़ादी का संघर्ष गाँधी से पहले भी चल रहा था कोंग्रेस तब भी थी और मज़बूत थी उसमे होता क्या था की कमरे में बैठकर कड़कड़ाती अंग्रेजी में डिस्कशन हुआ फिर गए वायसराय आदि के पास फिर कड़कड़ाती अंग्रेजी में बात हुई आवेदन प्रतिवेदन जनता ये सब भी दूर से देखती थी और मुग्द होती थी जिन्ना इस राजनति के बेताज बादशाह थे ऐसी राजनति में उनका कोई सानी नहीं था अब आ गए अफ्रीका से बीस साल तप कर गांधी . इस राजनति में बड़े आराम से अपनी जगह बना लेना उनके भी बाए हाथ का काम था मगर गाँधी ने नदी की धारा ही मोड़ दी वो अपने साथ लेकर आये आंदोलन लाठिया डंडे धूल धक्कड़ जेल गर्मी पसीना पका देने वाली सादगी ग्रामीण आम लोग देसी भाषाएँ आदि जिन्ना ये सब देख कर बेहद दुखी गुस्सा और कुंठित हुए अपनी कोंग्रेस में बेताज़ बादशाह की पोजिशन उन्होंने छोड़ दी बाद में इसी कुंठा में पाकिस्तान बनाया और आखिर दिनों में अपने चमचो को ” नेहरू इज़ बेटर देन फॉर यु ” कहते हुए दुनिया छोड़ गए याद रहे की नेहरू जिन्ना से कम नहीं बल्कि ज़्यादा ही एरिस्टोक्रेट थे मगर उन्होंने भी उलटी धार में तेरा अब सोचिये की दुनिया किसने बदली ? दुनिया का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक सेकुलर देश किसने बनाया जनरल नहीं नहीं नयी सोच वाले गांधी नेहरू ने पाकिस्तान का हाल देखिये और सोचिये की गाँधी नेहरू आज़ाद के रस्ते पर चलना हे ये जिन्ना की घिसीपिटी सामान्य सोच के ————-?

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  • July 27, 2016 at 9:59 am
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    ये खुशी की बात है कि भारत का मुसलमान, हर तबके, हर वर्ग का isis को इस्लाम से नही जोड़ता, कुछ एक अपवादो को छोड़ कर. यहाँ तक कि लगभग हर इस उप महाद्वीप का मुसलमान, isis से नफ़रत करता है, जो इस्लाम का नाम दुनिया मे बदनाम कर रहा है.

    लेकिन isis एक संगठन नही है, विचार है. कल को isis की जगह और कोई हिंसक राजनैतिक इस्लाम की तहरीक, चल पड़ी तो हम कैसे उससे बच पाएँगे.

    isis से पहले भी, मुसलमानो के भीतर इस्लाम के नाम पे मार-काट हुई है. पाकिस्तान मे कादियानो के क़त्ले आम का सिलसिला कई दशक पहले चालू हो चुका है. शिया धर्मस्थलो पे कातिलाना हमले, isis के उदय के पहले के हैं.

    isis एक अवधारणा है, इस्लाम के प्रति असुरक्षा की, शरीयत आधारित राज्य व्यवस्था की, बहुलतवाद के सिरे से इनकार की. क्या इस तरह के विचार, हमारे समुदाय मे धर्म-गुरु नही फैला रहे. भले ही हमने isis को गैर-इस्लामी मान कर इस बीमारी से तात्कालिक तौर पे बचने का जुगाड़ कर लिया हो. लेकिन इस बीमारी के कीटाणु, हमारे समुदाय मे घुस चुके हैं. हम इसके गंभीर बीमारी बनने से पहले इस कीटाणु को निकाल फैंकने की कोशिश मे जुटे. ये आसान काम नही, ना ही जल्द होने वाला है. हम सबको मिलके इसके खिलाफ लड़ना होगा.

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